
माँ तुम ऐसी होती हो – सास बहूँ और पोते । Emotional Story In Hindi
» विमल बहुत परेशान था । उसे समझ में नहीं आ रहा था । कि वो घर की इस परिस्थिति से कैसे संभाले । वह अपनी माँ को बहुत चाहता था । लेकिन विमल की पत्नी और बच्चें उसकी माँ से बहुत दूर भागतें थें । क्योंकि उसकी माँ की एक आँख नहीं थीं । साथ ही उसकी कमर भी किसी पुरानी बीमारी के कारण झुकी हुई थीं ।
» वैसे तो विमल की माँ अपना सारा काम खुद ही कर लेती थीं । किंतु फिर भी वो उसकी पत्नी और बच्चों के लिए हमेशा खटकती हैं । यानि वह सब उससे बहुत ही ज्यादा चिड़ते थें । और उनसे घिन भी करते थें ।
» एक दिन विमल का बेटा – ” दादी आप ऊपर के कमरे मे चले जाओ मेरे कुछ दोस्त आ रहे हैं । ” यह बात विमल के बड़े बेटे अखिलेश ने बड़ी ही बेरुखी से अपनी दादी से कहा ।
» दादी बोली – ” पर बेटा मैं तो यहाँ बहुत दूर बेठी हूँ । तो मुझसे भला तुम्हें क्या परेशानी हो सकती हैं । ” दरअसल मुझसे ऊपर चढ़ा नहीं जाएगा । बड़ी ही धीरे से दर्द भरी आवाज मे विमल की माँ ने अपने बड़े पोते अखिलेश से कहा ।
» बड़ा पोता – नहीं, ” आप उनके सामने मत रहों, मेरे सभी दोस्त मुझे चिढ़ाते हैं। ” अखिलेश ने अपनी दादी से जोर डांटते हुए कहा ।
» क्या हुआ अखिलेश , क्यों चिल्ला रहें हों , विमल की पत्नी कामिनी ने किचन से ही आवाज लगाई ।
» देखों न माँ , ये दादी यहीं ड्राइंग रूम मे बैठी हैं । और मेरे सभी दोस्त आने वाले हैं । अखिलेश नें शिकायत भरे लहजे से कहा ।
» माँ जी आप ऊपर चली जाओ न , क्यों हम लोगो को आप इतना परेशान करती हों । कामिनी ने अपने बेटे का पक्ष लेते हुए कहा ।
» यह सुनकर बेचारी सरस्वती चुपचाप उठकर जीने के सहारे ऊपर जाने लगी । ” कमर झुकी होने के कारण उन्हे ऊपर चढ़ने मे बहुत परेशानी हो रही थीं । ” किंतु वो पूरी ताकत से ऊपर के एक अकेले कोने वाले कमरे में जाकर बैठ गई ।
» विमल बाजू वाले कमरे से सब कुछ सउन रहा था । और सारी बात सुनकर उसे बहुत ही ज्यादा कष्ट हो रहा था । क्योंकि उसकी माँ को अपमानित होना पड़ रहा था । मगर वो असहाय था । अगर वो कुछ कहता तो , पत्नी और बच्चें उसका विरोध करने लगते थे । क्योंकि उसकी पत्नी एक ऊँचे घराने की थीं । इसलिए उसमे बूट घमंड था ।
» और विमल चाहता था कि घर मे कोई बड़ा क्लेश ना हों । अतः वह चुपचाप इसी तरह हर दिन अपनी माँ को अपमानित होते देखता रहता था । मगर विमल अपनी माँ को बहुत प्यार करता था । और वह उनका बहुत ख्याल रखता था ।
» तभी रात को विमल की पत्नी कामिनी बोली , कि अब कुछ करों , कल कलेक्टर साहब की पत्नी आई थीं । और तुम्हारी माँ उनके सामने आ गई । और तो और उनसे माँजी बात भी करने लगी । मुझे बहुत ही शर्म आ रही थीं उन्हे अपनी सास बताने मे , इसलिए कलेक्टर की पत्नी से मैंने कह दिया , कि यह मेरी दूर की रिश्तेदार हैं । अपना इलाज कराने आई हैं ।
» इस बात को सुनते ही विमल को रोना आ गया किंतु फिर भी वह चुप चाप रहा । उसे समझ मे नहीं आ रहा था । कि वो क्या करें ।
