एक घने जंगल में कौवे का एक जोड़ा रहता था। दोनों अपने बच्चों से बहुत प्यार करते थे। वे हर दिन उनके लिए दाना लाते और उन्हें खुशी से खिलाते थे।
उनका घोंसला एक पुराने पेड़ की ऊँची डाल पर था। उसी पेड़ के तने में एक गहरा छेद था, जहाँ एक खतरनाक साँप रहता था।
कौवे ने कैसे लिया खतरनाक साँप से बदला? Crow and Snake Story
हर सुबह कौवा और उसकी पत्नी भोजन की तलाश में निकलते थे। जाने से पहले वे अपने बच्चों को प्यार करते और कहते, “हम जल्दी लौट आएँगे।”
माता-पिता के जाते ही बच्चे घोंसले में चहचहाने लगते। जब भी उनके पंखों की आवाज सुनाई देती, वे खुशी से चोंच खोलकर उनका इंतजार करने लगते थे।
कौवे का परिवार हँसी-खुशी रह रहा था। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उसी पेड़ पर रहने वाला साँप उनके लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था।
खतरनाक साँप ने कौवे के बच्चों को खा लिया
एक दिन कौवा और उसकी पत्नी सुबह-सुबह भोजन खोजने निकल गए। उनके जाते ही साँप अपने छेद से बाहर आया और पेड़ पर चढ़ने लगा।
धीरे-धीरे वह डालों तक पहुँचा और घोंसले के पास आ गया। छोटे बच्चे उसे देखकर चहचहाने लगे। उन्हें लगा कि शायद उनके माता-पिता वापस आ गए हैं।
लेकिन वह उनका माता-पिता नहीं, बल्कि खतरनाक साँप था। उसने एक-एक करके कौवे के बच्चों को खा लिया और फिर अपने छेद में जाकर छिप गया।
कुछ देर बाद कौवा और उसकी पत्नी लौटे। घोंसले में बच्चों को न देखकर दोनों घबरा गए। वे इधर-उधर देखने लगे और अपने बच्चों को पुकारने लगे।
कौवे की पत्नी रोते हुए बोली, “हमारे बच्चे कहाँ गए? वे तो यहीं हमारा इंतजार कर रहे थे। कहीं उनके साथ कुछ बुरा तो नहीं हुआ?”
कौवे ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसके पास भी कोई जवाब नहीं था। दोनों ने पेड़ की डालों और आसपास की जमीन पर अपने बच्चों को खोजा।
काफी देर तक खोजने के बाद भी उन्हें बच्चे नहीं मिले। जिस घोंसले में कुछ समय पहले चहचहाहट गूँजती थी, वहाँ अब केवल सन्नाटा था।
कौवे को साँप पर हुआ शक
कौवा दुखी मन से अपने घोंसले के पास बैठा था। तभी उसकी नजर पेड़ के तने में बने छेद पर पड़ी। उसे लगा कि शायद खतरा वहीं छिपा है।
वह चुपचाप एक डाल पर बैठकर छेद को देखने लगा। थोड़ी देर बाद साँप बाहर निकला, इधर-उधर देखा और फिर वापस अपने छेद में चला गया।
कौवे को समझते देर नहीं लगी कि उसके बच्चों के गायब होने के पीछे इसी साँप का हाथ है। उसे बहुत गुस्सा आया और वह साँप से लड़ना चाहता था।
लेकिन अगले ही पल उसने खुद को रोक लिया। वह जानता था कि साँप उससे कहीं अधिक ताकतवर है। सीधे लड़ने पर उसकी जान भी जा सकती थी।
कौवे ने मन ही मन कहा, “मैं गुस्से में कोई गलत कदम नहीं उठाऊँगा। मुझे अपने दिमाग से ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिससे इस साँप से छुटकारा मिल सके।”
