छलावे का जंगल । मृत्युलेखा डायन ने लिया भयानक तरीके से बदला । Horror Story In Hindi

छलावे का जंगल । मृत्युलेखा डायन ने लिया भयानक तरीके से बदला । Horror Story In Hindi
Hindi Rama | डरावनी कहानी

एक ऐसा जंगल, जहाँ अंधेरा होते ही पेड़ों के बीच मौत घूमने लगती थी। वहाँ रहने वाली मृत्युलेखा डायन इंसानों के चेहरे पहनकर शिकार करती थी। इस बार उसका निशाना अमन था, जिसके परिवार से उसका पुराना बदला था।

मृत्युलेखा डायन का पुराना खौफ । Horror Story In Hindi

कई साल पहले एक गाँव में मृत्युलेखा डायन का आतंक था। वह रात के समय तंत्र-मंत्र करती और गाँव के छोटे बच्चों को गायब कर देती थी। सुबह होते ही किसी घर से बच्चे के लापता होने की खबर आती और पूरे गाँव में मातम छा जाता था।

गाँव वाले रात होते ही दरवाजे बंद कर लेते थे, लेकिन फिर भी डायन किसी न किसी तरह उनके घरों तक पहुँच जाती थी। कई परिवार अपने बच्चों को खो चुके थे। आखिरकार एक रात गाँव वालों ने मिलकर उसे पकड़ लिया।

वे उसे जंगल के बीच एक मोटे पेड़ के पास ले गए। वहाँ उसे खूँटे से बाँधकर उसके चारों ओर लकड़ियाँ जमा की गईं और आग लगा दी गई।

जलती हुई मृत्युलेखा दर्द से चीखने लगी। मरने से पहले उसने गाँव वालों को श्राप दिया, “तुम लोगों ने मुझे जलाया है। अब मैं लौटकर आऊँगी और तुम्हारे परिवारों को कभी चैन से नहीं जीने दूँगी।”

उसकी भयानक चीखें सुनकर गाँव वाले वहाँ से भाग गए। अगले दिन उन्होंने मान लिया कि डायन का अंत हो चुका है। लेकिन जिस पेड़ के पास उसे जलाया गया था, वहाँ रात में अजीब रोशनी दिखाई देने लगी। कुछ लोगों ने वहाँ एक जली हुई औरत को घूमते देखने का दावा भी किया।

अमन के परिवार से डायन का बदला

मृत्युलेखा डायन को जलाने का आदेश अमन के दादा ने दिया था। गाँव वालों को लगा था कि उन्होंने बच्चों की जान बचाकर सही काम किया है, लेकिन डायन ने अमन के परिवार को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान लिया था।

कुछ साल बाद उसने अमन के दादा-दादी को मार डाला। फिर एक रात वह अमन के माता-पिता के घर पहुँची। अगली सुबह दोनों की लाशें मिलीं। उनके चेहरों पर ऐसा डर था, जैसे मरने से पहले उन्होंने कोई भयानक चीज देख ली हो।

उस समय अमन बहुत छोटा था। डायन उसे भी मारना चाहती थी, मगर उसके गले में पहना ताबीज देखकर पीछे हट गई। ताबीज से हल्की रोशनी निकली, तो वह गुस्से में चीखी और वहाँ से गायब हो गई।

यह ताबीज अमन को उज्जैन के महाकालेश्वर धाम में एक साधु ने दिया था। साधु ने कहा था कि यह बुरी आत्माओं से उसकी रक्षा करेगा। जाते समय उसने चेतावनी दी थी, “इसे कभी अपने गले से अलग मत करना। तुम्हारी जान इसी की सुरक्षा में है।”

अमन बड़ा हुआ, लेकिन अपने परिवार की मौत का दर्द कभी नहीं भूल पाया। गाँव के लोग उसे बार-बार चेतावनी देते थे कि वह उस जंगल के पास भी न जाए। उनका मानना था कि मृत्युलेखा अब भी वहाँ मौजूद है और अपने दुश्मनों को कभी नहीं छोड़ती।

लेकिन अमन अपने परिवार की मौत का सच जानना चाहता था। आखिरकार उसने अपने पुराने दोस्त रवि के साथ गाँव जाने का फैसला किया।

