भैरवपुर का अंतिम सत्य – Murder Mystery
⇒ सन् 1978 कि सर्दियों का मौसम था। धुंध इतनी ज्यादा होती कि सुबह और रात का फर्क ही मिट जाता था। उत्तर भारत के एक भूले – विसरे इलाके में बसा एक गाँव भैरवपुर नाम का , उन दिनों दहशत की स्थिति में था ।
⇒ खेतों में खड़ी सरसों की फसल जरूर थी पर , गाँव के लोग बहुत ज्यादा परेशान हो गए है। पिछले तीन महीने सात हत्याएं हो चुकी थी और सब मौत रात के तीसरी पहर मे होती थी । हर लाश गाँव की सीमा के भीतर मिलती । और सबसे बड़ी बात यह है, कि हर लाश की आंखे खुली होती , जैसे डर के मारे फटी होती है ।
⇒ गाँवमें यह बात फाइल चुकी थी की कोई अदृश्य शक्ति घूम रही है थानेदार रघुवीर सिंह ने जिला अधिकारी को तार भेजा – स्थिति नियंत्रण से बाहर है, विशेष जांच अधिकारी की जरूरत है।
⇒ तीन दिन बाद दिल्ली से एक जीप गाँव मे पहुंची । उस जीप से उतरा जासूस अभिमन्यु राठोर था। लंबा कद , सख्त चेहरा , कंधे पर चमड़े का बैग और आँखों में ऐसा ठंडा आत्मविश्वास जैसे वह हर रहस्य को पहले ही पढ़ चुका हो।
⇒ गाँव वालों की भीड़ उसे देख रही थी और उस भीड़ में बहुत से उसके बारे में चर्चा करने लगे कि यही है दिल्ली वाला ,,,,। अभिमन्यु ने सबसे पहले हत्या वाली जगह देखी । हर जगह मिट्टी पर एक जैसा निशान बना हुआ था। गोल घेरा और उसके बीच तीन सीधी रेखाए।
⇒ यह किसी पंथ का चिन्ह नही यह एक प्रकार का संदेश है,,,,,,, उसने बुदबुदाया । पहली रात में वह चौपाल में रुका और रात में उसको ऐसा लगा कि जैसे खड़कई के पास कोई खड़ा है। टॉर्च जलायी कोई नही था पर नीचे जमीन पर गीले पैरों की निशान थे ,,,,,। जो बाहर की ओर जा रहे थे ।
⇒ वह उन निशानों का पीछा करते हुए गाँव के एक पुराने कुएं के पास पहुं चा ,,, कुएं से ठंडी हवा आ रही थी और बाहर से जैसे किसी के कराहने की आवाज सुनाई दे रही थी । अगले दिन उसने गाँव के लोगों से पूछताछ की सबकी बातें अलग थी पर डर एक जैसा ।
⇒ एक नाम बार – बार सामने आता भैरव सिंह । गाँव के जमींदार । उसकी हवेली गाँव से थोड़ी दूर पर ही थी । लोग कहते हाँ कि वह रात को जागता है और दिन में सोता है । जब अभिमन्यु हवेली पहुँचा तो जमींदार बाहर दरवाजे पर ही मिल गया । उसकी आंखे लाल थी ।
⇒ दिल्ली से आए हो …? यहाँ सच नही मिलता सिर्फ कहानियाँ मिलती हैं। हवेली के अंदर एक अजीब सि गंध थी कहीं अगरबत्ती की तो कुछ सड़ी चीजों की मिली जुली चीज।
⇒ एक कमरे में वही निशान बना हुआ था गोल घेरा और तीन सीधी रेखाए । यह क्या है ? पुरखों का चिन्ह …। अभिमन्यु ने उसके बाद कुछ कहा नही । उस रात गाँव में फिर से चीख गूंजी थी इस बार लाला रामप्रसाद की मौत हुई थी।
⇒ गाँव के सबसे अमीर बनिया ,, उसकी मुट्ठी में एक कागज था। उस पर लिखा था सांतवा पाप । अब अभिमन्यु को यकीन हो गया यह हत्याएं अंधाधुंध नही हैं…. यह गिनती है। सात पाप ,,,,सात मौत । पर पाप क्या था ?
