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परिधि का दर्द। पति ने क्यों निकाला धक्के मारकर? भाग 3। Family Story in Hindi

परिधि का दर्द। पति ने क्यों निकाला धक्के मारकर घर से? भाग 3। Family Story In Hindi। Hindirama.com

परिधि का दर्द भाग 2 में आपने पढ़ा, परिधि का गृह प्रवेश हुआ। अगले ही दिन कमला और स्नेहा ने उससे घर का सारा काम करवाना शुरू कर दिया।

परिधि सुबह से रात तक रसोई और घर के कामों में लगी रहती थी। फिर भी उसे ताने मिलते थे। वह समय पर खाना भी नहीं खा पाती थी।

कमला और स्नेहा दिनभर आराम करतीं, लेकिन परिधि पर ही हर जिम्मेदारी डाल देतीं। फिर भी परिधि का सपना एक बड़ी अध्यापिका बनने का कभी नहीं टूटा।

अब भाग 3 और अंतिम भाग में आप जानेंगे, परिधि ने B.Ed. की पढ़ाई दोबारा कैसे शुरू की। जरा सी बात पर स्नेहा ने उसे थप्पड़ क्यों मारा?

क्या बाजार में अपने चचेरे भाई राकेश से मिलना परिधि की सबसे बड़ी गलती बन गया? क्या झूठी तस्वीरों ने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी?

क्या मोहित बिना सच जाने परिधि को घर से निकाल देगा? भगवान ने परिधि को चोरी के झूठे आरोप से तो बचा लिया था, लेकिन उसकी असली परीक्षा अभी बाकी थी।

उसे अपनी B.Ed. की पढ़ाई पूरी करनी थी।

उसका सपना एक सफल शिक्षिका बनने का था। अब परिधि पूरे घर का काम भी करती, अपनी पढ़ाई भी करती और सास, ससुर तथा पति का पूरा ध्यान रखती थी।

स्नेहा अपने ससुराल को छोड़कर कई दिनों से मायके में ही रह रही थी। अब आगे क्या होगा? जानिए अंतिम भाग में की होगा-परिधि का दर्द भाग 3..     

परिधि ने फिर से उठाई अपनी किताब। Family Story In Hindi

सुबह से दोपहर तक परिधि पूरे घर का काम करती रही। उसने रसोई संभाली, सफाई की, कपड़े धोए और सभी के लिए समय पर खाना भी बना दिया।

हरिराम कई बार कहते, “बेटी, थोड़ा आराम भी कर लिया करो। इतना काम अकेले मत किया करो।”

परिधि मुस्कुराकर कहती, “बाबूजी, अभी मुझे बहुत आगे जाना है। मेहनत से डर गई तो अपने सपने पूरे कैसे करूँगी?”

दोपहर का काम खत्म होते ही वह अपने कमरे में गई। उसने अलमारी से B.Ed. की किताब निकाली और पढ़ाई शुरू कर दी।

उसकी आँखों में थकान थी, लेकिन मन में अपने भविष्य की नई उम्मीद भी थी। वह हर अध्याय को ध्यान से पढ़ती और कॉपी में लिखती जाती।

उधर कमला ने कमरे की तरफ देखा तो उसका चेहरा बिगड़ गया। उसे परिधि का पढ़ना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था।

कमला ने स्नेहा से कहा, “देख रही हो, बहू को पढ़ाई की पड़ी है। इसे इतना काम दो कि किताब खोलने का समय ही न मिले।”

स्नेहा मुस्कुराकर बोली, “माँ, आप चिंता मत करो। आज से इसकी पढ़ाई अपने आप बंद हो जाएगी।”

जूस की एक छोटी बात पर स्नेह ने की परिधि की बेइज्जती 

परिधि का दर्द। पति ने क्यों निकाला धक्के मारकर घर से? भाग 3। Family Story In Hindi। Hindirama.com   

