धोखे की दुल्हन – अंतिम भाग । मेरा बदला मेरी जीत । emotional story in hindi ।


धोखे की दुल्हन – अंतिम भाग । मेरा बदला मेरी जीत । emotional story in hindi


⇒ रात का समय था। पूरे घर में गहरा सन्नाटा फैला हुआ था। बाहर आसमान में बदल धीरे – धीरे चल रहे थे और हल्की हवा खिड़की से अंदर आ रही थी। लेकिन उस कमरे में बैठी प्रिया की आँखों में नींद नहीं थी।

⇒ उसके दिल में डर था , दर्द और गुस्से का तूफान चल रहा था।

⇒ उसने धीरे से आईने में खुद को देखा। उसके चेहरे पर चोट के काफी निशान अभी भी थे ।  कुछ पल के लिए उसकी आंखे नम हो गई थी ।

⇒ लेकिन अगले ही  पल उसने अपने आँसू पोंछ लिए । क्योंकि आज वो रोने वाली नही थी ….. आज वह फैसला करने वाली थी।

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⇒ शादी के बाद से ही उसकी जिंदगी बदल चुकी  थी। जिस घर को उसने अपना नया संसार समझा था, वह घर उसके लिए कैदखाना बन गया था।

⇒ दिनेश का गुस्सा , उसकी बुरी आदतें और उसकी लालच भरी सोच धीरे – धीरे सामने आने लगी थी।

⇒ कई बार प्रिया ने सोचा था, कि वह अब सब कुछ छोड़कर कहीं दूर चली जाएगी।

⇒ लेकिन हर बार उसने खुद को रोक लिया। क्योंकि उसको पता था कि भागने से समस्या का कोई समाधान नही मिल सकता करना ही होगा।

⇒ एक रात अचानक उसने दिनेश को अपने दोस्तों से बात करते हुए  सुना। उसकी आवाज में अजीब लालच होती थी।

⇒ वो कह रहा था – बस दो दिन और फिर देखना कितने पैसे मिलते हैं।

⇒ प्रिया चुपचाप दरवाजे के पीछे खड़ी होकर सब कुछ सुन रही थी , दिनेश बोल रहा था कि , लड़की बहुत सुंदर हैं अच्छे पैसे मिलेंगे।

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⇒ यह सुनकर प्रिया का दिल टूट गया उसे समझते देर नहीं लगी कि वह किस बारे में बात कर रहा हैं।

⇒ वह अपनी ही पत्नी को पैसों के लिए  बेचना चाहता था, और योजना भी बना चुका था । उस रात प्रिया कि नींद उड़ गई वह पुरी रात बाहर देखते रही ।

⇒ लेकिन सुबह होते – होते उसने मन में नया फैसला जन्म ले चुका था । अब वह चुप नही रहेगी । अगले दिन से उसने चुपचाप सबूत इकट्ठा करना शुरू कर दिया । 

⇒ जब भी दिनेश फोन पर बात करता तो वह उसकी बात रिकॉर्ड कर लेती , हर साजिश अब धीरे – धीरे उसके फोन में रिकॉर्ड होने लगी।

⇒ लेकिन ये लड़ाई वो अकेले नही लड सकती थी। उसे किसी ऐसे इंसान की जरूरत थी जिसपे वो भरोसा कर सके।

⇒ तभी उसे एक इंसान का ख्याल आया उसका नाम – जीत था। जीत वही था उसका सबसे अच्छा दोस्त और साथ ही उसका पहला प्यार था ।

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⇒ हालात ने दोनों को बहुत दूर तो कर दिया , लेकिन उसके दिल में जीत के लिए सम्मान और भरोसा हमेशा बना रहा।

⇒ बहुत सोचने के बाद प्रिया ने उसे एक छोटा सा मैसेज किया ….. अगर तुम सच में मेरे दोस्त हो …. तो मुझे तुम्हारी मदद चाहिए , क्या तुम….।

⇒ कुछ ही मिनटों में जीत का जवाब आया – मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।

⇒ यह मैसेज पढ़कर पहली बार प्रिया का दिल खुशी से भर  उठा और उम्मीद की एक छोटी किरण जगी। उसे लगा कि वह अब अकेली नही है।

⇒ अगले दो दिनों में प्रिया और जीत ने मिल कर एक योजना बनाई , यह योजना इतनी गुप्त थी कि दिनेश को जरा सी भनक नही लगी और ना ही उसको कोई शक हुआ।

