सात फेरों के बाद मैं अकेली – Divorce Emotional Story
⇒ बारात की विदाई के बाद जब नेहा ने अपने मायके की चौखट पर आखिरी बार माथा टेका, तो उसे लगा जैसे उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, । माँ की साड़ी का पल्लू आँसुओ से भीग चुका था, और पापा का हाथ उसके सिर पर कांप रहा था।
⇒ ढोल की आवाज दूर होती गई , और एक नई जिंदगी की शुरुआत नेहा के सामने खड़ी थी – सपनों से भरी , उम्मीदों से सजी। ससुराल पहुंची तो हर तरफ रोशनी , हंसी और स्वागत था। सास ने आरती उतरी – हमारे घर की लक्ष्मी आ गई।
⇒ नेहा का दिल भर आया। उसने सोचा – अब यही मेरा संसार है। लेकिन उसी रात , जब फूलों से सजे कमरे में वह अमित का इंतजार कर रही थी, तो दरवाजा खुला और उसके सपनों की पहली किरच टूट गई ।
⇒ अमित ने बस इतना कहा, तुम सो जाओ ….. मुझे काम है । वह पूरी रात जागती रही । बाहर पटाखों की आखिरी आवाजे खत्म हो चुकी थी – और उसके भीतर का शोर शुरू हो गया था ।
मुसकानों के पीछे छुपी दूरी
⇒ अगले कुछ दिन रस्मों में गुजर गए, पर नेहा ने महसूस किया – अमित उससे बचता है। जहाँ सबके सामने वह सामान्य पति बनता, वही कमरे में आते ही खामोश हो जाता । एक रात नेहा की नीद अचानक खुली।
⇒ उसने देखा – अमित बालकनी में खड़ा फोन पर धीमी आवाज में कह रहा था। बस थोड़ा वक्त और लगेगा .,,,, मै सब ठीक कर दूँगा । उसके बातों में वो नरमी थी जो नेहा से बात करते समय कअभी नही रहती । नेहा के दिल में पहली बार शक का कांटा चुभा ।
बंद आलमारी का रहस्य
⇒ कमरे में एक पुरानी लकड़ी की अलमारी थी जिसे सास ने छूने से मना था । यह घर की पुरानी चीजे हैं…. इन्हे मत खोलना । एक दिन सफाई करते – करते आलमारी का दरवाजा हल्का सा खुल गया। अंदर एक लाल जोड़ा , कुछ पुरानी तस्वीरे …. और एक शादी का एल्बम ।
⇒ तस्वीर मे अमित और एक औरत उसके बगल में दुल्हन के जोड़ें में थी। नेहा के हाथ कांपने लगे , क्या अमित की पहले भी शादी हो चुकी है।
आधा सच
⇒ अमित ने तस्वीरे देखकर झटके से आलमारी बंद कर दी । तुम्हें कहा था ना, इसे मत खोलना ! ये लड़की कौन है ? नेहा की आवाज कांप रही थी । अमित कुछ पल चुप रहा , मेरी जिंदगी का एक खत्म हो चुका अध्याय ।
⇒ लेकिन उसकी आँखों में डर था …… दर्द नही । उस रात को लगा – इस घर की दिवारे कुछ छुपा रही है।
पहली दहशत
⇒ रात के दो बजे दरवाजा अचानक से खटखटाने की आवाज आई। नेहा ने दरवाजा खोला – बाहर कोई नही था । नीचे देखा एक कागज पड़ा था। उस पर लिखा था । यह घर छोड़ दो ….. वरना तुम भी नही बचोगी । नेहा के हाथ से कागज गिर गया ।
नया मोड़ ” परछाईयों का घर “
⇒ सास की चुप्पी — जब नेहा ने सास को वो कागज दिखाया , तो उनके चेहरे का रंग उड़ गया । लेकिन अगले ही पल उन्होंने खुद को संभाल लिया – किसी की घटिया मजाक है।
⇒ पर उस रात नेहा ने देखा – सास मंदिर में बैठकर रो रही थी।
⇒ पड़ोसन की बात — एक दिन पड़ोस की आंटी ने पुछा ,,, बेटा तुम ठीक तो हो ना ? जी ….. आंटी ने धीरे से कहा इस घर की पहली बहु भी चुप रहती थी, नेहा का दिल धड़कना भूल गया ।
⇒ गायब हुई दुल्हन — धीरे – धीरे उसे पता चला अमित की पहली पत्नी नैना अचानक से कही गायब हो गई । सबने कहा वो घर छोड़ कर चली गई । लेकिन उसके मायके वालों ने कभी उसे ढूँढने की कोशिश क्यों नही की ?
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सच्चायी की डायरी
⇒ आलमारी में छुपी एक डायरी ने सब बदल दिया । उसमे नैना ने लिखा था – अगर मुझे कुछ हो जाए तो इसका मतलब ये नही की मैं खुद से चली गई हु अमित किसी और से प्यार करता है और मेरी सास को सब कुछ पता है ।
⇒ नेहा की साँसे रुक गई ।
मौत का कमरा
⇒ डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था – स्टोर रूम …. नेहा काँपते हुए स्टोर रूम तक गई । दरवाजा खोल अंदर जमीन पर हल्का सा लाल दाग ….. और दीवार पर खरोंच के निशान । उसे लगा जैसे कोई फुसफुसाया । भाग जाओ यहां से …..।
⇒ नया नाम सात फेरो का सच – आमना – सामना ,,, नेहा ने अमित से सब पूछ लिया। अमित का चेहरा पत्थर सा हो गया , तुम्हें जितना बताया गया है उतना ही जानो , नैना कहाँ है ? अमित चिल्लाया – मर चुकी है वो अब मेरी जिंदगी में नही है।
⇒ सास का टूटना – उस रात सास ने नेहा का हाथ पकड़ लिया – बेटी भाग जा यहाँ से … और वो फिर फुट – फुटकर रोई । मैंने अपनी पहली बहु को खो दिया तुझे नही खोना चाहती ।
⇒ सच का खुलासा – नैना ने अमित की सच्चयी जान ली थी। झगड़ा हुआ …. धक्का लगा … उसका सिर दीवार से टकराया … । वो मर गई। लक्ष को रात में ही ठिकाने लगा दिया । सबको बताया गया की वो भाग गई । नेहा के पैरों तले जमीन खिसक गई ।
भागती हुई दुल्हन
⇒ नेहा ने उसी रात घर छोड़ दिया । बारिश हो रही थी … माँग का सिंदूर उसके चेहरे पर फैल गया। उसे लग रहा था वो सचमुच मौत के घर से भाग रही थी।
⇒ कोर्ट का फैसला – नेहा ने पुलिस में शिकायत की । केस खुला। नैना के मायके वाले आए। अमित गिरफ्तार हो गया । सास ने कोर्ट मे सब बता दिया ।
⇒ नया नाम : मै बच गई – टूटकर भी जिंदा – तलाक के कागज पर साइन करते वक्त नेहा के हाथ नही कापे । क्योंकि इस बार वो रिश्ता नही – मौत की परछाई खत्म करे रही थी ।
⇒ नई सुबह – मायके लौटकर उसने आईने में खुद को देखा – बिना सिंदूर पर जिंदा । उसने धीरे से कहा मैं अकेली नही मैं अब आजाद हूँ ।
⇒ अंतिम संदेश – हर शादी सात फेरो से नही बनती …. कुछ सच के एक कदम टूट जाती है। और हर अकेली औरत बेचारी नही होती – कभी – कभी वह अपने साहस की पूरी कहानी होती है।