यह केवल एक मनगढ़ंत कहानी नहीं, बल्कि श्मशान की दहलीज पर लिखी गई वह रूह कंपा देने वाली खौफनाक सच्चाई है जो किसी के भी जिस्म का सारा खून सुखा दे।
क्या काले जादू की आगी में जलती एक निर्दोष आत्मा कभी आजाद हो पाती है या फिर अंधेरे में छिपा वह भयानक साया आज भी किसी नए शिकार की तलाश में रेंग रहा है?
जानिए इस रूह कंपा देने वाले खौफनाक मंजर की कहानी,काला जादू …
काला जादू की शुरुआत। Mysterious Horror Story
श्रुति बेटा तैयार हुई या नही अभी तक? लड़के वाले आते ही होंगे। बस हो गई माँ, इतनी देर से बाल बांधने की कोशिश कर रही हूँ।
लेकिन आज कुछ भी अच्छा नही लग रहा मुझ पर, तुम मेरे बालों में यह क्लिप लगा दो। अरे बेटा, तुम तो सादगी में भी अच्छी लगती हो।
फ़िर उसकी माँ ने बोला, इधर आ मैं तेरे बाल बाँध देती हूँ।
कुछ देर में दरवाजे के बाहर किसी की आवाज आई। दरवाजा खोला तो उसके देखने वाले लोग खड़े थे बाहर।
लड़के वालों का उन लोगों ने स्वागत किया, उन लोगों ने बोला रिश्ता हमारी तरफ से पक्का है।
पंडित जी को बुलावा कर शुभ मुहूर्त की बात कर ली गई।
शूम श्मशान की कुंडली और काला साया
दोनों की कुंडली मिलवाई गई, लेकिन कुंडली देखते ही पंडित जी कुछ परेशान नजर आने लगे।
उन लोगो ने पुछा, क्या हुआ कुछ परेशानी है? क्या पंडित जी कोई दोष है क्या?
पंडित जी ने कहा, मेरी बात मानो तो बेटी की शादी वहाँ मत करो। उन लोगों ने पुछा, ऐसा क्या है पंडित जी?
उन्होंने कहा कि तुम्हारी बेटी वहाँ खुश नही रहेगी। तुम्हारे लिए यही अच्छा होगा कि शादी के लिए मना कर दो।
क्योंकि वो लोग बहुत हिंसक प्रवृति के लोग हैं। मुझे समझ नही आ रहा कि आखिरकार लड़कों वालों के बारे में पूछूँ तो किससे?
मोहन भाई साहब से पुछा तो वो बोलेंगे कि मैंने रिश्ता करवाया, आँख बंद करके तय करो शादी।
मुझे किसी और से ही बात करनी होगी। कौन है जो उनको जानता है? अरे वो लोग धौलपुर के हैं।
और धौलपुर में आपके एक दोस्त भी तो रहते हैं। आप एक बार उनसे बात करके देखिए।
क्या पता उन्हे लड़के वालों के बारे में कुछ पता हो। श्रुति के बाबा ने अपने दोस्त को लड़के वालों का नाम बता दिया।
और उनके बारे में पुछा, तो उनके दोस्त ने भी रिश्ता करने से साफ मना कर दिया।
सब लोगों ने यही बोला कि अभी भी समय है रिश्ता मना कर दो, अपनी लड़की को इनके घर मत भेजो।
नही तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। लड़का एक नंबर का शराबी, जुआरी है।
जब श्रुति के पिता ने उन लोगों के मुँह से ये सब बात सुनी तो, उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे रिश्ता तोड़ दिया।
दरवाजे पर खौफनाक धमकी और जंग
यह बात लड़के वालों को बर्दाश्त नही हुआ, तो अगली सुबह ही उनके घर वो लोग पहुंचे।
और बोले कि क्या आप यह बताने का कष्ट करेंगे कि यह रिश्ता क्यों मना किया?
रिश्ता तय होने के बाद इस तरह तोड़ देना इज़्ज़तदार लोगों को शोभा नही देता।
अब हम गाँव वालों को क्या बताएंगे कि हमारे लड़के का रिश्ता क्यों टूट गया?
