
कैलाश पर्वत का रहस्य – Mystery Of Mount Kailash
» कैलाश पर्वत एक ऐसा स्थान जो रहस्यों से भरा हुआ हैं । साल 2001 में चीन सरकार नें कुछ ऐसा देखा , कि उन्होनें तुरंत कैलाश पर्वत पर चढ़नें पर प्रतिबंध लगा दिया । लेकिन आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ था ? कि आज तक केवल एक ही इस पर्वत की चोटी तक पहुँच पाया हैं । क्यों जो भी इस पर्वत पर चढ़ने की कोशिश करता है उसकि दो साल के भीतर ही मौत हो जाती है । सबसे हैरान करने वाली बात इस पर्वत पर उम्र दो गुनी रफ्तार से क्यों बढ़ती है ? क्या सच मे कैलाश पर्वत के नीचे शंभा ला नाम का एक प्राचीन शहर छुपा हुआ है ।
» अमेरिका संस्था नासा ने इस पर्वत पर कुछ ऐसा देखा जिसने उनके वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए और जब चीन ने कैलाश पर्वत पर हेलिकॉप्टर भेजा तो उसके साथ क्या हुआ इस सभी प्रश्नों और अनसुलझे रहस्यों को हम आज के इस वीडियो मे उजागर करेंगे तो जुड़े रहिए क्योंकि जो आप जानने जा रहे है वह आपकी सोच से भी परे (संगीत) है भारत और चीन के बीच 1962 का सीमा विवाद एक भयंकर युद्ध मे तब्दील हो गया और इसमे भारत को भरी नुकसान उठाना पड़ा इस युद्ध के परिणाम स्वरूप चीन ने भारत की लगभग 72000 वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया ।
» इसी दौरान कैलाश पर्वत का क्षेत्र भी चीन के नियंत्रण मे चला गया 1962 के चीन युद्ध के बाद जब पूरा देश सदमे मे था तब संसद मे देहरादून के सांसद महावीर त्यागी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से एक ऐसा सवाल पूछा जो आज भी इतिहास के पन्नों मे दर्ज है महावीर त्यागी ने सीधे – सीधे नेहरू से सवाल किया आपके देखते ही देखते चीन ने हमारी 72 हज वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया आप उसे कब वापस दिला रहे है । नेहरू का जवाब आज भी लोगों के दिल मे गुजता है , उन्होंने कहा की जो जमीन चली गई वो चली गई वैसे भी वह जमीन बंजर थी ।
» इस इलाके मे घास का एक तिनका तक नहीं उगता इस पर महावीर त्यागी भड़क गये और उन्होंने एक अनोखा और तीखा जवाब दिया उन्होंने अपना गंज सिर नेहरू की ओर करके कहा यहा भी कुछ नहीं उगता तो क्या मै इसे भी कटवा दु उस दौर मे भी यह चर्चा होती थी , भारत को काम से काम कैला मानसरोवर का क्षेत्र मुक्त कराने की कोशिश करनी चाहिए यह देश का दुर्भग्या था की सरदार बल्लभ भाई पटेल का 1950 मे निधन हो गया और नेहरू पर यह दबाव बनाने वाला कोई नहीं था दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट जिस पर अब तक 7000 से भी ज्यादा लोग चढ़ चुके है।
» उससे 2200 मीटर कम ऊंचाई वाले कैलाश पर्वत पर आज तक सिर्फ एक इंसान को छोड़ कर कोई फतह हासिल नहीं कर पाया इसके बारे मे हम आगे बात करेंगे यह अद्भुत पर्वत अपनी रहस्यमय और आध्यात्मिकता से भरी कहानियों के लिए जाना जाता है पौराणिक कथाओ के अनुसार कैलाश पर्वत के पास धन के स्वमी कुबेर की नागरी स्थित है मान्यता है की जो व्यक्ति अपने जीवन काल मे अच्छे और पुण्य कर्म करता है उसकि आत्मा को मृत्यु के बाद कैलाश पर्वत पर स्थान प्राप्त होता है । यही कारण है की इसे दुनिया के सबसे अद्भुत और पवित्र पर्वतों मे से एक माना जाता है ।
