गायब लड़की का आखरी सच । तहखाने में कौन था ? Mystery Of Missing Girl ।

Mystery Of Missing Girl

➡️  नवंबर की ठंडी रात थी। शहर के बाहरी इलाके में बने शर्मा परिवार के घर के बाहर हवा सूखे पत्तों को सड़क पर घसीट रही थी । रात के लगभग साढे ग्यारह बज रहे थे।

➡️  घर के बाकी लोग सो चुके थे , लेकिन अनन्या शर्मा अभी भी अपने कमरे की खिड़की के पास बैठी थी।

➡️  उसके सामने खुली डायरी रखी थी, पर उसकी नजरे बार – बार खिड़की के बाहर फैले अंधेरे पर चली जाती थी।

➡️  पिछले कुछ दिनों से उसे एक अजीब बेचैनी महसूस हो रही थी, जैसे कोई उसे पुकार रहा हो। ऐसा पहली बार नही था।

➡️  बचपन से ही उसके साथ ऐसी घटनाए होती आई थी, जिनका कोई स्पष्ट उत्तर उसके पास नही था।

➡️  अचानक कमरे में तापमान जैसे गिर गया। अनन्या ने अपने हाथों को सहलाया। उसे लगा जैसे किसी ने बहुत धीमी आवाज में उसका नाम लिया हो।

➡️  अनन्या …. वह चौककर खड़ी हो गई। कमरे में कोई नही था ।

➡️  उसने दरवाजे की ओर देखा, फिर खिड़की की ओर । सब कुछ सामान्य था। तभी वह आवाज दोबारा सुनाई दी।

➡️  अनन्या …. मेरी मदद करो…. ” इस बार आवाज बिल्कुल उसके पीछे से आई थी। सफर्द फ्रॉक वाली बच्ची ।

➡️  अनन्या धीरे – धीरे पलटी । कमरे के कोने में एक छोटी बच्ची खड़ी थी।

➡️  उसकी उम्र दस या ग्यारह साल से अधिक नही लग रही थी। उसने सफेद रंग की पुरानी फ्रॉक पहन रखी थी। उसके बाल बिखरे हुए थे और चेहरा असामान्य रूप से पीला था।

➡️  लेकिन सबसे अजीब उसकी आंखे थी। उनमे डर भी था और विनती भी।

➡️  तुम कौन हो ? अनन्या ने धीरे से पुछा। बच्ची कुछ क्षण उसे देखती रही। रिया…… तुम यहाँ कैसे आई ?

➡️  रिया ने कोई जवाब नही दिया । उसने केवल खिड़की के बाहर अंधेरे की तरफ इशारा किया और बोली – वे अभी भी वहाँ है … कौन ?

➡️  जो कभी नही चाहते थे कि सच बाहर आए । अगले ही पल बच्ची गायब हो गई।

➡️  कमरे में फिर वही सन्नाटा लौट आया। लेकिन अनन्या का दिल तेजी से धडक रहा था । उसे महसूस हो रहा था कि यह केवल शुरुआत है। डायरी का आखिरी वाक्य

➡️  अगले कई दिनों तक रिया बार – बार दिखाई देती रही।

➡️  कभी आईने  मे। कभी घर के पीछे वाले बगीचे में। कभी सपनों में।

➡️  हर बार वह एक हइ दिशा की ओर इशारा करती।

➡️  शहर के बाहर स्थित पुराने सेंट मैरी अस्पताल की ओर।

➡️  वह अस्पताल वर्षों पहले बंद हो चुका था ।

➡️  लोग कहते थे कि वहाँ अजीब घटनाए होती है। रात में रोने की आवाजे आती है।

➡️  खाली गलियारों में कदमों की आहट सुनाई देती है। और कई लोगों ने दावा किया था उन्होंने खिड़कियो में बच्चों जैसी परछाईयां देखी है। एक रात रिया फिर दिखाई दी। इस बार उसकी आँखों में आँसू थे।

➡️  समय बहुत कम है ” उसने कहा । मुझे क्या करना होगा ? अनन्या ने पुछा ।

➡️  सच को ढूँढना होगा। कौन सा सच ? रिया ने जवाब नही दिया ।

➡️  बस धीरे से कहा – कल रात मैं तुम्हें लेने आऊँगी । उसी रात अनन्या ने अपनी डायरी में एक पंक्ति लिखी- वह मुझे लेने आ चुकी है। सुबह जब अनन्या गायब थी

➡️  अगली सुबह पूरा घर हड़कंप में था। चप्पल बिस्तर के पास थी। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद नही था।

➡️  लेकिन बाहर निकलने का कोई निशान भी नही था। ऐसा लग रहा था जैसे वह हवा में घुल गई हो ।

