क्या भाग 2 में खूनी रजिस्टर का डरावना खेल खत्म होगा या फिर शुरू होगा एक नया भयानक अध्याय?
भाग 1 में आपने देखा कि रतनगढ़ के पुराने किले में बने गर्ल्स कॉलेज का रहस्य धीरे-धीरे सामने आने लगा था। काव्या ने जैसे ही खूनी रजिस्टर खोला, उसका नाम खून से लिखा जाने लगा और रामदास चौकीदार ने लड़कियों को उस रजिस्टर से दूर रहने की चेतावनी दी।
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चौकीदार के सामने अजय कुमार और उन सभी लड़कियों की डरावनी आत्माएं सामने आ गईं, जिनके चेहरे इस श्राप के कारण बदल चुके थे।
अवनी शर्मा अपने भाई की सच्चाई जानने के लिए कॉलेज पहुंची थी, लेकिन उसे पता नहीं था कि उसका भाई अजय कुमार अब इस दुनिया में नहीं है और उसके पीछे छिपा है मौत और धोखे का सबसे बड़ा रहस्य।
अब अमावस्या की रात फिर लौट चुकी है। पुराने किले की दीवारों से डरावनी आवाजें आने लगी हैं और खूनी रजिस्टर फिर से अपने अगले शिकार की तलाश कर रहा है।
अजय कुमार की अधूरी कहानी, नैना का रहस्य और प्रिंसिपल अशोक सिन्हा का छिपा हुआ सच अब सबके सामने आने वाला है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या अवनी अपने भाई को इस श्राप से मुक्त कर पाएगी?
या फिर खूनी रजिस्टर एक और लड़की का नाम अपने खून से लिख देगा?
तो जानिए कहानी के भाग 2 में खूनी रजिस्टर का सबसे डरावना सच और उस पुराने किले में छिपे भयानक रहस्य।
अमावस्या की भयानक रात और पिशाजों का बदला। Horror Story In Hindi
पुराने लॉकर रूम की दिशा से किसी के धीरे-धीरे हंसने की आवाज आने लगी।
पहले वह आवाज बहुत धीमी थी।
लेकिन कुछ ही पलों में पूरी इमारत में गूंजने लगी।
अवनी शर्मा का दिल तेजी से धड़कने लगा।
उसने डरते हुए रामदास की तरफ देखा।
रामदास का चेहरा बिल्कुल सफेद पड़ चुका था।
उसने कांपती आवाज में कहा –
“बेटी… अब एक भी आवाज मत करना।”
अवनी ने धीरे से पूछा – “क्या वही…?” रामदास ने सिर हिलाकर हां कर दी।
रात के ठीक बारह बज चुके थे। अचानक पूरे कॉलेज की बिजली एक साथ चली गई।
चारों तरफ गहरा अंधेरा फैल गया।
कुछ ही पल बाद पुराने किले की ऊपरी मंजिल पर एक पीली रोशनी अपने आप जल उठी।
वह वही कमरा था, जहां सबसे ऊपर वाली अलमारी में खूनी रजिस्टर रखा था।
अवनी ने पहली बार उस कमरे को ध्यान से देखा।
खिड़की के टूटे हुए शीशों के बीच कोई काली परछाईं धीरे-धीरे गुजरती दिखाई दी।
अवनी की सांस रुक गई।
उसने घबराकर रामदास का हाथ पकड़ लिया।
रामदास ने फुसफुसाकर कहा – “वे जाग चुके हैं…” अचानक पूरे किले में बर्फ जैसी ठंडी हवा चलने लगी।
सूखे पत्ते अपने आप उड़ने लगे।
कॉलेज के आंगन में लगे पुराने पीपल का पेड़ बिना हवा के भी जोर-जोर से हिलने लगा।
तभी दूर कहीं किसी लड़की के रोने की आवाज सुनाई दी।
वह आवाज इतनी दर्द भरी थी कि अवनी के रोंगटे खड़े हो गए।
अवनी ने कहा – “रामदास… यह कौन रो रहा है…?”