उसने अपनी पत्नी को भी सारी बात बताई। दोनों अपने बच्चों को याद करके रोए, फिर उन्होंने तय किया कि अब उन्हें कोई सही रास्ता खोजना होगा।
कौवे के मित्र ने बताया एक अनोखा तरीका
अगली सुबह कौवा अपने एक पुराने मित्र से मिलने गया। उसका मित्र भी जंगल में रहता था और दूसरों की परेशानी सुनकर सही रास्ता खोजने में मदद करता था।
कौवे ने उसे अपने बच्चों के साथ हुई पूरी घटना बताई। उसने कहा, “मेरा मन उस साँप को सबक सिखाने का है, लेकिन मैं उससे लड़ नहीं सकता।”
मित्र ने उसकी बात सुनी और कुछ देर सोचता रहा। फिर बोला, “तुम्हें उससे सीधे लड़ने की जरूरत नहीं है। कोई ऐसा तरीका अपनाओ, जिससे दूसरे लोग तुम्हारी मदद कर सकें।”
कौवे ने पूछा, “लेकिन मेरी मदद कौन करेगा? जंगल में तो कोई भी उस साँप से लड़ने को तैयार नहीं होगा।”
मित्र ने कहा, “पास के राजा के महल में कई सैनिक रहते हैं। अगर वे साँप के छेद तक पहुँच जाएँ, तो शायद तुम्हारी परेशानी दूर हो सकती है।”
कौवे ने हैरानी से पूछा, “लेकिन सैनिकों को उस पुराने पेड़ तक कौन लेकर जाएगा? उन्हें कैसे पता चलेगा कि वहाँ साँप छिपा हुआ है?”
मित्र बोला, “महल से कोई कीमती चीज लेकर उस पेड़ तक पहुँच जाओ। उसके पीछे आने वाले लोग जब साँप को देखेंगे, तो उसे हटाने की कोशिश करेंगे।”
कौवे को यह तरीका अच्छा लगा। उसने अपने मित्र को धन्यवाद दिया और मन ही मन पूरी योजना दोहराई, ताकि मौका मिलने पर कोई गलती न हो।
कौवे ने महल में देखा चमकदार हार
अगली सुबह कौवा जल्दी उठकर महल की ओर उड़ गया। रास्ते में उसने कई पेड़ पार किए और आखिरकार महल के पास एक ऊँची डाल पर बैठ गया।
महल के पास एक सुंदर तालाब था। वहाँ राजा के परिवार के लोग नहाने आते थे। उनके साथ सेवक भी रहते थे, जो कपड़ों और गहनों का ध्यान रखते थे।
कौवा पेड़ पर बैठा सही मौके का इंतजार कर रहा था। तभी उसकी नजर तालाब के किनारे रखे एक चमकदार हार पर पड़ी। वह धूप में खूब चमक रहा था।
कौवे ने सोचा, “अगर मैं इस हार को उठाकर साँप के छेद के पास डाल दूँ, तो सैनिक इसके पीछे जरूर आएँगे।” अब उसे अपनी योजना पूरी करने का मौका मिल सकता था।
वह कुछ देर तक इंतजार करता रहा। जब सेवकों का ध्यान दूसरी ओर गया, तो कौवा तेजी से नीचे आया, हार अपनी चोंच में पकड़ा और उड़ गया।
हार गायब होते ही वहाँ शोर मच गया। एक सेवक चिल्लाया, “अरे, कौवा हार लेकर जा रहा है! जल्दी करो, उसे पकड़ो, वरना हमारा हार खो जाएगा।”
आवाज सुनकर सैनिक तुरंत कौवे के पीछे दौड़े। कौवा जानबूझकर बहुत दूर नहीं उड़ रहा था, ताकि सैनिक उसे देखते रहें और उसका पीछा करते हुए जंगल तक पहुँच जाएँ।
हार के पीछे दौड़ते हुए सैनिक पहुँचे साँप के पास
कौवा कभी किसी पेड़ की डाल पर बैठता और फिर उड़ जाता। सैनिक उसे पकड़ने की कोशिश करते रहे, लेकिन वह हर बार उनसे थोड़ा आगे निकल जाता था।
सैनिकों को लग रहा था कि कौवा किसी घोंसले में हार छिपाने वाला है। वे उसके पीछे भागते रहे। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि कौवा उन्हें एक खास जगह ले जा रहा है।
