श्रापित पीपल का रास्ता और खतरनाक आत्मा – Horror Story In Hindi
⇒ बरसात की गहरी रात थी आसमान में काले बादल थे मानो जैसे किसी ने काली चादर से पूरे आकाश को ढक दिया हो। बिजली की चमक कभी – कभी आसमान को चीर देती और कभी सब कुछ फिर सेसन्नाटे में डूब जाता तेज हवा चल रही थी चारों तरफ तूफान उठ रहा था कुत्तों के रोने की आवाज आ रही थी मानो जैसे कोई अनहोनी होने वाली हो।
⇒ राजनपुर गाँव के बीचों – बीच चौराहे पर एक बड़ा अलाव जल रहा था । उसके आस -पास गाँव के कुछ लोग खड़े थे उन सबके बीच गाँव के सबसे बुजुर्ग आदमी रामस्वरूप बाबा बैठे हुए थे । उनके सफेद दाढ़ी , चेहरे पर झुर्रियां , गहरी आंखे जैसे उनके अंदर बहुत से रहस्य छुपे हो ?
⇒ उसी समय वहाँ एक युवक बैठे हुए थे जिसका नाम अजय था। वह शहर से कुछ दिनों के लिए गाँव आया हुआ था, अजय पढ़ा – लिखा और आधुनिक सोच वाला लड़का था इसलिए उसको भूत प्रेत की कहानियों पर विश्वास नही होता था ।
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⇒ रामस्वरूप बाबा ने अचानक गंभीर आवाज में कहा , बेटा अजय….. तुम्हें कभी रात में कही जाना पड़े तो पीपल वाले रास्ते से कभी मत जाना। अजय ने हँसते हुए पुछा, ऐसा क्यों बाबा ? क्या वहाँ सचमुच में भूत रहता है ?
⇒ बाबा की आंखे अचानक गहरी हो गई उन्होंने धीरे – धीरे कहा, भूत नही बेटा…. वहाँ एक अधूरी आत्मा भटकती है …. जिसका दर्द आज भी खत्म नही हुआ है । अलाव के पास बैठे बाकी लोग भी बहुत ज्यादा डर गए । उनमे से एक आदमी ने बोला, मैंने अपनी आँखों से देखा है बाबा सफेद साड़ी में एक औरत … जिसकी आंखे ही नही थी ,,, और वह रात में रोती रहती है….।
राधा की अधूरी मौत का रहस्य
⇒ रामस्वरूप बाबाब ने लंबी सांस ली और कहानी शुरू कर दी। आज से पहले ठीक 25 साल पहले ठाकुर साहब की एक बेटी थी … जिसका नाम राधा था। राधा पूरे गाँव सबसे सुंदर और सुशील लड़की और बहुत ही सीधी लड़की थी।
⇒ उसकी बड़ी – बड़ी आंखे, लंबे काले बाल और शांत स्वभाव के कारण हर कोई उसको पसंद करता था। गाँव हर लड़के उससे शादी करना चाहते थे इसलिए लेकिन वह बचपन से हइ मोहन नाम के एक लड़के को पसंद करती थी ।
⇒ मोहन देखने में तो सीधा लगता था लेकिन उसके दिल में लालच भरा हुआ था । वह राधा से प्यार तो करता था लेकिन वह साथ ही ठाकुर साहब की दौलत पर नजर भी रखता था एक दिन मोहन ने राधा से कहा अगर तुम सचमुच मुझसे प्यार करती हो? तो रात में पुराने पीपल के पेड़ के नीचे मिलना ।
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⇒ हम दोनों वहाँ से भागकर शहर चले जाएंगे । भोली- भाली राधा को क्या पता था कि मोहन उसको प्यार नही बल्कि उसके प्रति एक गहर सजिश रच रहा था । उस रात राधा सचमुच पीपल के उस रास्ते पर पहुँच गई । वहाँ घना जंगल था और चारों ओर अंधेरा ।
⇒ राधा मोहन का इंतजार करती रही , लेकिन मोहन जब आया तो उसके हाथ में एक चाकू था। उसी रात उसने वही राधा की बेरहमी से हत्या कर दी । और उसकी लाश पीपल के पेड़ के नीचे फैंक दी।
अजय का खतरनाक फैसला
⇒ रामस्वरूप बाबा की यह कहानी सुनकर बाकी लोगों की रूह कांप उठी लेकिन को इस बात का बिल्कुल डर नही था की भूत – प्रेत नाम की कोई चीज भी होती है । उसको यह सब एक पुरानी कहनि की तरह लग रही थी ।