⇒ जांच करते – करते उसे एक गाँव की बुद्धि औरत मिली – जमुना काकी । वह बोली – दो साल पहले एक लड़की गायब हुई थी सावित्री …. कहाँ गई किसी ने नही पूछा ? क्यू ? क्योंकि उस रात हवेली में पूजा थी । …… अब धागे जुडने लगी थी।
⇒ अभिमन्यु ने पुराने कागज खंगाले । उसे पता चला की सवित्री के पिता ने थाने में शिकायत करी थी … , पर शिकायत वापस ले ली गई उसके बाद उसके पिता की अचानक मौत हो गई । उस रात अभिमन्यु कुएं के पास छुपकर बैठ गया ।
⇒ घड़ी में बाहर बज चुके थे । धुंध घनी हो गई थी । तभी सफेद साड़ी में कुएं के पास एक औरत आई । उसके हाथ में फावड़ा था वह मिट्टी खोदने लगी । अभिमन्यु ने उसे पकड़ लिया । उसका चेहरा देखा वह गोमती थी … गाँव की चुप रहने वाली विधवा ।
⇒ तुम? गोमती की आँखों में आँसू नही थे… सिर्फ आग थी । सात हो गए … एक बाकी है ,,,, कौन ? भैरों सिंह । सच धीरे- धीरे बाहर आया। दो साल पहले भैरों सिंह ने तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर सावित्री की बलि दी थी।
⇒ उस रात वहाँ सात लोग मौजूद थे । पुजारी … हरनाम…. लाला रामप्रसाद …. पटेल … चौकीदार … और दो मजदूर । गोमती सावित्री की बहन थी। वह उस रात सब देख चुकी थी। पर डर के कारण चुप रही। जब उसकी माँ भी मर गई तो उसके मन का डर भी मर गया।
⇒ और अब उसके बदले की आग मन ही मन जलने लगी, मैंने एक – एक करके सबको मार डाला। और वो निशान क्यों बनाती थी । ? ताकि उन्हे याद रहे यह पूजा का घेरा नही …. मौत का घेरा है। और कागज …. सात पाप…।
⇒ अब आखिरी नाम बचा था भैरों सिंह ,, अभिमन्यु ने उसी रात हवेली को चारी तरफ से घेर लिया भैरों सिंह भागने की कोशिश कर रहा था । तहखाने में पहुँचा तो वहाँ एक गड्ढा था,, गड्ढे में हड्डियाँ थी और एक चांदी का कडा । सावित्री का था ।
⇒ भैरों सिंह हंसने लगा ,,,,, तुम अब कानून से मुझे सजा दोगे ? यहाँ मेरा राज चलता है। तभी पीछे से आवाज आई …. आज नही भैरों सिंह । गोमती खड़ी थी …. हाथ में खंजर थे । वह भैरों सिंह की तरफ बढ़ी । अभिमन्यु ने उसे रोक लिया ।
⇒ तुम्हारा बदला पूरा हो चुका है …. अब कानून बाकी है । भैरों सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। सुबह गाँवमें पहली बार सूरज निकला तो लोगों ने दरवाजे खोले । डर खत्म हो चुका था । गोमती को ले जाया जा रहा था उसने आखिरी बार कुएं की तरफ देखा ।
⇒ उसकी आँखों में शांति थी । अभिमन्यु बस में बैठा था थानेदार ने पुछा – साहब सच में भूत नही था …. ? अभिमन्यू ने कहा था लेकिन पाप का भूत । जो इंसानो के अंदर रहता है। बस चल पड़ी । धुंध छँट रही थी।
⇒ सात पाप खत्म हुए लेकिन उस हवेली में आठवा आदमी कौन था ? कहानी यही खत्म नही हुई थी …..। क्योंकि जब बस गाँव की सीमा पार कर रही थी उसे दूर खेतों में वही घेरा फिर से बना दिखाई दिया ।
⇒ ताजा और उसके बीच सिर्फ एक रेखा थी … मानो कोई नई गिनती शुरू हो गई थी ।