रामदास ने धीरे से उत्तर दिया – “जिन्हें दुनिया भूल चुकी है… उनकी आवाज कभी नहीं मरती…”
अचानक पुराने लॉकर रूम का दरवाजा अपने आप खुल गया।
अंदर से काली धुंध बाहर निकलने लगी।
धुंध धीरे-धीरे सीढ़ियों से उतरकर पूरे बरामदे में फैल गई।
खूनी रजिस्टर से बाहर आई कैद आत्माएं

तभी उस धुंध के बीच कई धुंधले चेहरे दिखाई देने लगे।
कुछ लड़कियां सफेद कपड़ों में खड़ी थीं। उनकी आंखें बिल्कुल खाली थीं।
उनके चेहरे पर न मुस्कान थी और न ही गुस्सा।
बस एक अजीब सी उदासी थी। अवनी ने डरते हुए पीछे कदम बढ़ाया।
उसी समय उन सभी लड़कियों ने एक साथ उसकी तरफ देख लिया।
पूरा बरामदा अचानक बिल्कुल शांत हो गया। कुछ पल बाद उन लड़कियों के बीच से एक लड़का धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।
उसका चेहरा धुंध में छिपा हुआ था। उसके कदमों की आवाज पूरे किले में गूंज रही थी।
जैसे-जैसे वह पास आने लगा, अवनी की आंखों से आंसू अपने आप बहने लगे।
न जाने क्यों उसे लग रहा था कि वह उस चेहरे को पहचानती है।
तभी वह धुंध अचानक हट गई। सामने अजय कुमार खड़ा था। लेकिन वह वैसा अजय नहीं था, जैसा तस्वीरों में था।
उसका चेहरा पीला पड़ चुका था।
आंखों के नीचे गहरे काले निशान थे।
फिर भी उसकी आंखों में अपनी छोटी बहन के लिए वही अपनापन बाकी था।
अवनी कुछ पल तक उसे देखती रह गई।
फिर अचानक उसके मुंह से निकला –
“भैया…”
यह सुनते ही अजय कुमार की आंखें भर आईं।
वह आगे बढ़ा। लेकिन अचानक उसके पैरों के पास काली धुंध घूमने लगी।
जैसे कोई अदृश्य ताकत उसे आगे आने से रोक रही हो।
अजय ने बहुत कोशिश की। लेकिन वह अवनी तक नहीं पहुंच सका।
अवनी रोते हुए उसकी तरफ दौड़ने लगी। रामदास ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
रामदास ने कहा – “नहीं बेटी… उनके पास मत जाना…”
अवनी जोर-जोर से रोने लगी।
अवनी ने कहा – “भैया… मैं आपको घर ले चलूंगी…”
अजय कुमार ने दर्द भरी मुस्कान के साथ सिर हिला दिया।
उसने धीमी आवाज में कहा – “अब मेरा घर यहां नहीं है…”
यह सुनकर अवनी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
तभी अंधेरे के बीच किसी लड़की की धीमी हंसी गूंजी।
वह हंसी धीरे-धीरे तेज होने लगी।
अचानक अजय कुमार के पीछे एक लड़की दिखाई दी।
वह नैना थी।
लेकिन अब उसके चेहरे पर इंसानों जैसी कोई भावना नहीं बची थी।
उसकी आंखें लाल चमक रही थीं।
उसने अवनी को देखते हुए मुस्कराकर कहा –
“बहुत देर कर दी तुमने…” अवनी डरकर पीछे हट गई। नैना के पीछे एक-एक करके बाकी गायब हुई लड़कियां भी दिखाई देने लगीं।
कुछ ही पलों में पूरा बरामदा उन सभी पिशाचिनियों से भर गया।
रामदास के सामने अचानक रजिस्टर के सारे पिशाच और पिशाचिनियां खड़ी थीं।
रामदास का शरीर कांपने लगा। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं।
अजय कुमार ने तुरंत नैना की तरफ देखा।
उसकी आवाज पहले से कहीं ज्यादा भारी हो गई।
अजय कुमार ने कहा – “नैना… मेरी बहन को इस श्राप से दूर रखो…” नैना जोर से हंसने लगी।
नैना ने कहा –
“अब यहां आने वाला कोई भी इंसान खाली हाथ वापस नहीं जाता…”