» समुद्र की सतह से 6718 मीटर ऊंचा कैलाश पर्वत हिन्दू बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र है । हिन्दू धर्म मे इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है । जो यहा अपनी पत्नी पार्वती के साथ रहते है । बौद्ध धर्म के अनुयायी मानते है की , परम आनंद के प्रतीक बुद्ध डेम चौक इस पर्वत के अधिष्ठता देव है । वही जैन धर्म के अनुयायी इसे अष्टपाद के नाम से जानते है जहा प्रथम तीर्थकर राश्म देव ने निर्वाण प्राप्त किया था कैलाश पर्वत जिसे श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है केवल एक पर्वत नहीं है बल्कि यह धर्म आस्था और रहस्यों का एक अद्भुत संगम है।
» वीडियो मे आगे बढ़ने से पहले मेरी आपसे एक छोटी सी गुजारिश है अगर आप हमारे चैनल पर पहली बार आए है कृपया चैनल को सबस्क्राइब जरूर करे और कमेन्ट बॉक्स मे हर – हर महादेव जरूर लिखकर अपना आशीर्वाद दें । चलिए अब हम इस रहस्यमय यात्रा मे आगे बढ़ते है साल 1999 जब रूस के विशेषज्ञ अर्नेस्ट मुल्दा शिफ और उनकी टीम ने कैलाश पर्वतों के रहस्यों को जानने के लिए एक साहसिक कदम उठाया उनकी पर्वतारोहण टीम मे भूविज्ञान भौतिक के विशेषज्ञ और इतिहासकार शामिल थे ।
» इस डाल ने तिब्बती लामा हो से मुलाकात की और कैलाश पर्वत के आसपास कई महीने बिताए उस रहस्यमय स्थान की गहराइयों को समझने के लिए मुल्दा शिफ ने अपनी इस यात्रा का विस्तृत विवरण अपनी किताब वयर डू वी काम फ्रॉम मे लिखा जिसमे उन्होंने कैलाश पर्वत के बारे मे चौकाने वाले खुलासे किये । उनकी टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि कैलाश पर्वत वास्तव मे एक विशाल मानव निर्मित पिरामिड है जिसका निर्माण प्राचीन काल मे किया गया था।
» उन्होंने यह दावा किया की यह पिरामिड कई छोटे – छोटे पिरामिड से घिरा हुआ है और यह स्थान अलौकिक गतिविधियों का केंद्र है , मुल्दा शिप ने वहा से लौटने के बाद लिखा हमे रात की खामोशी मे पहाड़ के भीतर से एक अजीब तरह की फुसफुसाना देती है एक रात अपने दोनों सहयोगीयो के साथ मैंने साफ – साफ पत्थरों के गिरने की आवाज सुनी यह आवाज कैलाश पर्वत के पेट के भीतर से आ रही थी । हमे ऐसा लगा जैसे इस पिरामिड के अंदर कुछ लोग रहते है , समय के तेजी से बीतने का एक अद्भुत प्रमाण इस क्षेत्र मे देखने को मिला है ।
» कैलाश पर्वत क्षेत्र मे आने वाले लोगों ने पाया कि , उनके शरीर के बाल और नाखून मात्र दो दिनों मे ही इतने बढ़ जाते है जितने सामान्यता दो हफ्तों मे बढ़ने चाहिए , इतना ही नहीं उनकी त्वचा भी अधिक तेजी से बूढ़ी नजर आने लगती है । यह रहस्यमय घटना बताती है कि कैलाश पर्वत क्षेत्र मे समय की गति कुछ अलग ही ढंग से काम करती है । यह अनुभव लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि , इस पावित्र स्थान मे कुछ ऐसी अदृश्य शक्तीय है जो मानव शरीर और मन को गहराई से प्रभावित करती है ।