⇒उसने हँसते हुए कहा, बाबा यह सिर्फ संयोग होगा भूत प्रेत जैसी कोई चीज नही होती । दो दिन बाद जब अजय को शहर वापस जाना था । लेकिन उसी दिन इतनी तेज बारिश हुई की गांव से जाने वाली बसे आई ही नही।
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⇒ उसी समय गाँव का युवक मोहन अजय के पास आया और बोला भैया अगर आपको जल्दी जाना है, तो आप पीपल वाले रास्ते से चले जाओ … वो छोटा रास्ता है । अजय को रामस्वरूप बाबा की चेतावनी याद आई , लेकिन उसने सोचा कि गाँव वाले बेकार में डरते हैं।
⇒ रात में करीब नौ बजे , अजय टॉर्च लेकर पीपल के रास्ते पर चल पड़ा वो भी अकेला। जैसे – जैसे जंगल के अंदर बढ़ता गया सन्नाटा और बह गहरा होता गया … और हवा में एक अजीब सी ठंढक महसूस हुई।
पहली भयानक मुलाकात
⇒ अचनक अजय को अपने पीछे किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। उसने तुरंत टॉर्च घुमाई लेकिन वहाँ कोई नही था । अजय ने खुद को समझाया की यह सिर्फ उसका वहम है और फिर वह आगे बढ़ गया।
⇒ तभी उसको एक औरत की धीमे से रोने की आवाज आई,,,,, अजय ने डरते हुए आवाज लगाई ,,, कौन है वहाँ ? लेकिन जवाब में सिर्फ रोने की आवाज आती रही । कुछ समय बाद आगे बढ़ते ही उसको टॉर्च की रोशनी में एक सफेद साड़ी पहले औरत दिखाई दी, जो पीपल के पेड़ के पीछे खड़ी थी।
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⇒ अजय ने हिम्मत करके पुछा आप यहां अकेली क्या कर रही हाँ ? तभी वह औरत अपना चेहरा धीरे – धीरे ऊपर उठाने लगी,,,। और अजय का दिल जोर – जोर से धड़कने लगा ।

बिना आँखों वाली औरत
⇒ जैसे ही उस औरत का चेहरा उस टॉर्च के सामने आया वैसे ही अजय का खून जम सा गया। उसका चेहरा पूरी तरह खून से सना हुआ था …. और उसकी आँखे गायब थी। वह डरावनी आवाज में बोली ,,,,, मुझे मेरे कातिल तक ले चलो…।
⇒ अजय के हाथ कंपने लगे और उसके हाथ से टॉर्च नीचे गिर गई । उसी क्षण टॉर्च बुझ गई और चारों ओर घना अंधेरा छा गया । अचानक अजय को अपने कंधे के ऊपर बर्फ जैसी ठंडे हाथों का स्पर्श महसूस हुआ । अजय चीखते हुए पीछे मुड़ा लेकिन वहाँ कोई नही था ।
तांत्रिक गिरधारी का प्रवेश
⇒ अचानक अजय तभी उस भयानक औरत को देखकर कांप गया । चारों तरफ गहरा अंधेरा था और तेज हवा पेड़ों को इस तरह हिला रही थी जैसे जंगल खुद जीवित हो गया हो । अचानक पीपल के पेड़ के पास किसी की मंत्र पढ़ने की आवाज आने लगी।
⇒ वह आवाज इतनी रहस्यमयी थी कि , अजय का दिल और तेज धड़कने लगा। अजय धीरे – धीरे उस आवाज की तरफ बढ़ा बिजली चमकी और उस में उसने देखा की पीपल के पेड़ के नीचे एक बूढ़ा आदमी बैठा हुआ था , उसके सामने हवन की छोटी सी अग्नि जल रही थी। और हाथ में रुद्राक्ष की माला थी।
⇒ वह आदमी था तांत्रिक गिरधारी। उसकी लंबी जताऐं और लाल आंखे देखकर अजय के रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। गिरधारी ने बिना अजय की तरफ देखे कहा, तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी बेटा …. इस रास्ते में आकर वो भी रात के समय उस आत्मा को तुमने फिर से जगा दिया।
