मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है ? गरुड़ पुराण कइ रहस्यमयी कहानी – Mrityu Ke Baad Atma Ke Saath Kya Hota Hai ? Garud Puran Ki Darawani Sachchai । After Death Truth ।

मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है ? गरुड़ पुराण कइ रहस्यमयी कहानी - Mrityu Ke Baad Atma Ke Saath Kya Hota Hai ? Garud Puran Ki Darawani Sachchai । After Death Truth । Hindirama.com

मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है ? गरुड़ पुराण कइ रहस्यमयी कहानी – Mrityu Ke Baad Atma Ke Saath Kya Hota Hai ?

गाँव के किनारे एक पुराना मकान था , जहाँ रामदास अपने परिवार के साथ रहता था । उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका रामदास अब पहले जैसा मजबूत नही रहा था । उसका शरीर धीरे – धीरे जवाब दे रहा था। कई दिनों से वह बीमार था, लेकिन उस रात कुछ अलग था।

कमरे में अजीब सी शांति थी, जैसे समय खुद रुक गया हो। दीवार पर टंगी घड़ी की टिक- टिक अब बहुत तेज सुनाई दे रही थी। उसकी साँसे भारी हो चुकी थी। हर सांस लेने में उसे संघर्ष करना पड़ रहा था । उसकी आंखे आधी खुली थी , लेकिन दृष्टि कही दूर खोई हुई थी।

उसके आस – पास उसका परिवार बैठा हुआ था , पत्नी रो रही थी बेटा उसका हाथ पकड़े बैठा था और बेटी भगवान का नाम जप रही थी। लेकिन रामदास अब इन सब से दूर होता जा रहा था। अचानक उसे अपने शरीर में एक अजीब कंपन महसूस हुआ।

जैसे अंदर से कुछ निकलने की कोशिश कर रहा हो। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा फिर धीरे – धीरे शांत होने लगा.।उसी समय उसकी आँखों के सामने एक – एक करके उसके जीवन के दृश्य आने लगे – बचपन की मासूमियत , युवावस्था की गलतियाँ परिवार के साथ बिताए पल, और वो सारे मौके जब उसने सही और गलत फैसले लिए थे।

उसे याद आया कि कैसे उसने कभी किसी गरीब को खाली हाथ लौटा दिया था, कैसे उसने गुस्से में अपने ह भाई से संबंध तोड़ लिये थे, और कैसे कई बार उसने सच जानते हुए भी झूठ का साथ दिया था । यह सब जैसे एक फिल्म की तरह उसकी आँखों के सामने चल रहा था – स्पष्ट , सजीव और बेहद तीखा ।

तभी अचानक उसकी सास एक पल के लिए रुक गई …. फिर एक गहरी सांस आई … और फिर सब शांत हो गया। कमरे में मौजूद सभी लोग रोने लगे। किसी ने कहा – रामदास अब नही रहे…. लेकिन उसी क्षण कुछ ऐसा हुआ जो किसी ने नही देखा ।

रामदास ने खुद को खड़ा पाया – अपने ही शरीर के पास । उसने देखा कि उसका शरीर बिस्तर पर पड़ा है, आंखे बंद हैं, और लोग उसके चारों ओर रो रहे हैं । वह हैरान रह गया । उसने अपने हाथों को देखा – वे हल्के थे, पारदर्शी जैसे। उसने अपने बेटे को छूने की कोशिश की, लेकिन उसका हाथ उसके आर – पार निकल गया।

ये क्या हो रहा है ? उसने खुद से पुछा । वह जोर से चिल्लाया – मैं यहाँ हूँ। लेकिन कोई उसे सुन नही पाया। उसकी आवाज जैसे किसी और दुनिया में गूंज रही थी , जहाँ से वापस लौटना संभव नही था।

