बुद्धि की परीक्षा – Story Of Akbar Birbal । Akbar Birbal stories In Hindi । Akbar And Birbal ।

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बुद्धि की परीक्षा – Story Of Akbar Birbal

» एक बार बीरबल बुखार से पीडित होने के कारण हफ्तों तक दरबार मे हाजिर न हो सके। बादशाह को बीरबल से कुछ ऐसा स्नेह था  की वे उससे ज्यादा देर अलग नही रह सकते थे। एकाएक आज बादशाह से  मिलने के लिए उतावले हो उठे।

» वे बादशाह के घर आ धमके । बादशाह ने देखा की बीमारी के कारण बीरबल कमजोर हो गए है। कुछ देर बाद बीरबल को हाज , महसूस हुई, वे आज्ञा लेकर पाखाने चले गए। बादशाह इस बीच मे अकेले बैठे थे।  उनके मन मे आया की बीमारी के कारण बीरबल की बुद्धि मे कोई फर्क तो नही आ गया? ऐसा सोच उन्होंने  नौकर को आज्ञा दी की बीरबल की  खाट को चारों पायो के बीच कागज का एक – एक टुकड़ा रख दो।

» नौकर ने  ऐसा ही किया। कुछ देर बाद जब बीरबल शौचालय से फारिग होकर आए और खाट पर लेट गए। तत्काल ही उन्हे अपनी खाट मे कुछ  परिवर्तन मालूम होने लगा अतएव वे  इधर – उधर देखने लगे। कभी दाए देखते, कभी बाये ।

» बादशाह ने उन्हे भुलावे मे डालने के लिए इधर-उधर का प्रसंग  छेड़  दिया। बीरबाल बादशाह की बातों का उत्तर अवश्य दे रहे थे , परंतु किसी अज्ञात वस्तु की तलाश कर रहे  थे।

» जब बादशाह से न रहा गया तो बीरबल से उनकी अधीरता का कारण पुछा । तब बीरबल बोले की इस वक्त मुझे अपने खाट की स्थिति मे हर-फेर मालूम होता है। बादशाह ने चेहरे पर कृत्रिम आश्चर्य का  भाव  दिखाते हुए पुछा-” क्या  हेर  – फेर है। “

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» बीरबल बोले – ” ऐसा मालूम  होता है की या तो मकान ही कागज भर नीचे धंस गया है अथवा खाट ही कागज भर ऊँची हो गई है। “

» बीरबल का कथन सुन बादशाह समझ गए की इनकी बुद्धी मे किसी किस्म का कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। फिर भी अपना  दिल का भाव छिपकर बोले-” अक्सर देखा जाता है की बीमारी से उठने के बाद लोगों को इस तरह के वहम हो  जाते हैं लेकिन असल मे कुछ होता है। “

» बीरबल बोले- जहाँपनाह ! मै बीमार जरूर पड़ा हूँ। परंतु मेरी बुद्धि बीमार नहीं है, इसीलिए मेरा सोचना गलत नही हो सकता । यह बात सुनकर बादशाह ने असल बात प्रकट कर दी और मान गये की बीरबल की  बुद्धि मे कोई फर्क नही आया है।

Author: Hindi Rama

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