महाभारत का सबसे भयानक और अनसुलझा रहस्य । Ashwatthama Still Alive ?
⇒ महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था। कुरुक्षेत्र की धरती पर चारों ओर केवल विनाश दिखाई दे रहा था। लाखों योद्धाओ का रक्त मिट्टी में समा चुका था। पांडव विजयी थे, लेकिन इस विजय में भी उन्हे कोई खुशी नही थी।
⇒ इसी युद्ध के बाद एक ऐसा रहस्य जन्मा , जसने हजारों वर्षों से लोगो को हैरान कर रखा है।
⇒ यह रहस्य था अश्वत्थामा की अमरता का। कहा जाता है, कि आज भी वह पृथ्वी पर जीवित है और जंगलों , पहाड़ों तथा वीरान स्थानों में भटक रहा है।
⇒ लेकिन आखिरी उसे यह श्राप क्यों मिला ? और क्या सचमुच वह आज भी जीवित है ?
द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा
⇒ अश्वत्थामा महान गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र था। जन्म से ही वह असाधारण शक्तियां का स्वामी माना जाता था। उसके माथे पर एक दिव्य मणि थी, जो उसे रोग, भूख और भय से बचाती थी।
⇒ बचपन से ही अश्वत्थामा ने अस्त्र – शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी। वह कौरवों और पांडवों दोनों का मित्र था, लेकिन समय के साथ उसका झुकाव कौरवों की ओर हो गया।
⇒ दुर्योधन उसे अपना सबसे विश्वसनीय मित्र मानता था। यही कारण था कि महाभारत युद्ध में अश्वत्थामा पुरइ शक्ति से कौरवों के पक्ष में लड़ा। वह झूठ जिसने सब कुछ बदल दिया।
⇒ युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य को हराना लगभग असंभव था। उनकी युद्धकला के सामने बड़े – बड़े महारथी भी टिक नही पाते थे। तब श्रीकृष्ण ने एक योजना बनाई। भीम ने अश्वत्थामा नाम के एक हाथी को मार दिया।
⇒ इसके बाद युधिष्ठिर ने कहा अश्वत्थामा मारा गया। द्रोणाचार्य ने यह सुना तो उनका हृदय टूट गया। उन्हे लगा कि उनका पुत्र अश्वत्थामा मर चुका है। दुख मे डूबकर उन्होंने अपने अस्त्र छोड़ दिए।
⇒ उसी समय धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया। जब अश्वत्थामा को अपने पिता के मृत्यु का समाचार मिला, तो उसके भीतर प्रतिशोध की आग भड़क उठी।
प्रतिशोध की भयानक रात – आधी रात को हुआ सबसे बड़ा अपराध
⇒ महाभारत युद्ध लगभग समाप्त हो चुका था। कौरव सेना नष्ट हो चुकी थी। और दुर्योधन मृत्यु के द्वार पर था।
⇒ दुर्योधन ने अश्वत्थामा को अपनी हार का बदला लेने के लिए उकसाया । क्रोध और दुख से भरा अश्वत्थामा , उसी रात पाँडव शिविर की ओर चल पड़ा।
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⇒ अंधेरी रात थी चारों ओर सन्नाटा था। पांडवों शिविर गहरी नींद मे थी। अश्वथामा ने सोते हुए योद्धाओ पर हमला किया। उसने द्रौपदी के पांचों पुत्रों का वध कर दिया। यह सोचकर की वे पांडव हैं।
⇒ जब सुबह हुई तो पूरे शिविर मे चीख – पुकार मच गई। द्रौपदी अपने पुत्रों के शव देखकर फूट – फूटकर रोने लगी।
श्री कृष्ण का भयंकर क्रोध
⇒ जब श्रीकृष्ण को इस घटना का पता चला , तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने कहा कि युद्ध में शत्रु को मारना वीरता है, लेकिन सोते हुए निर्दोष लोगों की हत्या करना सबसे बड़ा अधर्म है।
⇒ अर्जुन ने अश्वत्थामा का पीछा किया। दोनों के बीच भयंकर संघर्ष हुआ। जब अश्वथामा को लगा कि वह हार जाएगा , तब उसने अपना सबसे बड़ा अस्त्र प्रयोग किया।
ब्रह्मास्त्र का विनाशकारी प्रयोग
⇒ अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़ दीये। यह ऐसा अस्त्र था जो पुरइ पृथ्वी का विनाश कर सकता था।
⇒ अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। दोनों दिव्य अस्त्रों की टक्कर से प्रकृति कांप उठी। आकाश में भयानक प्रकाश फैल गया।