रवि ने उससे कहा, “तू चिंता मत कर। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं तुझे अकेला नहीं छोड़ूँगा।”

दोनों ने सफर शुरू किया। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह यात्रा उनकी जिंदगी का सबसे भयानक अनुभव बनने वाली है।

अंधेरी रात में जंगल का रास्ता

अमन और रवि की बस देर शाम गाँव से कुछ दूर एक सुनसान सड़क पर रुकी। आगे जाने वाली कोई गाड़ी नहीं थी और दोनों के मोबाइल में नेटवर्क भी नहीं था। गाँव तक पहुँचने के लिए उन्हें उसी डरावने जंगल से गुजरना था।

अमन ने ताबीज को कपड़ों के अंदर छिपाया और रवि के साथ जंगल में कदम रखा। भीतर जाते ही हवा ठंडी हो गई। पेड़ों की टेढ़ी डालियाँ रास्ते पर झुकी हुई थीं और चारों ओर अजीब खामोशी छाई थी।

कुछ दूर चलने के बाद रवि अचानक रुक गया।

“अमन, क्या तुझे किसी के चलने की आवाज सुनाई दे रही है?” उसने पूछा।

अमन ने ध्यान से सुना। सूखे पत्तों पर कदम पड़ने की आवाज उनके पीछे से आ रही थी। उसने पलटकर देखा, लेकिन अंधेरे में पेड़ों के अलावा कुछ नहीं था। तभी पीछे से किसी औरत के हँसने की धीमी आवाज आई।

दोनों तेजी से आगे बढ़े। थोड़ी दूर जाने पर सफेद साड़ी पहने एक औरत रास्ते के किनारे खड़ी दिखाई दी। उसके लंबे बाल चेहरे पर फैले थे और गर्दन एक तरफ झुकी हुई थी। उसके पैर पीछे की ओर मुड़े हुए थे।

औरत ने पूछा, “तुम दोनों इतनी रात को कहाँ जा रहे हो?”

अमन ने गाँव का नाम बताया। उसने आगे का रास्ता दिखाते हुए कहा, “रास्ते में चाहे कुछ भी दिखाई दे, पीछे मुड़कर मत देखना। अगर पीछे देखा, तो वापस नहीं लौट पाओगे।”

यह कहकर वह चुप हो गई। अमन और रवि बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए।

जंगल में मृत्युलेखा का पहला छलावा

औरत की आवाज सुनकर अमन को अपने माता-पिता की मौत के बारे में सुनी बातें याद आने लगीं। रवि ने उसे आगे बढ़ने को कहा, लेकिन कुछ कदम बाद अमन खुद को रोक नहीं पाया और पीछे मुड़कर देख लिया।

सफेद साड़ी वाली औरत गायब थी। उसकी जगह पेड़ से लटका एक सड़ा हुआ चेहरा दिखाई दे रहा था। उसकी लाल आँखें अमन को घूर रही थीं और मुँह से काला तरल टपक रहा था।

अमन चीखकर पीछे हटा। अगले ही पल वह चेहरा हवा में गायब हो गया। जंगल से एक बच्चे के रोने की आवाज आने लगी।

झाड़ियों के पीछे से एक छोटी लड़की निकली। वह रोते हुए बोली, “भैया, मुझे यहाँ से ले चलो। मैं रास्ता भटक गई हूँ।”

अमन उसकी ओर बढ़ने लगा, लेकिन तभी उसकी नजर जमीन पर पड़ी। लड़की के पैरों के नीचे कोई परछाईं नहीं थी।

अमन रुक गया। लड़की ने सिर उठाया, तो उसका चेहरा बदलने लगा। कुछ ही पलों में वह अमन जैसा दिखाई देने लगा। फिर उसके चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान उभरी और वह अंधेरे में गायब हो गई।

रवि ने अमन को पीछे खींचा। “यह जंगल सामान्य नहीं है। हमें जल्दी यहाँ से निकलना होगा।”

अमन ने अपना ताबीज कसकर पकड़ लिया। वह अचानक गर्म होने लगा, जैसे उसके भीतर कोई शक्ति जाग उठी हो।

