आम का पेड़ किसका? बीरबल ने असली मालिक का पता कैसे लगाया? Akbar Birbal ki Kahani

आम का पेड़ किसका? बीरबल ने असली मालिक का पता कैसे लगाया? Akbar Birbal ki Kahani। Hindirama.com

आम के पेड़ का असली मालिक कौन? क्या केवल यह कहना काफी है कि पेड़ मेरा है, या उसकी देखभाल ही असली मालिक की पहचान बनती है?

इस सवाल ने पूरे नगर में बड़ा झगड़ा खड़ा कर दिया।

दो पड़ोसी एक ही आम के पेड़ पर अपना हक बता रहे थे। दोनों के पास अपनी-अपनी बात थी, लेकिन सच किसी को समझ नहीं आ रहा था।

अकबर भी सोच में पड़ गए। आखिर बिना किसी निशान के कैसे पता चले कि पेड़ का असली मालिक कौन है? तभी सबकी नजर बीरबल पर जाकर ठहर गई।

क्या बीरबल इस मुश्किल बात का सही फैसला कर पाएंगे, या इस बार झूठ सच पर भारी पड़ जाएगा? जानिए इस रोचक कहानी में।

राजदरबार में पहुंचा आम के पेड़ का झगड़ा। Akbar Birbal ki Kahani 

सुबह का समय था। अकबर अपने भव्य राजदरबार में आकर राजगद्दी पर बैठे। दरबार में सभी मंत्री, सैनिक और नगर के लोग अपनी-अपनी जगह खड़े थे।

तभी दो आदमी हाथ जोड़कर दरबार के बीच आ गए। दोनों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। दोनों एक-दूसरे को गुस्से से देख रहे थे।

अकबर बोले – “तुम दोनों किस बात को लेकर इतना बड़ा झगड़ा कर रहे हो? बिना डर के अपनी बात बताओ।”

पहला आदमी बोला – “जहांपनाह, मेरे आंगन के पास लगा आम का पेड़ मेरा है। मैंने कई साल तक उसकी देखभाल की है।”

दूसरा आदमी बोला – “महाराज, यह बात बिल्कुल गलत है। पेड़ मेरे पिता ने लगाया था। यह पेड़ मेरा है।”

दरबार में बैठे सभी लोग दोनों की बातें ध्यान से सुनने लगे। कोई भी यह समझ नहीं पा रहा था कि सच कौन बोल रहा है।

अकबर बोले – “क्या तुम दोनों के पास कोई ऐसा आदमी है जो सच बता सके?”

दोनों ने एक साथ सिर हिलाकर मना कर दिया। कोई भी गवाह सामने नहीं आया।

बीरबल ने ध्यान से सुनी दोनों की बात

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अकबर ने बीरबल की ओर देखा। उन्हें लगा कि अब केवल बीरबल ही इस उलझन को सुलझा सकते हैं।

बीरबल बोले – “जहांपनाह, जल्दी किया गया फैसला कई बार गलत भी हो सकता है। पहले मुझे दोनों से कुछ बातें करनी होंगी।”

बीरबल ने पहले आदमी से पूछा – “तुम इस पेड़ की देखभाल कैसे करते हो?”

पहला आदमी बोला – “मैं समय पर पानी देता हूं। जब फल आते हैं, तब उसकी रखवाली भी करता हूं।”

फिर बीरबल ने दूसरे आदमी से वही सवाल पूछा।

दूसरा आदमी बोला – “मैं भी उसकी देखभाल करता हूं। पेड़ पर किसी को हाथ तक नहीं लगाने देता।”

दोनों के जवाब लगभग एक जैसे थे। इससे दरबार की उलझन और बढ़ गई।

बीरबल कुछ देर तक शांत खड़े रहे। उनके चेहरे से लग रहा था कि उनके मन में कोई नई बात चल रही है।

बीरबल ने बनाई एक अनोखी योजना

कुछ देर सोचने के बाद बीरबल ने सैनिकों को अपने पास बुलाया। उन्होंने सैनिकों के कान में धीरे से कुछ कहा।

सैनिक तुरंत सिर झुकाकर वहां से चले गए। किसी को समझ नहीं आया कि बीरबल आखिर क्या करने वाले हैं।

अकबर बोले – “बीरबल, क्या तुम्हें कोई रास्ता मिल गया है?”

