क्या एक भयानक अस्पताल की लिफ्ट में छिपी आत्मा किसी की भी जिंदगी छीन सकती है? आधी रात की चीखें, खून से सनी नर्स, अंधेरे बेसमेंट में पड़ी अपनी ही लाश और अचानक गायब होते लोग रिया को ऐसे खौफनाक रहस्य में फँसा देते हैं, जहाँ बचना नामुमकिन लगता है।
भयानक अस्पताल की लिफ्ट में पिशाच | The Last Patient Of The Haunted Hospital
शहर के बीचों-बीच एक बहुत पुराना हॉस्पिटल था, जिसका नाम सिटी केयर हॉस्पिटल था। दिन में यह हॉस्पिटल बिल्कुल सामान्य दिखाई देता था। मरीज आते-जाते, डॉक्टर भागते-दौड़ते और नर्सें काम में व्यस्त रहती थीं। लेकिन जैसे ही रात होती, यह हॉस्पिटल किसी डरावनी जगह में बदल जाता था।
खासकर उसकी पुरानी बिल्डिंग, जो पीछे खड़ी थी, अंधेरे में और भी खतरनाक दिखाई देती थी। उस बिल्डिंग की खिड़कियाँ टूटी हुई थीं, दीवारों पर पुराना पेंट उखड़ा हुआ था और जगह-जगह पानी के दाग ऐसे लगते थे, जैसे दीवारों से खून बहा हो।
उस पुरानी बिल्डिंग में पहले मरीजों को रखा जाता था, लेकिन एक अजीब हादसे के बाद उसे बंद कर दिया गया था। लोग कहते थे कि कई साल पहले वहाँ लिफ्ट अचानक खराब हो गई थी और एक नर्स अंदर फँस गई थी।
लिफ्ट दो मंजिलों के बीच अटक गई थी और उस नर्स ने बहुत देर तक मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन उस समय बिल्डिंग का वह हिस्सा खाली था। सुबह जब लिफ्ट खोली गई, तब तक निशा की मौत हो चुकी थी।
उस दिन के बाद उस बिल्डिंग में अजीब-अजीब हरकतें होने लगीं। हॉस्पिटल के पुराने गार्ड रमेश का कहना था कि उसने कई बार रात के 2 बजे उस बिल्डिंग की लिफ्ट को अपने आप चलते देखा था, जबकि उस बिल्डिंग की बिजली भी ज्यादातर समय बंद रहती थी।
कई बार लिफ्ट अपने आप ऊपर जाती, फिर नीचे आती और बीच-बीच में रुक जाती, जैसे कोई अंदर हो और बटन दबा रहा हो। लेकिन जब गार्ड ऊपर जाकर देखता, तो वहाँ कोई नहीं होता था। यह बात धीरे-धीरे पूरे हॉस्पिटल में फैल गई और रात में कोई भी उस बिल्डिंग में नहीं जाता था।
पुरानी बिल्डिंग में सबसे खतरनाक हिस्सा लिफ्ट वाली जगह थी। वहाँ हमेशा बहुत ठंड रहती थी, जबकि वहाँ कोई एसी नहीं था। दीवार पर एक पुरानी घड़ी लगी थी, जो हमेशा 2 बजे पर ही बंद रहती थी।
लिफ्ट के दरवाजे पर खरोंच के निशान थे, जैसे किसी ने अंदर से बाहर निकलने की बहुत कोशिश की हो। कई नर्सों का कहना था कि जब वे उस लिफ्ट के पास से गुजरती थीं, तो उन्हें अंदर से किसी के धीरे-धीरे दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनाई देती थी—ठक… ठक… ठक…
एक दिन हॉस्पिटल के मैनेजर मिस्टर वर्मा ने उस बिल्डिंग को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला किया, लेकिन अजीब बात यह थी कि बंद करने के बाद भी कई बार वहाँ लाइट जलती दिखाई देती थी। कुछ लोगों ने तो यह भी कहा कि उन्होंने रात में लिफ्ट के सामने एक नर्स को खड़े देखा, जो सिर झुकाकर खड़ी रहती थी।
जैसे ही कोई उसके पास जाने की कोशिश करता, वह अचानक गायब हो जाती। तब से लोग उस बिल्डिंग को डेथ बिल्डिंग कहने लगे थे और सभी को सख्त मना था कि रात में उस लिफ्ट के पास कभी मत जाना।
रिया की उस भयानक अस्पताल में नई जॉइनिंग
रिया नाम की एक नई नर्स की जॉइनिंग सिटी केयर हॉस्पिटल में हुई। वह बहुत मेहनती और बहादुर लड़की थी, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि जिस हॉस्पिटल में वह काम करने आई है, वहाँ की पुरानी बिल्डिंग के बारे में लोग क्या-क्या कहते हैं।
जॉइनिंग के पहले दिन ही उसे बताया गया कि उसकी ड्यूटी कभी-कभी नाइट शिफ्ट में भी होगी। यह सुनकर रिया थोड़ी घबराई, लेकिन उसने सोचा कि यह तो एक सामान्य हॉस्पिटल है। यहाँ डरने वाली क्या बात होगी?
