पीपल वाला भूत – Story Of The Peepal Ghost । Horror Stories In Hindi ।

पीपल वाला भूत - Story Of The Peepal Ghost । Horror Stories In Hindi । Hindirama.com

पीपल वाला भूत – Story Of The Peepal Ghost

» मेरे गाव से एक  किलोमीटर  दूर एक बड़ा सा पीपल का पेड़ है। जिसकी शाखाये  लंबी – लंबी और ऊपर से नीचे की ओर आकर ऊपर की ओर मुड़ी हुई मोर के आकार की है! वह पेड़ देखने में इतना भयानक लगता है की मेरे तो उस दिन की घटना के बाद रोंगटे खड़े हो जाते है।

» उस पेड़ की शाखाये  कम से कम आधे बीघे मे फैली हुई है। शायद तुम  लोगों मे से कोई मानता हो या ना मानता हो । लेकिन मै  जरूर मानता हूँ की भूत चुड़ैल होती है। हर गली और हर चौराहे पर ऐसी बुरी आत्मए होती है। वो बात अलग की है की वह हमे दिखती नही कभी भी ।

» यह आत्माए तब दिखती थी जब किसी की राशि उस आत्मा से मिल जाते जभी दिखती है।

» मई आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहा हु, जिसे याद करके मेरे भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अब मई आपको उस घटना के बारे मे बताने जा रहा हूँ की मै और मेरे दोस्त लोग उस पीपल के पेड़ पर खेलने जाया करते थे उस पेड़ की शाखाओ पर हम झूले की तरह झूला करते थे ।

» उस पेड़ की छाया इतनी थी की सारे पंछी उसी पे बैठा  करते थे और हम लोग गर्मियो मे उस पर जा के झूलते थे बड़ा मजा आता था। वैसे उस पेड़ के बारे मे लोग कहा करते थे की उस पेड़ भूत रहते हैं । पर हम बच्चे कहाँ किसी की मानते थे बस रोज खेलने को चल दिया करते थे ।

» एक बार की बात है। ,,,,,,,

» दोपहर का  समय था हम तीन दोस्तों ने मै और मेरे दो दोस्त उस दिन जल्दी चले गए 12:00 बजे का समय था हम लोग वहाँ पहुँच गए और हम लोगों ने योजना बनाई हम लोग ऊंचाई पर जाके छिप जाते हैं और वो लोग आएंगे तो हम लोग उन्हे भूत बन कर डराएंगे और फिर हम लोगों  ने  अपने – अपने पजामा मे पत्थर भर के  ऊपर चढ़ गए

» आपको एक बात और बता दु की उस पेड़ से दो खेत दूर एक कुआं था जिस पर कोई रहता नही था । बस एक रस्सी और बाल्टी ही रखि रहती थी। जब  हम लोग खेल खेला करते थे तो  हमे प्यास लगती थी , हम पानी पीने के लिए उस कुए पर जाया करते थे ।

» एक दिन एक बजे का टाइम था, जब हम लोग इंतजार करके थक चुके थे , वो लोग नही आए तो हम मे से एक ने कहा की चलो पानी पी कर आते हैं। तो मैंने कहा उन लोगों से की मुझे प्यास नही लगी तुम लोग चले  जाओ । तो वो लोग उतर कर पानी पीने चले गए । दोपहर  का समय था और सूरज  पूरी तपन पर  था । जोर – जोर से लू चल रही थी। और हवा के गोल- गोल झुंड बनकर धूल उड़ते हुए आ जा रहे थे । आप लोग जानते होंगे की गोलाकार को (बवंडर ) कहते हैं।

» एक ऐसा ही हवा का गोला मैंने देखा पीपल की पेड़ की ओर जाते हुए , पीपल के सारे पत्ते आवाज करने लगे और पत्ते गिरने लगे । धूल की वजह से तो मेरी  आख बंद हो गई थी । सारे पंछी उड़ गए , जब मैंने आखें खोली तो मै क्या देखता हूँ…।

» एक काली सी शक्ल का बड़े-बड़े बालों वाला और इतना डरावना इंसान मेरे सामने वाली डाली पर बैठा है एक दम मेरे डर के मारे हाथ छूट गए और मै नीचे जा गिरा नीचे गिरते ही मै बेहोश हो गया ।