⇒ ऋषि व्यास और नारद तुरंत वहाँ प्रकट हुए। उन्होंने दोनों योद्धाओ को अस्त्र लेने का आदेश दिया। अर्जुन ने अपने अस्त्रों को वापस बुला लिया, लेकिन अश्वत्थामा ऐसा नही कर सका। उसके पास वह वह विद्या नहीं थी।
⇒ तब उसने अपने अस्त्र पांडव वंश को समाप्त करने के लिए उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया। जहाँ अभिमन्यु का पुत्र पल रहा था।

भगवान श्री कृष्ण का श्राप – अश्वत्थामा की अमरता जो वरदान नही श्राप बन गई
⇒ श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से गर्भ में पल रहे बालक की रक्षा कर ली। वही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित बना । अश्वथामा का यह कृत्य देखकर श्रीकृष्ण का क्रोध चरम पर पहुँच गया।
⇒ उन्होंने कहा कि जिसने निर्दोष बच्चों की हत्या की और अजन्मे शिशु को मारने का प्रयास किया, वह क्षमा के योग्य नही है।
⇒ श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के माथे से दिव्य मणि निकाल ली। मणि निकलते ही उसके माथे से रक्त बहने लगा।
⇒ इसके बाद श्री कृष्ण ने उसे श्राप दिया कि वह हजारों वर्षों तक पृथ्वी पर भटकता रहेगा।
⇒ उसके घाव कभी नही भरेंगे और न शांति। वह लोगों से दूर जंगलों और वीरान स्थानों में अकेला भटकेगा ।
क्या आज भी जीवित है अश्वत्थामा ?
⇒ यही वह प्रश्न है जिसने सदियों से लोगों की उत्सुकता बढ़ा रखी है।
⇒ भारत के कई क्षेत्रों में यह मान्यता है कि अश्वत्थामा आज भी जीवित है कुछ लोग दावा करते हैं कि उन्होंने एक रहस्यमय व्यक्ति को देखा है जिसके माथे पर गहरा घाव था।
⇒ कई कथाओ में बताया जाता है कि वह प्राचीन मंदिरों में रात के समय पूजा करने आता है और सूर्योदय से पहले गायब हो जाता है।
⇒ कुछ साधु -संतों का भी दावा रहा है कि उन्होंने जंगलों में एक विचित्र व्यक्ति को देखा, जो अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमय प्रतीत होता था।
घने जंगल में मिला रहस्यमय व्यक्ति
⇒ एक लोगप्रिय कथा के अनुसार कुछ यात्री मध्य भारत के घने जंगलों में रास्ता भटक गए। रात होने पर उन्हे एक लंबा और बलशाली व्यक्ति दिखाई दिया।
⇒ उसके कपड़े पुराने और माथे पर एक बड़ा घाव था जिससे रक्त रिस रहा था।
⇒ उसने यात्रियों को सुरक्षित रास्ता दिखाया , और अचानक घने अंधेरे में गायब हो गया। जब यात्रियों ने आसपास के लोगों को उसका वर्णन बताया, तो कोई लोगों ने कहा कि वह अश्वत्थामा हो सकता है।
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श्रापित अमरता का दर्द व बड़ा दंड
⇒ सामान्यतः लोग अमर होने की इच्छा करते हैं, लेकिन अश्वत्थामा की कहानी बताती है
⇒ कि अमरता हमेशा वरदान नही होती। कल्पना कीजिए कि आपके सभी प्रियजन एक – एक करके संसार छोड़ दें और आप अकेले रह जाएं।
⇒ समय बदलता रहा , सभ्यताएं बने और मिट जाए, लेकिन आप जीवित रहे। यही अश्वथामा का सबसे बड़ा दंड था। उसे मृत्यु नही मिली, लेकिन जीवन भी शांति से नही मिला ।
वह रहस्य आज भी कायम है – आखिर सच क्या है ?
⇒ क्या अश्वत्थामा वास्तव मे आज भी जीवित है ? क्या वह किसी जंगल , पहाड़ या गुफ़ा में भटक रहा है ? क्या लोगों द्वारा देखे जाने वाले रहस्यमय व्यक्ति वास्तव में वही है ? इन प्रश्नों का कोई निश्चित उत्तर आज तक नही मिला है।
⇒ इतिहास , आस्था और लोककथाओ के बीच छिपा यह रहस्य आज भी करोड़ों लोगों को आकर्षित करता है। शायद यही कारण है कि महाभारत समाप्त होने के बाद हजारों वर्ष बाद भी अश्वत्थामा की कहानी लोगों के मन में जीवित है।
⇒ और जब भी कोई वीरान जंगल , प्राचीन मंदिर या रहस्यमयी गुफ़ा की बात करता है, तो एक प्रश्न फिर गूंज उठता है — क्या अश्वत्थामा आज भी पृथ्वी पर भटक रहा है ?
