असली माँ कौन है ? अकबर और बीरबल । Moral Story In Hindi । Hindi Stories ।

असली माँ कौन है ? अकबर और बीरबल । Moral Story In Hindi । Hindi Stories । by Hindirama.com

असली माँ कौन है ? अकबर और बीरबल । Moral Story In Hindi

एक सुबह – सुबह दरबार लगा ही हुआ था,  की दो औरते रोटी- बिलखती महल में आ पहुंची । उनके कपड़े धूल से भरे थे । और चेहरे पर घबराहट साफ  नजर आ रही थी, उनके बीच एक छोटा सा बच्चा था, जो  डर के मारे कभी एक औरत की तरफ देखता तो  कभी दूसरी की ओर।

दोनों ह उसे अपनी गोद में लेने की कोशिश कर रही थी ।

दरबार में पहुंचते ही दोनों ने एक साथ कहा जहाँपनाह ,,, हमे न्याय चाहिए। अकबर ने हाथ उठाकर उन्हे शांत किया और एक – एक करके अपनी बात कहनों को कहा । पहली औरत बोली हुजूर यह बच्चा मेरा है ,,, दूसरी ने बोला नही जहाँपनाह ,,, यह बच्चा मेरा है। यह झूठ बोल रही है , मुझे बदनाम करना चाहती है।

दोनों की बात सुनकर दरबार  के सभी लोग हैरान  रह गए , बच्चा इतना छोटा था की वह कुछ बोल भी नही पा रहा था। कोई गवाह भी मौजूद नही था ना कोई, सुबूत जिससे यह साबित हो जाए की यह बच्चा किसका है ?

अकबर ने कुछ देर तक गहरी सोच के बाद मंत्रियों  की ओर देखा , और उनकी राय माँगी, लेकिन कोई  भी सही निर्णय देने की हिम्मत नही कर पाया। आखिरकर अकबर की नजर बीरबल पर पड़ी ,,,, उन्होंने कहा बीरबल अब इस मामले का न्याय तुम्हें ही करना होगा ।

बीरबल धीरे- धीरे उठे और उन दोनों औरतो के पास जा खड़े हुए । उन्होंने उनके चेहरे के भाव को बहुत ही  ध्यान से देखे, । एक औरत की आँखों में दर्द और ममता थी जबकि दूसरी और के चेहरे पर बेचैनी तो थी लेकिन ,, वैसी ममता नही थी। फिर बीरबल जानते थे कि केवल अनुमान के आधार पर न्याय करना उचित नही होगा।

उनोने सैनिक को  आदेश दिया, एक तेज तलवार दरबार में लाओ, तलवार लाते ही दरबार में खुसुर – फुसुर शुरू हो गया। कोई समझ नही पा रहा था कि बीरबल क्या करने वाले हैं । बीरबल ने गंभीर  होके कहा ,,, जब दोनों ही इस बच्चे की माँ खुद को बता रही हैं , और कोई सुबूत भी नहीं हैं।

तो इसका उपाय एक ही है। बच्चे के दो टुकड़े कर दिए जाए और दोनों को आधा – आधा बाँट दिया जाए। यह सुनते  ही सब हैरान हो गए तलवार जैसे ही बच्चे के पास लायी गई , पहली औरत जोर – ओर से रोने लगी वह भागकर बीरबल के पैरों में गिर पड़ी और बोली ,,,,

नही ,,,,, ऐसा मत कीजिए । बच्चे को मत मारिए । इसे दुसर औरत को दे दीजिए , इसके बिना मै जी लूँगी लेकिन इसे जिंदा रहने दीजिए । इसके बिना मै जी लूँगी पर इसे मरते नही देख सकती।

दूसरी औरत  एकदम चुप खड़ी थी और उसके चेहरे पर कोई दर्द  नही था , वह केवल इस बात का इंतजार कर रही थी । वह केवल इस बात का इंतजार कर रही थी  कि फैसला उसके पक्ष में हो जाए।

बीरबल मुस्कुराये और तुरंत सैनिक को तलवार रोकने को आदेश दिया । उन्होंने पहली औरत की ओर इशारा करते हुए कहा, जहाँपनाह यही इस बच्चे की असली माँ है।

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अकबर ने आश्चर्य से पूछा , तुम इतने विश्वास से कैसे बता सकते हो कि, यही इसकी असली माँ हैं। बीरबल ने विनम्रता से उत्तर दिया , जहाँपनाह माँ अपने बच्चे के लिए अपना सब कुछ त्याग देती है, लेकिन उसकी जान जाते हुए नही  देख सकती।

जिसने बच्चे को बचाने के लिए उसको अपने से दूर जाने को बोल दिया वही उसकी सच्ची  माँ हैं। यह सुनते ही पूरा दरबार तालियों से गूंज उठा।

दूसरी औरत झूठ सामने आ गया और उसे दंड दिया गया। बच्चे को उसकी माँ को सौंप दिया गया । वह माँ अपने बच्चे को सीने से लगाकर फूट – फुटकर रोई । उसकी आँखों से खुशी के आँसू रुक ही नही रहे थे।

उस दिन के बाद दरबार में बैठे सभी लोग माँ के प्रेम की चर्चा करते रहे । हर कोई यही कह रहा था कि दुनिया में का प्यार सबसे सच्चा और पवित्र है ।

यह कहानी हमे सिखाती है कि सच्चा प्यार त्याग करना जानता है । जो अपने स्वार्थ के लिए नही, बल्कि दूसरे की खुशी के लिए  जीता है, वही सच्चा इंसान होता है।

कहानी से सीख : 

माँ का प्यार सबसे सच्चा और पवित्र होता है।

सच्चा प्रेम त्याग करना जानता है।

बुद्धि और धैर्य से हर समस्या का समाधान निकलता है ।

झूठ अधिक समय तक नही टिकता

Author: Hindi Rama

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