» जब मेरी आंखे खुली तो देखा की मेरे दोस्त पानी लौट आए हैं , मुझे उठा कर उन्होंने मुझे बिठाया नीचे पीपल के पत्ते काफी इकट्ठे हुए थे इस लिए मेरे ज्यादा नही  नही लगी बस मेरे पैर से थोड़ा सा खून निकल आया । जब मेरे दोस्त ने पूछा की क्या हुआ तो मैंने उन्हे बताया की अभी इस पेड़ पर मैंने भूत देखा है। सारे दोस्त समझ रहे थे की अजय हमे डराने की कोशिश कर रहा था ।

» उन्होंने कहा लगता है, तुझे प्यास लगी और तू ऊपर से इसलिए गिर गया है उन्होंने कहा जा तू पानी पीकर आ तब तक हम यही बैठे हैं। उनकी जिद की वजह से मुझे पानी पीने जाना पड़ा मै वैसे भी डरा हुआ था और मेरे हाथ पैर कांप रहे थे । मै मन ही मन यह  सोच रहा था की , कब मै यहाँ से निकल जाऊ काल से मै यहाँ नही आऊँगा मैंने बाल्टी उठाई और कुए मै डाल दी जैसे ही कुए मै बाल्टी पहुंची एक दम से आवाज आई और वो आवाज ऐसे लग रही थी ।

» जैसे कोई पानी मे बार – बार कूद रहा था मै और डर गया जब की रस्सी मैंने आराम से पकड़  रखी थी तो  यह आवाज कैसी मैंने कुए मै जहाँ कर देखा कुए के पानी मे मुझे वही चेहरा नजर आया एक दम से मै होश उड़ गए और डर के मारे मेरे हाथ से रस्सी कुए मे जा गिरी।

» मैंने जैसे ही पीछे देखा फिर से देखा वही भयानक शक्ल वाला आदमी खड़ा था मेरी तो आवाज बंद हो गई उसके बड़े- बड़े दांत तो ऐसे जैसे की उसने कभी जिंदगी मे मंजन नही किया होगा । उसकी खयाल जली हुई इंसान इतना डरावना लग रहा था की मै तो बस मेरी आखे खुली थी बस शरीर मे कोई जान नही थी।

» बस मै बेहोश हो कर गिर पड़ा । मेरे दोस्त सोच रहे थे की, यह अब तक क्यूँ नहीं आया। 4  मिनट बाद जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा की मै पीपल के पेड़ के नीचे पड़ा था तो मै और डर गया । की मै यहाँ कैसे आ गया दोस्त मुझे उठा कर आए थे ।

» जैसे ही मै खड़ा हुआ देखा तो मेरे दोस्त खड़े हुए थे और कर रहे थे लगता है तेरी तबीयत ठीक नही है , तुझे पहले बताना चाहिए था। हम पानी ले आते कही तू कुए मे गिर जाता तो हमे भी जान से मार देते मैंने उन्हे बताया की मेरी तबीयत खराब नही हैं  मैंने सचमुच भूत को देखा है।

» उन लोगों को विश्वास नही हो रहा था , की अजय जो की कभी भी भूत के बारे मे बोलते थे तो वो कहता था की भूत नही होते मगर इसे आज हो क्या गया है। जो हर बात पे भूत – भूत लगाए हुआ है । भाइयों अब तक 2 बज चुके थे। हमारे दोस्तों के आने का समय हो गया था । मेरे दोस्त ने कहा चलोअब ऊपर चढ़ जाते हैं और उन लोगों को डराते है।

» मुझे डर तो  लग रहा था पर मै दोस्तो के  साथ ज्यादा ऊपर नही बस थोड़ी ऊंचाई पर जाके बैठ गया  जब वो लोग आए तो हमने पत्थर फेकने चालू किये  और तब तक हुआ  क्या जोर जोर से एक ( बवंडर ) हवा का झोंका आया और सारे पीपल उसने झकझोर के  उखाड़ने की कोशिश कर रहा हो मेरे दोस्तों ने समझा की भूत है इस पेड़ प र और वो सारे लोग डर कर भाग गए ।