नाइट ड्यूटी के पहले दिन ही रिया की मुलाकात पुराने गार्ड रमेश से होती है। रमेश उसे ध्यान से देखता है और पूछता है, “तुम नई हो क्या?”
रिया बोली, “हाँ।”
रमेश थोड़ा चुप हो जाता है। फिर उससे कहता है कि रात में कभी पुरानी बिल्डिंग जाना हो, तो लिफ्ट से कभी मत जाना।
रिया हँसने लगी और बोली, “लिफ्ट से क्यों नहीं?” लेकिन रमेश कुछ नहीं बोलता। बस इतना कहता है, “बस मत जाना… सीढ़ियों से जाना।” उसकी आवाज में डर साफ सुनाई दे रहा था।
उसी रात लगभग 1:30 बजे एक सीनियर डॉक्टर, डॉ. अमन, आता है और रिया से कहता है कि पुरानी बिल्डिंग के स्टोर रूम से कुछ फाइलें लानी हैं, जो तीसरी मंजिल पर हैं।
रिया पहले मना करने वाली होती है, लेकिन डॉ. अमन कहता है कि वे बहुत जरूरी हैं। रिया टॉर्च लेती है और पुरानी बिल्डिंग की तरफ चली जाती है। जैसे-जैसे वह बिल्डिंग के करीब जाती है, उसे एक अजीब-सा सन्नाटा महसूस होता है।
ऐसा लग रहा था, जैसे वहाँ कोई है, लेकिन दिखाई कोई नहीं दे रहा था। बिल्डिंग के अंदर जाते ही रिया को बहुत ठंड लगने लगती है। उसकी टॉर्च बार-बार जल-बुझ रही थी। वह सीढ़ियों की तरफ बढ़ी, लेकिन तभी उसे टिंग… की आवाज सुनाई देती है, जैसे लिफ्ट का दरवाजा खुला हो।
रिया धीरे-धीरे पीछे मुड़ती है। लिफ्ट का दरवाजा सच में खुला था, जबकि वहाँ तो बिजली भी नहीं थी। लिफ्ट के अंदर पूरी तरह अंधेरा था। ऐसा लग रहा था, जैसे अंदर कोई खड़ा है। रिया डर जाती है और तेज-तेज सीढ़ियों की तरफ चलने लगती है।
लेकिन तभी लिफ्ट का दरवाजा अपने आप बंद हो जाता है और लिफ्ट अपने आप ऊपर जाने लगती है। लिफ्ट के ऊपर जाने की आवाज पूरी बिल्डिंग में गूँजने लगी। रिया डर के मारे वहीं खड़ी रह जाती है।
तभी बिल्डिंग की ऊपर वाली मंजिल से किसी औरत के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज आती है, जैसे कोई मदद माँग रहा हो। वह आवाज लिफ्ट के साथ-साथ ऊपर जा रही थी।
अस्पताल की लिफ्ट अपने आप क्यों चलती है?