दीपक के रूप में मृत्युलेखा डायन

तभी जंगल के रास्ते पर उनका दोस्त दीपक दिखाई दिया। वह हाथ हिलाकर उन्हें बुला रहा था और कह रहा था कि गाँव पास ही है।

रवि उसे देखकर राहत महसूस करने लगा, लेकिन अमन को कुछ अजीब लगा। दीपक की आँखें स्थिर थीं और उसके चेहरे पर डरावनी मुस्कान थी।

अमन ने नीचे देखा, तो दीपक के पैर पीछे की ओर मुड़े हुए थे।

“रवि, इसके पास मत जाना,” अमन ने उसे पीछे खींचते हुए कहा।

दीपक ने गर्दन टेढ़ी की और हँसने लगा। “क्या हुआ, अमन? अपने दोस्त को पहचान नहीं रहा?”

अगले ही पल उसके चेहरे की त्वचा फटने लगी। उसकी आँखें लाल हो गईं और मुँह कानों तक फैल गया। उसके लंबे बाल जमीन पर घिसटने लगे। अब उनके सामने दीपक नहीं, बल्कि मृत्युलेखा डायन अपने असली रूप में खड़ी थी।

उसका चेहरा जली हुई लाश जैसा था और नुकीले नाखून किसी जानवर के पंजों जैसे दिखाई दे रहे थे।

“आखिर तू मेरे पास आ ही गया, अमन। तेरे परिवार का हिसाब अभी बाकी है,” वह गुर्राई।

रवि ने अमन का हाथ पकड़ा और दोनों भागने लगे। डायन कभी बूढ़ी औरत बनकर रास्ता रोकती, कभी बच्ची बनकर रोती और कभी अमन की माँ की आवाज में उसे पुकारती।

अमन हर बार उस आवाज की ओर मुड़ना चाहता, लेकिन रवि उसे आगे खींचता रहा। अचानक पेड़ों के बीच काला धुआँ फैल गया। रास्ता दिखाई देना बंद हो गया। भागते हुए दोनों को दूर एक घर में दीपक जलता दिखाई दिया।

गाँव के घर में छिपा हुआ डर

अमन और रवि घर के दरवाजे पर पहुँचे और जोर-जोर से दस्तक देने लगे। कुछ देर बाद दरवाजा खुला। सामने असली दीपक खड़ा था।

“तुम दोनों की हालत ऐसी क्यों हो गई है?” उसने हैरानी से पूछा।

अमन अब किसी पर भरोसा नहीं कर पा रहा था, लेकिन दीपक ने उन्हें अंदर बुला लिया। घर में उसके माता-पिता, गाँव के कुछ लोग और एक बूढ़ा आदमी मौजूद थे।

अमन ने जंगल में देखी सारी घटनाएँ बताईं। मृत्युलेखा डायन का नाम सुनते ही बूढ़े आदमी का चेहरा पीला पड़ गया।

उसने कहा, “वह फिर जाग चुकी है। वह किसी भी इंसान का रूप बना सकती है। अपने दोस्तों और परिवार की शक्ल दिखाकर लोगों को धोखा देती है। जो उसके छलावे में फँस जाता है, उसका बचकर निकलना मुश्किल होता है।”

दीपक की माँ पानी लेकर आईं। अमन ने गिलास उठाया, तभी उसकी नजर दरवाजे के पास खड़े रवि पर पड़ी।

रवि के चेहरे पर अजीब मुस्कान थी। अमन ने नीचे देखा, तो उसके पैरों के नीचे कोई परछाईं नहीं थी।

“रवि, तुम वहाँ क्यों खड़े हो? इधर आओ,” अमन ने सावधानी से कहा।

रवि ने धीरे-धीरे सिर उठाया। उसकी आँखें काली पड़ने लगीं और मुँह दोनों तरफ से फटने लगा। उसके चेहरे के पीछे मृत्युलेखा डायन का भयानक रूप दिखाई देने लगा।