⇒ बस जैसे हीभैरवपुर की सीमा पार करने लगी , अभिमन्यु राठोर की नजर दूर उस खेत में बने निशान पर पड़ी मिट्टी पर बना वही गोला लेकिन उसके बीच खींचा हुआ एक रेखा । उसका दिल पहली बार हल्का सा कंपा ।
⇒ यह कहनी खत्म नही हुई थी , उसने तुरंत ड्राइवर से बस रुकवाई और बिना कुछ कहे नीचे उतर गया । थानेदार रघुवीर सिंह चौक गया …। क्या हुआ साहब? अभिमन्यु की आंखे खेतों पर बनी उस निशान पर थी।
⇒ हमने सात पाप गिने थे पर यह पहली रेखा है …. किसी नई गिनती की शुरुआत । दोनों उस निशान के पास पहुंचे । मिट्टी अबभी गीली थी मतलब यह निशान अभि कुछ समय पहले ही बनाया गया है। लेकिन गाँव में तो सब लोग मौजूद थे और भैरों सिंह जेल जा चुका है ।
⇒ गोमती भी पुलिस हिरासत में थी…। फिर यह किसने किया ? अभिमन्यु ने चारों ओर नजर दौड़ाई । दूर उसे एक छोटा स लड़का भगता हुआ दिखाई दिया। वह गाँव के एक लोहार का बेटा था – छोटू । उसे पकड़कर पूछा गया तो वह डर के मारे कांपने लगा।
⇒ मैंने कुछ नही किया साहब मैंने तो सिर्फ देखा, सफेद कपड़े वाला आदमी था । उसने मिट्टी पर कुछ बनाया और फिर कु एं की तरफ चला गया । अभिमन्यु का दिमाग़ तेजी से दौड़ने लगा फिर कुएं की तरफ भागा ….।
⇒ वही पुराना कुआ जहा से पहली रात में कराहने की आवाज आई थी। उस रात अभिमन्यु ने गांव छोड़ने का फैसला टाल दिया था। वह फिर चौपाल के कमरे में आकर बैठ गया । उसने अपनी डायरी खोली और अब तक हुई सारी घटनाओ को एक एक करके लिखने लगा।
यह कहानी बह पढ़ें ⇒ अधूरी चिट्ठियों का पूरा सच – Hindi Romantic Suspense Story । Grihshobha Style Story । Indian Family Stories ।
⇒ फिर अचानक उसकी नजर एक बात पे जाकर टिक गई। हर हत्या के समय गाँव का एक आदमी गायब रहता था । डाकिया – शंकरलाल ।
⇒ वह वही आदमी था जो हर हफ्ते शहर जाता था। जो हर घर की खबर जानता था । जो हर चिट्ठी पढ़ सकता था। लेकिन अब तक उस पर किसी ने ध्यान नही दिया । अभिमन्यु तुरंत उसके घर पहुँचा । दरवाजा खुला था। अंदर कोई नही था,।
⇒ पर दीवार पर एक पुरानी तस्वीर तंगी थी । उसमे सावित्री खड़ी थी और एक जवान लड़का …. अभिमन्यु की आंखे फाइल गई। तस्वीर के पीछे लिख था। सावित्री और शंकर अब सच सामने आने लगा । शंकर लाल डाकिया …. सावित्री से प्रेम करता था।
⇒ अभिमन्यु ने थानेदार से पुछा सावित्री के गायब होने के बाद शंकर कहा था ? वह कुछ महीनों के लिए शहर चला गया था। फिर वापस आ गया था। अब हर कड़ी जुड़ चुकी थी। गोमती ने बदला लिया सात लोगों से ।
⇒ लेकिन आठवा आदमी … जो उस रात वहाँ मौजूद था वह कोई और नही बल्कि उसका प्रेमी शंकर था। आधी रात। कुएं के पास धुंध फिर से उतर गई । अभिमन्यु अकेला वहाँ खड़ा था। अचानक कुएं के पीछे से एक आवाज आई …।
