छलावे का जंगल – Horror Story In Hindi
⇒ रात का समय था बदल ऐसे मंडरा रहे थे , मानो जैसे किसी अनहोनी का संकेत दे रहे हों हवा मे एक अजीब सी सिसकियाँ थी और दूर कही से कुत्ते की भौकने की आवाज बार – बार सुनने में आ रही थी । अमन और रवि शहर के एक लड़के थे ।
⇒ उनके कॉलेज का एक दोस्त दीपक नाम का उन लोगों को बार – बार अपने गाँव आने के लिए कह रहा था उसने गाँव की खूबसूरती , वहाँ की शांति और अपने पुराने घर की बाते इतने प्यार से बताई थी कि दोनों दोस्त उसके खुद को रोक नही पा रहे थे।
⇒ बस गाँव के पास एक छोटा सा जंगल पड़ता था … लेकिन तुम लोग डरना मत दीपक ने हँसते हुए कहा । दोनों भी हंस पड़े। और उन्हे इस बात की जरा सी भी खबर नही थी कि उनका इस जंगल में आना क्या हो सकता है ।
⇒ उन्हे क्या पता था कि उनकी जिंदगी का सबसे खौफनाक सच बन जाएगा । गाँव की ओर यात्रा शाम हो चुकी थी और बस उन लोगों को एक कच्ची सड़क पर उतार कर चली गई थी चारों तरफ सन्नाटा था और जब उन लोगों ने अपना – अपना मोबाईल निकाला तो उसमे नेटवर्क ही नही था ।
⇒ यार … दीपक ने कहा था बस स्टैंड से सीधा रास्ता है , अमन बोला,। रवि ने चारों तरफ देखा – सामने एक काला , घना जंगल खड़ा था …. ऐसा लग रहा था जैसे कोई एक विशाल दानव अपना मुह खोले खड़ा हो।
⇒ शायद इसी से होकर जाना हो.।। हवा की झोंके के साथ पेड़ों की टहनियाँ हिलने लगी और ऐसा लगा जैसे कोई उन लोगों फुसफुसाकर नाम ले रहा हो। अमन सउन किसी ने बुलाया क्या ?
⇒ पागल है, क्या चल जल्दी दोनों ने कदम जंगल की ओर बढ़ा तो दिया लेकिन उन लोगों को इस बात की खबर नही थी की आगे उनके साथ क्या होने वाला है, जंगल में घुसते ही तापमान अचानक से ठंडा हो गया पत्तों पर चलते ही ऐसा लग रहा था ,मानो जैसे किसी की हड्डियाँ टूट रही हो ।
⇒ अचानक ….. पीछे से पायल की आवाज आई । छन… छन… छन…. दोनों पलटें ,,
⇒ एक औरत सफेद साड़ी मे खड़ी थी …. उसके लंबे – लंबे बाल चेहरे पर लटक रहे थे । भैया …रास्ता भूल गए क्या ? उसने एकदम धीमी आवाज में कहा ।
⇒ दीपक ने राहत की सांस ली हाँ दीदी ….. दीपक के घर जाना था । औरत ने उंगली से आगे का रास्ता दिखाया । यहाँ से सीधे चले जाओ लेकिन ….. पीछे मूड कर मत देखना दोनों लोग अब आगे बढ़ते हैं ……।
⇒ लेकिन मन को कौन शांत कर सकता हैं, आखिर कर अमन ने पीछे मूड कर देख ही लिया,,,,, वहाँ कोई नही था सिर्फ एक पेड़ था । लेकिन तभी उसकी नजर पड़ती है पेड़ों की टहनियों से लटकती एक सड़ा हुआ सिर जो उन लोगों को घूर रहा था ।
⇒ अमन चीख पड़ा …। छलावे का खेल था अब हर तरफ अजीब चीजे होने लगी थी,, कभी उन्हे लगता कोई बच्चा रो रहा है, कभी दीपक की आवाज सुने देती – अरे इधर आओ …. “
⇒ एक बार उन्हे अपनी ह शक्ल सामने खड़ी मुसकुराती दिखी । रवि घबरा कर बोला ये जंगल हमारे लिए ठीक नही है यहाँ कोई तो है जो हमे भटका रहा हैं। तभी सामने दीपक दिखाई देता है ।