अवनी ने अपने भाई की तरफ देखा।
उसने रोते हुए कहा – “भैया… मैं आपको इस कैद से बाहर निकालूंगी…”
अजय कुमार की आंखों से आंसू की एक बूंद नीचे गिरी।
उसने बहुत धीमी आवाज में कहा – “अवनी… तुम यहां से चली जाओ…” “वरना यह खूनी रजिस्टर तुम्हारा नाम भी लिख देगा…”
“मैं तुम्हें दूसरी बार खो नहीं सकता…”
इतना कहते ही अचानक पुराने लॉकर रूम की दिशा से किसी भारी चीज के गिरने की आवाज आई।
पूरा किला जोर से कांप उठा।
सबकी नजर एक साथ ऊपर चली गई।
सबसे ऊपर वाली अलमारी का दरवाजा अपने आप खुल चुका था।
और उसके अंदर रखा खूनी रजिस्टर धीरे-धीरे अपने आप खुल रहा था।
खूनी रजिस्टर ने नया नाम लिखना शुरू कर दिया
उसके खाली पन्नों पर लाल रंग की एक पतली रेखा अपने आप बनने लगी।
वह लाल रेखा धीरे-धीरे फैलने लगी।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी अदृश्य हाथ ने ताजा खून से लिखना शुरू कर दिया हो।
अवनी शर्मा की नजर उसी पन्ने पर टिक गई।
उसका गला सूखने लगा।
कुछ ही पल बाद उस पन्ने पर पहला अक्षर उभर आया।
“अ…”
अवनी के कदम अपने आप पीछे हट गए। रामदास के चेहरे का रंग उड़ चुका था।
रामदास ने कांपती आवाज में कहा – “हे भगवान… यह फिर से किसी को बुला रहा है…”
पुराने लॉकर रूम के अंदर रखी लोहे की अलमारी जोर-जोर से कांपने लगी।
दीवारों से महीन धूल नीचे गिरने लगी। पूरा कमरा किसी अनदेखी शक्ति से भर गया।
अचानक पूरे बरामदे में बच्चों के हंसने जैसी आवाज गूंजने लगी।
लेकिन वहां कोई बच्चा नहीं था। अवनी ने घबराकर चारों तरफ देखा।
उसकी नजर जहां भी जाती, वहां सिर्फ अंधेरा दिखाई देता।
तभी पुराने किले की सबसे ऊंची मीनार पर बैठे उल्लू ने लगातार तीन बार आवाज निकाली।
रामदास ने तुरंत अपना सिर झुका लिया।
रामदास ने कहा – “आज की रात पहले जैसी नहीं है…”
अजय कुमार लगातार रजिस्टर की तरफ देख रहा था।
उसके चेहरे पर पहली बार डर दिखाई दे रहा था।
अवनी ने रोते हुए पूछा – “भैया… क्या हो रहा है…?” अजय कुमार ने गहरी सांस ली।
उसने बहुत धीमी आवाज में कहा –
“यह रजिस्टर किसी का नाम बिना कारण नहीं लिखता…”
“जब इसके पन्ने अपने आप खुलते हैं…”
“तो किसी की किस्मत बदल जाती है…”
अचानक पूरे कमरे में बहुत तेज ठंडी हवा चलने लगी।
रजिस्टर के सभी पन्ने तेजी से पलटने लगे।
उन पन्नों से सैकड़ों धीमी आवाजें आने लगीं।
कोई रो रहा था। कोई मदद मांग रहा था। कोई अपने घर लौटने की गुहार लगा रहा था।
अवनी ने दोनों कान बंद कर लिए।
लेकिन वे आवाजें उसके मन के भीतर गूंज रही थीं।
रजिस्टर के अंदर कैद उन चेहरों का दर्द

अचानक रजिस्टर के पन्नों से धुएं जैसी काली परत उठने लगी।
उस धुएं के बीच एक-एक करके कई चेहरे दिखाई देने लगे।
वह वही लड़कियां थीं, जो वर्षों पहले इस कॉलेज से गायब हो चुकी थीं।
उनमें से किसी की आंखों में आंसू थे।
कोई दोनों हाथ जोड़कर बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी।
कोई लगातार एक ही बात दोहरा रही थी।
“हमें यहां से निकालो…” अवनी का दिल भर आया।
उसने कांपती आवाज में पूछा – “भैया… क्या ये सभी यहीं कैद हैं…?”
