एक छोटी-सी चिड़िया ने कई दिनों की मेहनत से अपना सुंदर घोंसला बनाया था। लेकिन एक दिन उसकी कही हुई बात से बंदर इतना नाराज हो गया कि उसने चिड़िया का पूरा घोंसला ही तोड़ दिया। आखिर चिड़िया ने ऐसा क्या कहा था और बंदर ने उसका घर क्यों उजाड़ दिया? आइए पढ़ते हैं यह मजेदार और सीख देने वाली कहानी।
बारिश में बंदर ने चिड़िया का घोंसला क्यों तोड़ा? Kids Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में बहुत सारे ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे। उन पेड़ों पर कई तरह के पक्षी रहते थे। सुबह होते ही उनकी मीठी आवाज से पूरा जंगल गूंज उठता था।
उसी जंगल के एक बड़े पेड़ पर छोटी-सी चिड़िया अपने साथी के साथ रहती थी। दोनों ने पेड़ की एक मजबूत डाल पर अपना प्यारा-सा घोंसला बनाया था।
घोंसला बनाने के लिए दोनों ने कई दिनों तक मेहनत की थी। वे अपनी छोटी-छोटी चोंच में सूखी घास, पतली टहनियाँ और मुलायम पत्ते लाते थे। फिर उन्हें एक-दूसरे के साथ जोड़कर अपना घर बनाते थे।
धीरे-धीरे उनका सुंदर घोंसला तैयार हो गया। अब दोनों चिड़ियाँ उसमें आराम से रहती थीं। तेज धूप हो या ठंडी हवा, उनका छोटा-सा घर उन्हें हर मौसम में आराम देता था।
जंगल में अचानक तेज बारिश होने लगी
एक दिन सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए हुए थे। कुछ देर बाद ठंडी हवा चलने लगी और देखते ही देखते तेज बारिश शुरू हो गई। जंगल के जानवर बारिश से बचने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
पेड़ों की डालियाँ हवा से हिल रही थीं। चिड़िया और उसका साथी अपने घोंसले में बैठे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी, लेकिन उनका घर उन्हें भीगने से बचा रहा था।
उसी समय एक बंदर जंगल में घूम रहा था। वह कभी एक पेड़ पर चढ़ता तो कभी दूसरी डाल पर कूदने लगता। उसने अपने रहने के लिए कोई घर नहीं बनाया था।
अचानक बारिश और तेज हो गई। बंदर पूरी तरह भीग गया। ठंडी हवा चलने से वह काँपने लगा। उसने सोचा कि कहीं ऐसी जगह मिल जाए, जहाँ बैठकर वह बारिश रुकने का इंतजार कर सके।
बंदर ने आसपास देखा तो उसे एक बड़ा पेड़ दिखाई दिया। वह जल्दी से उसके नीचे जाकर बैठ गया। वहाँ बारिश से कुछ बचाव तो था, लेकिन तेज हवा के कारण वह अब भी भीग रहा था।
चिड़िया ने बंदर को घर बनाने की सलाह दी
जिस पेड़ के नीचे बंदर बैठा था, उसी पेड़ पर चिड़िया का घोंसला बना हुआ था। चिड़िया ने नीचे देखा तो बंदर ठंड से काँप रहा था। उसे बंदर पर दया आ गई।
चिड़िया ने सोचा कि अगर बंदर ने भी अपने रहने के लिए एक छोटा-सा घर बनाया होता तो आज उसे इतनी परेशानी नहीं होती। उसने पेड़ के ऊपर से प्यार से कहा, “बंदर भाई, आप इतने ताकतवर हैं। आपके हाथ-पैर भी मजबूत हैं। आप अपने लिए एक घर क्यों नहीं बना लेते?”