» और हम बड़े ही खुश हुए की आज तो इन्हे  हमने डरा ही दिया पार हमे क्या पता था की वो ( भूत ) भी यह सब देख रहा है । और उसने जोर से पेड़ को हिलाया जैसे ही मैंने मेरे दोस्तों ने यह सब देखा जल्दी-जल्दी उतरने लगे अब की बार तो  उसकी आंखे लाल – लाल दांत होंठों से बाहर  हम वहाँ से भागे मै  तो डाली पकड़ कर कूद पड़ा मेरे दोस्त जिस से लटका वो डाली टूट  गई और एक दम से नीचे गिरा ।

» मैंने उसे उठाया तक नही मै वहाँ से भागा और मेरे दोस्त भी पीछे – पीछे बस फिर तो हम ने मूड कर नही देखा घर आ के ही दम लिया , हमने देखा की हमारा दोस्त विवेक नही दिखा रहा है।

» तो हमने उसे उधर से लेट आते हुए देखा वो आराम – आराम से आ रहा था उसकी आंखे लाल हाव – भाव बदले हुए नजर आ रहे थे हमनें उनसे पूछा की विवेक क्या हुआ तो उसने कुछ नहीं कहा बस हमारी तरफ ऐसी ही नज़रों से वह देख कर चला गया और जाकर सीधे अपनी चबूतरे पर जा कर बैठ गया ।

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» उसके हाव – भाव बदले आवाज भारी सी हो गई है। जब घर के अब लोगों ने उसे देखा और कहा – कहा गए थे तुम मेरे दोस्त सुरेश ने सारी बात बता दी तब हमारे चाचा जी ने कहा मे हमेशा मन करता रहता हूँ । इन लोगों को की पीपल के पास मत जाया करो पर यह लोग मानते ही नही अब देखो इसका क्या हाल हुआ है।

» अब जा कर  भगत जी को बुला के ले आओ हमारे गाँव मे एक बाबा हैं सियारम जो हनुमान के मंदिर मे रहते है और पूजा करते हैं वो तंत्र – मंत्र इन चीजों मे माहिर है । इसलिए उन्हे लोग भगत जी के नाम से बुलाते हैं।

» तब मै जाकर मंदिर से भगत जी को बुलाया भगत जी ने मुझसे कहा की , पहले कुल्ला कर और जाकर हनुमान के मंदिर से (भभूत ) राख ले कर आ तब मैंने राख ले कर आ तब मैंने राख ली तब तक भगत जी ने कुल्ला कर के अपना कमंडल (साधुओ के पास जो पानी पीने के लिए होता है ) उठाया और चल दिए और मै उनके पीछे-पीछे चल दिया भगत जी वहाँ पहुचे और पहुंचते ही सब समझ गए और कहा भाई तुम यहाँ  क्या लेने आए हो ।

» वो चुप रहा कुछ बोला नही तब भगत जी समझ गए की तू ऐसे नही बताएगा तब भगत जी ने धरती के पैर छूकर बैठ कर मुझसे राख माँगी मैंने उनको राख दे दी तब उन्होंने कुछ मंत्र बोला कर उस राख को उसके ऊपर फेंक दिया और कुछ कमंडल से जल के छींटे मारे तक उसका कान पकड़ के बोले बता तूने इस लड़के को क्यों पकड़ रखा और कौन  है तू और कहाँ से आया है ।

» तब उसने बताया की मै पास के पीपल के पेड़ पर रहने वाला भूत हूँ यह लोग मुझे दोपहर के समय सोने नही देते थे इसलिए मैंने इनको डराया और इसको पकड़ो लिया भगत जी बोले तू पीपल को छोड़ और दूर जंगल मे चला जा और वो पीपल बच्चों के खेलने के लिए है,।

» पर मै कहाँ जाऊँगा तब भगत जी ने कहा की तू ऐसे ही चला जाएगा या फिर निकालू अपना बज्र और भगत जी की आंखे लाल हो गई तब भूत ने कहा आप मेरा कान छोड़ोगे तभी तो मै जाऊँगा देख कितना अच्छा बच्चा है इतना जल्दी समझ गया एक दम विवेक हिला और वो सामान्य हो गया जैसे की अभी सोकर जगा हुआ है। तब भगत जी ने कहा जाओ अब पीपल वाला भूत भाग चुका है अब तुम कभी भी जा कर उस पेड़ पर खेल सकते हो।

» आपको एक बात  बताना मै भूल गया भगत जी आँखों मे जो चमक आई वो हनुमान जी थे और उन्ही ने कहा था की मै बज़्र से मारू क्या तुझे ।

Author: Hindi Rama

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