कुछ देर बाद कौवा उसी पुराने पेड़ के पास पहुँचा, जहाँ साँप रहता था। उसने पेड़ के तने में बने छेद के ठीक पास हार गिरा दिया और उड़कर ऊपर बैठ गया।
थोड़ी देर में सैनिक भी वहाँ पहुँच गए। उन्होंने जमीन पर पड़ा हार देखा और उसे उठाने के लिए आगे बढ़े। तभी छेद के अंदर से आवाज आने लगी।
अचानक साँप ने अपना सिर बाहर निकाला और जोर-जोर से फुफकारने लगा। सैनिक चौंक गए और पीछे हटे। अब उन्हें समझ आया कि वहाँ एक खतरनाक साँप रहता है।
सैनिक हार वापस लेना चाहते थे, लेकिन साँप के कारण उनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल था। उन्होंने एक-दूसरे को देखा और मिलकर साँप को वहाँ से हटाने का फैसला किया।
वे सावधानी से आगे बढ़े। साँप भी गुस्से में बाहर निकल आया और उनकी ओर बढ़ने लगा। सैनिकों ने अपनी रक्षा की और साँप को मारने के लिए उस पर हमला कर दिया।
कौवे की योजना सफल हुई और साँप का अंत हो गया
कुछ देर की कोशिश के बाद सैनिकों ने साँप को मार दिया। अब पेड़ के पास कोई खतरा नहीं था। उन्होंने जमीन पर पड़ा हार उठाया और उसे लेकर महल लौट गए।
सैनिकों को पता ही नहीं चला कि कौवे ने उन्हें जानबूझकर वहाँ तक पहुँचाया था। वे यही समझ रहे थे कि हार का पीछा करते-करते उन्हें साँप का सामना करना पड़ा।
ऊपर बैठा कौवा सब देख रहा था। जब सैनिक वहाँ से चले गए, तो वह धीरे-धीरे अपने घोंसले के पास आया। अब उस पेड़ पर साँप का डर नहीं रहा था।
कौवे की पत्नी ने पूछा, “क्या वह साँप अब कभी हमारे पास नहीं आएगा?” कौवे ने कहा, “नहीं, अब वह हमें और किसी को भी नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा।”
दोनों को अपने बच्चों की याद आ रही थी। वे जानते थे कि उनके बच्चे अब लौटकर नहीं आएँगे, लेकिन कम से कम उस साँप से दूसरे पक्षियों के बच्चों को खतरा नहीं रहेगा।
कौवे ने अपनी पत्नी से कहा, “अगर मैं गुस्से में उससे लड़ने चला जाता, तो शायद हम दोनों भी मुसीबत में पड़ जाते। सही समय पर सही रास्ता चुनना बहुत जरूरी है।”
उस दिन कौवे ने अपने दिमाग से ऐसी योजना बनाई, जिससे वह खुद ताकतवर साँप से लड़े बिना उसे हटाने में सफल हो गया। उसकी पत्नी ने भी उसकी समझदारी की सराहना की।
कहानी से मिलने वाली प्यारी सीख
बच्चो, इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि परेशानी आने पर घबराना नहीं चाहिए। गुस्से में जल्दबाजी करने के बजाय सोचकर कदम उठाना चाहिए, क्योंकि सही रास्ता बड़ी मुसीबत को दूर कर सकता है।
कौवा साँप से छोटा और कमजोर था, फिर भी उसने हार नहीं मानी। उसने अपने मित्र की सलाह ली, सही मौका पहचाना और अपने दिमाग से रास्ता निकाल लिया।
इसलिए जब भी जीवन में कोई मुश्किल आए, तो पहले सोचो, जरूरत पड़े तो किसी भरोसेमंद बड़े से मदद लो और फिर सही कदम उठाओ। कई बार दिमाग और अच्छी सलाह सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं।