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⇒ अजय ने घबराते हुए बोला ,,,, क …. कौन आत्मा ? गिरधर ने धीरे – धीरे आंखे खोली और बोले,,, राधा की आत्मा … जो अपने कातिल को ढूंढ रही है । तभी अचानक हवा और तेज चलने लगी। पेड़ों की डालियाँ बहुत जोर – जोर से हिलने लगी और अंधेरे में किसी औरत की दर्दनाक चीख उठी ।
⇒ अजय का दल दहल गया। गिरधारी ने तुरंत जमीन पर रख से एक गोल घेरा बनाया और अजय को उसके अंदर खड़े रहने को बोला । कुछ समय बाद वही औरत फिर से पीपल के पेड़ के पास नजर आई सफेद साड़ी में उसके बाल हवा में उड़ रहे थे और उसका खून से सना चेहरा भी भयानक लग रहा था ।
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⇒ वह धीरे – धीरे जमीन से ऊपर उठकर ऊपर उड़ने लगी। गिरधारी तांत्रिक ने ऊँची आवाज में मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया , उसने कहा राधा,,,, शांत हो जाओ … यह लड़का निर्दोष है। लेकिन उस आत्मा की चीखे और भी डरावनी हो गई। उसने कहा निर्दोष नही …. जिसने मुझे मरते समय नही बचाया वो सब दोषी हैं।
मोहन का असली चेहरा
⇒ अजय को अब धीरे – धीरे समझ आने लगा कि इस रास्ते में कुछ भयानक रहस्य छुपा हुआ है। तभी अचानक से किसी के दौड़ने की आवाज आई ….. अंधेरे में एक आदमी तेजी से उनकी ओर आता दिखाई दिया । बिजली चमकी,,, और अजय ने पहचान लिया ,,,, वह मोहन था।
⇒ मोहन का चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, और उसकी आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था , उसने हांफते हुए बोला ,,,, अजय भैया मैं आपको लेने आया था। यहाँ बहुत खतरा हैं। लेकिन गिरधारी तांत्रिक की नजर उसपे पड़ते ही उसकी आवाज बदल गई ।
⇒ गिरधारी ने गुस्से में बोला अब नाटक बंद कर मोहन ,,, सच सामने आ गया है । अजय हैरान होकर मोहन की तरफ देखने लगा । तभी तांत्रिक ने भारी आवाज में कहा ,,,,राधा का कातिल कोई और नही यही मोहन है। यह सुनते ही अजय के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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⇒ उसे याद आया कि यह मोहन हैं जिसने मुझे इस रास्ते से जाने को कहा था अजय समझ गया कि मोहन ने जानबूझकर उसे यहाँ भेजा ताकि राधा की आत्मा उसको मार डाले। मोहन की आँखों में अचनक पागलपन उतर आया।
⇒ वह चिल्लाकर बोला ….. हाँ मैंने ही राधा को मार डाला । क्योंकि वह मुझे सबके सामने छोड़कर जाने वाली थी। अगर वह जिंदा रहती तो मेरा राज खुल जाता । यह सुनते ही हवा में चीख गूंजने लगी राधा की आत्मा अचानक मोहन के सामने आ खड़ी हुई। उसका चेहरा अब पहले से भी ज्यादा खतरनाक लगने लगा था और उसके मुह से खून टपक रहा था ।

राधा की आत्मा का भयानक बदला
⇒ मोहन अब सचमुच डर गया था। वह पीछे हटने लगा लेकिन अचानक जमीन से पीपल के पेड़ की मोटी जड़े निकलकर उसके पैरों से लिपट गई। वह जोर – जोर से छूटने की कोशिश करने लगा लेकिन जड़े उसे कसकर पकड़ती चली गई ।
⇒ राधाा की आत्मा धीरे – धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी उसके पैर जमीन को छुए बिना ही तैर रहे थे उसकी भयानक हंसी की आवाज पूरे जंगल में गूंज रही थी । अजय और गिरधारी दोनों स्तब्ध खड़े थे। मोहन बहुत चिल्ला रहा था रो रहा था कि मुझे माफ कर दो मुझसे गलती हो गई लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।