⇒ तुम्हें नही जाना चाहिए था। शंकर सामने ही खड़ा था । उसके हाथ में चाकू था । उसकी आंखे लाल थी ,,, तुमने सावित्री को क्यों नही बचाया ? उसने चीखते हुए कहा । अभिमन्यु शांत था … क्योंकि उस समय मैं यहा नही था । लकें तुम थे …। शंकर हंसने लगा।
⇒ मई सब जानता था , मैं वहाँ छिपकर देख रहा था , मैं अकेला था और वो सात लोग थे ,,, मैं बहुत डर गया था उसकी आवाज कांप रही थी। और भाग गया । उसी दिन से मर गया। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे ।
⇒ गोमती ने बदला लिया लेकिन मेरा बदला अभि बाकी है ,, किससे ? अभिमन्यु ने पुछा …। खुद से … यह कहकर उसने चाकू अपने सीने की ओर मोड़ लिया अभिमन्यु झपट पड़ा और उसका हाथ पकड़ लिया दोनों जमीन पर गिर पड़े।
⇒ संघर्ष हुआ चाकू दूर जाकर गिर गया । शंकर जोर – जोर से रोने लगा मैं कायर हूँ। मैं उसे बचा सकता था …। अभिमन्यु ने उसे पकड़कर बैठाया और कहा तुम कायर नही हो ,, तुम सबूत हो । और गवाह ही सचकों जिंदा रखते हैं।
⇒ उसी वक्त पीछे से गोमती की आवाज आई …। सच कभी नही मरता … गोमती पोलिस की पकड़ से भागकर वहाँ पहुँच गई थी। उसके पास मिट्टी थी उसने कुएं के पास एक नया घेरा बनाया था। यह आखिरी है … उसने कहा ।
⇒ अब सावित्री की आत्मा को शांति मिलेगी । अभिमन्यु ने धीरे से कहा ,,, आत्मा को शांति बदले से नही सच से मिलती है , सुबह होने तक तीनों वहीं बैठे रहे …। धुंध धीरे – धीरे छँटने लगी । पहली बार उस कुएं के पास सूरज की रोशनी पड़ी।
⇒ और तभी कुएं के अंदर कुछ चमका । रस्सी डालकर जब उसे निकाला गया तो वह एक लोहे का संदूक था। सन्दूक खोला गया उसमे पुराने कागज , तस्वीरे और एक डायरी थी। वो सब सवित्री का था। उसमे लिखा था,,, भैरों सिंह सिर्फ तांत्रिक नही था वह लड़कियों की तस्करी करता था।
⇒ सावित्री को उसने इसलिए मारा क्योंकि वह सबके सामने सच लाने वाली थी । उसके साथ और भी लड़कियां गायब थी । यह सिर्फ एक हत्या नही थी यह पूरा एक गिरोह था। अभिमन्यु ने तुरंत दिल्ली में वायरलेस किया।
⇒ जांच अब गाँव से निकलकर शहरों तक पहुँचने लगी तीन दिन बाद सीबीआई की टीम गाँव आई । भैरो सिंह ने सब कुछ कुबूल कर लिया । शहर के कई बड़े नाम सामने आए । गाँव का डर खत्म हो चुका था। गोमती को अदालत ने कम सजा दी ।
⇒ क्योंकि उसका अपराध बदले से ज्यादा न्याय था। शंकर को सरकारी गवाह बनाया गया। और कुएं के पास एक छोटा सा पत्थर लगा दिया था । सावित्री – जिसने सच के लिए जान दी। जब अभिमन्यु दिल्ली लौट रहा था तो उसने आखिरी बार भैरवपुर को देखा ।
⇒ अब वहाँ धुंध नही थी पिपल का पेड़ शांत खड़ा था। कुएं के पास बच्चे खेल रहे थे । थानेदार ने पुछा – साहब अब तो सब कुछ खत्म हो चुका है ? अभिमन्यु मुस्कुराया – सस्पेंस काभी खत्म नही होता…. वह सिर्फ सच बन जाता है।
⇒ उसने अपनी डायरी मे आखिरी लाईन लिखी । भैरवपुर जहा पाप ने जन्म लिया और सच बन उसे दफना दिया …।
⇒ बस आगे बढ़ गई सूरज पूरी तरह निकल गया था और इस बार – मिट्टी पर कोई निशान नही था ।