उन्होंने जवाब दिया कि देखिए बहन जी, हमे नही पता था कि आपका बेटा एक नंबर का शराबी, जुआरी है।
और ऐसे लड़के से हम अपनी लड़की की शादी नही करना चाहते हैं।
लड़के की माँ ने कहा, एक आखिरी मौका दे रही हूँ कि रिश्ता मंजूर है कि नही…।
अगर मना किया तो तुम्हारी बेटी मेरे बेटे से क्या, किसी और लड़के से भी शादी करने के लायक नही बचेगी।
हद पार कर दी है आपने तो, अगर कुछ बोल नही रहे तो उसका फायदा मत उठाइए।
श्रुति के पिता ने बोला, अभी इसी वक्त मेरे घर से बाहर निकल जाइए, फिर से कभी मुझे दिखाई मत देना।
लड़के की माँ बहुत गुस्सा हो गई। उसको ये सब बर्दाश्त नही हुआ, और उन्होंने लड़की पर हाथ उठा दिया।
श्रुति के माता-पिता आग बबूले हो गए। उन्होंने धक्का मार कर उन लोगों को घर से बाहर कर दिया।
लड़के की माँ ने बोला, ऐसी बेइज्जती को हम कभी नही भूलेंगे। कान खोल कर सुन लो।
तुम्हारी बेटी की शादी अगर मेरे बेटे से नही, तो अब किसी के साथ नही होगी।
तुमको बहुत घमंड है ना अपनी बेटी की सुंदरता को लेकर!
बहुत लड़ाई-झगड़ा होने के बाद गाँव वालों ने उन लोगों को धक्का मार कर निकाल दिया।
जिंदा लाश बनी श्रुति का भयानक रूप
उसके बाद श्रुति बीमार रहने लगी, उसकी सारी खूबसूरती चली गई। वह बहुत कमजोर हो गई थी।
वह अकेली अंधेरे कमरे में बंद रहती थी, कुछ खाती नही थी।
मानो उसका सारा खून सूख गया हो, उसका शरीर सूखकर कांटा हो चुका हो।
उसकी ऐसी हालत देखकर घरवाले बहुत परेशान रहने लगे। इतनी सुंदर फूल सी बेटी थी हमारी और अब देखो!
श्रुति की माँ ने कहा, मेरी बात मानिए तो किसी पंडित जी को दिखाओ।
जब से उसका रिश्ता टूट गया, तब से उसकी ऐसी हालत हो गई है।
अरे तुम ये सब फालतू की बातों पर ध्यान मत दो, डॉक्टर ने बोला है कि कुछ दिन लगेगा उसको ठीक होने में।
एक दिन श्रुति के लिए एक रिश्ता आया। लड़के वाले इस बार श्रुति को पसंद कर लें तो हम उसका रिश्ता वही कर देंगे।
वैसे भी एक बार उसका रिश्ता टूट चुका है, तो जल्दी उसका रिश्ता कर देते हैं।
वरना आगे चलकर रिश्ता करने में दिक्कत आएगी। उसके पापा ने उसका रिश्ता उस लड़के के साथ तय कर दिया।
उसके लिए एक अच्छा लड़का देखकर शादी के दिन नजदीक आ रहे थे।
श्रुति की तबीयत और ज्यादा बिगड़ते जा रही थी। हर समय अकेले कमरे में बैठी रहती थी।
उसने अपने घरवालों से बात करना भी बंद कर दिया। दीवार की तरफ देखती रहती एकटक में।
जैसे मानो उसको कोई मानसिक बीमारी हो। धीरे-धीरे उसने नहाना भी बंद कर दिया।
और उसके शरीर से किसी मरे हुए जानवर जैसी दुर्गंध आने लगी।
पता नही मेरी बच्ची को क्या हो गया! ऊपर से ये भी मेरी बात नही सुन रहे।
मुझे खुद ही मेरी बच्ची को लेकर कहीं जाना होगा।
खून से सनी रात और तांत्रिक का खौफ
श्रुति की मम्मी उसकी ऐसी हालत देख कर बहुत परेशान हो चुकी थीं।
उसे किसी तांत्रिक के पास ले जाना होगा, लेकिन ऐसे किसी इंसान को नही जानती थीं।
जिससे वह ऐसा इलाज करवा सकें। तभी उसकी एक कॉलेज फ्रेंड उससे मिलने आई।
उसने कहा, नमस्ते आंटी, आपने पहचाना मुझे? हाँ हाँ बेटा, मैं तुमको क्यों नही पहचानूँगी!
आओ आओ बैठो, जाओ श्रुति अपने कमरे में ही है। निधि कमरे में गई।
लेकिन उसकी ऐसी हालत देखकर वह बहुत ज्यादा ही चौंक गई।
श्रुति को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह कितने दिनों से बीमार पड़ी है।
उसके कमरे से आने वाली दुर्गंध निधि के लिए असहनीय थी। उसने कहा, श्रुति यह क्या हो गया?