घर में मौजूद लोग चीख उठे। डायन हँसते हुए बोली, “तुम्हें लगा कि तुम अपने दोस्त के साथ भागकर मुझसे बच जाओगे? असली रवि तो मेरे कब्जे में है। मैं उसी का चेहरा पहनकर तुम्हारे साथ यहाँ तक आई हूँ।”

तभी कमरे के कोने से किसी के कराहने की आवाज आई। सबने पलटकर देखा। वहाँ असली रवि घायल अवस्था में पड़ा था। उसके कपड़े मिट्टी और खून से सने हुए थे।

जंगल में डायन के हमले के दौरान रवि घायल हो गया था। वह किसी तरह उस घर तक पहुँच गया था और गाँव वालों ने उसे अंदर लाकर छिपा दिया था। लेकिन उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह कुछ बता नहीं पाया। इसी बीच डायन ने रवि का रूप धारण करके अमन का पीछा किया और उसके साथ घर में घुस आई।

अब उसका छलावा सबके सामने था।

रवि की आखिरी साँस

मृत्युलेखा डायन घायल रवि की ओर बढ़ी। रवि ने अमन को देखकर कमजोर आवाज में कहा, “अमन, ताबीज संभालकर रखना। यह हमें बचा सकता है।”

अमन अपने दोस्त के पास जाना चाहता था, लेकिन डायन रास्ते में खड़ी थी। तभी रवि ने पास पड़ी लकड़ी उठाई और उस पर वार कर दिया। डायन एक पल के लिए पीछे हटी।

रवि ने अमन को दरवाजे की ओर धकेलते हुए कहा, “भाग जा, अमन! यह तुझे मार देगी!”

अमन ने रवि का हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन डायन तेजी से पलटी। उसने अपने लंबे पंजों से रवि को पकड़ लिया। रवि ने अमन को बचाने के लिए खुद को उसके सामने कर दिया।

डायन के पंजे रवि के सीने में धँस गए। रवि की चीख कमरे में गूँज उठी। उसकी आँखें अमन पर टिकी रहीं और फिर धीरे-धीरे बंद हो गईं।

अमन का सबसे अच्छा दोस्त उसकी आँखों के सामने मर गया था। डायन ने रवि की लाश जमीन पर फेंकी और अमन की ओर देखकर हँसी।

“एक चला गया, अब दूसरा भी जाएगा।”

अमन की साँसें तेज हो गईं। वह अपने दोस्त को बचा नहीं पाया था और अब उसकी अपनी जान भी खतरे में थी।

दीपक की कुर्बानी

दीपक ने अमन को बचाने के लिए पास पड़ी जलती लकड़ी उठा ली। उसने मृत्युलेखा डायन पर वार किया, तो उसके बालों में आग की छोटी लपटें उठने लगीं।

डायन गुस्से से चीखी और दीपक की ओर झपटी। दीपक ने उसे पीछे धकेलकर अमन को भागने का मौका दिया।

“अमन, बाहर भाग जा!” वह चिल्लाया।

लेकिन अमन अपने दोस्त को छोड़कर नहीं जाना चाहता था। वह वापस उसकी ओर बढ़ा। इसी बीच डायन ने दीपक को पकड़कर दीवार से दे मारा। उसके मुँह से खून निकल आया, फिर भी उसने डायन के पंजे पकड़कर उसे अमन से दूर रखने की कोशिश की।

दीपक ने अमन की तरफ देखा और कहा, “ताबीज मत उतारना, अमन। अपने परिवार के लिए जीना।”

अगले ही पल डायन ने उसके गले पर वार कर दिया। दीपक जमीन पर गिर पड़ा और उसकी साँसें थम गईं।

अमन की आँखों से आँसू बहने लगे। रवि और दीपक दोनों उसे बचाते हुए अपनी जान दे चुके थे। वह अपने दोस्तों के पास घुटनों के बल बैठ गया, लेकिन अब उन्हें वापस लाने का कोई रास्ता नहीं था।

मृत्युलेखा डायन धीरे-धीरे अमन की ओर बढ़ने लगी। उसके पीछे दीवार थी और सामने मौत खड़ी थी।

मृत्युलेखा डायन का असली निशाना

डायन अचानक रुक गई। उसका जला हुआ चेहरा बदलने लगा और कुछ ही पलों में वह अमन की माँ जैसी दिखाई देने लगी।