⇒ राधा की आत्मा उसके बिल्कुल सामने आ गई थी और उसने अपने खून से सने हाथ मोहन की तरफ बढ़ा दिए। अगले ही पल जंगल में मोहन की ऐसी दर्दनाक चीख गूंजी कि अजय के कान सुन्न हो गए। ऐसा लग रहा था से कोई अदृश्य शक्ति उसकी शरीर को चीर रही है ।
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⇒ हवा में खून की गंध फाइल गई । और पेड़ों पर बैद पक्षी भी घबराकर उड़ गए । कुछ ही क्षणों बाद सब कुछ शांत हो गया मोहन जमीन पर निश्चल पड़ा था और उसकी आंखे डर से फटी रह गई थी राधा की आत्मा धीरे – धीरे पीछे हटने लगी और उसकी परछाई धुएं में बदलने लगी।
⇒ जाते – जाते उसकी डरावनी आवाज गूंजी- जिसने धोखा दिया …. उसका यही अंजाम होगा । और पीपल का रास्ता हमेशा दर्द की कहानी सुनाता रहेगा…।
राधा की आत्मा का असली रहस्य
⇒ मोहन की दर्दनाक चीखे जंगल में गुजने के बाद अचानक सब कुछ शांत हो गया। हवा रुक गई और पेड़ों की डालियाँ अब शांत हो गई और रात का सन्नाटा और भी भारी हो गया अजय अभी भी डर से कांप रहा था , उसकी आंखे उस जगह पर जमी थी जहाँ कुछ क्षण पहले मोंहन तड़प रहा था।
⇒ लेकिन अब वहाँ सिर्फ कीचड़ और टूटे पत्ते पड़े थे। ऐसा लग रहा था जैसे जमीन ने खुद मोहन को निगल लिया हो। तांत्रिक गिरधारी ने अपनी आंखे धीरे – धीरे बंद की और कुछ मंत्र बुदबुदाने लगा । फ़िर उन्होंने अजय की ओर देखा और बोले ,,, तुम समझते हो की राधाा का बदला पूरा हो गया…. लेकिन सच्चाई इससे कही ज्यादा भयानक है ।
⇒ अजय का दिल धक सा रह गया। उसने कांपती आवाज में पुछा क्या मतलब बाबा ? गिरधारी ने विशाल पेड़ की ओर इशारा किया । इस पेड़ के नीचे सिर्फ राधाा की हइ आत्मा नही रहती बल्कि और भी आत्माएं कैद हैं जिसकी मौत अन्याय से हुई थी। राधा का खून इस जमीन में गिरा और उसी दिन यह पीपल का पेड़ श्रापित हो गया।
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⇒ उन्होंने बताया कि राधा मरते समय इतनी पीड़ा में थी, कि उसकी चीख इस जंगल की मिट्टी में बस गई। उसकी आत्मा ने सिर्फ अपने कातिल को नही बल्कि उस हर इंसान को श्राप दिया जो उस रास्ते से गुजरते हुए उसकी मौत को भूल जाएगा । तभी से यह रास्ता भटकती आत्माओ का अड्डा बन गया।
⇒ अजय के शरीर में सिरहन दौड़ उठी। उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे , आसपास उसे अदृश्य रूप में सैकड़ों आत्माएं घूर रही है । अचानक हवा में धीरे – धीरे फुसफुसाहटें गूंजने लगी…. जसे कई आत्माएं एक साथ रो रही हो।
पीपल के पेड़ का भयानक श्राप
⇒ गिरधारी तांत्रिक ने अजय को चेतावनी दी कि यह पीपल का पेड़ साधारण पेड़ नही है । यह एक ऐसा द्वार बन चुका है, जहाँ जीवित और मृत दुनिया के बीच की सीमा कमजोर हो जाती है। आधी रात के बाद यहाँ की आत्माएं और भी शक्तिशाली हो जाती है।
⇒ तभी अचानक आसमान में तेज बिजली चमकी और उसी क्षण पीपल का पेड़ जोर से कांप उठा। उसकी मोटी शाखाओ से सूखे पत्ते झड़ने लगे और जमीन पर गिरते हइ अजीब सी अदृश्य शक्ति पेड़ के अंदर जाग गई हो।
