बेटे की शादी और बाप का कर्ज – Father Debt Emotional Story In Hindi
⇒ एक छोटे से गाँव में रामलाल नाम का एक गरीब किसान रहता था । उसकी जिंदगी खेतों और मेहनत के बीच ही बीतती थी। दिन भर मेहनत करने के बाद भी उसके घर में भरपेट खाना नही होता था । लेकिन फिर भी वह अपने परिवार से बहुत प्यार करता था,….।
⇒ खासकर अपने इकलौते बेटे मोहन से, जिसे वह अपनी जिंदगी से भी ज्यादा मानता था । जैसे – जैसे मोहन बड़ा हुआ, रामलाल की एक ही ख्वाहिश थी कि वह अपने बेटे की शादी धूमधाम से करें, ताकि समाज में उसकी इज्जत बनी रहे ।
⇒ गाँव के लोग अक्सर ताने मारते थे कि गरीब आदमी अपने बेटे की शादी क्या धूमधाम से करेगा ? ये बाते रामलाल के दिल को चीर देती थी और उसने ठान लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह अपने बेटे की शादी शानदार तरीके से करेगा।
⇒ लेकिन हकीकत कुछ और ही था । रामलाल के पास न तो ज्यादा जमीन थी और न ही बचत। उसकी फसल भी हर साल कभी सूखे तो कभी बारिश की मार झेलती थी । घर की हालत इतनी खराब थी कि कई बार उसे उधार लेकर घर चलाना पड़ता था ।
⇒ फिर भी उसने अपने मन में एक सपना पाल लिया था – अपने बेटे की शादी पूरे गाँव में सबसे अलग और यादगार बनाने का। एक दिन आखिरकर उसने बड़ा फैसला लिया । उसने सोचा कि अगर अपनी इज्जत बचानी है, तो उसे कर्ज लेना ही पड़ेगा।
⇒ उस रात वह सो नही पाया । उसकी आँखों में चिंता थी, दिल में डर था , लेकिन बेटे के लिए उससे भी ज्यादा प्यार था। उसने तय कर लिया था अब चाहे उसे अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़े या जिंदगी भर मेहनत करनी पड़े , वह अपने बेटे की शादी में कोई कमी नही छोड़ेगा …. और यही फैसला आगे चलकर उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बनने वाला था।
बेटे की खुशी के लिए लिया बड़ा बोझ
⇒ रामलाल ने आखिरकर अपने दिल पर पत्थर रखकर गाँव के साहूकार के पास जाने का फैसला किया। वह जानता था कि साहूकार बहुत ऊँचे ब्याज पर पैसे देता हा, लेकिन उसके पास कोई दूसरा रास्ता नही था। जब वह साहूकार के दरवाजे पर पहुँचा , तो उसके कदम कांप रहे थे और दिल तेजी से धडक रहा था।
⇒ उसने धीमी आवाज में अपनी मजबूरी बताई – मुझे अपने बेटे की शादी करनी है …. थोड़े पैसे चाहिए। साहूकार ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और एक ठंडी मुस्कान के साथ कहा, पैसे तो मिल जाएंगे …. लेकिन कीमत भी चुकानी पड़ेगी।
⇒ साहूकार की शर्ते बहुत कठोर थी। उसने कहा कि अगर समय पर पैसा वापस नही हुआ, तो रामलाल की छोटी सी जमीन और घर दोनों उसके हो जाएंगे । रामलाल के पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन बेटे की खुशी के सामने उसे सब कुछ छोटा लगा।
⇒ उसने काँपते हाथों से कागज पर अंगूठा लगा दिया। उस एक अंगूठे के निशान ने जैसे उसकी पूरी जिंदगी को कर्ज के बोझ में जकड़ दिया। पैसे मिलते ही रामलाल ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी। उसने गाँव में सबसे अच्छा खाना बनवाने का इंतजाम किया, बारात के लिए ढोल – नगाड़े बुलवाए और बेटे के लिए नए कपड़े सिलवाए।
⇒ हर छोटी बड़ी चीज में वह कोई कमी नही छोड़ना चाहता था। गाँव वाले भी हैरान थे कि एक गरीब किसान इतनी धूमधाम से शादी कैसे कर रहा है, लेकिन रामलाल के चेहरे पर सिर्फ एक ही खुशी थी – अपने बेटे की मुस्कान देखने की।
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⇒ शादी का दिन आया और पूरे गाँव में रोशनी और खुशियों का माहौल था। मोहन दूल्हा बनकर बहुत खुश था, और बारात बड़े धूमधाम से निकली हर कोई उस शादी की तारीफ कर रहा था , लेकिन उस भीड़ में एक आदमी ऐसा भी था , जिसके दिल में तूफान चल रहा था – वह था रामलाल ।
⇒ बाहर से वह मुस्कुरा रहा था ,हाँलकी अंदर ही अंदर उसे पता था कि यह खुशी बहुत भारी कीमत पर आई है। रात को जब सारी रस्में खत्म हो गई और मेहमान चले गए , तो रामलाल अकेले आँगन में बैठा था। उसके हाथ में वही कागज था, जिस पर उसने साहूकार के सामने अंगूठा लगाया था।