➡️  उसके पिता राघव शर्मा ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ घंटों में इंस्पेक्टर अर्जुन राठौर मामले की जांच में जुट गए।

पुराने अस्पताल का खौफनाक रहस्य 

➡️  अर्जुन व्यावहारिक सोच वाले इंसान थे । भूत – प्रेत जैसी बातों पर उनका विश्वास नही था ।

➡️  लेकिन जब उन्होंने अनन्या की डायरी पढ़ी और उसके दोस्त कबीर से बात की, तो उन्हे पहली बार लगा कि इस मामले मे कुछ असामान्य है।

➡️  कबीर ने रिया के बारे में सब कुछ बताया । अर्जुन ने तुरंत पुराने अस्पताल के रिकॉर्ड निकलवाए।

➡️  तभी पहली बार उन्हे एक नाम मिला -रिया वर्मा । उम्र – 10 वर्ष । भर्ती – 1976 । स्थिति – लापता । अर्जुन कुछ देर तक उस फाईल को देखते रहे।

➡️  पचास साल पुराने फाइल । और वही नाम जिसे अनन्या बार – बार देख रही थी जो दीवार पर लिखा हुआ था।

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➡️  उसी शाम पुलिस अस्पताल में पहुंची और उस अस्पताल को देखकर ऐसा लगा जैसे , समय ने इसे भुला दिया हो।

➡️  टूटी हुई खिड़कियां , धूल भरे गलियारे। जंग लगे स्ट्रेचर । और हर तरफ  एक अजीब सन्नाटा ।

➡️  तलाशी के दौरान एक पुराने वार्ड की दीवार पर कुछ दिखाई दिया। मोटी धूल हटाने पर शब्द साफ दिखने लगा।

➡️  रिया ,,,, उसके नीचे एक और लाइन लिखी थी वह अभी भी इंतजार कर रही है ।

➡️  अर्जुन के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

पुराने तहखाने का बंद दरवाजा

➡️  अस्पताल की जांच जारी रही,,,, तभी एक पुराने एक्स – रे कक्ष के पीछे छिपा दरवाजा मिला।

➡️  वह मोटी लोहे की चादर से बंद था । ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने जानबूझकर उसे दुनिया की नज़रों से छिपाया हो।

➡️  दरवाजा तोड़ा गया। उसके पीछे नीचे जाती सीढ़ियाँ थी। नीचे घुप्प अँधेरा था।

➡️  पुलिस टीम टॉर्च लेकर उतरी तहखाने की हवा में अजीब बदबू थी।

➡️  जैसे वर्षों से कोई वहाँ बंद हो। गलियारे के अंत मे एक कमरा मिला।

➡️  कमरे मेदर्जनों पुरानी फाइले पड़ी थी । कई फ़ाइलों पर बच्चों का नाम था।

➡️  लेकिन अधिकांश रिकॉर्ड अधूरे थे । जैसे किसी ने जानबूझकर इतिहास मिटाने की कोशिश करी है।

पचास साल पुराना रहस्यमयी सच 

➡️  उन फ़ाइलों मे एक दस्तावेज ऐसा भी था जिसे देखकर अर्जुन हैरान रह गए।

➡️  उसमे लिखा था अस्पताल मे कुछ गुप्त चिकित्सीय प्रयोग किये जाते थे। कई बच्चों को बिना परिवार की जानकारी के उन परीक्षणों मे शामिल किया गया था।

➡️  रिया का नाम भी उसी सूची मे था। लेकिन उसके बाद के पन्ने गायब थे। मानो सबसे महत्वपूर्ण सच किसी ने निकाल लिया हो।

➡️  तभी एक पुलिसकर्मी ने आवाज लगाई । सर ,,, यहाँ कोई है…।

➡️  सभी उस दिशा में दौड़े अनन्या वही बैठी थी। वह जीवित थी।

➡️  लेकिन उसकी आँखों में अजीव खामोशी थी,,,,,।

रिया का आखिरी राज 

➡️  अस्पताल से बाहर आने के बाद भी अनन्या ने कई घंटों तक कुछ बोला नही।

➡️  फिर उसने अर्जुन को पूरी कहानी बताई।

➡️  उसने बताया कि रिया उसे तहखाने तक लेकर गई थी।

➡️  वहाँ उसने उन बच्चों की सच्चाई बताई जो अस्पताल से कभी बाहर नही जा सके, रिया चाहती थी की दुनिया सच जाने अनन्या ने बताया।

➡️  क्या वह सच मे थी ? अर्जुन ने पुछा । अनन्या ने मुस्कुराय और बोली अगर वो नही थी तो मुझे वहाँ तक कौन लेकर गया ?

