गरीबदास की सच्ची दौलत – Motivational Story In Hindi
⇒ एक छोटे से गाँव मे गरीबदास नाम का एक किसान रहता था। उसका नाम ही जैसे उसकी किस्मत बन गई घर में पत्नी थी, तीन छोटे- छोटे बच्चे और एक गाय – जो उनके जीवन का सहारा थी। मिट्टी मे टूटी दीवारो वाला घर , छप्पर से टपकती बुँदे, और चूल्हे मे कभी धुआँ , कभी सन्नाटा – यही उनका संसार था।
⇒ गरीबी इतनी थी कि कई बार बच्चों को आधा पेट खाकर सोना पड़ता था। फिर भी गरीबदास का दिल अमीर था। वह रोज सुबह उठकर घर के बाहर कबूतरों को दाना डालता । और तालाब पर जाकर मछलियों को गीला आता खिलाता ।
⇒ जो भी बिखारी उसके दरवाजे पर आता , उसे बिना कुछ दिए वापस नही जाने देता। उसकी पत्नी कई बार चुपचाप देखती और आह भरती। एक दिन उसने दुखी होकर कहा, ″सुनो जी, हम कब तक यूँ ही दूसरों के पेट भरते रहेंगे ?
⇒ हमारे अपने बच्चे बड़े हो रहे हैं । उनके कपड़े नही, पढ़ाई का खर्च नही। क्या दान से ही घर चलेगा ?″ गरीबदास चुप हो गया । उसके पास उस समय कोई जवाब नही था। वह जानता था कि उसकी पत्नी गलत नही कह रही ।
⇒ मगर उसका मन किसी भूखे को खाली हाथ लौटाने को तैयार नही होता था। उनकी गाय ही उनकी सबसे बड़ी संपत्ति थी। उसी के दूध से बच्चा का भरता और थोड़ा – बहुत बेचकर घर चलता। गरीबदास रोज सुबह गाय को जंगल मे चराने ले जाता और फिर दोपहर बाद मे मजदूरी करने निकल जाता।
⇒ वह अनपढ़ था, इसलिए काम भी मुश्किल से मिलता । ऊपर से गाँव वाले उसे उसकी जाति के कारण तिरस्कार की नजर से देखते । कोई अपने घर के अंदर बुलाना तो बहुत दूर की बात, पानी तक नही पूछता।
⇒ एक दिन अनहोनी हो गई, जब गरीबदास शाम को जंगल से लौटने लगा , तो उसकी गाय कहीं नजर नही आयी । उसने हर तरफ ढूँढा , आवाज लगाई, पेड़ों के पीछे देखा , नाले के पास गया – पर गाय का कोई पता नही चला।
⇒ उस रात घर मे चूल्हा तक नही जला। बच्चे सारे रोते रहे रात भर । पत्नी की आँखों मे आँसू थे। गरीबदास की आत्मा मानो जैसे टूट गई , अगले कुछ दिनों तक उसने गाँव – गाँव , जंगल – जंगल ढूँढा। उधार लेकर घर चलाया , पर काम भी कम मिलने लगा।
⇒ लोग ताने मारते – “दान करते – करते भगवान ने सब ले लिया ।” अब वह हर रात भगवान के सामने बैठ जाता और कहता, “हे प्रभु , या तो मुझे काम दे दो , या मेरी गाय लौटा दो । मेरे बच्चों पर दया करो प्रभु !
⇒ एक दिन बहुत ही परेशान हो गया और बिना कुछ सोचे समझे वो जंगल की ओर निकल पड़ा । जंगल मए सन्नाटा था, अजीब आवाजें आ रही थी। काँटों की वजह से उसके पैर पूरी तरह लहूलुहान हो गया , लेकिन वह रुका नही चलता ही गया।
⇒ चलते – चलते उसे एक पुरानी गुफ़ा दिखाई देती है , भीतर के अंदर सेकुछ अजीब सी आवाजें आई , मानो जैसे कोई पुकार रहा हो ….. “आओ अंदर आओ … और खजाना लेके जाओ ।”
⇒ गरीबदास बहुत ज्यादा ही चौक गया , उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। उसने सोचा – शायद यह उसका भ्रम है, लेकिन आवाज फिर से आई – डरो मत ,,, अंदर आओ !
