चोर पकड़ा गया – Akbar Birbal Story In Hindi
⇒ एक दिन की बात है । सुबह का समय था। सूरज की हल्की किरणे महल की संगमरमर की दिवारे पर पड़कर चमक रही थी । महल के अंदर शांति का वातावरण था । अकबर अपने निजी कक्ष में तैयार हो रहे थे, क्योंकि उन्हे दरबार में जाना था ।
⇒ तभी अचानक उनकी नजर अपने गहनो के संदूक पर पड़ी। सन्दूक खुला हुआ था । यह वही हार था जो उनकी बेगम ने उन्हे खास मौके पर दिया था वह केवल एक गहना नही था , बल्कि भावनाओ से जुड़ी एक अनमोल निशानी थी ।
⇒ अकबर का चेहरा गुस्से से लाल हो गया । उन्होंने तुरंत पहरेदारों को बुलाया – महल के सभी दरवाजे बंद कर दिए जाए। जब तक हार नही मिलता, कोई अंदर – बाहर नही जाएगा। पूरे महल में हलचल मच गई।
शक की सुई महल के अंदर
⇒ अकबर जानते थे की महल की सुरक्षा बहुत कड़ी थी। बाहर को कोई व्यक्ति अंदर नही आ सकता था । इसका मतलब साफ था चोरी महल के अंदर ही किसी ने की थी । दरबार लगाया गया । सभी सेवक , दासियाँ , पहरेदार , और कर्मचारी एक लाईन मे खड़े कर दिए गए ।
⇒ सभी के चेहरे पर डर साफ था अकबर ने सख्त आवाज में कहा – जिसने भी चोरी की है- वह खुद सामने आ जाए। उसे कम सजा दी जाएगी । लेकिन अगर हमने उसे पकड़ा , तो सजा बहुत कठोर दी जाएगी । लेकिन पूरा दरबार खामोश रहा ।
⇒ अब , अकबर ने बीरबल की ओर देखा और कहा , बीरबल हमे हमारा हार हर हाल में चाहिए । बीरबल ने शांत स्वर मे कहा, – जहाँपनाह चोर यहीं मौजूद है, और बहुत जल्द पकड़ा जाएगा। दरबार मे कानाफूसी शुरू हो गई, ।
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⇒ बीरबल की योजना – बीरबल ने सभी सेवकों को ध्यान से देखा। किसी के चेहरे पर पसीना दिखाई दे रहा था, कोई सिर झुकाए खड़ा था, कोई सामान्य दिखने की कोशिश कर रहा था लेकिन केवल शक के आधार पर किसी के ऊपर दोष डालना सही नही था ।
⇒ कुछ देर बाद बीरबल ने सोचने के बाद कहा , जहाँपनाह मुझे एक – एक लकड़ी की छड़ी मंगवानी पड़ेगी। छड़ियाँ मँगवाई गई ,, बीरबल ने हर एक सेवक को एक एक छड़ी दी । और कहा, यह छड़ी जादुई है जो चोर होगा उसकी छड़ी दो इंच बढ़ जाएगी।
⇒ यह सुनते ही सभी सेवक घबरा गए । लेकिन असली चोर के पैरों के तले जमीन खिसक गई । चोर की बेचैनी – रात हो गई सभी सेवक अपने – अपने कमरे में चले गए । लेकिन असली चोर सो नही प रहा था । उसके मन मे एक ही बात घूम रही थी ,,,,, अगर छड़ी सचमुच मे बढ़ गई तो मै पकड़ा जाऊँगा ।
⇒ डर के मारे उसके एक फैसला लिया । उसने छड़ी उठई और छड़ी का दो इंच काट दिया । अब उसे लगा की वह बच जाएगा। सच्चयी सामने आई – अलगी सुबह दरबार लगा और सभी सेवक अपनी- अपनी छड़ियाँ लेकर अपनी जगह खड़े हो गए।
⇒ बीरबल ने एक – एक छड़ी को ध्यान से देखा फिर मुस्कुराये ,,,,,, जहाँपनाह चोर पकड़ा गया अकबर ने पुछा कौन है वह ? बीरबल ने एक सेवक की ओर इशारा किया – इसकी छड़ी सबसे छोटी है। वह सेवक कांपने लगा ,,, उसके हाथ से छड़ी गिर गई।
⇒ वह अकबर के चरणों मे गिर पड़ा। हुजूर मुझसे गलती हो गई, लालच में आकर मैंने हार चुरा लिया । पूरा दरबार स्तब्ध रह गया ।
⇒ अकबर का न्याय – अकबर ने हार वापस लिया उन्होंने कहा , लालच इंसान से उसका ईमान छीन लेता है । फिर बीरबल की ओर देख कर बोले – तुमने बिना किसी को मारे – पीते और बिना किसी कठोर सजा के चोर पकड़ लिया । यही सच्चा न्याय है । अकबर ने बीरबल को कीमती उपहार दिया।
⇒ बीरबल की महानता ,, दरबार खत्म होने के बाद लोग बीरबल की बुद्धिमानी की चर्चा करते रहे ! किसी ने सिर्फ बुद्धि ही नही , इन्सान को समझने की कला भी है बीरबल में । यह घटना पूरे राज्य मे फैल गई । अब लोंग कहते थे की जहा अकबर का न्याय और बीरबल की बुद्धिमानी हो , वहां गलत करने वाला बच नही सकता।
कहानी से मिलने वाली सीख
बुद्धि बल से बड़ी होती है ।
अपराधी अपने डर से खुद पकड़ा जाता है।
लालच का परिणाम हमेशा बुरा होता है ।
सच्चा न्याय बिना हिंसा के भी हो सकता है ।