अजय कुमार ने सिर झुका लिया।
उसकी आंखों में दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
अजय कुमार ने कहा – “इनमें से कोई भी यहां अपनी इच्छा से नहीं आया…”
“सबको इस रजिस्टर ने निगल लिया…”
इतने में नैना धीरे-धीरे आगे बढ़ी।
उसके चेहरे पर इस बार पहले जैसी हंसी नहीं थी।
वह कुछ पल तक उन कैद लड़कियों को देखती रही।
फिर उसने धीमी आवाज में कहा – “यह जगह किसी की नहीं सुनती…”
“जो एक बार यहां आ गया…” “वह इस दुनिया और उस दुनिया के बीच फंस जाता है…”
अवनी ने पहली बार नैना की आंखों में पछतावा देखा।
उसे महसूस हुआ कि इस श्राप ने सिर्फ अजय को ही नहीं, नैना को भी बदल दिया है।
तभी रजिस्टर के पन्नों पर बनी लाल रेखा फिर से आगे बढ़ने लगी।
रामदास की धड़कनें तेज हो गईं।
उसने देखा कि इस बार बनने वाले अक्षर पहले से साफ थे।
“अ…”
“व…”
रामदास जोर से चिल्लाया – “नहीं… यह अवनी का नाम लिख रहा है…” अवनी घबरा गई।
वह रजिस्टर से दूर भागना चाहती थी। लेकिन उसके पैर जैसे जमीन से चिपक गए।
रजिस्टर के ऊपर रखी धूल अचानक हवा में उठने लगी।
कमरे की सारी खिड़कियां एक साथ जोर-जोर से बजने लगीं।
अजय कुमार तुरंत आगे बढ़ा।
उसने पूरी ताकत से रजिस्टर का पन्ना बंद करने की कोशिश की।
लेकिन जैसे ही उसका हाथ पन्ने तक पहुंचा, किसी अदृश्य शक्ति ने उसे पीछे धकेल दिया।
अजय कुमार दूर जाकर दीवार से टकराया।
उसकी आंखों में पहली बार बेबसी दिखाई दी।
अजय कुमार ने पूरी ताकत से आवाज लगाई – “अवनी… अपनी नजर उस रजिस्टर से हटा लो…”
“उसकी तरफ मत देखो…”
लेकिन अवनी की आंखें उस पन्ने पर ही जमी रहीं।
उसे ऐसा महसूस होने लगा जैसे कोई अनजानी ताकत उसके मन के भीतर उतर रही हो।
उसी समय पुराने लॉकर रूम के बाहर किसी भारी कदमों की आवाज सुनाई दी।
ठक…
ठक…
ठक…
वह कदम धीरे-धीरे कमरे के दरवाजे तक पहुंच गए। रामदास ने कांपते हुए दरवाजे की तरफ देखा।
दरवाजे के नीचे से एक लंबी काली परछाईं कमरे के अंदर फैलने लगी।
अजय कुमार का चेहरा अचानक बदल गया।
उसने घबराकर फुसफुसाया – “यह… यह नहीं आना चाहिए था…”
काली परछाईं दरवाजे की चौखट पार करके धीरे-धीरे कमरे के भीतर प्रवेश करने लगी…
काली परछाईं ने जैसे ही अपना हाथ रजिस्टर की ओर बढ़ाया, पूरे कमरे में अचानक बर्फ जैसी ठंडी हवा फैल गई।
अवनी शर्मा डर से एक कदम पीछे हटी, लेकिन उसकी नजर अपने भाई अजय कुमार से बिल्कुल नहीं हटी।
अजय कुमार ने जोर से कहा, “अवनी, पीछे हट जाओ। आज जो होने वाला है, उसे कोई इंसान रोक नहीं सकता।”
अचानक रजिस्टर के सभी पन्ने अपने आप तेजी से पलटने लगे। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई अदृश्य शक्ति उन्हें पढ़ रही हो।
कमरे की दीवारों पर अजीब परछाइयां दौड़ने लगीं। हर परछाईं किसी कैद आत्मा की तरह तड़पती हुई दिखाई दे रही थी।
नैना और बाकी पिशाचिनियां अचानक एक साथ रजिस्टर के चारों ओर खड़ी हो गईं। उनके चेहरे पहले से कहीं ज्यादा डरावने दिखाई दे रहे थे।
तभी काली परछाईं ने गहरी आवाज में कहा, “समय पूरा हो चुका है। अब आखिरी फैसला होगा।”
अजय कुमार ने पहली बार उस परछाईं की आंखों में देखकर कहा, “आज फैसला मेरा होगा, तुम्हारा नहीं।”
इतना सुनते ही पूरा कमरा जोर से कांपने लगा। पुरानी अलमारी अपने आप खुल गई और उसके अंदर से वर्षों पुरानी जंजीरों की आवाज आने लगी।
अवनी ने कांपती आवाज में पूछा, “भैया… यह सब आखिर है क्या?”