» सरस्वती अपने बेटे विमल की सारी परिस्थिति अच्छी तरह से जानती थीं । उसके बेटे को कोई कष्ट ना हो इसलिए वो हर बात को चुपचाप सह लेती थीं । विमल बहुत उदास रहने लगा। एक तरफ परिवार और सामाजिक स्तर पर जीवन जीने की प्रतिबद्धता थी , तो दूसरी तरफ उसकी प्यारी माँ ।
» विमल को रोज उदास और बहुत दुखी देखकर सरस्वती भी अंदर ही अंदर दुखी रहने लगी । और अब सरस्वती से अपने बेटे विमल की ऐसी हालत देखी नहीं जा रही थीं ।
» तभी एक दिन सरस्वती ने अपने बेटे विमल से कहा , कि बेटा विमल बहुत दिन हो गए हैं । मैं अपने गाँव जाना चाहती हूँ । मुझे वहाँ छोड़ आ बेटा , मेरा यहाँ मन नहीं लग रहा ।
» किंतु माँ वहाँ तो कोई नहीं हैं । तुम्हारी देखभाल कौन करेगा ? विमल नें आश्चर्य से पूछा ।
» विमल की पत्नी जल्दी से बोली – अरे, ” सब गाँव वाले हैं ना , और तुम्हारे मामाजी भी तो उसी गाँव मे रहते हैं। और फिर हम गाँव मे माँजी के लिए सारी व्यवस्था कर आएंगे ना , कामिनी की तो जैसे मन की मुराद ही पूरी हो गई हों । “
» विमल की माँ – हाँ बेटा , ” बहूँ सही कह रही हैं। उदास मन से लंबी साँस लेते हुए विमल की माँ सरस्वती ने कहा ।
» विमल जानता था , कि गाँव मे माँ की देखभाल करने वाला कोई नहीं हैं । लेकिन अपनी पत्नी की जिद के कारण , वह अपनी प्यारी माँ को गाँव छोड़ने के लिए विवश हो गया ।
» और फिर माँ को गाँव छोड़कर आते समय विमल को रोना आ रहा था । तथा अपनी बेबसी पर बहुत गुस्सा भी आ रहा था । लेकिन परिवार पत्नी और समाज ने उसके इन मनोभावों को दबा दिया ।
» कुछ दिनों के बाद उसके चाचा , जो अमेरिका मे रहते थें । वो आने वाले थे । जब विमल छोटा था , और उसके पिता जीवित थें , तब उसके मामा आए थें । उसके बाद वो अब भारत आने वाले थें ।
» पूरा परिवार और आस – पड़ोस उनके अमेरिका से आने पर बहुत ही उत्साहित था । अमेरिका से विमल के डॉ चाचा आ रहे थे ।
» तो जैसे ही डॉ चाचा रमेश ने विमल के घर मे कदम रखा , सबने मिलकर बहुत उत्साह से उनका स्वागत किया । यह देखकर उसके चाचा बहुत ही खुश हो गए ।
» क्यों विमल भाभी नहीं दिख रही , कहाँ हैं ? डॉ रमेश ने बड़े ही उत्साहपूर्वक से पूछा ।
» जी वो गाँव में रहती हैं , यहाँ उनका मन नहीं लग रहा था । कामिनी ने सपाट लहजे मे उत्तर दिया ।
» डॉ रमेश नें विमल की ओर देखा तो विमल नें अपनी आंखे झुका ली । और डॉ रमेश सब समझ गए । और बोले कि कल हम सब भाभी से मिलने गाँव चलेंगे ।
» दूसरे दिन सभी लोग गाँव के घर मे पहुंच गए । और देखा कि सरस्वती को बहुत तेज बुखार हैं। और वह पलंग पर असहाय पड़ीं हैं । डॉ रमेश दौड़कर सरस्वती के पास गए और उनके पैर छूकर रोने लगे सरस्वती की यह हालत उनकी कल्पना से परे थीं । सब कुछ देखकर सरस्वती का देवर डॉ रमेश बहुत दुखी हो रहा था ।
» वाह बेटा विमल , ” तूने तो नाम उजागर कर दिया। अपनी माँ की ऐसी हालत देखकर तुझे तो शर्म भी नहीं आ रहीं होगी । डॉ रमेश ने विमल को खूब डांटते हुए कहा। “
» नहीं देवरजी – विमल का कोई दोष नहीं हैं मैं खुद गाँव आई थीं । सरस्वती ने विमल का बचाव करते हुए कहा।
» मुझे सब पता चल गया भाभी आप चुप रहो ।
