भरोसे की कीमत – Kids Story In Hindi । Motivational Story In Hindi । Hindi Kahani ।

भरोसे की कीमत - Kids Story In Hindi । Motivational Story In Hindi । Hindi Kahani । by Hindirama.com

भरोसे की कीमत – Kids Story In Hindi

एक समय  की बात हैं , पहाड़ों से घिरे एक छोटे से गाँव मे एक शरारती सा लड़का रहता था । उसका नाम गोपाल था , और गाँव के लोग सीधे – सादे और मेहनती थे। उन लोगों का जीवन खेतों , पशुओ और आपसी प्रेम में भरा हुआ था।

गोपाल हर रोज सुबह भेड़ों को ले के हरी भरी पहाड़ों पर चराने जाता था । लेकिन धीरे – धीरे वह इस काम से ऊबने लगा । पूरे दिन पहाड़ी पर अकेले बैठना भेड़ों पर नजर रखना और शाम होने का इंतजार करना ।

उसे बहुत गंदा लगता था ना वहाँ कोई दोस्त होता और ना कोई खेलने वाला । बस हवा की आवाज पक्षियों की चहचाहट और भेड़ों की मिमियाहट ।

एक दिन ऊबकर सोचने लगा काश ! यहाँ कुछ मजेदार  हो जाए । तभी उसके मन में एक शरारती  विचार आया । उसने जोर – जोर से चिल्लाना शुरू कर दीया । भेड़िया  आया , भेड़िया आया बचाओ …। बचाओ …।

गाँव के लोग अपना – अपना काम छोड़कर लाठियाँ और डंडे लेकर दौड़ते हुए पहाड़ी पर पहुँचे । उन्होंने देखा कि वहाँ कोई भेड़िया नही था। गोपाल जोर – जोर से हंस रहा था ,,, गाँव वाले समझ गए कि उसने ये सब मजाक किया है । वे लोग गुस्से बोले ऐसा मजाक नही करते हैं। अगर सच में भेड़िया आ जाता तो ?

लेकिन गोपाल को यह सब बहुत मजेदार लगा । वह कुछ दिन बाद फिर से उसने वही किया भेड़िया आया भेड़िया आया बचाओ .।। बचाओ॥ गाँव वाले फिर से दौड़ते हुए आए ।

और जब वो लोग पहाड़ों पर पहुंचे तो वहाँ कोई भेड़िया नही था इस बार भी उसने मजाक किया था जिससे गाँव वालों को इस बार बहुत गुस्सा आया सब लोगों ने कहा अगर तुमने फिर से ऐसा कुछ किया तो हम लोग तुम्हारी मदद के लिए कभी नही आएंगे ।

गोपाल ने इस बार भी उन लोगों की बातों को हल्के में लिया , उसको लगा की मैं जब चिल्लाऊँगा तब ये लोग दौड़कर आएंगे । समय बीतता गया। एक दिन शाम का समय था। आसमान में हल्का  अंधेरा छाने लगा था। ठंडी हवा चल रही थी और भेड़े शांति से घास चर रहे थे ।

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तभी अचानक झाड़ियों के पीछे से असली  भेड़ आया उसकी आंखे चमक रही थी और वह धीरे – धीरे भेड़ों की तरफ  बढ़ रहा  था। गोपाल के होश उड़ गए वह डर के मारे कांपने लगा उसने पूरी ताकत से चिल्लाना शुरू किया भेड़िया आया ,,, भेड़िया आया,,,, बचाओ… बचाओ….।

इस बार सच में भेड़िया आया था ! लेकिन गाँव वालों ने जब उसकी आवाज सुनी तो बोले की यह फिर से कोई मजाक कर रहा होगा । रोज – रोज कौन इसके झूठ पर ध्यान दें।

गोपाल लगातार चिल्लाता रहा उसकी आवाज में डर साफ दिखा रहा था लेकिन इस बार कोई भी उसकी मदद के लिए नहीा आया । भेड़िया भेड़ों पर कूद पड़ा और वह एक ,, एक  करके कई  भेड़ों को मारकर ले गया ।

गोपाल रोता रहा लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी उसकी आँखों के सामने उसकी  सारी भेड़े खत्म हो गई।

शाम को जब वह खाली हाथ लौटा तब गाँव वाले सब कुछ समझ चुके थे तो उसने रोते – रोते सारी सच्ची बताई …। मैंने पहले झूठ बोला था लेकिन,,, जब आज मैंने सच कहा तो किसी ने मेरी  बात पर विश्वास नही किया। यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी ।

उस दिन के बाद गोपाल पूरी तरह बदल गया  । वह समझ गया कि झूठ बोलकर थोड़ी  देर की हंसी तो मिल सकती  है, लेकन जब सच मे जरूरत होती है, तो कोई भी विश्वास नही करता। गाँव वालों ने उसे माफ तो कर दिया , लेकिन उसे उसकी गलती  का एहसास हमेशा बना रहा ।

अब वह ईमानदारी से अपना काम करता और कभी झूठ नही बोलता । धीरे – धीरे समय बिता और गोपाल एक समझदार और जिम्मेदार युवक बन गया। अब जब भी गाँव में बच्चों को कोई सीख देनी होती ,तो यह कहानी जरूर सुनाई  जाती – ताकि काभी झूठ बोलने की गलती ना करें ।

कहानी से सीख  –  “झूठ बोलने वालों पर कोई विश्वास नही करता , चाहे वह सच ही क्यों ना बोल रहा हो।”  ईमानदारी ही सबसे बड़ी ताकत है ।

Author: Hindi Rama

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