अजय कुमार ने गहरी सांस ली। उसकी लाल आंखों में पहली बार दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
उसने कहा, “जिस दिन मेरा खून इस रजिस्टर पर गिरा था, उसी दिन यह जाग गया था। लेकिन इसकी शुरुआत मुझसे भी बहुत पहले हो चुकी थी।”
खूनी रजिस्टर की असली शुरुआत
अजय कुमार ने धीरे-धीरे पूरा सच बताना शुरू किया।
“सैकड़ों साल पहले यह किला एक लालची जमींदार का था। उसने अपनी ताकत बचाने के लिए एक तांत्रिक की मदद ली थी।”
“उस तांत्रिक ने इसी रजिस्टर को बनाया। उसने कहा था कि जब तक इसमें नाम लिखते रहेंगे, किला कभी उजड़ेगा नहीं।”
“लेकिन कीमत बहुत बड़ी थी। हर कुछ समय बाद एक मासूम जान इस रजिस्टर को चाहिए होती थी।”
अवनी की आंखें फैल गईं।
“फिर क्या हुआ भैया?”
अजय ने कहा, “जमींदार तो मर गया, तांत्रिक भी खत्म हो गया, लेकिन यह रजिस्टर कभी खत्म नहीं हुआ।”
“वर्षों तक यह बंद पड़ा रहा। जब इस किले को कॉलेज बनाया गया, तब मजदूरों को यह पुरानी अलमारी मिली।”
“किसी ने इसे साधारण रजिस्टर समझकर यहीं रख दिया।”
रामदास चुपचाप सब सुन रहा था। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।
उसने कहा, “मैंने पहली बार इसे बारह साल पहले खुलते देखा था। उसी दिन पहली लड़की गायब हुई थी।”
अजय ने उसकी ओर देखा।
“रामदास काका, आपने हमेशा सबको बचाने की कोशिश की। आपकी कोई गलती नहीं थी।”
रामदास रो पड़ा।
“बेटा… मैं हर बार हार गया। मैं किसी को नहीं बचा सका।”
अजय ने शांत आवाज में कहा, “आप नहीं हारे थे। असली हार उन लोगों की थी, जिन्होंने सच छिपाया।”
इतना सुनते ही रजिस्टर के अंदर से एक साथ कई लड़कियों के रोने की आवाज गूंज उठी।
अवनी ने देखा कि रजिस्टर के पन्नों पर दर्ज सभी नाम हल्की लाल रोशनी से चमकने लगे थे।
प्रिंसिपल का सबसे बड़ा राज

उसी समय नीचे कॉलेज के मुख्य गेट पर पुलिस की कई गाड़ियां आकर रुक गईं।
गांव के लोग भी बड़ी संख्या में कॉलेज के बाहर जमा होने लगे।
प्रिंसिपल अशोक सिन्हा घबराया हुआ बाहर निकला। उसके चेहरे से पहली बार अहंकार गायब दिखाई दे रहा था।
उसने पुलिस से कहा, “यह सब झूठ है। कॉलेज में कुछ नहीं हुआ।”
लेकिन तभी पूरे कॉलेज की बिजली अपने आप बंद हो गई।
अमावस्या की काली रात में अचानक किले की सबसे ऊपरी खिड़कियां एक-एक करके खुलने लगीं।
गांव वालों ने ऊपर देखा तो उनके चेहरे डर से सफेद पड़ गए।
ऊपरी मंजिल की बालकनी में सफेद कपड़ों में कई लड़कियां खड़ी दिखाई दे रही थीं।
कुछ ही पल बाद वे सभी एक साथ गायब हो गईं।
भीड़ में भगदड़ मच गई।
एक पुलिस अधिकारी ने कांपती आवाज में कहा, “ऊपर कौन है?”
