
लालच बुरी बला हैं – Greed Is Bad Thing Story ।
» बहुत पुरानी बात है , एक गाँव मे शेखर नाम का एक व्यक्ति रहता था । वह बड़ा मेहनती था किंतु गाँव मे कोई रोजगार नही था , उसने सोचा की मै शहर चला जाता हूँ वहाँ मुझे मेरी योग्यता अनुसार मेहनत के पैसे मिल जाएंगे । यह सोचकर शेखर एक दिन अपने गाँव से शहर की ओर चल दिया ।
» शहर बहुत दूर था , चलते – चलते शेखर थक चुका था। की अब उससे बिल्कुल भी चला नही जा रहा था । और वह थककर वही बैठ गया। तभी शेखर ने देखा की वहाँ से कुछ दूरी पर एक झोपड़ी है और झोपड़ी मे एक घोडा बंधा हुआ है। शेखर ने सोचा क्यों ना इस घोडे को किराये पर ले लूँ और इसी से शहर चला जाता हूँ।
» शेखर जैसे – तैसे झोपड़ी पर तक पहुँचा । शेखर ने देखा वहाँ एक व्यक्ति खड़ा हुआ है। शेखर समझ गया की यह अवश्य ही घोडे का मालिक है। शेखर उस व्यक्ति से बोला – मुझे आगे शहर मे जाना है और शहर यहाँ से कई किलोमीटर दूर है, मै बुरी तरीके से थक चुका हूँ , तो क्या मै आपका घोडा ले सकता हूँ।
» इस पर घोडे का मालिक झुँझलाते हुए बोला- तुम्हें क्या मै घोडा ऐसे ही दे दूँ। शेखर बोला- मै आपसे घोडा फ्री मे नही लूँगा इसके बदले मे आपको घोडे का किराया दूँगा ।
» घोडे का मालिक बोला- मै तुम्हें घोडा किराये पर तो दे सकता हूँ , किंतु मुझे अभी दूसरे गाँव जाना है , अगर तुम मुझे उस गाँव तक छोड़ दो तो मै यह घोडा तुम्हें किराये पर दे सकता हूँ।
» शेखर झट से तैयार हो गया और आगे घोडे पर बैठ गया । घोडे का मालिक पीछे । गर्मी के दिन थे बहुत तेज की धूप थी । दोनों चलते -चलते थक गए और पसीने से तरबतर हो गए । शेखर बोला- बहुत तेज गर्मी है और थकान भी बहुत हो रही है, कही थोड़ी देर आराम कर लिया जाए।
» दोनों ने इधर – उधर देखा किंतु कहीं भी कोई भी पेड़ नही दिखा , तभी शेखर घोडे से उतरा और घोडे के ही छाँव मे बैठ गया। शेखर थोड़ी देर ही घोडे की छाँव मे आराम कर पाया था की यह सब देख कर घोडे का मालिक बुरी तरीके से जल गया । घोडे का मालिक बोला – मैंने तुम्हें घोडा किराये पर दिया है। उसकी छाया किराये पर नही दी है । तुम हटो यहाँ से इस छाया पर सिर्फ मेरा अधिकार है । और मै यहाँ आराम करूंगा ।
» यह सुनकर शेखर बोला- महानुभव ! आप यह कैसे बात कर रहे हैं। मैंने अगर घोडे को किराये पर लिया है , तो उसकी छाया पर भी मेरा ही अधिकार है । अगर आप चाहे तो आप भी मेरे साथ इसकी छाए मे बैठ कर आराम कर सकते हैं।
» लेकिन घोडे का मालिक बड़ा जिद्दी था वह बोला- नही – नही इस छाया पर सिर्फ और सिर्फ मेरा अधिकार है। और मै ही इसकी छाया मे बैठूँगा , तुम हटो यहाँ से।
» इतनी छोटी सी बात पर दोनों मे बहुत ज्यादा ही बहस होने लगी और बात तू, तू मै, मै से हाथापाई पर आ गई । दोनों एक दूसरे से झगड़ने लगे और एक दूसरे पर लात घूसे बरसाने लगे। सुनसान जंगल मे भी उनके बीच बचाव करने वाला भी कोई नही था। दोनों की लड़ाई देख कर घोडा भी भड़क गया और वहाँ से भाग गया ।
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» थोड़ी देर बाद जब घोडे के मालिक ने घोडे को देखा तो वह कहीं दिखई नही दिया , यह देखकर घोडे का मालिक बोला- अरे मेरा घोडा कहाँ चला गया , वह तो अभी नया है। उसने ठीक से घर भी नही देखा, पता नही वह कहाँ गया और अब मै उसे कैसे ढूँढ़ू ।
» तभी शेखर बोला- अच्छा हुआ तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही होना चाहिए , अभी तुम छाया के लिए परेशान हो रहे थे अब घोडे की काया के लिए परेशान होना ।
» घोडे के मालिक को अपनी गलती को एहसास हुआ , और अपना माथा पीट कर हाय तौबा करते हुए बैठ गया और बोला- मेरे थोड़े से लालच के कारण कितना बड़ा नुकसान हो गया। घोडे की छाया के लोभ के कारण घोडे की काया से भी हाथ धो बैठा ।
» शिक्षा- ″इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है , की लालच बुरी बला है। और कभी- कभी छोटे से लोभ के कारण बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। “