» क्यों बहूँ तुम्हें अपनी सास की झुकी हई कमर पसंद नहीं , उसकी कुरूपता पसंद नहीं । समाज मे तुम्हें उनकी वजह से नीचा देखना पड़ता होगा ना । यह कहकर डॉ रमेश ने कामिनी की तरफ बहुत ही गुस्से से देखा।
» कामिनी निरुतर होकर विमल की ओर देखने लगी ।
» आज तुम जिस सामाजिक स्तर पर हों , वो सरस्वती भाभी के संघर्षों की देन हैं। और बेटा विमल , तुम्हें शायद मालूम ना हों। कि बचपन मे जब तुम 1 साल के थें तब छत से नीचे गिरने के कारण तुम्हारी एक आँख फुट गई थीं और तुम्हारी रीड की हड्डी मे भी समस्या थीं ।
» तब तुम्हारी इस कुरूप माँ नें अपनी एक आँख और अपना बोनमेरो तुम्हें देकर तुम्हारा इलाज करवाया था । और तुम्हें इतना सुंदर रूप दिया था ।
» कामिनी बेटा – इतने सालों तक संघर्ष करके बेटे को प्रशासनिक अधिकारी बनाने वाली इस संघर्षशील औरत की तुम लोगो नें यह दशा कर दी । तुम्हें ईश्वर कभी माफ नहीं करेगा । डॉ रमेश की आँखों से ये सारी बातें कहते हुए खूब आँसू बह रहे थे ।
» अब भाभी आप मेरे साथ अमेरिका चलोगी । यहाँ इन स्वार्थी लोगो के बीच आपको नहीं रहना पड़ेगा । डॉ रमेश ने अपनी भाभी सरस्वती से कहा।
» डॉ रमेश चाचा की सारी बात सुनकर , विमल फुट -फुट कर रोने लगा। उसे यह बात अब पता चली थीं , की उसकी माँ की एक आँख खराब क्यों हैं । और उनकी कमर झुकी हुई क्यों हैं। वह सब तो उसकी माँ ने बचपन मे ही उसे खुशी खुशी दे थीं ।
» तभी तो आज विमल खुद इतना स्वस्थ हैं , और उसकी माँ इतने सालों से इस दर्द से तड़प रही हैं ।
» अब विमल खुद को कोस रहा था। और उसे लग रहा था कि उससे ज्यादा पापी इंसान इस दुनिया में कोई नहीं हैं।
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उस लड़की का इंतजार – Hindi Love Stories । Love Stories In Hindi । Love Stories ।
» विमल दौड़कर माँ के पैरों मे गिर गया। और रोता हुआ बोला , कि माँ मेरा अपराध अक्षम्य हैं । मैं जानबूझकर चुपी साधे रहा । और आपका अपमान करवता रहा ।
» अब से सिर्फ आप ही उस घर मेरे साथ रहोगी , और कोई नहीं , यह कहते हुए विमल ने बहुत ही क्रोध होते हुए , अपनी पत्नी कामिनी व बच्चों को देखा।
» कामिनी को भी बहुत ही पछतावा हो रहा था । किंतु उसकी हिम्मत नहीं हो रही थीं, कि वो अपनी सास सरस्वती से आंखे मिला पाए । लेकिन उसकी आँखों मे पछतावा बिल्कुल साफ दिख रहा था।
» सरस्वती ने कामिनी की मन स्थिति को समझकर उसको पुचकारते हुए अपने पास बुलाया , ” और विमल को डांटते हुए कहा, खबरदार जो मेरी बहूँ को मुझसे अलग करने की कोशिश की तों ” मैं तुझे ही घर से बाहर निकाल दूँगी।
» सास की इतनी अच्छी बात सुनते ही , ” कामिनी ने उनके पैर पकड़ लिए व फिर विमल के दोनों बच्चों ने भी अपनी दादी से माफी मांग ली। और दोनों ही पोतों ने अपनी दादी की गोद मे अपना सिर रख दिया। व उनकी गोद मे रोने लगे ।
» अब सरस्वती ने सबको माफ कर दिया ।
» फिर सभी लोग मिलकर सरस्वती को शहर ले गए , ” और उस दिन से सरस्वती की पूरा घर ही सेवा करने लगा। ” और विमल को भी माँ का प्यार समझ आ गया था। कि माँ जैसा इस दुनिया में कोई भी नहीं। एक माँ ही हैं जो अपना बलिदान करके पूरा परिवार खुश रखती हैं ।