शाहजहाँ की मौत का रहस्य – Mystery Of shahjahan death । History Of Mughal Ruler । Mystery Of Mughal Ruler ।

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शाहजहाँ की मौत का रहस्य – Mystery Of shahjahan death

» शाहजहाँ  – आज हम आपको एक ऐसे मुगल बादशाह की कहनी बताने वाले है जो अपने हुकूमत के दौर मे पूरी शानो-शौकत से जिया पर अपने अंतिम दौर मे इतनी दर्दनाक हादसे से गुजरा  की दो वक्त की रोटी भी नसीब ना कर सका । अपने ही  बेटे कए आदेश से जंजीरों मे जकड़ा अंधेरी कोठरी मे मौत के  इंतजार मे दिन काटता वह  बादशाह था ।

» शाहजहा जिसे उसी के बेटे ने तड़पा-तड़पा के  मारा तो आइए आज हम इतिहास के इस अनसुने हिस्से से पर्दा उठाते   हैं ।

» शहबुद्दीन मुहम्मद खुरर्म अर्थात शाहजहाँ का जन्म 5 जनवरी 1592 को लाहौर मे हुआ था। की उत्तर भारत कए बड़े इलाके पर उसके पिता जहांगीर की हुकूमत थी । परंतु इस विशेष 1627 मने जहांगीर की मृत्यु के बाद उसके बेटों मे मुगल सत्ता के लिए युद्ध हुआ । जिसमे शाहजहाँ ने अपने सब भाइयों को मार कर विजय प्राप्त की । और मुगल सल्तनत का बादशाह बन बैठ।

» शाहजहाँ की तलवार सबसे पहले अपने ही परिवार पर पड़ी उसने  अपने भाइयों को मारा अपनी सौतेली माँ को कारावास मे डाल दिया हुकूमत की यह तलवार अंत तक हिंदुओ के खिलाफ रही 130 सालो तक दिल्ली पर हुकूमत करने वाले  शाहजहाँ के चार पुत्र थे ।

» दारा शिकोंह शहर सुझा लाल रंग जैव और मुराद बख्श दो कि इन सबही पुत्रों को शाहजहाँ ने भारत के अलग – अलग हिस्सों मे तैनात कर रखा था। शाहजहाँ का सबसे बड़ा बेटा दाराशिकोंह उसका काफी चाहिए  था , तथा वह सदैव दिल्ली मे ही शाहजहाँ की नज़रों  के  सामने ही रहता  असल मे शाहजहा की नज़रों मे दारा सिंह को ही मुगल सल्तनत का अगला बस यह था ।

» शाहजहाँ का  दूसरा बेटा औरंगजेब ही दक्कन मे तैनात था जबकि अन्य दो बेटे गुजरात और  उत्तर भारत मे मुगल सत्ता को  विस्तार दे रहे थे ।

» 1627 में शाहजहाँ गंभीर बीमार  पड़ गया की शाहजहाँ  के बीमार पड़ते ही दारा शिकोंह ने मुगल सत्ता को संभाला और राज गद्दी पर बैठ गया परंतु यह बात औरंगजेब को नागवार गुजरी  है और अगले  ही दिन सत्ता प्राप्त करने कए  उद्देश्य से औरंगजेब दक्कन से अपनी तमाम सेनाओ कए साथ दिल्ली चला आया । इधर शाहजहाँ का तीसरा बेटा शहर सुझा जो बंगाल का सूबेदार था ।

» उसने अपने बाप कए बीमार पड़ते ही बंगाल और बिहार को अपने कब्जे मे कर लिया जबकि चौथे बेटे मुराद बख्श ने गुजरात और सिंधु को अपने कब्जे मे ले लिया। की यह  सभी  भाइयों मे औरंगजेब  बड़ा शातिर और दूर था ।