⇒ उसकी आँखों में आँसू थे, और दिल में एक अजीब सा डर था – क्या वहीस कर्ज को कभी चुका नही पाएगा ? क्या यह खुशी उसके परिवार को बर्बादी की तरफ ले जाएगी ? उस रात को खामोशी मे सिर्फ उसकी सिसकियाँ गूंज रही थी , और उसे पहली बार एहसास हुआ कि उसने अपने बेटे की खुशी के लिए कितना बड़ा बोझ अपने सिर पर ले लिया है।
अपनों का बदलता व्यवहार
⇒ शादी के कुछ दिनों बाद मोहन और उसकी पत्नी के व्यवहार में धीरे धीरे बदलाव आने लगा । पहले जो बेटा अपने बाप के साथ बैठ कर बाते करता था , अब वही उससे दूरी बनाने लगा । बहु भी घर के हालात देखकर खुश नही थी और अक्सर ताने मारती – इस गरीब घर में मेरा दम घुटता है।
⇒ मोहन अपनी पत्नी की बातों में आकर बदलने लगा और जब उसे अपने बाप की मेहनत और त्याग नजर नही आते थे । रामलाल सब कुछ चुपचाप देखता रहता, क्योंकि उसके लिए बेटे कीे खुशी ही सबसे बड़ी थी।
⇒ उधर कर्ज का बोझ दिन ब दिन बढ़ता जा रहा था। साहूकार बार – बार घर आकर पैसे माँगता और धमकी देता कि अगर समय पर पैसा माँगता और धमकी देता कि अगर समय पर पैसा नही मिला , तो वह घर और जमीन दोनों छीन लेगा । रामलाल दिन – रात खेतों मे मेहनत करता, लेकिन उसकी कमाई इतनी नही थी कि वह बढ़ते हुए ब्याज को चुका सके।
⇒ उसकी सेहत भी अब जवाब देने लगी थी – कमजोर शरीर , थकी हुई आंखे और चेहरे पर गहरी चिंता की लकीरें साफ दिखती थी। सबसे ज्यादा दर्द उसे तब हुआ , जब एक दिन उसने अपने बेटे से मदद माँगी।
⇒ कांपती आवाज में उसने कहा, बेटा , अब यह कर्ज अकेले नही चुकाया जा रहा …. थोड़ा साथ दे दे। लेकिन मोहन ने नजरे फेर ली और ठंडे स्वर में कहा, यह कर्ज अपने लिया था , अब आप भी संभालिए । यह सुनकर रामलाल का दिल जैसे टूट गया।
⇒ जिस बेटे के लिए उसने सबकुछ दांव पर लगा दिया था, आज वही उससे मुंह मोड चुका था। उस दिन रामलाल पहल बार अंदर से पूरी तरह टूट गया…..
कर्ज , तन्हाई और टूटता दिल
⇒ दिन बीतते गए और रामलाल की हालत और भी खराब होती चली गई । कर्ज का व्याज अब इतना बढ़ गया , कि उसे चुकाना उसके बस से बाहर हो चुका था साहूकार पहले से ज्यादा कठोर हो गया था और हर दूसरे दिन घर आकर धमकी देता कि अगर पैसे नही मिले, तो वह सब कुछ छीन लेगा।
⇒ रामलाल दिन – रात मेहनत करता रहा, लेकिन उसका कमजोर शरीर अब उसका साथ नही दे रहा था । एक दिन खेत में काम करते – करते वह बेहोश गिर गया । लेकिन उसके पास कोई नही था जो उसे संभाल सके ।
⇒ घर लौटने पर भी सुकून नही मिला । उसका अपना बेटा जिसके लिए उसने सब कुछ कुर्बान कर दिया था अब वह उससे दूर हो चुका था। बहु भी उसे बोझ समझने लगी थी कई बार रामलाल चुपचाप कोने मे बैठकर अपने पुराने दिनों को याद करता और सोचता – क्या यही वह खुशी थी जिसके लिए उसने अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी?
⇒ उसकी आँखों में आँसू बहते रहते , लेकिन उन्हे पोंछने वाला कोई नही था। वह अब पूरी तरह अकेला पड़ चुका था। एक रात , जब चारों तरफ सन्नाटा था, रामलाल अपने आँगन में बैठा आसमान की तरफ देख रहा था । उसक आँखों में दर्द था, दिल में पछतावा । उसने धीमी आवाज में कहा, शायद मैंने अपने बेटे की खुशी के लिए गलत रास्ता चुन लिया …. कश मैं अपनी हैसियत में ही रहता।
⇒ उसी रात उसकी हालत और बिगड़ गई। अगले दिन सुबह जब लोगों ने देखा , तो रामलाल शांत पड़ा हुआ था- हमेशा के लिए । उसके चेहरे पर एक अजीब सी खामोशी थी , जैसे वह सारे दर्द से मुक्त हो गया हो।
⇒ जब यह खबर मोहन तक पहुंची , तो उसके पैरों तले जमीन खसक गई । वह भागता हुआ आया और अपने बाप के पास बैठकर फुट – फुटकर रोने लगा । उसे एहसास हुआ की जिस बाप ने उसकी खुशी के लिए सब कुछ खो दिया, उसी को उसने अकेले मरने के लिए छोड़ दिया ।
⇒ लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। कर्ज अब भी बाकी था , घर पर खतरा अब भी था और सबसे बड़ी बात – उसका बाप अब कभी लौटकर नही आने वाला था। उस दिन मोहन ने सब कुछ खो दिया ….. और यही स कहानी का सबसे बड़ा दर्द था।