» रूसी डॉक्टर अर्नेस्ट मुल्दा शिफ अपने स्मरणों मे एक अद्भुत और रहस्यमय घटना का जिक्र करते है वे लिखते है कि एक बार उन्हे एक साइबेरियाई पर्वतारोही ने बताया था की कुछ पर्वतारोही कैलाश पर्वत पर एक निश्चित बिन्दु तक पहुचने मे सफल हुए थे । लेकिन जैसे ही वे उस बिन्दु तक पहुँचे अचानक वे बूढ़े दिखाई देने लगे इस रहस्यमय घटना के बाद उन पर्वतारोहियों की उम्र इतनी तेजी से बढ़ने लगी की एक साल के भीतर ही बुढ़ापे की वजह से उनकी मृत्यु हो गई यह रहस्यमय अनुभव कैलाश पर्वत को और भी अद्वितीय और अद्भुत बनाते है , ।
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» जिससे यह दुनिया के रहस्यमय स्थानों मे से यह एक बन गया । अब बात करते है कैलाश पर्वत पर स्थित दो झीलों की मानसरोवर और राक्षस ताल यह दोनों जहीले जो एक दूसरे के बिल्कुल पास स्थित है । परंतु स्वभाव मे पूरी तरह विपरीत है । मांसरिवर झील जिसे दुनिया की सबसे ऊँची मीठे पानी की झील माना जाता है । अपने शांत और स्थिर स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है इसका आकार गोल है जैसे सूर्य की आकृति इसके पवित्र पानी मे जीवन की बहुलता देखी जाती है । सबसे हैरान करने वाली बात यह है की इतनी ऊंचाई और ठंड के बाद भी यह झील कभी नहीं जमती , और इसमे कभी लहरे नहीं उठती इसे देखने वाले हर व्यक्ति को अद्भुत शांति का अनुभव होता है ।
» दूसरी ओर राक्षस ताल जो मानसरोवर के पास ही है , दुनिया की सबसे ऊँची खरे पानी की झील है । इसके पानी मे खरेपा इतना अधिक है कि यहा कोई जीवन पनप नहीं सकता यह झील हमेशा उथल – पुथल मे रहती है । जैसे किसी आंतरिक बेचैनी से भरी पड़ी हुई हो , कहते है की राक्षस ताल का निर्माण स्वयं रावण ने किया था । जो भगवान शंकर के अनन्य उपासक थे अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए , रावण कैलाश पर्वत गया लेकिन उससे पहले उसने राक्षस ताल मे स्नान किया और वही ध्यान लगाया पौराणिक कथाओ के अनुसार जैसे ही रावण ने राक्षस ताल मे डुबकी लगाई झील पर आसुरी शक्तियों का कब्जा हो गया।
» यह झील नेगेटिविटी से भर गई और रावण की सोच मे भी बदलाव आ गया सोचने वाली बात यह है कि एक ही भौगोलिक क्षेत्र मे होते हुए भी यह दोनों झीले इतनी अलग क्यों है क्या आप जानते है कि कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के आसपास एक रहस्यमय ध्वनि सुनाई देती है । जब आप इन पवित्र स्थलों के पास पहुंचते है तो ऐसा लगता है , जैसे आसमान मे कोई विमान उड़ रहा हो लेकिन जब आप ध्यान से सुनते है तो यह आवाज बिल्कुल वैसी होती है जैसे किसी ने डमरू बजाया हो या फिर ओम की गूंज हो रही हो।
» वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक घटना बताते है और कहते है , कि शायद यह आवाज बर्फ के पिघलने से उत्पन्न होती है लेकिन वहा जाने वाले कई साधक और यात्री मानते है की यह ध्वनि केवल एक संयोग नहीं बल्कि एक दिव्य संकेत है ऐसा कहा जाता है की कैलाश पर्वत की शक्तिशाली ऊर्जा और वहा की आध्यात्मिक शक्तियों इस ध्वनि को जन्म देती है क्या यह बर्फ के पिघलने की साधारण आवाज है या फिर ओम की दिव्य ध्वनि का चमत्कार यह सवाल आज भी अज्ञात है । और शायद यही कैलाश पर्वत के रहस्य को और गहराई से जोड़ता है ।