बीरबल बोले – “जहांपनाह, आज नहीं। कल सुबह सच अपने आप सबके सामने आ जाएगा।”

दोनों आदमी भी हैरान थे। उन्हें समझ नहीं आया कि बिना पेड़ देखे बीरबल सच कैसे जान पाएंगे।

सैनिक अपनी तैयारी पूरी कर चुके थे। अब सबकी नजर अगले दिन होने वाले फैसले पर टिक गई।

सैनिक पहुंचे आम के पेड़ के पास

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रात होते ही बीरबल ने दो सैनिकों को चुपचाप उस आम के पेड़ के पास भेज दिया। उन्होंने किसी को अपनी असली बात नहीं बताई।

बीरबल बोले – “तुम दोनों छिपकर पेड़ पर नजर रखना। जो भी वहां आए, उसकी हर बात ध्यान से सुनना।”

सैनिक बोले – “जैसी आपकी आज्ञा। हम पूरी रात वहीं रहेंगे और सुबह सब कुछ बता देंगे।”

दोनों सैनिक पेड़ के पास झाड़ियों में छिपकर बैठ गए। वहां चारों तरफ पूरा सन्नाटा था। केवल हवा की आवाज सुनाई दे रही थी।

कुछ समय बाद बीरबल ने अपने एक सेवक को पहले आदमी के घर भेजा।

सेवक बोला – “जल्दी चलो। कुछ लोग तुम्हारे आम के पेड़ से फल तोड़ रहे हैं।”

पहला आदमी यह सुनते ही घबरा गया। वह बिना देर किए हाथ में लाठी लेकर घर से बाहर भाग पड़ा।

दूसरे आदमी की बात सुनकर बीरबल मुस्कुराए

पहले आदमी के जाने के बाद वही सेवक दूसरे आदमी के घर पहुंचा। उसने वही बात दोहराई।

सेवक बोला – “जल्दी चलिए। कुछ लोग आपके आम के पेड़ से फल तोड़ रहे हैं।”

दूसरा आदमी आराम से बैठा रहा। उसके चेहरे पर कोई चिंता नहीं थी।

दूसरा आदमी बोला – “रात बहुत हो गई है। सुबह देख लेंगे। अभी जाने से क्या होगा?”

यह बात सुनकर सेवक चुपचाप वापस लौट आया। उसने सारी बात बीरबल को बता दी।

उधर सैनिक भी सब कुछ अपनी आंखों से देख रहे थे। उन्होंने पहले आदमी को पेड़ के चारों तरफ घूमकर उसकी रक्षा करते देखा।

पहला आदमी पेड़ के नीचे खड़ा रहा। वह बार-बार इधर-उधर देखता रहा कि कहीं कोई फल न तोड़ ले।

अगले दिन फिर सजा राजदरबार

सुबह होते ही राजदरबार फिर से सज गया। अकबर अपनी राजगद्दी पर बैठे और दोनों आदमी भी दरबार में बुला लिए गए।

सैनिक भी वहां पहुंच गए। उनके चेहरे से लग रहा था कि अब सच सामने आने वाला है।

अकबर बोले – “बीरबल, अब बताओ। इस आम के पेड़ का असली मालिक कौन है?”