तुम इतनी कमजोर कैसे हो गई, तुम्हारे कमरे से इतनी दुर्गंध?
श्रुति ने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर से वह दीवार की तरफ घूरने लगी।
वह अपने पैरों को बिस्तर पर मारते हुए दीवार को ही घूरे जा रही थी।
तभी श्रुति की मम्मी उन दोनों के लिए चाय-नाश्ता लेकर आईं।
गर्मी का मौसम था, चाय भी बहुत गरम थी, लेकिन श्रुति ने चाय का कप उठाया।
और एक ही घूँट में गरम-गरम चाय पीकर उसका गला अंदर से पूरा जल गया होगा।
लेकिन उसे तो मानो कोई फर्क नही पड़ा। उसने एक घूँट में चाय पीकर वह बिस्तर पर लेट गई।
चादर ओढ़ कर चेहरा भींच कर लेट गई। निधि को उसका बर्ताव बिल्कुल अच्छा नही लगा।
बहुत अजीब लग रहा था उसको देख कर। वह उसकी मम्मी के साथ बाहर आ गई।
श्रुति ठीक नही है आंटी, इसके ऊपर कोई टोटका किया गया है।
वरना किसी अच्छे-भले इंसान की हालत इतनी खराब अचानक से नही होती।
मेरे बड़े पापा तो हमेशा ऐसी चीजों का उतारा करते हैं।
मैं उसे देख कर समझ गई थी कि उसके साथ ऐसी कोई परेशानी है।
आप श्रुति को लेकर मेरे घर आना और अगर वह आने में कुछ आनाकानी करे।
तो आपके घर के मंदिर में माता रानी का जो सिंदूर रखा होगा, उसका टीका उसे लगा देना।
यह सब बोल कर निधि वहाँ से चली गई। श्रुति की मम्मी को भी उसकी कही हुई सारी बातें समझ आ गईं।
श्रुति की मम्मी ने श्रुति को उठाया और बोलीं कि श्रुति बेटा उठो।
मुझे कहीं बाहर जाना है, तो तुम मेरे साथ चलो, मेरा अकेले जाने का मन नही है।
मुझे बाहर नही जाना। तो क्यों, मेरे साथ चलो! श्रुति ने गुस्से में बोला।
कि तुमको जाना है तो जाओ, नही जाना है तो घर में बैठो। मुझे परेशान मत करो।
उसकी मम्मी समझ गईं, कोई है जो श्रुति को इस घर से बाहर नही जाने दे रहा।
निधि ने जैसा बताया, उसकी मम्मी ने वैसा ही किया।
मंदिर में रखा सिंदूर माता रानी का जो था, उसके माथे पर लाकर लगा दिया।
तो श्रुति का शरीर ढीला पड़ गया।
उबलता खून, आग और आत्मा की चीख
वो जल्दी-जल्दी श्रुति को निधि के घर लेकर चली गईं।
निधि के बड़े पापा ने पहले से ही पूजा की तैयारी कर रखी थी।
उन्होंने आते ही उसके ऊपर गंगाजल छिड़क दिया और उसे अपने पास बैठा लिया।
बहुत भयानक टोटका किया है। तुम्हारी बेटी के ऊपर ऐसा टोटका कि यह दिन-पर-दिन बदसूरत हो जाए।
और किसी बीमारी से मर जाए। अच्छा हुआ जो समय पर आप इसे यहाँ लेकर आ गईं।
वरना अगर एक महीना और बीत जाता तो तुम्हारी बेटी का बचना असंभव था।
लेकिन मेरी बेटी के साथ ये सब किया किसने? आखिर उसने किसका क्या बिगाड़ा है?