» उसने सभी भाइयों  के खिलाफ जंग का बिगुल बज दिया 29 मई सन 1658 को आगरा की धरती पर मुगल सत्ता प्राप्त करने के लिए शाहजहाँ कए सभी पुत्रों कए मध्य भयंकर युद्ध हुआ था, इस युद्ध मे औरंगजेब विजयी हुआ था। औरंगजेब ने अपने भाइयों कए खिलाफ तो युद्ध जीत  लिया, पर आगरा को फतेह किये  बिना वह उँगलिय हूकूमत का बादशाह नही बन सकता था । 

» इस कारण 1 जून की सुबह औरंगजेब ने अपनी तमाम सेना के साथ आगरा पर चढ़ाई कर दी की इस समय मुराद बख्श भी अपने भाई औरंगजेब के साथ मिल चुका था , ।

» शाहजहाँ  के  इन दोनों बेटों ने अपनी  सेनाओ  के साथ आगरा  के किले को घेर लिया किले के अंदर औरंगजेब का पिता और पूरा  परिवार था 5 दिनों  की घेराबन्दी  के बावजूद किले के द्वार नही खुले , जिससे  गुस्साए औरंगजेब ने किले की रजत और पानी की आपूर्ति रुक अवधि अंत 8 जून को आगरा  के  किले  के द्वार खोल दी गई है ।

» और औरंगजेब  अपनी लश्कर  के साथ आगरा के किले मे घुसा बीमार शाहजहाँ ने आत्मसमर्पण करते हुए अपनी तलवार औरंगजेब  के कदमों मे रख दी और इस तरह इस विशेष 1659 को औरंगजेब ने मुगल सत्ता पर अपना कब्जा जमा लिया ।

» सत्ता प्राप्त होते ही औरंगजेब  के  आदेश पर उसके पिता शाहजहाँ को आगरा के किले मे शाह बुर्ज नामक जगह पर कैद कर दिया गया ।  शाहजहा की चहेति बेटी जहांआरा को शाहजहा  के  साथ कैद कर दिया गया की शाहजहाँ  अगले आठ वर्षों तक औरंगजेब की कैद मे रहा उसे अत्यधिक दुख और यातनाओ के साथ जीने पर मजबूर कर दिया ।

» 70 साल का वह बीमार और बूढ़ा आदमी रोज उठता और के दिखने की खिड़की से ताजमहल को देखता अपने हुकूमत के दौर को याद करता और फिर अपने  बिस्तर पर जाकर लेट जाता यह उसका  रोज का काम था।

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» शाहजहाँ ने तो उम्मीद ही छोड़ दी की वह कभी औरंगजेब की कैद से आजाद हो  पाएगा । या फिर भी एक बार शाहजहाँ ने अपने मुट्ठी  भर पुराने  नौकरो की मदद से किले की दीवारों से  भागने का प्रयास किया किंतु किले  के मजबूत  दीवारों ने बूढ़े बादशाह को भागने  नही दिया।

» वह पकड़ा गया और उसे और अधिक सख्त पहरे मे कैद कर दिया गया की एक शम शाहजहाँ  के पास उसके चहेते बेटे दारा सिक्खों का  कटा हुआ सर  भेजा गया ।

» उसने भी सत्ता पाने  के  लिए इसी तरह अपने भाइयों का कत्ल किया था, आठ साल तक औरंगजेब की कैद मे रहने कए बाद तीस जनवरी की सुबह शाहजहाँ लुढ़क कर जमीन पर गिर गए । 

» और दम तोड़ दिया अपने हुकूमत  के  दौर को याद करते हुए इस भीषण 1666 मे शाहजहाँ मर गया उसने उसे आगरा के ताजमहल मे अपनी माशूका मुमताज की कब्र के पास दफन कर दिया गया की इन आठ सालों मे औरंगजेब एक भी बार अपने पिता से मिलने नही आया । शाहजहाँ के मृत्यु के बाद औरंगजेब अपने पिता के जनाजे को कंधा तक नही दिया की शाहजहाँ की अर्थी नौकर और हिजड़ों से उठाई गई ।

Author: Hindi Rama

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