धीरे – धीरे उसे यह समझ आने लगा की अबवह अपने शरीर में नही है उसक आत्मा शरीर से अलग हो चुकी है। वह अब ऐसी अवस्था में था जहाँ वह सब कुछ देख सकता था, महसूस कर सकता था , लेकिन कुछ भी बदल नही सकता था ।

उस समय उसे एक अजीब सा खिचाव महसूस हुआ – जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे अपने पास बुला रही हो। लेकिन वह अपने परिवार को छोड़ना नही चाहता था। वह अपनी पत्नी के पास गया, उसके आँसू पोंछने की कोशिश की, लेकिन उसका स्पर्श उसे छु भी नही पाया।

उसका दिल टूट गया। उसे एहसास हुआ की अब वह इस दुनिया का हिस्सा नही रहा। वह केवल एक दर्शक बन चुका था- अपने ही जीवन का, अपने ही अंत का। तभी कमरे में एक ठंडी हवा चली । दिए की लौ कांपने लगी । रामदास ने  पीछे मुड़कर देखा… और जो उसने देखा, उससे उसकी आत्मा कांप उठी ।

दरवाजे के पास दो भयानक आकृतियाँ खड़ी थी। उनके शरीर काले थे , आंखे लाल थी , और चेहरे पर कठोरता थी। उनके हाथों में लोहे की जंजीरे थी, और उनकी उपस्थिति से ही भय का संचार हो रहा था । वो धीरे – धीरे उसकी ओर बढ़ रहे थे।

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रामदास समझ गया – ये कोई साधारण प्राणी नही है। ये यमदूत हैं…. मृत्यु के दूत जो आत्मा को लेने आते हैं।

उसने भागने की कोशिश की  ,लेकिन उसके पैर जैसे जड़ गए थे। वह हिल नही पा रहा था । यमदूत उसके पास आए और एक ने कठोर आवाज में कहा – रामदूत , तुम्हारा समय समाप्त हो चुका है। अब तुम्हें हमारे साथ चलना होगा।

रामदास डर गया । उसने विनती की – मुझे थोड़ा समय दे दो,,,, मैं अपने परिवार से बात करना चाहता हूँ …. उन्हे बताना चाहता हूँ कि मैं ठीक हूँ … लेकिन यमदूतो के चेहरे पर कोई भाव नही था। दूसरे यमदूत ने कहा,,, जो  समय तुम्हें मिला था , वह तुमने जी लिया । अब जो समय है, वह तुम्हारे कर्मों का है।

यह सुनकर रामदास की आत्मा सिहर उठी । उसे अपने जीवन के हर कर्म याद आने लगे। अच्छे भी और बुरे भी.। उसे एहसास हुआ कि अब वह किसी भी चीजों को बदल नही सकता । यमदूतो ने उसकी आत्मा को पकड़ लिया।

वह विरोध करना चाहता था, लेकिन उसकी शक्ति खत्म हो चुकी थी । उसे लगा जैसे वह किसी अदृश्य शक्ति में जकड़ा हुआ है। जैसे ही उसे ले जाने लगे उसने आखिरी बार अपने घर की ओर देखा,,,, वही दिवरे ,,, वही लोग … वही जीवन … जो अब उसका नही था।

उसकी आँखों में गहरा दुख था – पछतावे का, बिछडने का, और उस सच का जिसे उसने कभी समझा ही नही था। और फिर वह धीरे – धीरे उस दुनिया से दूर जाने लगा… एक ऐसी यात्रा पर, जहाँ से वापस लौटना संभव नही था।

कहानी का सार….. 

मृत्यु केवल शरीर का अंत है, आत्मा का नही,,,,,,,.  आत्मा सब कुछ देखती है, लेकिन कुछ कर नही पाती ,,,,, जीवन के कर्म मृत्यु के समय सामने आते हाँ ,,,, यमदूत आत्मा को लेने आते हैं ,,,,, और सबसे बड़ा सच – जो समय मिला है, वही असली मौका है….।

Author: Hindi Rama

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