मिट्टी का दीपक और अहंकार – Mahatma Buddha Story In Hindi । Moral Stories । Hindi Stories ।

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मिट्टी का दीपक और अहंकार – Mahatma Buddha Story In Hindi

शाम का समय था। कपिलवस्तु के पास बसे एक छोटे से गाँव में हल्की ठंडी हवा चल रही थी। आकाश में सूरज ढल रहा था और उसकी लालिमा पूरे गाँव  को सुनहरे रंग में रंग रही थी । गाँव के लोग अपने – अपने काम से लौट रहे थे उसी समय गाँव के चौक में एक छोटा सा दीपक जलाया गया था।

  उस दीपक की रोशनी से धीरे – धीरे अंधेरा खत्म होने लगा ,, गाँव के बच्चे उसे कौतूहल से देख रहे थे, और बुजुर्ग उसके पास बैठ कर बाते कर रहे थे । उस दीपक की छोटी सी लौ पूरे चौक को रोशन कर रही थी।  उस समय महात्मा बुद्ध अपने कुछ भिक्षुओ के साथ उसी गाँव में आए हुए थे।

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  वह एक पेड़ के नीचे बैठ कर ध्यान लगा रहे थे गाँव के सभी लोग धीरे – धीरे इकट्ठा हो रहे  थे उनके उपदेश को सुनने के लिए । उसी चौक पर रखा दीपक भी उनकी सभा के बीच जल रही थी। दीपक की लौ स्थिर थी और  उसकी रोशनी सबके चेहरे पर पड़ रही थी।

गाँव में एक युवक रहता था,  जिसका नाम सोमिल था । वह बहुत ही घमंडी स्वभाव का और उसको अपनी सुंदरता , अपने धन पे बहुत गर्व था। वह हमेशा सबको नीचा दिखाता और खुद को सबसे श्रेष्ट समझता था। जब उसको पता चला  कि गाँव में महात्मा बुद्ध आए हैं तो वो भी उस जगह गया उनको देखने ।

  लेकिन उसके मन में श्रद्धा से ज्यादा जिज्ञासा और अहंकार भरा हुआ था । सोमिल ने देखा कि सबके बीच  एक मिट्टी का छोटा सा दीपक जल रहा है, वह हँसते हुए बोला कि इतने बड़े सभा के बीच यह छोटा सा मिट्टी का दीपक क्यू रखा है। क्या यह सच में कोई महत्व रखता है ?

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  उसकी बात में उपहास था कई लोग उसकी बात सुनकर चुप बैठ गए । महात्मा बुद्ध ने उसकी ओर शांत दृष्टि से देखा । उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। उन्होंने कुछ नही कहा और सभा में उपस्थित लोगों को जीवन के बारे में समझाने लगे।

  वे कहे कि — मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अहंकार होता है । अहंकार मनुष्य की बुद्धि को अंधा बना देता है सोमिल को यह बात अच्छी नही लगी। उसे लगा कि यह उपदेश शायद उसी के लिए कहा गया है । वह आगे बढ़कर बोला – भगवान , अगर मनुष्य में शक्ति और धन है तो उसे गर्व क्यों न हो ? क्या यह गलत है ?

  बुद्ध ने पास रखे उस मिट्टी के दीपक की ओर इशारा किया और बोले –  इस दीपक को ध्यान से देखो। सोमिल ने दीपक की ओर देखा । वह साधारण मिट्टी से बना था और उसमे तेल और बाती जल रही थी। बुद्ध बोले – यह दीपक बहुत साधारण है।

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  मिट्टी से बना है, और बहुत छोटा दीपक है । लेकिन जब अंधेरा जब अंधेरा होता है तो यही दीपक सबको रोशनी देता है । यह अपनी रोशनी का अहंकार नही करता , बल्कि चुपचाप अपना कर्तव्य निभाता है। सभा में बैठे लोग ध्यान से उनकी बात सुन रहे थे। बुद्ध ने आगे कहा – अगर यह दीपक यह सोचने लगे कि मैं ही सबसे बड़ा हूँ और बाकी सब व्यर्थ हैं, तो इसकी रोशनी भी व्यर्थ जाएगी।

  लेकिन यह ऐसा नही करता है यह बस जलता और अंधकार को दूर करता है। सोमिल कुछ क्षण के लिए चुप हो गए। लेकिन उसका अहंकार अभी भी वैसा ही बना रहा। उसने कहा – लेकिन , यह दीपक तो मिट्टी का बना है । यह तो बहुत साधारण है। इसमे क्या महानता है ?

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  बुद्ध मुस्कुराये और बोले – महानता किसी के बाहरी रूप में नही होती । महानता उसके कार्य और स्वभाव में होती है। यह मिट्टी का दीपक छोटा है, लेकिन इसकी रोशनी अंधकार को मिटा देती है। वही व्यक्ति महान होता है जो दूसरों के जीवन में प्रकाश लाए।

  उसी समय तेज हवा का झोंका आया और दीपक कि लौ थोड़ी कापने लगी। सब लोग कुछ क्षण के लिए चिंतित हो गए कि कहीं दीपक बुझ न जाए। लेकिन थोड़ी देर बाद लौ फिर से स्थिर होने लगी। बुद्ध उस दृश्य की ओर इशारा करते हुए कहा – देखो, कठिन परिस्थितियां में भी यह दीपक अपनी रोशनी बनाए रखने की कोशिश करता है।

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  यही सच्ची शक्ति है। जो व्यक्ति कठिनयियों में भी अपने कर्तव्य को नही छोड़ता, वही सच्चा महान होता है। सोमिल के मन मे धीरे – धीरे परिवर्तन होने लगा। उसे महसूस हुआ की उसका अहंकार उसे सच्चाई से दूर कर रहा था वह सोचने लगा की अगर एक साधारण मिट्टी का दीपक बिना गर्व के इतना काम कर सकता है तो मनुष्य को भी विनम्र होना चाहिए।

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  सभा समाप्त होने के बाद सोमिल धीरे – धीरे बुद्ध के पास आया । उसकी आँखों में अब पहले जैसा घमंड नही था । उसने सिर झुककर कहा – भगवन ,,, आज मैंने समझ लिया, कि मेरा अहंकार हइ मेरे दुखों का कारण है। कृपया मुझे सही मार्ग दिखाईए।

  बुद्ध ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा- जब मनुष्य अपने अहंकार को पहचान लेता है तभी उसके अंदर सच्चा ज्ञान जन्म लेता है । उस दिन के बाद सोमिल का जीवन बदल गया। उसने दूसरों की मदद करना शुरू किया और विनम्रता को अपनाया। गाँव के लोग उसके इस परिवर्तन को देखकर आश्चर्य चकित थे।

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  रात के समय वही मिट्टी का दीपक फिर से जलाया गया। उसकी रोशनी शांत थी और स्थिर थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह केवल अंधकार ही नही, बल्कि मनुष्य के अहंकार को भी दूर करने का संदेश दे रहा है ।

सीख : अहंकार मनुष्य को अंधा बना देता है , जबकि विनम्रता उसे सच्चे ज्ञान की ओर ले जाती है। जो व्यक्ति दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाता है, वही वास्तव में महान होता है।

Author: Hindi Rama

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