वह रोते हुए उसके पास आई और बोली, “बेटा, मैं तुम्हारी माँ हूँ। मुझे अपने पास आने दो। यह ताबीज उतार दो, फिर सब ठीक हो जाएगा।”

अमन की आँखों में आँसू भर आए। उसकी माँ की आवाज बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी उसे बचपन में सुनाई देती थी। लेकिन उसे याद था कि उसकी माँ अब इस दुनिया में नहीं थीं।

अगले ही पल वह चेहरा उसके पिता का हो गया।

“अमन, ताबीज उतार दो। तुम हमें फिर से देख सकोगे,” नकली पिता ने कहा।

अमन कुछ पल के लिए डगमगाया, लेकिन फिर उसने ताबीज कसकर पकड़ लिया।

“तुम मेरे माता-पिता नहीं हो। तुम वही डायन हो जिसने मेरा परिवार छीन लिया,” उसने कहा।

मृत्युलेखा का चेहरा फिर से जली हुई लाश जैसा हो गया। वह गुस्से से गुर्राई, “तेरे दादा ने मुझे जलाया था। मैंने तेरे परिवार को मिटा दिया। अब तुझे भी नहीं छोड़ूँगी।”

तभी अमन के गले का ताबीज तेज गर्म होने लगा। उससे हल्की सुनहरी रोशनी निकली। डायन उसे देखते ही पीछे हट गई। जब भी रोशनी उसके करीब पहुँचती, वह दर्द से चीखने लगती थी।

अमन समझ गया कि ताबीज उसकी रक्षा करने के साथ-साथ डायन को नुकसान भी पहुँचा सकता है।

अमन और मृत्युलेखा का आखिरी मुकाबला

मृत्युलेखा डायन ने अपने लंबे पंजे फैलाए और अमन पर झपट पड़ी। अमन जमीन पर गिर गया, लेकिन उसने ताबीज को कसकर पकड़े रखा। उसकी आँखों के सामने रवि और दीपक के आखिरी पल घूम रहे थे।

उसने भगवान का नाम लिया और किसी तरह उठ खड़ा हुआ। डायन ने उसका गला पकड़ने की कोशिश की, लेकिन ताबीज की रोशनी उसके हाथों पर पड़ी तो उनसे धुआँ उठने लगा।

डायन दर्द से पीछे हटी। फिर उसने अमन के चारों ओर काला धुआँ फैला दिया। घर की दीवारें गायब होने लगीं और अमन को लगा कि वह फिर उसी अंधेरे जंगल में खड़ा है।

उसके सामने रवि और दीपक दिखाई दिए। दोनों ने उसे पुकारा, “अमन, हमें बचा ले।”

अमन उनकी ओर बढ़ना चाहता था, लेकिन उसे समझ आ गया कि यह भी डायन का एक और छलावा है। उसने भगवान का नाम लेना जारी रखा। धीरे-धीरे धुआँ छँटने लगा और घर फिर से दिखाई देने लगा।

ताबीज की रोशनी से डायन कमजोर पड़ रही थी, लेकिन वह बार-बार अमन पर हमला कर रही थी। आखिरकार उसने अमन को दीवार से दबा दिया और उसके गले की ओर पंजे बढ़ाए।

अमन को साधु की चेतावनी याद थी कि ताबीज कभी न उतारे। मगर उसे यह भी समझ आ गया था कि ताबीज की शक्ति ही डायन को रोक सकती है।

उसने रवि और दीपक की कुर्बानी याद की और आखिरी फैसला कर लिया। अमन ने ताबीज अपने गले से उतारा। एक पल के लिए उसे लगा कि उसकी सुरक्षा खत्म हो गई है, लेकिन अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था।

वह ताबीज को दोनों हाथों में पकड़े डायन की ओर बढ़ा और पूरी ताकत लगाकर उसे उसके गले में डाल दिया।

ताबीज का रहस्य और डायन का अंत

ताबीज लगते ही मृत्युलेखा डायन की भयानक चीख से पूरा घर काँप उठा। उसका शरीर अकड़ गया और त्वचा से काला धुआँ निकलने लगा। उसने ताबीज खींचकर निकालने की कोशिश की, लेकिन उसे छूते ही उसके हाथ जलने लगे।

उसका चेहरा राख की तरह टूटने लगा और शरीर आग की लपटों में घिर गया।

डायन ने अमन को घूरते हुए चिल्लाया, “तूने मुझे रोका है, खत्म नहीं किया! अमन, मैं वापस आऊँगी!”

