माँ की आखरी शिकायत – एक दर्द भरी कहानी । emotional stories in hindi
⇒ अपनें पिता की मौत के बाद ,” बेटे नें अपनी माँ को वृद्धाश्रम मे ” छोड़ दिया था । और कभी कबार उनसे मिलने चला जाता था । तभी एक दिन वृद्धाश्रम से फोन आया । कि तुम्हारी माता जी की तबीयत बहुत खराब हैं ।
⇒ एक बार आकर उनसे मिल लों । बेटा वृद्धाश्रम गया तो उसने देखा कि उसकी माँ बहुत बीमार थीं । और शायद वो अपनी जिंदगी के आखरी पड़ाव पर थीं ।
⇒ बेटे नें पूछा , ” माँ मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ?
⇒ माँ नें एक गहरी सांस ली और जवाब दिया । कि बेटा मेहरबानी करके वृद्धाश्रम में कुछ पंखे लगवा देना । और हो सकें तो यहाँ एक फ्रिज भी मँगवा कर रखवा देना । ताकि यहाँ के लोगों का खाना खराब ना हों । इसीलिए कई बार खाना खराब होने की वजह से मुझे भूखा ही सोना पड़ा हैं ।
⇒ तभी बेटे नें आश्चर्यचकित होकर पूछा , ” कि माँ आप इस आश्रम में कितने साल रही ” मगर आपनें मुझे पहले कभी ये सब शिकायत नहीं की , और आज आप जब ये दुनियाँ छोड़कर जाने वाली हों । तो इस आश्रम के लिए इतना प्रेम क्यों ?
⇒ माँ ने जवाब दिया , ” बेटा वो इसलिए कि मैंने तो यहाँ रहते हुए गर्मी , भूख , दर्द और सब कुछ बर्दाश्त कर लिया ” लेकिन जब तुम्हारी औलाद बुढ़ापे में तुम्हें यहाँ छोड़कर जाएगी , ” तो मुझे डर हैं ” कि तुम यह सब नहीं सह पाओगे ।
⇒ इसके बाद उसकी माँ ने ऐसे कई किस्सों के बारे मे बताया कि जब उसने अपने बेटे के लिए धूप छाव नहीं देखी थीं । और एक माँ की हेसियात से पूरी जिम्मेदारी निभाई थीं । और आखिर मे उसकी माँ ने यह सब कहते हुए , ” अपने बेटे को अपने सिने से लगा लिया ” और अचानक कुछ ही देर मे उनकी साँसे थम गई । वह भगवान को प्यारी हो गई ।
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⇒ अब बेटे की आँखों से आँसू नहीं रुक रहे थें । क्योंकि मरने से पहले उसकी माँ ने बेटे की आँखें जो खोल दी थीं । रोता हुआ बेटा बहुत ज्यादा पछताता हुआ अपनी मरी हुई माँ से कह रहा था । कि माँ आपने मेरी आँखें खोलने मे इतनी देर क्यों कर दी ।
⇒ काश आप , ” यह सब मुझे पहले ही समझा देती । तो मैं आपको घर ही ले चलता । और आपकी खूब सेवा करता ‘ माँ ‘ आपने इस आश्रम मे रहकर कितने दुख झेले होंगे ।
⇒ मुझे माफ कर दो माँ , यह सब रोता हुआ वो अपनी मरी हुई माँ से कह रह था ।
⇒ लेकिन अब पछताने से फायदा ही क्या ? अब तो उसकी माँ मर चुकी थीं । अब पछताने के सिवा कुछ भी नहीं बचा था ।
⇒ दोस्तों – वाकई में घर परिवार होते हुए भी अगर हम जेसे लोग अपनी माँ को वृद्धाश्रम मे छोड़ने लगे तो फिर इस जीवन का मतलब ही क्या ? और यह बिल्कुल सच हैं दोस्तों , आज जैसा हम अपने माता – पिता के साथ करेंगे , कल वैसे ही हमारे बच्चे हमारे साथ जरूर करेंगे ।
⇒ इसलिए हमें अपने माता पिता का ध्यान व सेवा सच्चे मन से करनी चाहिए । बुढ़ापे में उनका ध्यान बिल्कुल वैसे हइ रखना चाहिए जैसे – उन्होंने हमारा ध्यान बचपन में रखा था । औलाद को माता – पिता पालते हाँ बड़ा करते हैं। क्योंकि वह सोचते हैं कि बड़े होकर हमारे बच्चे बुढ़ापे में हमारा ध्यान जरूर रखेंगे ।
⇒ लेकिन कुछ बेटे उन्हे बुढ़ापे में मारते हैं , गलत शब्द बोलते हैं । यहाँ तक कि उनको वृद्ध आश्रम तक छोड़ आते हैं । यह सब गलत हैं दोस्तों प्लीज उनकी हमेशा सेवा कीजिए ।
धन्यवाद