रिया सीढ़ियों की तरफ बढ़ रही थी कि अचानक पूरी बिल्डिंग की लाइट एक सेकेंड के लिए जलती है और फिर बंद हो जाती है। उसी एक सेकेंड की रोशनी में रिया ने ऊपर की मंजिल की रेलिंग के पास किसी को खड़े देखा। वह बिल्कुल सीधा खड़ा था और नीचे रिया की तरफ देख रहा था।
लेकिन जैसे ही अंधेरा हुआ, वह गायब हो गया। रिया का दिल अब बहुत तेज धड़कने लगा। अब उसे गार्ड रमेश की बात याद आने लगी—लिफ्ट का इस्तेमाल मत करना। तभी अचानक लिफ्ट नीचे ग्राउंड फ्लोर पर अपने आप आकर रुक जाती है।
टिंग… की आवाज पूरे खाली हॉल में गूँज रही थी। लिफ्ट का दरवाजा धीरे-धीरे खुलता है। अंदर अंधेरा था, लेकिन ऐसा लग रहा था, जैसे कोई अंदर खड़ा है और बाहर आने का इंतजार कर रहा है। रिया डर के मारे पीछे हटने लगती है।
लेकिन तभी उसे महसूस होता है कि उसके पीछे कोई खड़ा है। वह तुरंत पीछे मुड़ती है, लेकिन वहाँ कोई नहीं होता। अचानक लिफ्ट के अंदर की लाइट जलती है और रिया की नजर लिफ्ट के अंदर लगे शीशे पर पड़ती है।
शीशे में उसे अपना चेहरा दिखाई देता है, लेकिन पीछे एक और औरत खड़ी दिखाई देती है। रिया तुरंत पीछे मुड़कर देखती है, लेकिन वहाँ कोई नहीं होता। वह फिर शीशे में देखती है। वह औरत अभी भी वहीं खड़ी थी। उसके बाल उसके चेहरे पर थे और उसकी नर्स की ड्रेस पर खून के बड़े-बड़े दाग थे।
रिया डर के मारे भागने लगती है, लेकिन तभी लिफ्ट का दरवाजा जोर से बंद हो जाता है—धड़ाम! और लिफ्ट अपने आप ऊपर जाने लगती है, जबकि रिया लिफ्ट के बाहर खड़ी थी। लिफ्ट के अंदर से कोई जोर-जोर से दरवाजा पीटने लगा—ठक! ठक! ठक! ठक!
जैसे कोई अंदर से बाहर निकलना चाहता हो। साथ में एक औरत के चीखने की आवाज आती है, “बचाओ… मुझे बाहर निकालो…” लिफ्ट अचानक तीसरी मंजिल पर रुकती है, फिर चौथी और फिर पाँचवीं मंजिल पर, जो सालों से बंद थी।
पाँचवीं मंजिल पर पहुँचकर लिफ्ट रुक जाती है और इस बार दरवाजा धीरे-धीरे खुलता है। ऊपर पूरी तरह अंधेरा था, लेकिन अंधेरे में दो लाल आँखें चमक रही थीं और धीरे-धीरे कोई लिफ्ट के अंदर जाने लगता है।
अगले ही सेकेंड लिफ्ट का दरवाजा अपने आप बंद हो जाता है और लिफ्ट बहुत तेजी से बेसमेंट की तरफ जाने लगती है। इस बार लिफ्ट के अंदर से चीखने की आवाज आ रही थी। फिर एक बहुत डरावनी, धीमी हँसी सुनाई देती है—”हह… हहहह… अब कोई नहीं बचेगा…”
सीसीटीवी कैमरे में दिखी वह आत्मा
उसी समय हॉस्पिटल के सिक्योरिटी रूम में बैठे रमेश की नजर अचानक सीसीटीवी स्क्रीन पर पड़ती है। बाकी सारे कैमरे सामान्य दिख रहे थे, लेकिन जैसे ही उसकी नजर पुरानी बिल्डिंग के कैमरे पर जाती है, स्क्रीन अपने आप झिलमिलाने लगती है।
पहले तो सब कुछ खाली दिखता है। फिर धीरे-धीरे लिफ्ट के सामने खड़ी रिया दिखाई देती है। लेकिन अगले ही पल रमेश के हाथ काँपने लगते हैं, क्योंकि स्क्रीन में रिया अकेली नहीं थी। उसके ठीक पीछे एक और आकृति खड़ी थी।
रमेश ध्यान से स्क्रीन के पास जाता है। वह आकृति धीरे-धीरे साफ होने लगती है। वह एक औरत थी, नर्स की ड्रेस में, लेकिन उसका चेहरा पूरी तरह खून से भरा हुआ था। उसके बाल उसके चेहरे पर चिपके हुए थे और उसकी आँखें बिल्कुल काली थीं, बिना किसी सफेदी के।