तभी पूरे किले में एक साथ कई लड़कियों की आवाज गूंज उठी।
“हमें इंसानों ने नहीं… लालच ने मारा था…” अशोक सिन्हा के हाथ कांपने लगे।
उसे पहली बार महसूस हुआ कि वर्षों से दबाया गया सच अब उसके सामने खड़ा है।
उधर सबसे ऊपर वाले कमरे में रजिस्टर के बीच वाला पन्ना अपने आप खुल गया।
उस पन्ने पर धीरे-धीरे एक नया वाक्य उभरने लगा।
“आज आखिरी अमावस्या है… अब हर सच दुनिया के सामने आएगा…”
रजिस्टर के पन्नों पर यह वाक्य उभरते ही पूरा कमरा जोर से कांपने लगा। पुरानी अलमारी अपने आप टूटकर जमीन पर गिर गई।
अवनी शर्मा ने अपने भाई अजय कुमार की ओर देखा। पहली बार उसके चेहरे पर बदले से ज्यादा थकान दिखाई दे रही थी।
नीचे कॉलेज परिसर में पुलिस, गांव वाले और कॉलेज का पूरा स्टाफ डर के कारण एक जगह खड़ा था। किसी की हिम्मत ऊपर आने की नहीं हो रही थी।
अचानक किले की सबसे ऊपरी मंजिल से सफेद धुएं का एक बड़ा बादल पूरे आसमान में फैल गया। उसके बीच दर्जनों लड़कियों की परछाइयां दिखाई देने लगीं।
कुछ ही पल बाद वे सभी आत्माएं कॉलेज के मुख्य मैदान में उतर आईं। हर चेहरे पर दर्द था, लेकिन अब किसी की आंखों में क्रोध नहीं था।
पुलिस के जवान कुछ समझ पाते, उससे पहले मैदान में एक साथ कई आवाजें गूंज उठीं। हर आवाज एक ही सच दोहरा रही थी।
“हम गायब नहीं हुई थीं… हमें इस श्राप ने कैद कर लिया था…”
पूरा मैदान सन्नाटे में डूब गया। गांव वालों की आंखों से डर साफ दिखाई दे रहा था।
अशोक सिन्हा पीछे हटने लगा, लेकिन उसके कदम जैसे जमीन से चिपक गए थे।
तभी अजय कुमार धीरे-धीरे उसके सामने आकर खड़ा हो गया।
अशोक सिन्हा कांपते हुए बोला, “मुझे छोड़ दो… मैंने जो किया, गलती थी…”
अजय की आवाज पहले जैसी शांत थी।
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“गलती नहीं… लालच था। अगर तुम सच उसी दिन बता देते, तो कोई और लड़की इस रजिस्टर में कैद नहीं होती।”
इतना सुनते ही बाकी आत्माएं भी अशोक सिन्हा को चारों ओर से घेरने लगीं।
नैना सबसे आगे खड़ी थी। उसकी आंखों में वर्षों का पछतावा साफ दिखाई दे रहा था।
उसने कहा, “आज इसे वही दर्द महसूस होना चाहिए, जो हमने सहा था।”
अचानक सभी आत्माएं एक साथ अशोक सिन्हा की ओर बढ़ीं।
उसी क्षण अवनी शर्मा उनके बीच आकर खड़ी हो गई।
अवनी ने ऊंची आवाज में कहा, “नहीं… कोई इसे हाथ नहीं लगाएगा।”
पूरा मैदान एक पल के लिए बिल्कुल शांत हो गया।
अजय ने अपनी बहन की ओर देखा। अवनी की आंखों से आंसू बह रहे थे।
उसने कहा, “भैया… अगर यह आज मर गया, तो दुनिया फिर सच नहीं जान पाएगी। लोग कहेंगे यह भी किसी रहस्य में गायब हो गया।”
वह अशोक सिन्हा की ओर मुड़ी।
“तुम्हें मौत नहीं मिलेगी। तुम्हें जीते जी अपने हर अपराध का जवाब देना होगा। पूरी दुनिया तुम्हारा असली चेहरा देखेगी। यही तुम्हारी सबसे बड़ी सजा है।”