अगले ही पल उसका शरीर राख बनकर बिखर गया। काला धुआँ छत की ओर उठा और बाहर आसमान में छाए बादलों के बीच खो गया।

घर में सन्नाटा छा गया। अमन जमीन पर बैठ गया। पहली बार उसे लगा कि मृत्युलेखा का आतंक खत्म हो चुका है, लेकिन उसके मन में एक सवाल बाकी था—अगर डायन सचमुच खत्म हो गई थी, तो उसने वापस आने की चेतावनी क्यों दी थी?

मृत्युलेखा डायन की आखिरी चेतावनी

सुबह होने पर अमन घर से बाहर निकला। रवि और दीपक उसे बचाते हुए अपनी जान दे चुके थे। गाँव वालों ने दोनों का अंतिम संस्कार किया। अमन ने उनकी चिताओं के सामने खड़े होकर कसम खाई कि वह उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

कुछ समय बाद अमन को घर के मलबे के पास वही ताबीज मिला। वह काला पड़ चुका था, लेकिन उसमें हल्की गर्माहट बाकी थी। अमन ने उसे उठाकर दोबारा अपने गले में पहन लिया और शहर लौट गया।

शहर में भी उसे चैन से नींद नहीं आती थी। रात में कमरे के बाहर किसी के चलने की आवाज सुनाई देती। कभी उसकी माँ उसे पुकारती और कभी रवि की आवाज आती कि वह दरवाजा खोल दे।

एक रात अमन आईने के सामने खड़ा था। उसे अपनी परछाईं के पीछे एक दूसरी आकृति दिखाई दी। उसके लंबे बाल जमीन पर फैले थे और गर्दन एक तरफ झुकी हुई थी। अमन ने पलटकर देखा, लेकिन कमरे में कोई नहीं था।

तभी उसके गले का ताबीज बर्फ जैसा ठंडा पड़ गया। कमरे की बत्ती बुझ गई और अंधेरे में मृत्युलेखा की हँसी सुनाई दी।

“अमन, तूने सोचा मैं मर गई?”

दीवार के कोने में एक जला हुआ चेहरा उभर आया। डायन मुस्कुराई और बोली, “रवि और दीपक को तू बचा नहीं पाया। अब देखना, अगली बार तेरे लिए कौन अपनी जान देगा।”

इतना कहकर उसका चेहरा अंधेरे में घुल गया। अमन ने दरवाजा खोलकर बाहर भागना चाहा, लेकिन दरवाजे के नीचे से काले धुएँ की लकीर अंदर आने लगी। दीवार पर डायन की परछाईं उभर आई।

उस परछाईं के पीछे दो और आकृतियाँ दिखाई दीं। एक रवि जैसी थी और दूसरी दीपक जैसी। अमन समझ नहीं पा रहा था कि वे उसके दोस्तों की आत्माएँ थीं या डायन का नया छलावा।

तभी अंधेरे में आवाज गूँजी, “अब तेरी बारी है, अमन।”

अमन ने आँखें बंद करके भगवान का नाम लिया। जब उसने दोबारा आँखें खोलीं, तो कमरा खाली था। आईने पर किसी ने नाखून से लिखा था—

“मैं वापस आऊँगी।”

उसने ताबीज को छुआ, लेकिन वह अब भी बर्फ जैसा ठंडा था। तभी खिड़की के बाहर सूखे पत्तों पर कदमों की आवाज सुनाई दी।

अमन ने धीरे-धीरे सिर घुमाया। खिड़की के बाहर अंधेरे में कोई आकृति चल रही थी।

उसके पैर उलटे थे।

और उसके पीछे जमीन पर कोई परछाईं नहीं थी।

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