सोने का खेत – अकबर और बीरबल । Akbar Birbal Story In Hindi
⇒ एक दिन की बात है । दरबार लगा हुआ था और सभी मंत्री और दरबारी अपनी – अपनी जगह बैठे हुए थे । तभी एक किसान घबराया हुआ दरबार में आया । उसके कपड़े मैले थे , और चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी।
⇒ उसने अकबर के सामने झुककर कहा जहाँपनाह , मुझे न्याय दो । अकबर ने उसे सांत्वना देते हुए कहा डरो मत हमे अपनी समस्या खुल कर बताओ। किसान बोला- हुजूर मेरे पड़ोसी ने मेरा खेत छिन लिया है ,,,, वह कहता है कि यह खेत उसका है ।
⇒ लेकिन यह खेत मेरे दादा और पिता के समय से हमारे पास है । इतना सुनते ही अकबर ने उस पड़ोसी को भी दरबार में बुलाने का आदेश दिया । थोड़ी ही देर में वह पड़ोसी भी वहाँ पहुँच गया । वह बहुत चालाक और धूर्त आदमी था ।
⇒ अकबर ने उससे पुछा क्या यह सच है कि तुमने इसका खेत ले लिया है ? वह बोला ….. जहाँपनाह ,यह खेत मेरा है । मेरे पास इसके कागज भी है। उसने कुछ पुराने कागज पेश किये । उन्हे देखकर यह तय करना मुश्किल था की सच में यह खेत किसका है।
⇒ अब अकबर सोच में पड़ गया। मामला बहुत उलझा हुआ था , तभी उन्होंने बीरबल की तरफ देखा और कहा ,,, बीरबल इसका फैसला अब तुम करो ।
⇒ बीरबल ने दोनों बाते ध्यान से सुनी और फिर कुछ देर सोचने लगे। फिर उन्होंने कहा जहाँपनाह मुझे इस खेत को देखने की अनुमति दि जाए। अगले दँ बीरबल दोनों को साथ लेकर उस खेत पर पहुंचे । खेत बहुत उपजाऊ थी और फसल लहलहा रही थी ।
⇒ हवा चलने पर फसल ऐसे लग रही थी जैसे मानो खेत सोने की तरह चमक रहा हो। बीरबल ने किसान से पुछा – अगर यह खेत तुम्हारा है तो बताओ इसमे सबसे पहले कौन सी फसल बोई थी ? किसान ने तुरंत जवाब दिया – हुजूर इसमे गेहू बोया था।
⇒ मेरे पिता भी यही बोते थे । फिर बीरबल ने पड़ोसी से वही सवाल पुछा । वह थोड़ा हिचकिचाया और बोला इसमे जौ बोया गया था हुजूर ।
बीरबल मुस्कुराये लेकिन अभी भी उन्होंने कुछ नही कहा। फिर उन्होंने दोनों से कहा कि कल सुबह तुम लोग दरबार मे आना । अबजब अगले दिन दरबार लगा तो दोनों आए । बीरबल बोले जहाँपनाह मैंने फैसला कर लिया है कि यह खेत सोने का खेत है।
⇒ यह सुनकर सब हैरान रह गए , अकबर ने पुछा सोने का खेत यह कैसे हो सकता है ? बीरबल बोले – हुजूर , यह खेत उस आदमी के लिए है जो इसमे अपना खून पसीना बहाता है । जो इसे अपने बच्चों की तरह संभालता है ।
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⇒ मैंने रात को वहाँ पहरा दिया और मैंने यह देखने के लिए पहरा दिया की इसकी देख रेख कौन करता है और किसान बार बार देर तक खेत को देखने आता , उसकी मेड़ों को ठीक किया फसल को हाथ लगाकर देखा । लेकिन दूसरा आदमी एक बार भी खेत के पास नही आया ।
⇒ फिर बीरबल ने किसान की तरफ़ देख कर इशारा किया की जहाँपनाह ,,, यह खेत इसी का है। इसके लिए यह खेत सोने से भी ज्यादा कीमती है। यह सुनते ही दरबार में तालियाँ गूंज उठी धूर्त पड़ोसी फिर नीचे सिर करके शर्म के मारे खड़ा रहा।
⇒ उसने फिर अपनी गलती मान ली और किसान से माफी माँगी। अकबर ,,, बीरबल के बुद्धिमानी से बहुत खुश हुए। उन्होंने किसान को उसका खेत वापस दिलाया और इनाम भी दिया। किसान की आँखों में खुशी के आँसू थे ।
⇒ उसने बीरबल को धन्यबाद कहा , और बोला – मेरे लिए यह खेत सच में सोने की तरह कीमती है । क्योंकि इसमे मेरे परिवार की मेहनत और प्यार बसा हुआ है। अकबर मुस्कुराया कहा- सच ही कहा गया है, – मेहनत से उगाया हुआ अनाज सोने से भी ज्यादा कीमती है ।
⇒ उस दिन के बाद पूरे राज्य में बीरबल के इस न्याय की चर्चा होने लगी।
कहानी से सीख
⇒ मेहनत और सच्ची से कमाई हुई चीज असली सोना होती है। धोखा और लालच कभी जीत नही सकते । जिस चीज से हमे सच्चा प्रेम होता है, वही हमारे लिए सबसे कीमती होती है।