लकड़हारा और सुनहरी कुल्हाड़ी – The Woodcutter And The Golden Axe । Best Moral Story In Hindi ।

लकड़हारा और सुनहरी कुल्हाड़ी - The Woodcutter And The Golden Axe । Best Moral Story In Hindi । Hindirama.com

लकड़हारा और सुनहरी कुल्हाड़ी – The Woodcutter And The Golden Axe

» सालों पहलें एक नगर में कुसम नाम का एक लकड़हारा रहता था । वो रोज जंगल में लकड़ी काटने के लिए जाता और उन्हे बैचकर जो कुछ मिलता उससे अपने परिवार के लिए खाना खरीद लेता था । उसकी दिनचर्या कई सालों से ऐसे ही चल रहीं थीं ।

» तभी एक दिन वो लकड़हारा जंगल में बहती नदी के बगल में लगे पेड़ की टहनियों को काटने के लिए उस पर पेड़ पर चढ़ गया । तभी उस पेड़ की लकड़ी काटते -काटते उस लकड़हारे की कुल्हाड़ी नीचे गिर गई । 

» कुल्हाड़ी गिरते ही वो तेजी से नीचे उतरा ।और अपनी कुल्हाड़ी को ढूँढ़नें लगा । उसे लगा था कि नदी के आस पास उसकी कुल्हाड़ी गिरी होगी । और ढूँढनें पर मिल जाएगी । लेकिन ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था । क्योंकि उसकी कुल्हाड़ी पेड़ से सीधा नीचे नदी में जा गिरी थीं । 
» और वो नदी बहुत गहरी व तेज बहाव वाली थीं । अब आधे से एक घंटे तक लकड़हारा अपनी कुल्हाड़ी ढूँढता रहा । 
» लेकिन जब कुल्हाड़ी नहीं मिली । तो उसे लगने लगा । कि अब उसकी कुल्हाड़ी उसे कभी वापस नहीं मिलेगी । इससे वो काफी दुखी हो गया । और लकड़हारे को पता था कि अब उसके पास इतने पैसे भी नहीं है । कि वो एक नई कुल्हाड़ी खरीद सकें । अब वो अपनी स्तिथि पर नदी किनारे बैठे -बैठे रोने लगा । 
» तभी लकड़हारे की रोने की आवाज सुनकर वहाँ नदी के देवता आ गए । 
» उन्होंने लकड़हारे से पूछा , ” बेटा क्या हो गया ” तुम इतना क्यों रो रहें हो । कुछ खो दिया हैं क्या ?? तुमने इस नदी मे ?? नदी के देवता का सवाल सुनते ही लकड़हारे ने उन्हे अपनी कुल्हाड़ी गिरने की सारी बात बता दी । 
» नदी के देवता ने पूरी बात सुनते ही उस कुल्हाड़ी को ढूँढने में लकड़हारे की मदद करने की बात कही । और वो देवता वापस नदी मे चला गया । कुछ देर बाद नदी के देवता नदी से बाहर निकल आए और उन्होंने लकड़हारे से कहा कि । मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी लेकर आ गया । 
» नदी के देवता की बात सुनकर लकड़हारे के चेहरे पर मुस्कान आ गई । तभी लकड़हारे ने देखा कि नदी के देवता ने अपने हाथों में एक सुनहरी रंग की कुल्हाड़ी ले राखी हैं । 
» तबी दुखी मन से लकड़हारे ने कहा । कि यह सुनहरी रंग की कुल्हाड़ी मेरी तो बिल्कुल भी नहीं हैं । यह सोने की कुल्हाड़ी जरूर किसी आमिर इंसान की रही होगी । ये मेरी नहीं हैं नदी के देवता । लकड़हारे की बात सुनकर नदी के देवता दोबारे से नदी में चले गए ।
» और कुछ देर बाद वो दौबारा नदी से बाहर निकले । इस बार उनके हाथों में चांदी की कुल्हाड़ी थीं । और उस कुल्हाड़ी को देखकर भी लकड़हारे को खुशी नहीं हुई । 
» तभी उसने कहा कि यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं हैं ये किसी दूसरे इंसान की कुल्हाड़ी होगी । 
» मुझे तो अपनी ही कुल्हाड़ी ढूँढ़नी हैं । इस बार भी लकड़हारे की बात सुनकर नदी के देवता फिर वहाँ से पानी मे चले गए । फिर वह देवता काफी देर बाद बाहर आए । अब देवता को देखते ही लकड़हारे के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी थीं ।
» फिर उसने नदी के भगवान से कहा कि इस बार आपके हाथ में जो लोहे की कुल्हाड़ी हैं । वह कुल्हाड़ी मेरी ही हैं । यही कुल्हाड़ी पेड़ काटते समय मेरे हाथ से नीचे गिर गई थी । 
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» कृपया आप मुझे ये कुल्हाड़ी मुझे दे दीजिए । और वो सोने और चांदी वाली कुल्हाड़ी उसके असली मालिक को दे दीजिए । 
» लकड़हारे की इतनी ईमानदारी और निष्पाप मन को देखकर ,” नदी के देवता को काफी अच्छा लगा “। 
» तभी उन्होंने लकड़हारे से कहा कि तुम्हारे मन में बिल्कुल भी लालच नहीं हैं । तुम्हारी जगह कोई और होता । तो यह सोने की कुल्हाड़ी झट से ले लेता । लेकिन तुमने ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया । और चांदी की कुल्हाड़ी को भी तुमने लेने से इनकार कर दिया । 
» तुम्हें सिर्फ अपनी लोहे की ही कुल्हाड़ी चाहिए थीं । तुम्हारे इतने सच्चे और पवित्र मन से में काफी प्रभावित हूँ । और अब मैं तुम्हें  ये सोने और चांदी की कुल्हाड़ी उपहार में देना चाहता हूँ । तुम अपनी लोहे की कुल्हाड़ी के साथ इन्हे भी अपने पास अपनी ईमानदारी के तोहफे के तौर पर रख लो। 
कहानी से सिख 
» दोस्तों – ईमानदारी से बड़ी दौलत इस दुनियाँ में कुछ भी नहीं हैं । और अच्छे ईमान वाले की प्रशंसा चारों तरफ होती हैं । 
आपका धन्यवाद   

Author: Hindi Rama

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