असली वर कौन ? विक्रम और बेताल – Story Of Vikram And Betal । Hindi Moral Stories ।

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असली वर कौन ? विक्रम और बेताल – 〈 Story Of Vikram And Betal 〉

» उज्जैन मे महाबल नाम का एक राजा रहता था । उसके हरीदास नाम का दूत था। जिसके महादेवी नाम की बड़ी सुंदर कन्या थी । जब वह विवाह योग्य हुई तो हरीदास को बहुत चिंता होने लगी । इसी बीच राजा ने उसे एक दूसरे राजा के पास भेजा । कई दिन चलकर हरीदास वहाँ पहुँचा । राजा ने उसे बड़ी  अच्छी तरह से रखा । एक दिन एक ब्राह्मण हरीदास के पास आया । एक दिन ब्राह्मण हरीदास के पास आया ।

» बोला, तुम अपनी लड़की मुझे दे दो । हरीदास ने कहाँ , मै अपनी लड़की उसे दूँगा , जिसमे सब गुण होंगे ,। ब्राह्मण ने कहा , मेरे पास एक ऐसा रथ है, जिस पर बैठकर जहाँ चाहो , घड़ी – भर मे पहुँच जाओगे।

» हरीदास बोला, ठीक है। सबेरे उसे ले आना । अगले दिन दोनों रथ पर बैठकर उज्जैन आ पहुंचे । दैवयोग से उससे पहले  हरीदास की स्त्री अपनी लड़की को किसी तीसरे को देने का वादा कर चुकी थी।

» इस तरह तीन वर इकट्ठे हो गए। हरिदास सोचने लगा की कन्या एक है , वह तीन हैं। क्या करे! इसी बीच एक राक्षस आया और कन्या को उठाकर विंध्याचल पहाड़ पर ले गया । तीनों वरों मे एक ज्ञानी था।  हरीदास ने उससे पूछा तो उसने बता दिया की एक राक्षस लड़की को उड़ा ले गया है और वह विंध्याचल पहाड़ पर है।

» दूसरे ने कहा , मेरे रथ पर बैठकर चलो । जरा सी देरी मे वहाँ पहुँच जाएंगे । तीसरा बोला , मै शब्दवेधी  तीर चलाना जानता हूँ ।  राक्षस को मार  गिराऊँगा । वे सब रथ पर चढ़कर विंध्याचल पहुंचे और राक्षस को मारकर लड़की को बचा लाए । इतना कहकर बेताल बोला , हे राजन् ! बताओ , वह लड़की उन तीनों मे से किसको मिलनी चाहिए ?

» राजा ने कहा , जिसने राक्षस को मारा , उसको मिलनी चाहिए , क्योंकि असली वीरता तो उसी ने दिखाई । बाकी दो ने तो मदद की । राजा का इतना कहना था की बेताल फिर पेड़ पर जा लटका और राजा फिर उसे लेकर आया तो रास्ते मे बेताल ने छठी कहानी सुनाई ।

Author: Hindi Rama

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