चिड़िया ने आगे कहा, “देखिए, हमने अपनी छोटी-सी चोंच से तिनके और पत्ते जोड़कर यह घोंसला बनाया है। अब बारिश हो रही है, फिर भी हम इसमें आराम से बैठे हैं। अगर आपका भी घर होता तो आपको इस तरह भीगना नहीं पड़ता।”
चिड़िया की बात सुनकर उसका साथी भी नीचे देखने लगा। दोनों को लगा कि बंदर उनकी बात समझ जाएगा और आगे से अपने लिए एक घर बनाने की कोशिश करेगा।
बंदर को चिड़िया की बात बुरी लग गई
लेकिन बंदर पहले से ही ठंड और बारिश के कारण परेशान था। उसे चिड़िया की बात अच्छी नहीं लगी। उसने सोचा कि वह उसका मजाक उड़ा रही है।
बंदर गुस्से से बोला, “तुम अपने काम से काम रखो। मुझे घर बनाना है या नहीं, इससे तुम्हें क्या मतलब? मैंने तुमसे कोई सलाह नहीं माँगी है।”
चिड़िया ने प्यार से जवाब दिया, “बंदर भाई, मैं आपका मजाक नहीं उड़ा रही हूँ। मुझे तो बस आपकी परेशानी देखकर बुरा लगा। अगर आप अपना घर बना लेंगे तो अगली बार बारिश में आपको इतनी तकलीफ नहीं होगी।”
लेकिन बंदर ने उसकी बात समझने की कोशिश नहीं की। वह और गुस्से में आकर बोला, “मुझे कोई सलाह नहीं चाहिए। तुम अपने घोंसले में बैठकर मुझे बार-बार मत समझाओ।”
गुस्से में बंदर ने चिड़िया का घोंसला तोड़ दिया
चिड़िया ने बंदर को फिर समझाने की कोशिश की। उसने कहा, “बंदर भाई, नाराज मत होइए। मैं तो बस आपकी भलाई के लिए कह रही हूँ। अपना घर होगा तो आप भी आराम से रह सकेंगे।”
यह सुनकर बंदर का गुस्सा और बढ़ गया। उसे लगा कि चिड़िया बार-बार उसे छोटा दिखा रही है। उसने गुस्से में ऐसा काम करने का फैसला कर लिया, जिससे चिड़िया को बहुत दुख पहुँचने वाला था।
कुछ देर बाद बारिश थोड़ी कम हुई। बंदर अचानक पेड़ पर चढ़ने लगा। चिड़िया ने उसे अपनी तरफ आते देखा तो वह घबरा गई। उसे समझ नहीं आया कि बंदर उसके घोंसले के पास क्यों आ रहा है।
बंदर तेजी से उस डाल पर पहुँच गया, जहाँ चिड़िया का घोंसला था। उसने गुस्से में घोंसले को पकड़ लिया और उसकी टहनियाँ खींचकर नीचे फेंकने लगा। उसने सूखी घास और पत्ते भी बिखेर दिए।
कुछ ही देर में चिड़िया का सुंदर घोंसला टूटकर नीचे गिर गया। जिस घर को बनाने में दोनों ने कई दिन मेहनत की थी, वह कुछ ही पलों में बिखर गया।
चिड़िया और उसका साथी डरकर उड़ गए। वे पास की दूसरी डाल पर बैठकर अपने टूटे हुए घर को देखने लगे। दोनों बहुत दुखी थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि बंदर ने उनकी छोटी-सी बात के बदले इतना बड़ा नुकसान क्यों कर दिया।
चिड़िया ने फिर से अपना घर बनाया
बंदर अपना गुस्सा दिखाकर पेड़ से नीचे उतर गया और वहाँ से चला गया। उसे चिड़िया के दुख की कोई परवाह नहीं थी। लेकिन चिड़िया और उसका साथी अपने टूटे हुए घोंसले को देखकर उदास थे।
कुछ देर बाद चिड़िया के साथी ने उसे हिम्मत दी। उसने कहा, “हम दुखी होकर बैठे रहेंगे तो हमारा घर वापस नहीं बनेगा। हमें फिर से मेहनत करनी होगी।”
चिड़िया को उसकी बात अच्छी लगी। दोनों ने तय किया कि वे किसी दूसरी सुरक्षित डाल पर अपना नया घोंसला बनाएँगे। उन्होंने फिर से छोटी-छोटी टहनियाँ और सूखी घास इकट्ठी करनी शुरू कर दी।
कुछ समय बाद बारिश पूरी तरह रुक गई। दोनों चिड़ियों ने मिलकर फिर से अपना घर बनाना शुरू किया। इस बार भी उन्होंने पूरी मेहनत की और कुछ ही दिनों में उनका नया घोंसला तैयार हो गया।
अब दोनों फिर से अपने घर में खुशी से रहने लगे। उन्होंने यह भी समझ लिया था कि हर किसी को सलाह देने से पहले उसकी बात सुनने की इच्छा और समय का ध्यान रखना चाहिए।
चिड़िया और बंदर की कहानी से सीख
इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि किसी को भी बिना सोचे-समझे सलाह नहीं देनी चाहिए। अगर हमें किसी की मदद करनी है तो उससे प्यार से बात करनी चाहिए और उसकी बात भी सुननी चाहिए।
साथ ही, हमें छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करना चाहिए। गुस्से में लिया गया फैसला दूसरों को दुख पहुँचा सकता है। बंदर ने गुस्से में चिड़िया का घर तोड़कर बहुत गलत काम किया। इसलिए हमें हमेशा अपनी बात और गुस्से पर काबू रखना चाहिए।





