
» एक बार की बात किसी जंगल मे एक बड़ा सा पेड़ था । उस पेड़ पे प्रतिदिन बहुत से पक्षी आकर विश्राम करते थे । एक दिन एक बहेलिये ने पक्षी पकड़ने की इच्छा से वहाँ चावल के दाने फैल लिए। और उसके ऊपर जाल बिछा दिया। और स्वयं एक पेड़ कए पीछे छिपकर बैठ गया। कुछ समय बाद उस पेड़ पर एक कबूतरों का झुंड आकर विश्राम करने लगा । तभी उनकी नजर चावलों के दाने पर पड़ी।
» दाने देखकर उनकी भूख जग उठी और वह दाने चुगने कए लिए जाने लगे । तब उनके मुखिया कबूतर ने उन्हे समझाया की उसे इन दाने कए पीछे कुछ गड़बड़ लग रही है, इसलिए उन्हे यह दाने चुगने चाहिए । पर कबूतरों ने अपने मुखिया की बात नही सुनी , और दाने चुगने के लिए चले गए। तभी अचानक सारे कबूतरों जाल मे फंस गए।
» अपने मुखिया की बात ना मानते तथा लालच करने की सजा मिल गई। उनके मुखिया ने उन्हे एक दिशा मे उड़ने के लिए कहा। सब कबूतर जाल के साथ एक ही दिशा में उड़ने और बहलिया देखता ही रह गया। सब कबूतर अपने मुखिया कए दोस्त चूहे के घर जा पहुँचे ।
» चूहे ने अपने पैने दांतों से जाल काट कर कबूतरों को मुक्त कर दिया। कबूतरों ने अपने प्राण बचने वाले नन्हे चूहे को बहुत – बहुत धन्यवाद दिया और सब कबूतर नीले आसमान में फिर उड गए । इस तरह हमे पता चलता है , की हम एकभी लालच नही करना चाहिए , अन्यथा हम भी कबूतरों की तरह संकट मे फंस सकते है। साथ ही हमे यह भी शिक्षा मिलती है की , एकता में ही शक्ति है।