बीरबल हल्का सा मुस्कुराए। उन्होंने पहले सैनिकों की ओर देखा, फिर दोनों आदमियों की तरफ नजर घुमाई।

पूरा राजदरबार एकदम शांत हो गया। सभी लोग बीरबल के अगले शब्द सुनने का इंतजार करने लगे।

बीरबल ने सुनाया अपना फैसला

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बीरबल बोले – “जहांपनाह, अब मुझे साफ पता चल गया है कि इस आम के पेड़ का असली मालिक कौन है।”

दरबार में बैठे सभी लोग एक साथ बीरबल की ओर देखने लगे। दोनों आदमी भी घबराकर खड़े हो गए।

अकबर बोले – “अगर तुम्हें सच पता चल गया है, तो बिना देर किए सबके सामने बता दो।”

बीरबल पहले आदमी के पास गए। फिर उन्होंने उसके कंधे पर हाथ रखा और मुस्कुराए।

बीरबल बोले – “इस आम के पेड़ का असली मालिक यही आदमी है।”

दूसरा आदमी यह सुनते ही घबरा गया। उसके चेहरे का रंग बदल गया।

दूसरा आदमी बोला – “यह फैसला गलत है। मैंने भी कहा था कि पेड़ मेरा है।”

बीरबल शांत खड़े रहे। उन्हें पहले से ही सच्चाई पता थी।

झूठ बोलने वाला खुद फंस गया

अकबर बोले – “बीरबल, तुमने यह फैसला किस आधार पर किया?”

बीरबल बोले – “जहांपनाह, रात को मैंने दोनों के घर एक ही खबर भिजवाई थी।”

पूरा दरबार ध्यान से उनकी बात सुनने लगा। किसी की नजर बीरबल से नहीं हट रही थी।

बीरबल बोले – “पहले आदमी ने जैसे ही सुना कि कोई पेड़ से आम तोड़ रहा है, वह तुरंत उसकी रक्षा करने दौड़ पड़ा।”

बीरबल फिर दूसरे आदमी की ओर देखने लगे।

बीरबल बोले – “लेकिन दूसरे आदमी ने कहा कि सुबह देख लेंगे। उसे पेड़ की कोई चिंता ही नहीं थी।”

सैनिक बोले – “जहांपनाह, हमने अपनी आंखों से यही देखा है। पहला आदमी पूरी रात पेड़ के पास खड़ा रहा।”

यह कहानी भी पढ़ें ⇾  जादुई छड़ी और चोर की कहानी। बीरबल ने कैसे पकड़ा चोर को? 📖

यह सुनते ही दूसरा आदमी सिर झुकाकर खड़ा हो गया। अब उसके पास कोई जवाब नहीं था।

कुछ पल बाद उसने अपनी गलती मान ली।

दूसरा आदमी बोला – “महाराज, मुझसे लालच में बहुत बड़ी गलती हो गई। पेड़ मेरा नहीं है।”

अकबर ने दिया न्याय और मिली बड़ी सीख

अकबर बोले – “झूठ बोलकर किसी की मेहनत पर हक नहीं पाया जा सकता। तुम्हें अपने काम की सजा मिलेगी।”

सैनिक आगे आए और झूठ बोलने वाले आदमी को दरबार से बाहर ले गए।

अकबर पहले आदमी की ओर मुस्कुराकर देखने लगे।

अकबर बोले – “आज से इस आम के पेड़ पर केवल तुम्हारा अधिकार रहेगा। कोई भी इसे तुमसे नहीं छीन सकेगा।”

पहला आदमी हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। उसकी आंखों में खुशी साफ दिखाई दे रही थी।

पहला आदमी बोला – “जहांपनाह, मैं आपका और बीरबल जी का जीवन भर आभारी रहूंगा।”

पूरा दरबार बीरबल की समझदारी की प्रशंसा करने लगा। सभी लोग खुश थे कि बिना किसी झगड़े के सही इंसान को न्याय मिल गया।

कहानी से मिली सीख

इस कहानी से हमें समझ आता है कि असली मालिक वही होता है, जो अपने काम और अपनी चीज की सच्चे मन से देखभाल करता है। केवल दावा करने से कोई अधिकार नहीं मिल जाता।

बीरबल ने बिना किसी लड़ाई और बिना किसी डर के केवल समझदारी से सच सामने ला दिया। इसलिए जीवन में हमेशा सच, मेहनत और ईमानदारी का साथ देना चाहिए, क्योंकि अंत में जीत हमेशा सच्चाई की ही होती है।

____कहानी समाप्त____

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