गाँव की प्रेम कहानी – Village Love Story In Hindi
⇒ पुराने समय की बात हैं पहाड़ियों और सरसों के खेतों से घिरा एक छोटा – सा गाँव था — नाम माधवपुर । गाँव मे कच्ची पगडंडिया थी, सुबह – सुबह गौरैया की चहचहाहट होती थी और शाम को तालाब के किनारे ढलता सूरज आसमान को लाल कर देता था।
⇒ एक इसी गाँव की लड़की शहर से पढ़कर वापस आई – उसका नाम था नंदिनी । वह अमीर घर की इकलौती बेटी थी ।
⇒ उसके पिता बड़े जमींदार थे और शहर मे भी उनका बड़ा कारोबार था। नंदिनी ने बड़े कॉलेज मे पढ़ाई करी थी।
⇒ उसका पहनावा सादा था और चाल मे आत्मविश्वास था। और सब गाँव के लोग उसे हैरानी से देखते थे।
⇒ एक सुबह नंदिनी जब खेतों की ओर टहलने गई , हवा मे मिट्टी की खुशबू थी।
⇒ तभी उसकी नजर दूर एक युवक पे पड़ी वह चल रहा था , मगर उसके चेहरे पर थकान नही , बल्कि एक अजीब सी खुशी थी और पास मे ही गाय कहर रही थी।
⇒ और बीच – बीच मे गायों को प्यार से सहला भी देता था ।
⇒ उस लड़के का नाम था अर्जुन गाँव के किसान रामदास का बेटा । अर्जुन पढ़ा लिखा था। उसने कृषि विज्ञान की पढ़ाई की थी।
⇒ पर उसने गाँव लौटकर खेती को ही अपनाया उसको शहर मे नौकरी भी मिल सकती थी ।
⇒ वह अपनी खेती नई – नई तकनीकों से करता था लोगों को यह भी समझता की कम पानी मे भी फसल कैसे हो सकती है।
⇒ गाव के बुजुर्ग लोग भी उसे बहुत सम्मान के नजर से देखा करते और बच्चे उसे अर्जुन भैया कह कर बोलते थे ।
⇒ अब से नंदिनी भी उसी समय खेतों मे जाने लगी जिस समय उसको अर्जुन दिखता , अर्जुन को कभी पौधों की जांच करते देखती तो कभी बीमार बछड़ों की देखभाल करते ।
⇒ उसे हैरानी होती – इतना पढ़ा – लिखा होकर भी यह युवक शहर की चमक – दमक छोड़कर मिट्टी में खुश कैसे है ?
⇒ एक दिन नंदिनी ने हिम्मत करके अर्जुन से बात की। “आप इतनी पढ़ाई करके भी यह गाँव मे खेती कर रहे हैं। उसने पूछा।
⇒ अर्जुन ने उसे जवाब दिया मुसकुराते हुए ,, पढ़ाई का मतलब यह नही की हम अपनी जड़ों को ही भूल जाए खेती ही तो हमारी असली ताकत होती है । उस दिन के बाद अर्जुन और नंदिनी की मुलाकाते बढ़ने लगी।
⇒ वे दोनों तालाब के किनारे बैठकर बाते करते नंदिनी को अर्जुन की सादगी और सच्चयी बहुत ज्यादा ही भाने लगी ।
⇒ और अर्जुन को भी ऐसा ही कुछ एहसास नंदिनी के लिए था। धीरे – धीरे दोनों लोग एक दूसरे के बारे मे दिन – रात सोचने लगे ।
⇒ पर गाँव जैसे जगह मे बाते छिपती कब है, जल्द ही नंदिनी के पिता को सब पता चल गया । वे गुस्से मे भर उठे ।
⇒ उन्होंने कहा ,,, कठोर स्वर मे , कि एक मामूली से किसान का बेटा हमारी बराबरी करेगा अब । और दूसरी ओर अर्जुन के पिता भी बहुत चिंतित थे।
⇒ उन्हे एक बात का डर था की अमीर लोग कभी गरीब लोगों को अपने बराबर का नही मानते हैं।
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⇒ एक दिन दोनों परिवार आमने – सामने आ गए। और उन लोगों के बीच बात जो हुई सिर्फ – जात- पात , ऊंच – नीच , और अमीर – गरीब तक पहुँच गई। माहोल भारी हो चुका था।
⇒ नंदिनी रो पड़ी पर अर्जुन शांत रहा । उसने बस इतना कहा इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है, जन्म से नही।
⇒ समय बीतता गया , अर्जुन ने अपनी मेहनत से खेती मे बहुत बड़ा बदलाव लाया ।
⇒ उसने जैविक खेती शुरू कर दी। नई फसले लगाई और अपनी उपज शहर तक पहुंचाई , कुछ ही सालों मे उसका नाम आस – पास के कई जिलो मे प्रसिद्ध हो गया।
⇒ उसकी मेहनत रंग लाई – वह आर्थिक रूप से भी बहुत सफल व्यक्ति हो गया। गाव के कई लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ।
⇒ अब वही लोग जो पहले उसे एक गरीब किसान के बेटे के नाम से जानते थे उसकी मिसाल देने लगे , नंदिनी के पिता ने भी देखा कि अर्जुन सिर्फ एक किसान नही बल्कि दूरदर्शी और होनहार युवक है।
⇒ एक दिन वे खुद अर्जुन के घर गए , और उनकी आवाज मे पहली जैसी कठोरता नही थी। मुझे तुम पर बहुत गर्व है , उन्होंने धीमे आवाज से कहा .।
⇒ अगर मेरी बेटी तुमको पसंद करती है तो मुझे कोई आपत्ति नही ।
⇒ यह सुनकर नंदिनी के आँखों मे खुशी के आसू मे गए , गाँव में सादे ढंग से दोनों का विवाह हुआ ।
⇒ ढोलक बजे, औरतो ने संगीत गाया , और पूरा गाँव खुशी से झूम उठा। नंदिनी ने बह अर्जुन के कामों हाथ बताना शुरू कर दिया ।
⇒ किसानों को नई शिक्षा दी और गाँव को आगे बढ़ाया।
⇒ माधवपुर अब सिर्फ एक गाँव नही रहा। बल्कि मेहनत और सच्चे प्यार की मिसाल बन गया।
⇒ और लोग कहते थे, सच्चे प्यार की वही निशानी जो जात – पात, अमीर -गरीब से ऊपर उठकर दिलों जोड़ दे।