⇒ वह सावधानी से भीतर गया , गुफ़ा के अंदर सोना – चांदी का ढेर लगा हुआ था , हीरे – जवाहरात चमक रहे थे । और बीच मे एक बूढ़ा व्यक्ति शाही वस्त्रों मे बंधा हुआ वही बैठा था। उसकी आँखों मे बहुत दर्द था उसने बोला , मै एक राजा हूँ।
⇒ वर्षों पहले मुझे एक गुफ़ा का श्राप मिला था , यह खजाना मेरी परीक्षा थी मैंने लालच किया और इस गुफ़ा मे कैद हो गया। अब मैं तभी मुक्त हो सकता हूँ जब कोई सच्चे दिल वाला इंसान यहाँ आए , जो खजाने को केवल जरूरत भर ले और बाकी को ना छूए ।
⇒ गरीबदास के सामने चमकता सोना था । उसके बच्चे भूख से तड़प रहे थे और उसके बच्चों का भविष्य , उसकी गरीबी , उसका अपमान – सब उसकी आँखों के सामने घूमने लगा । वो अगर चाहता तो सब कुछ ले सकता था । कोई देखने वाला बह नही था।
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⇒ लेकिन उसने सिर झुका लिया और बोला महाराज मुझे सिर्फ अपनी गाय चाहिए , अगर यह खजाना सच मे है तो मुझे बस इतना दीजिए ताकि मै अपना कर्ज चुका सकु और बच्चों को पढ़ा सकु बाकी सब आपका है ।
⇒ राजा की आँखों मे आश्चर्य चमक उठी , गुफ़ा की दीवारे मानो जैसे कांपने लगी हो । अचानक एक तेज प्रकाश फैला राजा के बंधन टूट गए , वह खड़ा हो गया और अब वह बूढ़ा आदमी नही बल्कि , एक तेजस्वी और युवा दिख रहा था ।
⇒ तुमहरी नियत साफ है गरीबदास , राजा ने कहा । तुमने लालच नही किया यही सच्ची दौलत है । तभी गुफ़ा के कोने से उसकी गाय बाहर आ गई सुरक्षित और स्वस्थ्य । गरीबदास की आँखों से आँसू बह निकले , उसने अपनी गाय को गले लगा लिया ।
⇒ राजा ने कहा यह खजाना अब से तुम्हारा है , लेकिन याद रखना धन तभी फलता है, जब उसका उपयोग सही जगह हो । गरीबदास ने फिर भी उतना ही लिया जितना उसको चाहिए था ताकि वह अपने बच्चों और पत्नी की जरूरतों को पूरा कर स के ।
⇒ बाकी खजाना वही छोड़ गया गुफ़ा से बाहर निकलते ही वह गुफ़ा गायब हो गई । गाँव लौटकर उसने कर्ज चुकाया । बच्चों को स्कूल भेजा। घर की मरम्मत करवाई । लेकिन उसने दान देना नही छोड़ा । अबवह और भी अधिक लोगों की मदद करने लगा – पर समझदारी से ।
⇒ गाँव वालों का नजरिया भी बदल गया जो लोग उसे तिरस्कार से देखते थे, वही अब सम्मान से बुलाते है, लेकिन गरीबदास का स्वभाव नही बदला । वह अभी भी सुबह कबूतरों को दाना डालता , तालाब मे मछलियों को आटा खिलाता ।
⇒ एक दिन उसकी पत्नी ने मुसकुराते हुए कहा , सच मे सबसे बड़ा खजाना तो आपका दिल है । गरीबदास ने आसमान की ओर देखा और कहा , भगवान ने मुझे सीखा दिया की सच्ची अमीरी धन मे नही नियत मे होती है ।
⇒ उसके बच्चों ने पढ़ – लिखकर एक अच्छा जीवन पाया , और गाँव मे लोग आज भी कहते हैं ,,, जिसका दिल साफ हो तो उसके लिए एक ना एक दिन किस्मत की गुफ़ा जरूर खुलती है जो उसके पूरे जीवन को बदल कर रख देती है।