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⇒ अजय ने डरकर पीछे कदम बढ़ाए लेकिन तभी उसे अपने पीछे किसी के चलने की आहट सुनाई दी। उसने पलटकर देखा …. पर वहाँ कोई नही था । फिर उसके कानों में साफ आवाज सुनाई दी। हम भी मुक्त होना चाहते हैं। अगले हइ पल मे अंधेरे में कई धुंधली परछाइयाँ दिखायी देने लगी।
⇒ वे इंसानो की तरह दिखती थी लेकिन उसके चेहरे विकृत थे और आँखों की जगह काले गद्दे थे । अजय का दिल जोर से धड़कने लगा। गिरधारी ने तुरंत जोर से मंत्र पढ़ना शुरू किया और अपने त्रिशूल को जमीन मे गाड़ दिया । उन्होंने कहा यह आत्माएं उस श्राप का हिस्सा है। और जब तक इस श्राप को खत्म नही किया जाएगा , यह रास्ता कभी सुरक्षित नही होगा।
भटकती आत्माओ का हमला
⇒ जैसे ही तांत्रिक के मंत्रों की आवाज तेज हुई, अंधेरे में मौजूद आत्माएं बेचैन होने लगी। उनकी चीखे हवा में गूंजने लगी । अचानक उनमे से एक परछाई तेज गति से अजय के ओर झपटी। अजय डर के मारे पीछे गिर गया ।
⇒ गिरधारी ने तुरंत अपने गले की माला उतारकर अजय की ओर फेंकी। माला जमीन पर गिर गई चारों तरफ उसकी चमक फैल गई। और वह आत्मा अजय से कुछ कदम पहले ही रुक गई। उसकी भयानकचीख पूरे जंगल में गूंज उठी।
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⇒ तभी अचानक कई और आत्माएं चारों ओर से अजय की तरफ बढ़ने लगी । उनकी फुसफुसाहटे अब स्पष्ट शब्दों में बदल चुकी थी ….. हमे भी न्याय चाहिए हमें भी शांति चाहिए । गिरधारी ने आंखे बंद करके जोर से मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया । अचानक पीपल के पेड़ के तने से काले धुएं की लपटे निकलने लगी।
⇒ उस धुएं में राधा की आकृति फिर से दिखाई दे रही थी । राधा की आत्मा ने एक भयानक चीख लगायी और बाकी आत्माएं तुरंत पचे हट गयी । उसकी आवाज गूंज उठी – आज के बाद कोई निर्दोष इस रास्ते पर नही मरेगा …. लेकिन यह श्राप हमेशा इस पेड़ मे कैद रहेगा…।
अजय के साथ आखिरी भयानक घटना
⇒ अचानक तेज हवा का एक भयानक झोंका आया और पूरे जंगल मे धूल उड़ने लगी। जब अजय ने अपनी आंखे खोली तो उसने देखा कि पीपल के पेड़ का तना काला पड़ गया था और उसकी छाल पर खून से लिखे हुए कुछ शब्द दिखाई दे रहे थे ।
⇒ गिरधारी तांत्रिक ने धीरे से कहा, राधा ने अपने श्राप को इस पेड़ में बाँध दिया है… लेकिन अगर कोई इंसान लालच या घमंड में आकर इस रास्ते को फिर से चुनौती देगा तो यह श्राप दोबारा जाग जाएगा। अजय ने आखिरी बार उस पेड़ की ओर देखा।
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⇒ उसे ऐसा लगा जैसे पेड़ की शाखाओ के बीच से राधा की धुंधली आकृति उसे देख रही हो। उसकी आंखे नही थी… लेकिन फिर भी अजय को महसूस हुआ कि वह घूर रही है । अगले ही पल अजय को ऐसा लगा जैसे कोई उसके कान में धीरे से फुसफुसाया – याद रखना इस रास्ते की कहानी कभी खत्म नही होगी।
⇒ उसी क्षण बिजली जोर से चमकी और पूरा जंगल एक पल के लिए उजाले में डूब गया । जब अजय ने फिर आंखे खोली तो वहाँ न तांत्रिक था…. न आत्माएं सिर्फ वह श्रापित पीपल का पेड़ खड़ा था …. और उसकी शाखाये हवा मे ऐसे हिल रही थी जैसे अब भी किसी की दर्दनाक चीखे उनमे कैद हो।