रामपुर का एक डरावना गाँव । The Haunted Village Story
श्याम रात के दस बजे दिल्ली के बस अड्डे पहुँचा। रामपुर जाने वाले बस का पता किया तो पता लगा बस साढ़े दस बजे निकलेगी और रात करीब दो बजे रामपुर पँहुच जाएगी। श्याम एक सरकारी ऑफिस मे काम करता था।
उसे कुछ जरूरी काम से रामपुर मे पंचायत ऑफिस जाना था। वह बस मे बैठ गया।
बस अभी खाली थी। दो-चार सवारियां ही बैठी थी।
साढ़े दस बजे बस निकल गई । कंडेक्टर से टिकट लेते समय श्याम ने पुछा-
श्याम- भाई जी रात को बस स्टेंड से गाव के लिए कोई सवारी मिल जाएगी?
कंडेक्टर- मेरी बात मानो तो रामपुर मे मत उतरो आगे शहर मे उतर जाना वहाँ से बीस मील है । वहाँ किसी होटल मे रुक कर सुबह रामपुर जाना।
श्याम- को कंडेक्टर की बात समझ नही आई। वह बोला –
श्याम – नही भाई मुझे तो रामपुर ही जाना है। काम खत्म करके कल ही वापस लौटना है।
बस चल रही थी काफी सवारी बैठी थी। रात करीब ढाई बजे बस रामपुर स्टैंड पर पहुँच गई। श्याम बस से उतर रहा था, तभी उसे कुछ सवारी ने मना किया। लेकिन श्याम नही माना वह बस स्टैंड से उतर गया।
बस स्टैंड बिल्कुल खाली पड़ा था। वह अंदर गया तो टिकट काउंटर पर भी कई नहइ नही था । श्याम वही पास पड़ी एक बैच पर बैठ गया।
श्याम- लगता है यहाँ कोई नही है। रात यही टिकट काउंटर मे बिता लेता हूँ सुबह होते ही गाँव चला जाऊँगा ।
वह टिकट काउंटर के गेट पर पहुंचता है, लेकिन वहाँ ताला लगा हुआ था। श्याम हार कर उसी बैंच पर आकर बैठ गया ।
कुछ दूर पर एक चाय की दुकान थी । वह वहाँ पहुँच जाता है। वहाँ भी कोई नहीं था।
दुकान के अंदर एक बेंच थी श्याम अपना बैग सिर के नीचे लगा कर वही लेट जाता है।
कुछ देर मे उसे किसी के चलने की आहट सुनाई देती है। वह दुकान से निकल कर बाहर देखता हैं , तो एक आदमी कंबल ओढ़े , शायद हाथ मे बीड़ी लिए गाँव की ओर जा रहा था।
श्याम- अरे भैया रुको क्या तुम गाँव मे जा रहे हो?
वह आदमी नही रुका और सीधा चला जा रहा था। श्याम भाग कर उसके पास गया । उसने देखा एक बूढ़ा आदमी जिसका रंग एकदम काला था। श्याम को देख कर वह रुक गया।
आदमी- क्या है मेरा रास्ता क्यों रोका?
श्याम- भाई मुझे भी साथ ले चलो गाँव तक जाना है।
आदमी- इस समय जाना ठीक नही यही सो जाओ सुबह गाव चले जाना ।
श्याम- लेकिन तुम भी तो जा रहे हो। मै तुम्हारे साथ चलता हूँ।
आदमी- ठीक है तुम्हारी मर्जी लेकिन बाद मे मत कहना बताया नहीं था। तुम शहरी लोग किसी बात मानते कहा हो।
चलो । दोनों खेतों के रास्ते से होकर गाँव की ओर चल देते है।
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आदमी- भूत प्रेत मे विश्वास रखते हो?
श्याम- अरे भाई नहीं भूत प्रेत कुछ नही होते।
आदमी- क्या तुम बीड़ी पीते हो?
श्याम– नही। बिल्कुल नहीं
आदमी- मै बीड़ी जला कर देता हूँ इसे हाथ मे पकड़ कर चलो वरना ए खेत भी पार नहीं कर पाओगे हाथ मे आग रहेगी तो सही रहेगा।
श्याम को बड़ा अजीब सा लग रहा था लेकिन उसने उस आदमी की बात मानने मे भी भलाई समझी और जलती हुई बीड़ी अपने हाथ मे ले ली।
आदमी- पीछे से कोई आवाज दे तो पलट कर मत देखना । चाहे कोई भी हो। अमन आदमी के पीछे – पीछे चल रहा था। तभी उसे किसी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी।
श्याम- भाई लगता है कोई बच्ची मुसीबत मे है।
आदमी- तुम मुझे भी मरवाओगे ये सब छलावा है । तुम चुपचाप मेरे पीछे चलो पीछे मत देखना । कुछ दूर आगे जाने पर एक कुआ दिखाई दिया।
श्याम- भाई जी यहाँ पानी पी सकते हैं बहुत प्यास लगी है।
आदमी- नही रात के समय यहाँ रुकना ठीक नही । अगर रुक गए तो गाँववालों को सुबह हमारी लाश ही मिलेगी। चुपचाप चलते रहो।
आदमी- लगता है तुम्हारी बीड़ी बुझ गई। श्याम ने देखा वाकई उसकी बीड़ी बुझ गई थी।
आदमी- तुम्हें किसी साये ने पकड़ लिया है मै अपना हाथ देता हूँ, उसे पकड़ कर मेरे साथ चलो ,मै पीछे मूड कर नही देख सकता ।
श्याम उस आदमी का हाथ पकड़ लेता है। वह आदमी लगभग उसे घसीटता हुआ लेकर चलने लगता है।
कुछ दूर इसी कश्माकश मे चलते -चलते श्याम के पैर हल्के हो जाते हैं।
श्याम- भाई जी अब ठीक है मै चल पा रहा हूँ।
आदमी- तुम्हें पता नही तुम अभी – अभी मौत के मुह से बच कर आ रहे हो, मेरे हाथ मे आग थी जिसने तुम्हें बचा लिया।
कुछ ही देर मे दोनों गाँव पहुँच गए। सुबह होने की थी वह आदमी श्याम को अपने घर ले गया। घर मे उसकी पत्नी थी ।
पत्नी- आपको कितनी बार कहा है रात के समय मत आया कीजिए।
आदमी- मुझे किसी से डर नहीं लगता ये शहरी बाबू डर रहे थे इन्हे भूत ने पकड़ भी लिया था । इन्हे भी छुड़ा लाया । आप बैठो । जा इनके लिए चाय बना ला ।
श्याम– बहुत डरता हुआ बोला ।
श्याम- क्या गाँव के लोग रात को कहीं नहीं जाते?