» कैलाश पर्वत के रहस्य केवल ध्वनियों तक सीमित नहीं है कई यात्रियों ने दावा किया है कि उन्होंने रात के समय कैलाश पर्वत पर सात अलग – अलग रंगों की रोशनिसेक्स नियों के रहस्य को पूरी तरह से नहीं समझ पाए है नासा के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हो सकता है कि कैलाश पर्वत के आसपास का चुंबकीय बल आसमान के साथ मिलकर इस अद्भुत प्रकाश का निर्माण करता हो लेकिन क्या यह सिर्फ चुंबकीय शक्ति का खेल है या फिर कैलाश पर्वत की दैवीय शक्तियों का प्रतीक यह सवाल आज भी अनुत्तरित है ।
» क्या आपने हिम मानव या यति की कहानिया सुनी है यह वह विशाल काय प्राणी है जिसे कैलाश पर्वत और हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों मे देखा गया है वर्षों से हिमालय के आसपास रहने वाले लोग दावा करते है की उन्होंने इस रहस्यमयी प्राणी को अपनी आखों से देखा है , लेकिन आज तक इस बात का पुख्ता सबूत नहीं मिला की यह वास्तव मे कौन है , एक विशाल भालू जंगली या मानव या फिर एक प्राचीन प्राणी कई तिब्बती और नेपाली लोग मानते है ।
» कि यह हिम मानव कैलाश पर्वत के आसपास घूमता है इसे यति कहा जाता है । और इसके बारे मे कई कहानिया प्रचलित है कुछ इसे भूरा भालू मानते है तो कुछ इसे जंगली मानव यहा तक कि यह माना जाता है की यह लोगों पर हमला कर सकता है । और उन्हे खा भी सकता है । इस रहस्य ने हिमालय की इन पवित्र भूमि को और भी गहराई से जिज्ञासा का केंद्र बना दिया है । वैज्ञानिक भी इस बारे मे शोध कर रहे है । कुछ शोधकर्ताओ का मानना यह है की हिम मानव वास्तव मे डर थल मानव के अवशेष हो सकते है ।
» जो अब तक इन बर्फीले क्षेत्रों मे जीवित है हलाकि यह सिर्फ एक परिकल्पना है क्योंकि अब तक हिम मानव के शरीर या उसके जीवन के ठोस प्रमाण नहीं मिले है विश्व भर के करीब 30 वैज्ञानिक ने इस बात का दावा किया है की हिमालय के बर्फीले इलाकों मे हिम मानव मौजूद हो सकते है लेकिन वे इसे साबित नहीं कर पाए क्या आपने कभी सुना है की कैलाश पर्वत को पृथ्वी का केंद्र बिन्दु या एक्सिस मुंडी कहा जाता है कई धार्मिक और पौराणिक मान्यताओ के अनुसार कैलाश पर्वत व स्थान है जहां स्वर्ग और पृथ्वी का मिलन होता है इसे ब्रह्मांड की धुरी या मेरुदंड कहा गया है जो समस्त जीवों और ब्रह्मांड की ऊर्जा का केंद्र है ।
» प्राचीन ग्रंथों मे एक्सेस मुंडी का अर्थ होता है वह स्थान जहा धरती और आकाश आपस मे जुडते है यह धुरी पूरी पृथ्वी को संतुलित करती है । और इसी कारण इसे विश्व का केंद्र कहा जाता है । हिन्दू धर्म के अनुसार कैलाश पर्वत केवल भगवान शिव का निवास स्थल नहीं बल्कि यह वह स्थान है , जहाँ से सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन होता है । यह दुनिया के सभी धार्मिक और आध्यात्मिक धारणाओ मे एक पवित्र और रहस्यमय स्थां के रूप मे स्थापित है , आश्चर्य की बात यह है की कैलाश पर्वत से स्टोनहेज की दूरी 6666 किमी है।
» यह उत्तर ध्रुव से भी 6666 किमी की दूरी पर स्थित है इसके अलावा दक्षिण ध्रुव से इसकी दूरी 13332 किमी है यह रहस्य और तथ्य कैलाश पर्वत को एक भौतिक पर्वत नहीं बल्कि ब्रह्मांड की शक्तियों का केंद्र है । क्या आप जानते है की कैलाश पर्वत जिसे दुनिया के सबसे पवित्र मे से एक माना जाता है आज एक कोई भी इंसान उसकि चोटी तक नहीं पहुँच पाया है , हिमालय की सबसे ऊँची चोटीयो को तो कई पर्वतारोहियों ने सफलता पूर्वक फतह किया है लेकिन कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश करने वाले हर किसी के कदम किसी ना किसी कारण से थम जाते है ।
