
» रामानुजन का जन्म एक गरीब परिवार में 22 दिसंबर , 1887 को तमिलनाडु के इरोड कस्बे में हुआ था । उनके पिता एक साड़ी की दुकान पर क्लर्क का काम करते थे । रामानुजन के जीवन पर उनकी माँ का बहुत प्रभाव था । जब वे 11 वर्ष कए थे, तो उन्होंने SL Loney द्वारा लिखित गणित किताब की पूरी मास्टरी कर ली थी । गणित का ज्ञान तो जैसे उन्हे ईश्वर कए यहाँ से ही मिल था ।
» 14 वर्ष की उम्र में उन्हे मेरिट सर्टिफिकेट एवं कई अवार्ड मिले । वर्ष 1904 मे जब उन्होंने टाउन हाईस्कूल से स्नातक पास की, तो उन्हे कए रंगनाथा राव पुरस्कार , प्रधानाध्यपक कृष्ण स्वामी अय्यर द्वारा प्रदान किया गया।
»वर्ष 1909 में उनकी शादी हुई, उसके बाद वर्ष 1910 मे उनका एक ऑपरेशन हुआ। घरवालों के पास उनके ऑपरेशन हेतु पर्याप्त राशि नही थी एक डॉक्टर ने उनका यह मुफ़्त मे ऑपरेशन किया था । इस ऑपरेशन के बाद रामानुजन अपनी नौकरी की तलाश मे जुट गए वे मद्रास मे नौकरी के लिया जगह – जगह घूमे । इसके लिए उन्होंने ट्यूशन भी किये । वे पुनः बीमार पड़ गए , ।
» इसी बीच वह गणित मे अपना कार्य करते रहे । ठीक होने के बाद , उनका संपर्क नेलौर के जिला कलेक्टर – रामचन्द्र राव से हुआ । वह रामानुजन के गणित मे कार्य से बहुत प्रभवित हुए। उन्होंने रामानुजन की आर्थिक मदद भी की।
» वर्ष 1912 मे उन्हे मद्रास मे चीफ अकाउणटेंट के ओफिस मे क्लर्क की नौकरी भी मिल गई । वे ओफीस का कार्य जल्दी पूरा करने के बाद , गणित का रिसर्च करते रहते , इसके बाद वह इंग्लैंड चले गए, । वहाँ उनके कार्य को खूब प्रशंसा मिली। उनके गणित के अनूठे ज्ञान को खूब सराहना मिली।
» वर्ष 1918 में उन्हे ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज का फ़ेलो (Fellow of trinity college cambridge ) चुना गया। वह पहले भारतीय थे, जिन्हे इस सम्मान (Position) के लिए चुना गया।
» बहुत मेहनती एवं धुन के पक्के थे। कोई भी विषम परिस्थिति , आर्थिक कठिनाइयों , बीमार एवं अन्य परेशानियाँ उन्हे अपनी धुन से नही डिगा सकी। वे अंततः सफल हुए। आज उन्हे विश्व के महान गणितज्ञ मे शुमार किया जाता है। 32 वर्ष की छोटी उम्र मे ही इस प्रतिभाशाली व्यक्ति का देहावसान हो गया। दुनिया ने एक महान गणितज्ञ को खो दिया।