आदमी- नहीं गाव के बाहर भूतों का पहरा रहता है जो भी गया वापस नही आया।
श्याम- आप कहाँ से आ रहे थे।
आदमी- मई अक्सर अपने बेटे को ढूंढ़ने निकल जाता हूँ वह भी आपकी तरह रात को उस रास्ते पर गया था लेकिन वापस नही आया।
कुछ ही देर मे सुबह हो गई अमन पंचायत घर गया और अपना काम निबटा कर वापस जाने लगा तो वह पहले उस आदमी के घर गया।
श्याम- बाबा माई वापस जा रहा हूँ। आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।
आदमी- बेटा एक वादा करो चाहे कितना भी जरूरी काम हो इस गाँव मे वापस मत आना। लेकिन अब सवाल यह है की जाओगे कैसे?
श्याम- क्यों दिन मे भी नहीं जा सकते क्या?
आदमी- अब तुम इस गाँव वे बाहर नहीं जा सकते तुम्हें यही रहना होगा। मै तुम्हें मना कर रहा था।
यहाँ आने को लेकिन तुम नही माने । रात को उन आत्माओ ने तुम्हें देख लिया अब वे तूम्हारा पीछा छोड़ेंगी यहाँ कुछ नही कर पाई तो तुम्हारे घर तक पहुँच जाएंगी ।
अपने घरवालों की रक्षा करना चाहते हो तो इसी गाँव मे बस जाओ।
श्याम बहुत डर जाता है। गाँव के पीछे एक पुराने मकान मे रहने लगता है। उसे रहते कई महीने बीत जाते है। एक दिन अमन उस आदमी के घर जाकर उसके पैर पकड़ लेता है।
श्याम- बाबा मुझे किसी तरह इस गाँव के बाहर पहुँचा दो। मै अपने घर जाना चाहता हूँ।
आदमी:- तुम इस गाँव मे आना चाहते थे। इस गाँव मे तुम्हारे अलावा और भी कई लोग शहर से आए थे कुछ ने जाने का प्रयास किया मारे गए।
कुछ इसी गाँव मे रहते हैं, लेकिन किसी मे इतनी हिम्मत नही की तुम्हें कुछ बता सके। चुपचाप यहाँ रहो नहीं तो मारे जाओगे ।
गाँव के लोग यहाँ बाहर से आने वाले का पूरा ध्यान रखते है। खाना,पीना, रहने के लिए जगह सब कुछ मिलेगा । इधर श्याम के घर पर उसकी पत्नी और एक बेटी थी। वे श्याम को ढूँढने के लिए कभी पुलिस चौकी जाती, कभी उसके ऑफिस लेकिन श्याम का कोई पता नही लगता।
कुछ दिन मे सरकार मे उसे मृत घोषित कर दिया और उसकी पत्नी को पेंशन देनी शुरू कर दिया। इसी तरह सात साल बीत गए। एक दिन गाँव वाले बाहर नाच रहे थे। तभी श्याम बाहर निकला गाँव वालों ने उसे अपनी खुशी का कारण बताया-
आदमी:- बेटा आज से बारह साल पहले हमारे गाँव मे एक तांत्रिक आया था। उसे गाँव वालों ने मार कर भगा दिया।
तभी से उसने आत्माओ को बुला कर इस गाँव को बांध दिया । कोई भी गाँव से बाहर नही जा सकता है।
अब गाँव मे के एक सच्चे साधु बाबा आए हैं। कल वे पूजा करेंगे जिससे यह गाँव बंधन से खुल जाएगा और सभी आत्माओ को मुक्ति मिल जाएगी।
तुम भी अपने घर जा सकते हो । अगले दिन पूरे गाँव को सजाया गया। साधु और उनके शिष्यों ने गाँव के बीच मे हवन किया।
हवन के समय कई खतरनाक आत्माओ की आवजे गाँव वालों ने सुनी । हवन समाप्त होते-होते सब शांत हो गया।
गाँव अब श्राप मुक्त हो चुका था। श्याम भी साधु बाबा और अन्य लोगों के साथ गाँव से बाहर आ गया। वहाँ से बस लेकर वह अपने घर पहुँच गया। घर पहुँच कर श्याम ने चैन की सांस ली।
श्याम अपने जीवन में कभी इतना भयभीत नहीं हुआ जितना रामपुर गाँव में जाकर हों गया।
बस समझो श्याम को एक नया ही जीवन मिल गया हो । अब वह कभी उस भयानक गाँव के बारे में सोचेगा भी नहीं जाने की तो बहुत दूर।
यह कहानी आपको कैसी लगी प्लीस comment करके जरूर बताए।





