चार पत्नियों की कहानी – Mahatma Buddha Stories । Buddha Story In Hindi । Hindi Kahani ।

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चार पत्नियों की कहानी – Mahatma Buddha Stories

एक समय की बात है एक शहर में बहुत समृद्ध धनी व्यापारी रहता था। उसके पास धन दौलत की कोई कमी नही । बड़े से बड़े सोना – चांदी हीरे नौकर – चाकर सारी सुविधाये उसके पास मौजूद थी उस व्यापारी की चार पत्नियाँ थी , और सबसे अधिक प्रेम अपने चौथी पत्नी से करता था ।

उसे सबसे अच्छे कपड़े पहनता , गहने दिलवाता उसे सुंदर स्त्री की तरह उसकी हर चीज की पूर्ति करवाता । व्यापारी की तीसरी पत्नी भी बहुत सुंदर थी उसे लेकर वह दूसरे नगरों में जाता और लोगों को दिखाता की उसकी पत्नी कितनी सुंदर है। लेकिन उसे एक बात का डर था कि कहीं उसकी यह पत्नी उसको छोड़ कर किसी और के आपस ना चली जाए।

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इसलिए वह हमेशा उसे खुश रखने की कोशिश करता । उसकी दूसरी पत्नी  बहुत समझदार और धैर्यवान थी। जब भी व्यापारी किसी परेशानी में पड़ता , तो वह उसी के पास जाता और उससे सलाह लेता। वह हर कठिन समय में उसका साथ देती  और सही रास्ता दिखती।

व्यापारी जानता था कि उसकी ये  पत्नी उसका हमेशा साथ देगी उसकी पहली पत्नी बहुत वफादार थी । वह चुपचाप घर की देखभाल करता , परिवार का ध्यान रखती और व्यापारी के हर काम में सहयोग कर रह थी लेकिन व्यापारी उसको कभी ज्यादा  महत्व नहीं देता

वह अक्सर उसको नज़रअंदाज़ करता , और उसके प्रेम को समझ नही पाता था। समय बीतता गया । एक दिन व्यापारी जंभीर रूप से बीमार पड़ गया । उसके शरीर की ताकत धीरे – धीरे खत्म होने लगी। कि अब उसे इस संसार को छोड़कर जाना पड़ेगा।

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उसने अपनी चौथी पत्नी को बुलाया और कहने लगा ,,,, – मैंने तुम्हें हमेशा सबसे ज्यादा प्यार किया है। तुम्हें सबसे अच्छे कपड़े और गहने दीये है। अब जब मैं इस दुनिया से जा रहा हूँ , क्या तुम मेरे साथ चलोगी ?

चौथी पत्नी ने तुरंत जवाब दिया नहीं मैं तुम्हारे साथ नही चलूँगी । इतना कहकर वो वहाँ से चली गई व्यापारी को यह सब सुनकर बहुत तकलीफ हुई । जिसे वो सबसे अधिक प्रेम करता था वही उसे छोड़कर चली गई।

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फिर उसने तीसरी पत्नी को बुलाया उसेन कहा  – मैंने तुमको हमेशा गर्व से सबसे मिलवाया तुम्हारी सुंदरता की बहुत प्रशंसा की …। अब जब मैं मरने वाला हूँ क्या तुम मेरे साथ चलोगी ? तीसरी पत्नी  ने कहा – नही मैं तुम्हारे साथ नही जाऊँगी ,,, जब तुम मर जाओगे तो मै किसी और से शादी लूँगी । यह सुनकर व्यापारी का दिल टूट गया ।

अब उसने अपनी दूसरी पत्नी को बुलाया – उसने कहा – जब भी मुझे परेशानी हुई तब तक तुम्हें मैंने मदद लिया तुमने हमेशा मेरा साथ दिया। अब जब मैं इस दुनिया से जा रहा हूँ , क्या तुम मेरे साथ चलोगी ? दूसरी पत्नी ने शांत स्वर में कहा,,, मै तुम्हारे साथ तो नही चल सकती लेकिन मैं तुम्हें शमशान तक जरूर छोड़ने आऊँगी ।

तभी एक धीमी सी आवाज आई  कि , मैं आपके साथ चलूँगी व्यापारी ने देखा कि उसकी पहली पत्नी थी । वह कमजोर और साधारण दिख रही थी , क्योंकि व्यापारी ने कभी उसकी देखभाल नही की। व्यापारी को बहुत पछतावा हुआ । उसने कहा – काश मैंने तुम्हारा भी उतना ही ध्यान रखा होता जितना बाकी पत्नियों का रखा।

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उसी समय महात्मा बुद्ध वहाँ पहुंचे । उन्होंने इस घटना को  देखकर लोगों को एक गहरा सत्य समझाया । उन्होंने कहा-  यह चार पत्नियाँ वास्तव में मनुष्य के जीवन के चार सत्य का प्रतीक हैं। बुद्ध ने समझाया – चौथी पत्नी हमारा शरीर है। हम उसे सजाने – सँवारने में बहुत समय  लगते हैं ।

लेकिन मृत्यु के समय वह हमारा साथ नही देता है। तीसरी पत्नी हमारा धन और संपत्ति है। हम उस पर बहुत गर्व करते हैं, लेकिन मरने के बाद वह किसी और के पास चली जाति है। दूसरी पत्नी हमेशा हमारे मित्र और रिश्तेदार हैं।

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वे हमारे जीवन में साथ देते हैं। लेकिन मृत्यु के बाद वे केवल शमशान तक ही छोड़ सकती है। पहली पत्नी हमारी आत्मा है । हम जीवन भर उसे भूल जाते हैं , लेकिन अंत में वही साथ जाती  है । यह सुनकर वहाँ बैठे सब लोग विचार में पड़ गए ।

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उन लोगों को समझ आ गया कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आत्मा और अच्छे कर्म हैं, न कि धन और बाहरी चीजें। उस दिन के सब लोग अपने जीवन को बदलने का निश्चय कर लिया। कि शरीर , धन और संबंध सब अस्थायी है , लेकिन आत्मा और कर्म ही सच्चे साथी हैं।

सीख : मनुष्य को अपने शरीर और धन से ज्यादा अपनी आत्मा और अच्छे कर्मों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अंत में वही उसके साथ जाते है।

Author: Hindi Rama

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