अगले दिन परिधि ने फिर सुबह से घर का सारा काम पूरा किया। खाना बनाया, बर्तन धोए और कपड़े सुखाने के बाद थोड़ी देर पढ़ने बैठ गई।

उसे अगले हफ्ते होने वाली परीक्षा की चिंता थी। इसलिए वह पूरे मन से पढ़ाई में लगी हुई थी।

इसी बीच स्नेहा ने अपने कमरे से तेज आवाज़ लगाई, “परिधि, मेरे लिए संतरे का जूस बनाकर लाओ।”

परिधि ने आवाज़ तो सुनी, लेकिन वह पढ़ाई में इतनी डूबी थी कि कुछ देर के लिए जूस बनाना भूल गई।

करीब दस मिनट बाद स्नेहा गुस्से से कमरे में पहुँची। उसने किताब पर हाथ मारते हुए कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बात भूलने की?”

परिधि ने तुरंत किताब बंद की और शांत स्वर में बोली, “माफ करना स्नेहा, मैं पढ़ाई में लग गई थी। अभी जूस बना देती हूँ।”

स्नेहा ने गुस्से में कहा, “तुम्हारी पढ़ाई मेरे किसी काम की नहीं। पहले मेरा काम होगा, फिर तुम्हारी किताब।”

परिधि ने पहली बार सिर उठाकर उसकी तरफ देखा। उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन शब्दों में आत्मसम्मान साफ दिखाई दे रहा था।

उसने कहा, “स्नेहा, जूस तुम भी बना सकती हो। मैं सुबह से पूरे घर का काम कर रही हूँ। मुझे अपनी पढ़ाई भी पूरी करनी है।”

परिधि की यह बात सुनते ही स्नेहा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। कमरे के बाहर खड़ी कमला भी तेज कदमों से अंदर आ गई।

कमला ने गुस्से में कहा, “बहुत ज़बान चलने लगी है। दो दिन पढ़ क्या लिया, अब घरवालों को जवाब देने लगी।”

परिधि ने शांत स्वर में कहा, “माँ जी, मैंने किसी का अपमान नहीं किया। मैं केवल अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हूँ।”

स्नेहा ने ताना मारते हुए कहा, “तुम जैसी बहुएँ किताबें नहीं, सिर्फ़ घर का काम करती हैं। पढ़ाई का सपना भूल जाओ।”

स्नेहा ने खोया अपना धैर्य और भाभी परिधि पर छोड़ा हाथ 

परिधि का दर्द। पति ने क्यों निकाला धक्के मारकर घर से? भाग 3। Family Story In Hindi। Hindirama.com

परिधि ने गहरी साँस ली। वह बोली, “मैं सुबह से रात तक पूरे घर का काम करती हूँ। बस थोड़ा समय अपनी पढ़ाई को देती हूँ।”

इतना सुनते ही स्नेहा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने बिना कुछ सोचे परिधि के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ मार दिया।

थप्पड़ की आवाज़ पूरे घर में गूँज उठी। परिधि कुछ पल के लिए वहीं खड़ी रह गई। उसकी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने पलटकर कुछ नहीं कहा।

उसी समय मुख्य दरवाज़ा खुला। मोहित किसी ज़रूरी सामान के लिए घर वापस आया था। उसने यह पूरा दृश्य अपनी आँखों से देख लिया।

मोहित तेज़ी से आगे बढ़ा। उसने गुस्से में स्नेहा का हाथ पकड़ा और कहा, “तुम्हें किसने हक दिया परिधि पर हाथ उठाने का?”

स्नेहा कुछ बोल पाती, उससे पहले मोहित ने गुस्से में उसे एक थप्पड़ मार दिया। स्नेहा हैरान होकर पीछे हट गई।

कमला यह देखकर आग-बबूला हो गई। उसने ऊँची आवाज़ में कहा, “मोहित, अपनी बहन पर हाथ उठाने की हिम्मत कैसे हुई?”