पुलिस अधिकारी आगे बढ़ा और अशोक सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया।
उसी समय कॉलेज के कई पुराने कर्मचारी भी सामने आ गए। वर्षों से छिपे दस्तावेज, रिकॉर्ड और दबाए गए मामलों का सच एक-एक करके बाहर आने लगा।
रामदास ने पुलिस के सामने सब कुछ बता दिया। उसने कोई बात नहीं छिपाई।
नैना धीरे-धीरे अवनी के पास आई।
उसने सिर झुकाकर कहा, “मैंने तुम्हारे भाई के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया था। अगर उस रात मैं झूठ नहीं बोलती, तो शायद यह सब कभी नहीं होता।”
अवनी ने उसकी ओर देखा। उसके मन में दर्द था, लेकिन नफरत नहीं।
अजय कुमार ने पहली बार हल्की मुस्कान के साथ अपनी बहन से कहा, “आज तुमने मुझे बदले से बड़ा रास्ता दिखाया है।”
तभी रजिस्टर के सभी पन्ने अपने आप खुल गए।
उन पर लिखे हर नाम से लाल चमक निकलने लगी।
कमरे में रखी मशाल अचानक नीचे गिर गई।
अवनी बिना डरे आगे बढ़ी।
उसने दोनों हाथों से वह श्रापित रजिस्टर उठाया और जलती हुई मशाल के ऊपर रख दिया।
कुछ ही क्षणों में रजिस्टर आग की लपटों से घिर गया।
पूरा किला जोर-जोर से कांपने लगा।
जैसे-जैसे रजिस्टर जलता गया, वैसे-वैसे हर पन्ने पर लिखा नाम धीरे-धीरे मिटता गया।
अजय, नैना और बाकी सभी आत्माओं के शरीर से काला धुआं निकलने लगा।
उनके चेहरे पहली बार बिल्कुल सामान्य दिखाई देने लगे।
अजय अपनी बहन के सामने आया।
उसने कहा, “अब मुझे जाना होगा।”
अवनी रो पड़ी।
“भैया… इस बार मुझे छोड़कर मत जाओ।”
अजय ने उसके सिर पर हाथ रखा।
“हर रिश्ता साथ रहने से नहीं… याद रहने से भी पूरा होता है।”
धीरे-धीरे अजय, नैना और बाकी सभी आत्माएं उजाले में बदलने लगीं।
कुछ ही पल बाद पूरा मैदान बिल्कुल शांत हो गया।
ऐसा लग रहा था, जैसे वहां कभी कोई था ही नहीं।
कई महीनों बाद अदालत ने अशोक सिन्हा को उसके अपराधों के लिए कठोर सजा सुनाई।
रतनगढ़ महिला महाविद्यालय हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
रामदास अपने गांव लौट गया।
अवनी ने अपने भाई की याद में एक छोटी सी पुस्तकालय खोली, जहां गरीब बच्चों को मुफ्त किताबें मिलने लगीं।
लोगों को लगा कि अब खूनी रजिस्टर की कहानी हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है।
लेकिन…
बरसात की एक रात, उसी पुराने किले के खंडहरों में बिजली जोर से चमकी।
एक पुलिसकर्मी मलबे का निरीक्षण कर रहा था।
अचानक उसे राख के बीच एक आधा जला हुआ पुराना पन्ना दिखाई दिया।
उसने उसे उठाया। पन्ना बिल्कुल ठंडा था।
लेकिन अगले ही पल उस पर अपने आप लाल अक्षर उभरने लगे।
“रजिस्टर जल गया… लेकिन क्या श्राप भी खत्म हुआ?” पुलिसकर्मी के हाथ कांपने लगे।
उसने डरकर वह पन्ना नीचे फेंक दिया।
हवा का तेज झोंका आया।
वह आधा जला पन्ना उड़ता हुआ घने जंगल की ओर चला गया।
और उसी अंधेरे जंगल में… किसी ने बहुत धीमी आवाज में हंसना शुरू कर दिया।
समाप्त… या शायद नहीं।