» आखिर इस पर्वत मे ऐसा क्या रहस्य छुपा है , जो इसे आज भी आछूट बनाए हुए है आइए जानते है अब तक कितने लोगों ने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की और उनका क्या परिणाम रहा रूसी पर्वतारोही सर्गेई सीटिया कोव ने भी इस रहस्यमी पर्वत की चढ़ाई का प्रयास किया जब वह चोटी के करीब पहुचे तो अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी उन्हे कमजोरी और असहजता महसूस होने लगी और मजबूर होकर उन्हे वापस लौटना पड़ा । सर्गेई सीटिया कोव ने बताया की जब मै पर्वत के बिल्कुल पास पहुँच गया तो मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा मै उस पर्वत के बिल्कुल सामने था।
» जिस पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका अचानक मुझे बहुत कमजोरी महसूस होने लगी और मन मे यह ख्याल आने लगा की मुझे यहा और नहीं रुकना चाहिए उसके बाद जैसे जैसे हम नीचे आते गया मन मे हल्का होता गया ींंन होड मेसन इटली के एक प्रसिद्ध पर्वतारोही जिन्होंने समुद्र तल से 26000 फीट से अधिक ऊंचाई वाली 14 सबसे ऊँची चोटियों पर चढ़ने का रिकॉर्ड बनाया है वह साधारण पर्वतारोही नहीं थे बल्कि अद्वितीय साहस और दृढ़ संकल्प के प्रतीक थे लेकिन जब उन्हे कैलाश पर्वत पर चढ़ने के लिए कहा गया तो उन्होंने मना कार्ड दिया मैसन जो असंभव को संभव करने वाले व्यक्ति थे शायद इस पर्वत की दैवीय शक्तियों को समझ लिया था।
» बहुत काम लोग जानते है की चीनी अधिकारियों द्वारा कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने का प्रस्ताव दिया गया था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया इस निर्णय के बाद चीन ने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करने पर प्रतिबंध लगा दिया क्योंकि यह पर्वत किसी साधारण मनुष्य की क्षमता से परे माना जाता है कहा जाता है की तिब्बती बौद्ध साधु मिल रेपा ने 11वीं शताब्दी मे कैलाश पर्वत की चोटी तक पहुँचने का एक एक मात्र सफल प्रयास किया गया था वह एक महान योगी और सिद्ध पुरुष थे जिन्होंने अपनी गहन साधना और तप के बल पर इस दिव्य पर्वत पर चढ़ाई की उनकी इस चढ़ाई को आध्यात्मिक रूप से माना गया।
» और यह भी कहा जाता है की इसके बाद से किसी ने इस पर्वत की चोटी तक चढ़ने की कोशिश नहीं की हालांकि मिला रेपा ने इस चढ़ाई के बारे मे कभी कोई बात नहीं की और इसलिए यह घटना भी एक गहरा रहस्य बनी हुई है रूस के वैज्ञानिकों को एक रिपोर्ट यूएन स्पेशियल मैगजीन के 2004 के जनवरी अंक मे प्रकासित हुई थी जिसमे कैलाश पर्वत की संरचना और रहस्यों पर प्रकाश डाला गया था लेकिन आज भी इस पर्वत से जुड़े कई प्रश्न अनुत्तरित है ।
» कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कोशिश साल 2001 मे की गई थी उस समय चीन ने अपनी ओर से स्पेन की एक पर्वतारोही टीम को कैलाश पर चढ़ने की अनुमति दी थी हालांकि यह टीम भी इस पवित्र चोटी तक नहीं पहुँच सकी दुनिया भर के लोगों का मानना है की कैलाश पर्वत एक अत्यंत पवित्र स्थान है और इस पर चढ़ाई करना देवताओ का अपमान होगा इसी मान्यता के चलते इसके बाद कैलाश पर्वत की चढ़ाई पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया कैलाश हमे यह याद दिलाता है कि कुछ चीजे इंसान के दायरे से बाहर होती है कुछ रहस्य ऐसे होते है। जिन्हे छूने के लिए भौतिक ताकत नहीं बल्कि एक गहरी आत्मिक ऊर्जा की जरूरत है ,।
» शायद इसलिए आज तक कोई कैलाश पर्वत की चोटी पर नहीं पहुँच सका , क्योंकि यह सिर्फ चढ़ाई नहीं बल्कि आस्था और समर्पण का पर्वत है । कैलाश पर्वत का एक और अद्भुत रहस्य है उसकि छाया से बनने वाले स्वस्तिक और ओम के चिन्ह जैसे ही सूरज कैलाश पर्वत के पीछे डूबता है पर्वत की छाया से स्वस्तिक का अद्भुत चिन्ह उभरता है यह वही स्वस्तिक है जिसे हिन्दू धर्म मे शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इस पवित्र प्रतीक को देखकर लगता है मानो भगवान शिव और सूर्यदेव के बीच एक गहरा आध्यात्मिक सबंध प्रकट हो रहा है। लेकिन यह केवल एक ही रहस्य नहीं है ।
» जब कैलाश पर्वत पर बर्फ गिरती है तो दक्षिण दिशा से देखने पर बर्फ की संरचना से ओम चिन्ह बनता है यह वही ओम है जो हिन्दू धर्म मे परम वासविकता और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक माना जाता है । ओम पर्वत के रूप मे दिखने वाला यह दृश्य दर्शकों को प्राकृत और आध्यात्मिकता के गहरे सं बंध की याद दिलाता है और हमे यह समझने का अवसर देता है की यह पर्वत कितना दिव्य और रहस्यमय है यह प्राकृत घटनाए पीढ़ियों से लोगों को विस्मित करती आ रही है और सच्चे धर्म और निष्कलंक जीवन के कारण स्वर्ग मे प्रवेश करने मे सक्षम रहे , कैलाश पर्वत को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है ।
» इसकी चार ढलान कपास की चार दिशाओ की प्रतिनिधित्व करती है । शिष्यों का विश्वाश है की यह पर्वत वास्तव मे स्वर्ग का प्रवेश द्वार है इसकी दिव्यता और पवित्रता से यह स्थान एक अद्वितीय आध्यात्मिक धरोहर बन जाता है ,। जब चीन ने देखा की कोई इंसान कैलाश पर्वत पर चढ़ नहीं पा रहा है तो उन्होंने एक साहसिक निर्णय लिया कैलाश पर्वत की चोटी तक हेलिकॉप्टर भेजने का हालांकि कैलाश पर्वत के ऊपर हेलिकॉप्टर और विमान उड़ाने की सख्त मनाही है । क्योंकि इस इलाके का मौसम अचानक खराब हो जाता है ।
» और कोई भी हवाई जहाज यहा लंबे समय तक टिक नहीं पाता कई दिनों की मौसम रिसर्च के बाद चीन ने एक साफ दिन चुना और अपने हेलिकॉप्टर को कैलाश पर्वत की ओर रवाना किया शुरुआत मे सब कुछ ठीक लग रहा था हेलिकॉप्टर मे बैठे लोग कैलाश पर्वत के अद्भुत दृश्य का आनंद ले रहे थे । उन्हे लग रहा था की सब कुछ सही चल रहा है और वे चोटी तक पहुँच जाएंगे लेकिन जैसे ही उन्होंने थोड़ी और ऊंचाई हासिल का माहौल मे बदलाव आने लगे कैलाश के ऊपर बादल गिरने लगे और हिमस्खलन के दृश्य दिखाई देने लगे ।