⇒ अरे यार तुम लोग यहाँ हो …. मैं कब से ढूंढ रहा था दोनों उसकी ओर दौड़े । लेकिन अमन अचानक रुक गया । दीपक तेरे पैर उलटे क्यों हैं ? दीपक का चेहरा फट गया … और फिर उसी सफेद साड़ी वाली औरत का चेहरा सामने आ गया ।
⇒ उसकी आंखे पूरी काली थी … मुंह ,कान तक फटा था तुम लोग मेरे जंगल मे आ गए वह हवा में उछली और गायब हो गई वहाँ से । डर के मारे अब दोनों की हालत खराब हो चुकी थी और दोनों भागने लगे बिना किसी दिशा के ।
⇒ पेड़ों के पीछे से हाथ निकालके उन्हे पकड़ने की कोशिश करते किसी की हंसी गूँजती , कभी बूढ़ी औरत … और कभी छोटी लड़की…. तो कभी उनकी माँ का रूप ले लेती । अमन वो देख अमन का घर दूर टिमटिमाता दिया दिखाई दिया ।
⇒ दोनों भागते हुए वहाँ पहुंचे । सच का खुलासा दरवाजा खटखटाया । दीपक ने दरवाजा खोला … इस बार सच में । अरे ! तुम लोग इतने ज्यादा डरे हुए क्यों हो ? घर के अंदर गाँव के लोग बैठे हुए थे एक बूढ़ा आदमी बोला …. तुम लोग उस जंगल से होकर आए हो ? दोनों ने हाँ मे सिर हिलाया ।
⇒ बूढ़ा आदमी काँपते हुए बोला .. वहाँ एक डायन रहती है , जो किसी का भी रूप ले सकती है। जिसे वो पकड़ लेती है वो उसी के साथ रहता है….. जब तक नए लोग ना आ जाए । अमन और रवि के होश उड़ गए । लेकिन हम तो बचकर आ गए । तभी दीपक की माँ पानी लेकर आई ।
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⇒ अमन ने गिलास गिलास लिया और तभी अचानक उसकी नजर रवि पर गयी रवि की परछाई नही थी र…. रवि तेरी परछाई नही नजर आ रही है ?
⇒ सभी की नजर रवि पर गई और फिर रवि धीरे – धीरे मुस्कुराने लगा । उसकी आंखे काली हो गई…. मुंह फट गया मैं तो तुम्हारे साथ ही थी ,,,, जंगल से … वह डायन थी। जिंदगी की सबसे खतरनाक रात घर मे चीख गूंज उठी ।
⇒ डायन हवा में उड़ गई और छत से उलटी होकर लटक गई। दीपक का पिता बोला इससे बचने का सिर्फ एक ही तरीका है,,,,, इसे आग मे बांधों …. वरना ये सबको मार देगी …।
⇒ अमन रोते हुए बोला – कैसे ? बूढ़े आदमी ने उसे एक लोहे की कील और लाल धागा दिया । इसके असली रूप की छाया जहाँ कही पड़े वही इस कील को ठोक देना …। डायन हर समय अपना रूप बदल रही थी ।
⇒ कभी रवि , कभी दीपक तो कभी दीपक की माँ अमन रोने लगा…. मैं कैसे पहचानू …… तभी उसे याद आया जंगल में वह हमेशा उल्टा चलती थी उसने देखा एक कोने मे खड़ी दीपक की माँ उनके पैर उल्टे थे अमन दौड़ा और कील जमीन मे ठोक दी …..।
⇒ और डायन जोर से चीखने लगी। उसका शरीर आग मे बदलने लगा । तुम बच नही पाओगे … मैं वापस आऊँगी … और फिर वह राख बन गई । अंत या शुरुआत
⇒ सुबह हुई। जंगल शांत था और अमन अकेला बैठा था दीपक ने पूछा रवि कहा हैं ? अमन ने रोते हुए सब बताया सब कुछ खत्म हो चुका था अमन गाँव छोड़कर शहर वापस आ गया ।
⇒ लेकिन एक रात उसने शीशे में देखा तो उसकी परछाई नही थी पीछे से वही पायल की आवाज आने लगी और वही आवाज और मै तो तुम्हारे साथ ही आई थी .. …. दरअसल अभी तक अमन का डर खत्म नही हुआ था ,।