उसकी तो किसी से ऐसी दुश्मनी भी नही है। वह सब मैं तुम्हें बाद में बताऊँगा।
पहले इसका निवारण करना जरूरी है। निधि के बड़े पापा ने अपने हाथ में एक नींबू लिया।
और उसके अंदर दो लौंग लगा दीं, लेकिन जैसे ही वह लौंग नींबू के अंदर गईं।
वैसे ही श्रुति बहुत जोर से चिल्लाई। जैसे कोई उसके शरीर पर चाकू से वार कर रहा हो।
मुझे बहुत दर्द हो रहा है, ये तुम क्या कर रहे हो? वह बहुत चिल्ला रही थी।
तो उसकी माँ बहुत ज्यादा ही घबरा गईं। निधि के बड़े पापा ने कहा कि पास मत जाना उसके…।
निधि के बड़े पापा ने नींबू को निचोड़ कर उसको आग में फेंक दिया।
और श्रुति वैसे ही चिल्लाने लगी जैसे उसका शरीर आग में जल रहा हो।
निधि के बड़े पापा ने श्रुति के सिर पर भभूति लगाई, तो श्रुति को वहीं पर भयानक उल्टी होने लगी।
लेकिन उसकी उल्टी के अंदर कुछ काली राख सी निकल रही थी और कुछ लौंग के दाने।
निधि और श्रुति की मम्मी भी यह देखकर हैरान थीं। श्रुति बहुत देर से वहाँ उल्टियाँ करती रही।
और बेहोश होकर गिर पड़ी। निधि के बड़े पापा ने श्रुति के ऊपर गंगाजल छिड़का।
और मंत्र पढ़ा हुआ पानी पीने के लिए दिया। जब उसने वह पानी पी लिया।
तो उसके शरीर से कोई काली आत्मा बाहर निकल रही थी।
श्रुति की मम्मी तो अपनी आँखों पर यकीन ही नही कर पा रही थीं।
कि अभी उनकी बेटी के साथ क्या हुआ। ये सब मेरी बेटी की हालत ऐसी कैसी है बाबा?
अब ठीक तो है ना ये? हाँ, तुम्हारी बेटी अब बिल्कुल ठीक है।
लेकिन तुम अपने घर में हर रोज पूजा-पाठ करना।
और किसी का भी दिया हुआ खाना मत खाना, ना ही किसी अनजान को अपने घर के अंदर आने देना।
अपनी बेटी के लिए एक साल तक घर में हर महीने हवन करवाना।
तो तुम्हारी बेटी के ऊपर फिर कभी कोई खतरा नही आएगा।
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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद बाबा, जो हमारी बेटी को सही-सलामत कर दिया।
उसकी मम्मी ने कहा, मेरी बेटी का ऐसा कौन दुश्मन बन गया है? जो इसकी ऐसी हालत हो गई?
बाबा ने कहा, कुछ साल पहले तुम्हारी बेटी का एक रिश्ता आया था।
जिन लोगों से बहुत लड़ाई हुई थी। कोई तुम्हारे घर आया श्रुति के ऊपर टोटका करने, उसको जान से मारने।
उसके ऊपर टोटका किया कि पहले तो वह अपनी सुंदरता खो दे।
फिर धीरे-धीरे वह अपना दम तोड़ दे और मानसिक संतुलन खो दे।
उन्होंने ही तुम्हारे घर की दहलीज पर तुम्हारी ही बेटी के लिए टोटका किया था।
ये गंगाजल लो, अपने घर की दहलीज पर छिड़क देना।
और पूजा सामग्री के साथ कपूर को वहाँ जला देना। और एक तुलसी का पौधा लगा देना।
तुलसी माँ तुम्हारे घर की रक्षा करेंगी। यह सब सुन कर श्रुति की मम्मी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
दहलीज की मुक्ति और एक अनसुलझा खौफ
वो श्रुति को लेकर घर आईं और जब उन्होंने सारी बातें श्रुति के पिता को बताईं।
तो यह सब कुछ जानकर उनकी आँखों में भी आँसू आ गए।
निधि के बड़े पापा के बताए अनुसार उन्होंने घर की दहलीज पर गंगाजल छिड़क दिया।
पूजा सामग्री के साथ कपूर को जला दिया और वहाँ पर तुलसी माँ की स्थापना की।
तुलसी माँ के रक्षण से उनके घर के भीतर फिर कभी किसी नकारात्मक ऊर्जा ने प्रवेश नही किया।
घर में एक साल हवन होते रहे। भगवान की कृपा से आज श्रुति बिल्कुल ठीक है।
और उसका एक हँसता-खेलता परिवार भी है। यह कोई कहानी नही, बल्कि एक सच्ची घटना है।
कि किस तरह लोग इस हद तक भी गिर सकते हैं। इसलिए हमेशा सावधान रहो।
और कभी भी आपके साथ ऐसा हो, तो जल्द से जल्द इसका निवारण करवा लो।
इंसान इन चीजों को समझने में बहुत देरी कर देता है, और इसी कारण कभी-कभी वह अपना सब कुछ खो बैठता है।
लेकिन क्या सच में वह भयानक साया हमेशा के लिए मिट चुका था?
आज भी जब आधी रात को श्रुति गहरे सपने में सो रही होती है, तो उसके कमरे की सूनी दीवार पर वही पुरानी और भयानक इंसानी परछाईं रेंगती हुई दिखाई देती है!
____कहानी समाप्त ____