मोहित ने शांत लेकिन सख्त आवाज़ में कहा, “गलती जिसने की है, उसे समझाना भी ज़रूरी है। परिधि कोई नौकरानी नहीं है।”

हरिराम भी वहाँ आ गए। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा, “मैं कब से कह रहा हूँ कि बहू के साथ इंसानियत से पेश आओ।”

कमला ने हरिराम की बात भी अनसुनी कर दी। उसने स्नेहा को अपने पास बैठाया और परिधि को घूरने लगी।

कमल और स्नेह की बदला लेने की नई साज़िश

उस रात घर में किसी ने ठीक से खाना नहीं खाया। हर कोई अपने-अपने कमरे में चला गया।

कमला और स्नेहा देर रात तक एक कमरे में बैठी रहीं। दोनों के चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।

स्नेहा बोली, “माँ, आज भैया ने पहली बार मेरे ऊपर हाथ उठाया है। इसकी वजह सिर्फ़ परिधि है।”

कमला ने धीरे से कहा, “घबराओ मत। अब ऐसा खेल खेलेंगे कि मोहित खुद परिधि से नफ़रत करने लगेगा।”

दोनों के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। उन्होंने मन ही मन परिधि को सबक सिखाने की ठान ली।

उधर अपने कमरे में बैठी परिधि किताब खोलकर पढ़ने की कोशिश कर रही थी। लेकिन गाल पर पड़े थप्पड़ की जलन और दिल का दर्द उसकी आँखों से आँसू बनकर बह रहा था।

उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि अगले कुछ दिनों में उसकी ज़िंदगी का सबसे कठिन मोड़ आने वाला है।

अगली सुबह परिधि हमेशा की तरह घर का काम पूरा करके बाज़ार जाने लगी। कमला ने उसे कुछ सामान लाने के लिए पैसे दिए।

परिधि चुपचाप बाज़ार पहुँची। सामान खरीदने के बाद वह वापस लौटने ही वाली थी कि पीछे से किसी ने उसका नाम पुकारा।

वह मुड़ी तो सामने एक युवक मुस्कुराता हुआ खड़ा था। परिधि उसे देखते ही हैरान रह गई। वह उसका चचेरा भाई राकेश था।

राकेश ने मुस्कुराकर कहा, “दीदी, कैसी हो? शादी के बाद पहली बार मिल रहा हूँ। तुम बिल्कुल बदल गई हो।”

परिधि की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने कहा, “राकेश, तुम कहाँ थे? शादी में भी नहीं आए।”

राकेश ने शर्माते हुए कहा, “काम की वजह से गाँव से बाहर था। बहुत कोशिश की, लेकिन समय पर पहुँच नहीं पाया।”

परिधि को फँसाने के लिए स्नेहा ने रची नई चाल

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उसी समय थोड़ी दूर खड़ी स्नेहा दोनों को ध्यान से देख रही थी। वह भी बाज़ार आई थी, लेकिन परिधि ने उसे नहीं देखा।

स्नेहा के चेहरे पर एक चालाक मुस्कान फैल गई। उसने अपना मोबाइल निकाला और छिपकर कई तस्वीरें खींच लीं।

एक तस्वीर में राकेश मुस्कुराकर बात कर रहा था। दूसरी तस्वीर में परिधि भी मुस्कुरा रही थी। देखने वाला आसानी से गलत मतलब निकाल सकता था।

स्नेहा मन ही मन बोली, “अब देखती हूँ, भैया तुम्हारा कितना साथ देते हैं।”

परिधि ने राकेश से कहा, “घर में सब ठीक हैं। तुम कभी समय निकालकर हमारे घर भी आना।”

राकेश ने हँसते हुए कहा, “ज़रूर दीदी। इस बार बिना मिले वापस नहीं जाऊँगा।”