➡️  अर्जुन के पास कोई जवाब नह था ।

पुराना लॉकेट जो दफन हो चुका था   

➡️  बातचीत के बीच में अनन्या ने अपनी जेब से एक लॉकेट निकाला । यह लॉकेट उसने दिया है।

➡️  लॉकेट की जांच करवाई गई। रिपोर्ट देखकर सभी हैरान रह गए ।

➡️  यह वही लॉकेट थी जिसका जिक्र 1976 की फ़ाइलों में था।

➡️  रिकॉर्ड के हिसाब से वह रिया के साठ गायब हुआ था ।  लेकिन और एक बात सामने आई । लॉकेट के भीतर एक छोटी तस्वीर थी। तस्वीर में रिया खड़ी थी।

➡️  और उसके पचे धुंधली परछाई में कुछ लोग दिखाई दे रहे थे, तस्वीर जितनी बार देखि जाती उतनी बार परछाइयाँ की संख्या अलग लगती। किसी को समझ नहीं आया कि  ऐसा कैसे संभव है ।

आखरी तस्वीर में क्या ? 

➡️  कुछ समय बाद प्रशासन ने अस्पताल को हमेशा के लिए बंद कर दिया ।

➡️  मामला लगभग समाप्त माना जाने लगा लेकिन जब एक रात अनन्या अपने कमरे मे बैठी थी कि अचानक मेज पर रखा लॉकेट अपने आप ही खुल गया ।

➡️  कमरे में ठंडी हवा फैल गई , उसने लॉकेट के अंदर रखी तस्वीर निकाली।

➡️  इस बार तस्वीर बदल चुकी थी। रिया अब अकेली नही थी।

➡️  उसके साथ एक और लड़की खड़ी थी, वही चेहरा । वही आंखे । बिल्कुल अनन्या जैसी ।

➡️  अनन्या का गला सुख गया । उसने तस्वीर को फिर से देखा।

➡️  तभी उसके पीछे किसी के चलने की धीमी सी आहट हुई ।

➡️  उसने तुरंत मुड़कर देखा । कमरा खाली था। लेकन आईने में कुछ सेकंड के लिए एक छोटी बच्ची दिखाई दी।

➡️  वही सफेद फ्रॉक । वही उदास मुस्कान । और फिर वह खुद ही गायब हो गई।

➡️  उसी क्षण उसके कान में फुसफुसाहट गूंजी – एक सच सामने आ गया दूसरा अभी भी दफन है ….।

➡️  अनन्या ने तेजी से तस्वीर की तरफ देखा । अब तस्वीर में केवल रिया थी ।

➡️  दूसरी लड़की फिर गायब हो चुकी थी। उसके हाथ  पूरी तरह कांपने लगे ।

➡️  बाहर बादल गरज रहे थे । और शहर दूर बंद पड़े सेंट मैरी अस्पताल की सबसे ऊपरी खिड़की में उसी रात कुछ लोगों को रोशनी जलती हुई दिखी ।

➡️  जबकि अस्पताल को सील किये हुए कई साल हो चुके थे।

➡️  अगले दँ जब पुलिस वहाँ पहुंची तो खिड़की बंद थी। अंदर कोई नही था।

➡️  लेकिन धूल से भरी दीवार पर एक नई लिखावट उभर आई थी – मैं अकेली नही हूँ,,,,,।

➡️  उस लिखावट के नीचे एक छोटे अक्षरों में एक और शब्द लिखा था।

➡️  “जल्द मिलेंगे,…..। “

➡️  यह किसने लिखा था ? रिया ने …? किसी जीवित इंसान ने ?

➡️  या फिर उस अस्पताल में आज भी कोई ऐसा रहस्य छिपा था, जो सामने आने का इंतजार कर रहा था ?

➡️  इस सवाल का जवाब कभी भी नहीं मिला….।

निष्कर्ष Conclusion 

→ क्या रिया की आत्मा को सचमुच शांति मिल गई थीं । या वह अभी भी किसी अधूरे सच के उजागर होने का इंतजार कर रही थीं ? अनन्या के पास आज भी उस रात के कुछ सवालों के जवाब नहीं हैं । 

→ पुराने अस्पताल का रहस्य भले ही समय की धूल में दब गया हों , लेकिन कुछ तो रहस्य ऐसे होते हैं , — जो कभी भी पूरी तरह खत्म नहीं होते । 

→ शायद हर बंद दरवाजे के पीछे एक नई कहानी छिपी होती हैं । 

→ और यह रहस्य भी अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ । ऐसी रहस्यमयी कहानी और पढ़नें के लिए हमारी कहानियों की website को फॉलो जरूर करें …. धन्यवाद  

Mystery Of Missing Girl

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