⇒ दिनेश अपने लालच में इतना डूब चुका था कि उसके आस पास सब कुछ बदल रहा है।

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⇒ आखिरकर वो दिन आ ही गया जिसका प्रिया बहुत इंतजार कर रही थी।

⇒ उस दिन दिनेश ने अपने कुछ अजनबी दोस्तों को बुलाया ,,,, उन लोगों को देखकर ही समझ आ रहा था कि वो लोग किसी अच्छे इरादे से नहीं आए हैं.।

⇒ प्रिया के दिल की धड़कने तेज होने लगी। लेकिन इस  बार उसके चेहरे पर कोई डर नही था।

⇒ अचानक घर के बाहर एक कार रुकी ,,, दरवाजा खुला था, और कार से जीत निकला ,, जीत के चेहरे पे गुस्सा साफ दिखाई दे  रहा था। वह तेज कदमों से घर के अंदर आया और सीधे दिनेश के सामने खड़ा हो गया।

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⇒ दिनेश ने हँसते  हहुए कहा – तू यहाँ क्या कर रहा है ? जीत बिना घबराए और डरे बिना उसको जवाब दिया कि…. आज सच सामने आने वाला है।

⇒ यह सुनकर दिनेश हंसने लगा उसे लगा जीत उसे सिर्फ डराने  आया है। लेकिन अगले ही पल जीत ने फोन में एक वीडियो चला दिया ।

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⇒ उस वीडियो में दिनेश खुद  अपनी योजना बटा रहा था । वीडियो देखते ही दिनेश के होश उड़ गए । उसके दोस्तों के चेहरे पर भी डर साफ दिखाई  दे रहा था।

⇒ उसी वक्त पुलिस के गाड़ी की आवाज आने लगी । प्रिया ने आगे बढ़कर पुलिस को सारे  सुबूत दिखाए । अब सच सामने आ गया।

⇒ दिनेश गुस्से में चिल्लाता रहा लेकिन अब उसकी आवाज में कोई ताकत नही थी । उस दिन पहली बार महसूस हुआ कि आज वो आजाद हो चुकी है।

⇒ कुछ महीने बीत गए जिंदगी फिर से वैसे हइ सामान्य हो गई। प्रिया ने  अपने सपनों को फिर से जीना शुरू कर दिया।

⇒ उसने अपने अंदर की ताकत को पहचान लिया । उस पूरे समय जीत उसके साथ खड़ा था ।

⇒ उसने कभी उससे कोई सवाल नही किया , बस हर मोड़ पर उसका साथ दिया। एक शम दोनों साथ में नदी के किनारे बैठे थे,, सूरज धीरे – धीरे डूब रहा था और आसमान लाल होने लगा था।

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⇒ प्रिया ने मुस्कुराते  हुए कहा – अगर उस दिन तुम मेरे साथ नही होते तो शायद आज मेरी जिंदगी खत्म हो चुकी होती ।

⇒ जीत ने शांत होकर जवाब दिया- सच्ची दोस्ती वही होती है जो मुश्किल समय मे साथ खड़ा हो।

⇒ प्रिया ने जीत की ओर देखा और बोली – कि शायद हर  इंसान की जिंदगी में एक ऐसा दोस्त  होना चाहिए ।

⇒ जो अंधेरे में भी उसका हाथ पकड़ कर खड़ा हो उसके साथ। उस दिन ही दोनों को एहसास हुआ कि कभी – कभी दोस्ती सच्चा प्यार बन जाती है।

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⇒ उसी पल उनकी जिंदगी का एक नया पल शुरू हुआ, जहाँ डर की जगह भरोसा और अकेलेपन की जगह दोस्ती और सच्चा प्यार।

कहानी  का संदेश 

⇒ जिंदगी  में पैसा और ताकत से ज्यादा जरूरी है,,, सच्चा साथ।

⇒ हमे हमारी जिंदगी में एक ऐसे इंसान की जरूरत होती जो हमे हर मोड़ पर सुरक्षित करे चाहे वह कोई सच्चा दोस्त हो या प्यार ।

⇒ क्योंकि जब जिंदगी में दुनिया साथ छोड़ देगी तब वही एक इंसान हमारी जिंदगी बदल सकता है।

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