दोनों अपने-अपने रास्ते चले गए। परिधि को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि कुछ तस्वीरें उसकी पूरी ज़िंदगी बदलने वाली हैं।

पति मोहित के मन में भर दिया गया ज़हर

शाम को मोहित काम से घर लौटा। उसके आते ही स्नेहा और कमला उसके पास बैठ गईं।

स्नेहा ने बिना कुछ कहे मोबाइल मोहित के हाथ में दे दिया। तस्वीरें देखते ही मोहित का चेहरा बदल गया।

कमला ने बात को और बढ़ाते हुए कहा, “हम तो पहले से कह रहे थे। पढ़ाई के बहाने बाहर जाने का यही कारण था।”

स्नेहा बोली, “भैया, हमने अपनी आँखों से देखा है। दोनों बहुत देर तक हँसकर बातें कर रहे थे।”

मोहित का गुस्सा बढ़ने लगा। उसने एक बार भी यह नहीं सोचा कि पहले परिधि से सच पूछ लेना चाहिए।

उसी समय परिधि घर के अंदर आई। उसके हाथ में बाज़ार का सामान था और चेहरे पर दिनभर की थकान साफ दिखाई दे रही थी।

मोहित ने गुस्से से पूछा, “आज बाज़ार में किससे मिल रही थीं?” परिधि कुछ समझ नहीं पाई। उसने शांत स्वर में कहा, “आप किसकी बात कर रहे हैं?”

मोहित ने मोबाइल उसकी तरफ बढ़ा दिया। तस्वीरें देखकर परिधि एक पल के लिए चौंक गई।

उसने तुरंत कहा, “मैं सब समझा सकती हूँ। पहले मेरी पूरी बात सुन लीजिए।”

लेकिन मोहित का गुस्सा अब उसकी समझ पर भारी पड़ चुका था।

उसने तेज़ आवाज़ में कहा, “अब मुझे किसी सफाई की ज़रूरत नहीं है। मैंने अपनी आँखों से सब देख लिया है।”

परिधि की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने फिर भी शांत होकर कहा, “एक बार मेरी पूरी बात सुन लीजिए। उसके बाद जो फैसला करेंगे, मुझे मंजूर होगा।”

स्नेहा तुरंत बीच में बोली, “भैया, ऐसी बातें करने वाले लोग हमेशा बहाने बनाते हैं। आप इसकी बातों में मत आइए।”

कमला ने भी आग में घी डालते हुए कहा, “आज नहीं रोकोगे तो कल हमारा सिर झुक जाएगा।”

परिधि पर इतना बड़ा झूठा आरोप

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मोहित ने गुस्से में परिधि का हाथ पकड़ लिया। उसने कहा, “आज के बाद तुमसे मेरा कोई रिश्ता नहीं रहा।”

हरिराम तुरंत आगे आए। उन्होंने मोहित का हाथ छुड़ाते हुए कहा, “बेटा, बिना सच जाने इतना बड़ा फैसला मत करो। परिधि ऐसी लड़की नहीं हो सकती।”

मोहित ने पहली बार अपने पिता की बात भी अनसुनी कर दी। उसके मन में शक पूरी तरह घर कर चुका था।

परिधि रोते हुए बोली, “वह मेरा चचेरा भाई है। मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ। एक बार उससे मिल लीजिए।”

स्नेहा हँसते हुए बोली, “देखा माँ, अब नया रिश्ता भी तैयार हो गया।”

कमला ने कहा, “बहुत हो गया। ऐसी बहू इस घर में नहीं रह सकती।”

हरिराम ने फिर समझाया, “कम से कम सच की जाँच तो कर लो। जल्दबाज़ी मत करो।”

लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी।

परिधि के आत्मसम्मान की सबसे कठिन परीक्षा

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गुस्से में मोहित ने परिधि को दरवाज़े की ओर धक्का दे दिया।