» लेकिन सबसे डरावनी बात तब हुई जब आसमान मे गहरे बादल हेलिकॉप्टर को घेरने लगे , हिम्मत जुटा के वो हेलिकॉप्टर को और ऊपर ले गए लेकिन तभी आसमान मे बिजली कड़कने लगे , । और टेज बर्फबारी शुरू हो गई ऊंचाई पर हवा का दबाव इतना बढ़ गया की हेलिकॉप्टर को नियंत्रित करना बेहद मुस्किल हो गया । चीन के वैज्ञानिक ने बताया की कैलाश पर्वत की अद्वितीय भौगोलिक स्तिथि के कारण सभी दिशाएं जाकर एक साथ मिल जाती है । जिससे वे दिशा भ्रम मे फस गए । इस दौरान उनके कंपास ने भी काम करना बंद कर दिया , अब उनके पास कोई विकल्प नहीं था। और उन्होंने वापस नीचे लौटने का निर्णय लिया ।
» धीरे -धीरे वे नीचे आए दिल की धड़कने तेज थी , लेकिन सुरक्षित वापस लौटे , इस घटना ने चीन को यह समझ दिया की इस रहस्यमय पर्वत पर चढ़ना या इसे जीतना उनके बस की बात नहीं है । चीन की नाकामयाब कोशिश के बाद कैलाश पर्वत को लेके अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की उत्सुकता काफी बढ़ गई 2015 मे नासा ने अपने सैटेलाइट को कैलाश पर्वत पर पॉइंट करके गहन रिसर्च शुरू की इस पर्वत के रहस्यों ने नासा के वैज्ञानिक को भी चौका दिया निरीक्षण के बाद जो तस्वीरे नासा के वैज्ञानिक ने साझा की उनमे कैलाश पर्वत की एक रहस्यमय परछाई दिखाई दी ।
» इस परछाई को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई विशाल आकृति ध्यान की मुद्रा मे बैठी हो इस अद्भुत दृश्य ने दुनिया भर के लोगों को चौका दिया क्योंकि इसे ज्यादातर लोग भगवान शिव की छवि से जोड़कर देख रहे थे यह रहस्यमय छवि से कैलाश पर्वत की पवित्रता और उसके आध्यात्मिक महत्व को और गहरा करती है जो आज भी मानवता के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई ।
» डॉक्टर अर्नेट मुल्दा शेव के दावों को बल मिलता है जब हम प्राचीन रशियन पेंटर निकोलस रोरीग और जादुई नगरी मौजूद है इस रहस्यमय नगरी का उल्लेख हिन्दू और बौद्ध धर्म मे भी मिलता जिसे शंभाला कहा गया है , शंभाला संस्कृत का एक शब्द है जिसका अर्थ है शांत जगह विष्णु पुराण के अनुसार यही वह पवित्र स्थान है , जहाँ भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि का जन्म होगा ऐसा कहा जाता है की शांभाला को केवल वे ही देख सकते है । जिनके मन मे कोई पाप ना हो साधु संत और योगी इस स्थान पर आकार तपस्या करते है ।
» और इसकी दिव्यता का अनुभव करते है लेकिन शंभला का रहस्य यही खत्म नहीं होता , ऐसा माना जाता है की हमारे प्राचीन महाकाव्यों मे वर्णित अमर योद्धा जैसे हनुमान और आश्वथामा आज भी इसी नगरी मे रहते है । शंभला के निवासियों के पास असाधारण बुद्धि और अत्याधुनिक तकनीक है जो हमारे लिए ाभी तक एक कल्पना मात्र है । यह के लोग टाइम ट्रेवल कर सकते हैं, टेलीप कर सकते है । और यह तक ऐलियाँ से संपर्क साध सकते है ।
» और समय की सीमाओ से परे है । कैलाश पर्वत के भीतर छिपी इस अद्भुत नगरी का रहस्य आज भी हमरे समाज मे एक अनसुलझी पहेली है जो हमे प्रकृति आध्यात्मिकता और विज्ञान के बीच के गहरे संबंधों को बताता है । अगर आप शंभला के इस अद्भुत रहस्य पर और अधिक जानना चाहते है और इसी पर एक विशेष डॉक्यूमेंटरी देखना चाहते है तो हमे कमेन्ट मे जरूर बताए हम जल्द ही शंभला के इस रहस्यमय और अद्वितीय विषय पर एक नई वीडियो लेकर आएंगे अगर आपको कैलाश पर्वत के रहस्यों ने मोहित किया है और इस तरह के आओर भी अद्भुत कहानियों को जानना चाहते है