संतुलन बिगड़ने से परिधि चौखट से टकरा गई। उसके सिर से खून बहने लगा। दर्द से उसकी आँखें बंद हो गईं।

वह काँपते हुए उठी। दोनों हाथ जोड़कर बोली, “मैंने कोई गलती नहीं की। भगवान के लिए मेरी बात एक बार सुन लीजिए।”

मोहित ने कठोर स्वर में कहा, “आज के बाद इस घर में कभी मत आना। तुम्हारी यहाँ अब कोई जगह नहीं है।”

यह सुनकर परिधि का दिल जैसे टूट गया। उसने एक बार हरिराम की ओर देखा। उनकी आँखें भी आँसुओं से भर चुकी थीं।

हरिराम आगे बढ़े, लेकिन कमला और स्नेहा ने उन्हें रोक लिया। घर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था।

परिधि ने अपने आँसू पोंछे। उसने धीरे से अपने सिर का खून साफ किया और मन ही मन एक वचन लिया।

उसने सोचा, “आज मैं इस घर से खाली हाथ जा रही हूँ, लेकिन अपना आत्मसम्मान साथ लेकर जा रही हूँ।”

“जब तक मेरी सच्चाई सबके सामने नहीं आएगी, मैं इस चौखट पर दोबारा कदम नहीं रखूँगी। यह मेरा अपने आप से किया हुआ वादा है।”

इतना सोचकर परिधि बिना पीछे मुड़े धीरे-धीरे उस घर से चली गई। उसके हर कदम के साथ एक रिश्ता टूटता जा रहा था।

उधर मोहित का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ था। उसने कुछ लड़कों को बुलाकर राकेश को सबक सिखाने की बात कह दी।

राकेश को बिना वजह रास्ते में रोककर उन लड़कों ने उसके साथ मारपीट की। राकेश समझ ही नहीं पाया कि उसकी गलती क्या थी।

किसी तरह वह वहाँ से निकलकर अपने काम पर चला गया। उसे इस बात का बिल्कुल पता नहीं था कि उसके कारण परिधि का घर टूट चुका है।

अचानक सच आया सामने  

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अगले ही दिन मोहित बाज़ार में एक दुकान पर खड़ा था। तभी पीछे से किसी ने मुस्कुराकर आवाज़ लगाई, “अरे जीजू, नमस्ते।”

मोहित ने पीछे मुड़कर देखा तो सामने वही युवक खड़ा था, जिसकी तस्वीर उसने मोबाइल में देखी थी।

मोहित गुस्से से उसकी तरफ बढ़ा, लेकिन राकेश मुस्कुराकर बोला, “जीजू, पहचान नहीं पाए? मैं परिधि दीदी का चाचा का लड़का राकेश हूँ।”

मोहित एकदम चुप हो गया। उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

राकेश ने कहा, “दीदी की शादी में मैं काम की वजह से नहीं आ पाया था। बाद में एल्बम में आपकी तस्वीर देखी थी, इसलिए पहचान गया।”

“परसों अचानक बाज़ार में दीदी मिल गईं तो हालचाल पूछ लिया।

लेकिन मैं घर नहीं आ पाया, क्योंकि कल कुछ लोगों ने पता नहीं क्यों अचानक मुझसे हातापाई करना शुरू कर दी।     

राकेश की हर बात मोहित के दिल में तीर की तरह चुभ रही थी। उसे अपनी सबसे बड़ी भूल समझ आने लगी।

उसे याद आया कि उसने परिधि की एक भी बात नहीं सुनी। उसने बिना सच जाने उस पर भरोसा तोड़ दिया।

मोहित का पछताना और परिधि की B.Ed की पढ़ाई शुरू   

मोहित भारी कदमों से घर पहुँचा। उसने पहली बार कमला और स्नेहा से सख्त आवाज़ में सवाल किए।

हरिराम ने दुखी होकर कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि परिधि ऐसी नहीं हो सकती, लेकिन तुमने मेरी बात भी नहीं मानी।”

घर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था। मोहित पछतावे में डूब गया, लेकिन अब परिधि बहुत दूर जा चुकी थी।

उधर परिधि अपने मायके में थी। उसने अपने आँसू पोंछ लिए थे और अब अपने जीवन को नई दिशा देने का फैसला कर लिया था।

परिधि की B.Ed. की पढ़ाई शादी से पहले ही शुरू हो चुकी थी। शादी के बाद ससुराल की जिम्मेदारियों और लगातार परेशानियों के कारण उसकी पढ़ाई कुछ महीनों तक रुक गई थी।

यह कहानी भी पढ़ें   ⇾  परिधि का दर्द। ससुराल में क्यों मिली सिर्फ़ नफ़रत और अत्याचार? भाग 1। 📖

लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने फिर से अपनी किताबें निकालीं और पूरे मन से B.Ed. की तैयारी शुरू कर दी।

अब उसका एक ही सपना था, अपने पैरों पर खड़े होकर एक सफल शिक्षिका बनना और अपने आत्मसम्मान के साथ नई पहचान बनाना।

दिन बीतते गए। मोहित को अपनी गलती का एहसास हर पल सताने लगा। उसने कई बार परिधि को फोन किया, लेकिन हर बार उसका फोन बिना उत्तर के रह गया।

हरिराम भी कई बार परिधि से बात करना चाहते थे। उन्होंने भी अनेक बार फोन मिलाया, लेकिन परिधि ने किसी का भी फोन नहीं उठाया।

परिधि अब अपने पुराने दर्द को याद करके नहीं रोती थी। उसने अपना पूरा ध्यान केवल अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य पर लगा दिया था।

देखते ही देखते दो वर्ष बीत गए। इस दौरान उसने दिन-रात मेहनत करके अपनी B.Ed. की पढ़ाई पूरी कर ली।

परिधि का सबसे बड़ा सपना हुआ पूरा

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एक सुबह डाकिए ने उसके घर एक सरकारी लिफाफा पहुँचाया। परिधि ने काँपते हाथों से वह लिफाफा खोला।

पत्र पढ़ते ही उसकी आँखों से खुशी के आँसू बह निकले। उसे मुंबई के एक बड़े विद्यालय में शिक्षिका के पद पर नियुक्ति मिल गई थी।

उसकी मेहनत आखिर रंग लाई। आज उसने अपने सपनों की पहली मंजिल हासिल कर ली थी।

पूरे परिवार ने उसे गले लगा लिया। उसके माता-पिता की आँखों में गर्व साफ दिखाई दे रहा था।

कुछ ही महीनों में परिधि ने विद्यालय में अपनी मेहनत और अच्छे व्यवहार से सभी का दिल जीत लिया। बच्चे भी उसे बहुत सम्मान देने लगे।

उधर लगभग चार महीने बाद किसी परिचित से मोहित को यह खबर मिली कि परिधि अब मुंबई के एक बड़े स्कूल में शिक्षिका बन चुकी है।

यह सुनते ही मोहित की आँखें भर आईं। उसे याद आया कि जिस लड़की के सपनों को उसने कभी समझा ही नहीं, उसी ने आज अपनी मेहनत से नई पहचान बना ली।

नारी का आत्मसम्मान सबसे बड़ा होता है

परिधि का दर्द। पति ने क्यों निकाला धक्के मारकर घर से? भाग 3। Family Story In Hindi। Hindirama.com

अगले ही दिन मोहित, हरिराम, कमला और स्नेहा परिधि के मायके पहुँचे।

परिधि ने सभी का सम्मान के साथ स्वागत किया। उसने पानी पिलाया और बैठने के लिए कहा, क्योंकि यही उसके संस्कार थे।

कुछ देर बाद मोहित हाथ जोड़कर बोला, “परिधि, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। अगर हो सके तो मुझे माफ़ कर दो और मेरे साथ घर चलो।”

कमला और स्नेहा ने भी सिर झुकाकर अपनी गलती स्वीकार की। हरिराम की आँखों से आँसू रुक नहीं रहे थे।

यह कहानी भी पढ़ें  ⇾  परिधि का दर्द। क्या परिधि अत्याचार सहकर भी रह पाएगी वहाँ? भाग 2। 📖

परिधि कुछ क्षण शांत रही। फिर उसने धीमे लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, “मैंने आप सबको मन से माफ़ कर दिया है, लेकिन उस घर में अब कभी वापस नहीं जाऊँगी।”

उसने आगे कहा, “मेरा सम्मान इतना छोटा नहीं कि जिस दिन मन हुआ मुझे घर से निकाल दिया और जिस दिन मन हुआ वापस बुला लिया।”

“जिस दिन आपने मेरी बात सुने बिना मुझे दोषी मान लिया, उसी दिन मेरा विश्वास टूट गया था। विश्वास और सम्मान टूट जाएँ तो उन्हें जोड़ना बहुत कठिन होता है।”

“हर बेटी का सम्मान उसके गहनों से नहीं, उसके विश्वास से होता है। जिस घर में विश्वास ही न बचे, वहाँ लौटना अपने आत्मसम्मान को खो देना है।”

मोहित सिर झुकाकर खड़ा रहा। उसके पास अपनी गलती का कोई उत्तर नहीं था।

हरिराम रोते हुए बोले, “बेटी, मैं तुम्हारा दोषी हूँ। मैं चाहकर भी तुम्हें उस दिन बचा नहीं सका।”

परिधि ने उनके चरण छुए और कहा, “बाबूजी, आप कभी दोषी नहीं थे। आपने हमेशा मेरा साथ दिया।”

परिधि ने अंत में मुस्कुराकर कहा, “मैं आज शिक्षिका बन गई हूँ, लेकिन मेरे सपने अभी पूरे नहीं हुए हैं। मैं आगे भी पढ़ना चाहती हूँ, नई डिग्रियाँ हासिल करना चाहती हूँ और अपने ज्ञान से समाज की बेटियों को आगे बढ़ाना चाहती हूँ।”

वह दरवाज़े तक सबको छोड़ने आई। मोहित एक आख़िरी बार उसकी तरफ देखता रहा, जाते-जाते वह परिधि से बोला, परिधि मैं तुम्हारा इंतजार करूँगा अंत तक लेकिन परिधि ने अपने निर्णय से पीछे हटना उचित नहीं समझा।

उस दिन मोहित अपने परिवार के साथ लौट गया। परिधि अपने आत्मसम्मान, शिक्षा और नए जीवन के साथ आगे बढ़ गई।

परिधि का दर्द इस कहानी से सीख

हर पत्नी का सम्मान करना हर पति का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है। बिना सच जाने किसी पर आरोप लगाना पूरे परिवार को तोड़ सकता है।

पत्नी भी अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अधिकार रखती है। शिक्षा, आत्मसम्मान और विश्वास किसी भी रिश्ते से कम नहीं होते।

किसी भी महिला पर हाथ उठाना कभी समाधान नहीं होता। प्यार, धैर्य और बातचीत से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है।

परिधि ने कठिन समय में भी हार नहीं मानी। उसने अपने आत्मसम्मान और मेहनत के दम पर अपना B.Ed. पूरा किया और शिक्षिका बनने का सपना भी सच कर दिखाया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चाई एक दिन जरूर सामने आती है। इसलिए हर फैसला सोच-समझकर और पूरी बात जानने के बाद ही लेना चाहिए।

अब आप अपनी राय जरूर बताइए। क्या परिधि को मोहित के पास वापस जाना चाहिए या अपने आत्मसम्मान के साथ नया जीवन ही चुनना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।

____कहानी समाप्त____

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