सबसे डरावनी बात यह थी कि वह औरत सीधे कैमरे की तरफ देख रही थी, जैसे उसे पता हो कि कोई उसे देख रहा है। अचानक वह धीरे-धीरे मुस्कुराने लगती है और स्क्रीन पर हल्की-हल्की खरोंच जैसी लकीरें बनने लगती हैं।
रमेश घबराकर दूसरे कैमरे पर स्विच करता है। इस बार वह लिफ्ट के अंदर का कैमरा देखता है। स्क्रीन कुछ सेकेंड के लिए पूरी तरह ब्लैक हो जाती है। फिर अचानक चालू होती है। अंदर रिया खड़ी होती है, लेकिन उसका चेहरा डर से सफेद पड़ चुका था।
वह बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी, जैसे कोई उसके बहुत करीब खड़ा हो। लेकिन कैमरे में उसके पीछे कोई दिखाई नहीं दे रहा था। तभी अचानक कैमरे में एक गड़गड़ाहट-सी हुई और एक सेकेंड के लिए वही खून से भरी नर्स रिया के पास खड़ी दिखाई दी।
अचानक सीसीटीवी कैमरे पर एक अजीब आवाज गूँजने लगी—कड़… कड़… कड़… जैसे कोई कैमरे के अंदर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो। रमेश डर के मारे पीछे हट जाता है। तभी स्क्रीन पर रिया की जगह कुछ और दिखाई देने लगता है।
अब लिफ्ट के अंदर रिया नहीं, बल्कि एक मरी हुई लाश खड़ी थी। सिर झुका हुआ था, बाल बिखरे हुए थे और धीरे-धीरे सिर ऊपर उठने लगा। जैसे ही उसका चेहरा कैमरे के सामने आता है, वह वही खून से भरी नर्स होती है। उसकी आँखों से खून टपक रहा था।
अगले ही पल सारे कैमरे एक साथ बंद हो जाते हैं। सिक्योरिटी रूम में अंधेरा छा जाता है। रमेश जल्दी से लाइट ऑन करने की कोशिश करता है, लेकिन स्विच काम नहीं करता। तभी पीछे से किसी के कदमों की आवाज आती है—ठक… ठक… ठक…
रमेश धीरे-धीरे पीछे मुड़ता है और उसका दिल जैसे रुक जाता है, क्योंकि उसके पीछे वही नर्स खड़ी थी। बिल्कुल पास। उसके होंठ धीरे से हिलते हैं और वह कहती है, “अब तुमने भी देख लिया। अब तुम नहीं बचोगे…”
अस्पताल की लिफ्ट वाली आत्मा से हुआ सामना
पुरानी बिल्डिंग के अंदर रिया अब पूरी तरह अकेली नहीं थी। उसे साफ महसूस हो रहा था कि कोई उसके बहुत करीब खड़ा है। उसकी साँसों की ठंडी हवा उसकी गर्दन को छू रही थी। अचानक उसके कान के पास कोई बहुत धीमी आवाज में फुसफुसाता है, “तुम आ गई…” रिया का शरीर सुन्न पड़ गया।
वह हिल तक नहीं पा रही थी। उसका दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि उसे लग रहा था, जैसे उसकी धड़कन की आवाज बाहर सुनाई दे रही हो। तभी लिफ्ट का दरवाजा अपने आप टिंग… की आवाज के साथ खुलता है। अंदर पूरी तरह अंधेरा था, लेकिन इस बार अंधेरा खाली नहीं था।
रिया चाहकर भी अपनी नजरें हटा नहीं पा रही थी। धीरे-धीरे उसे अंदर कुछ हिलता हुआ दिखाई देता है। फिर अचानक लिफ्ट के अंदर की लाइट झपकती है और एक सेकेंड के लिए सब कुछ साफ दिखाई देता है।
वह खून से सनी नर्स निशा थी। उसका शरीर टेढ़ा-मेढ़ा था, आँखें पूरी तरह काली थीं और उसका मुँह इतना खुला हुआ था, जैसे वह चीखते-चीखते मर गई हो। रिया पीछे हटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसके पैर जैसे जम गए थे। तभी निशा धीरे-धीरे लिफ्ट से बाहर निकलती है। उसके कदम जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। वह हवा में तैरते हुए आई।
वह रिया के बिल्कुल सामने आकर रुक जाती है। उसकी आँखें सीधे रिया की आँखों में घुसती जा रही थीं। अचानक उसका हाथ आगे बढ़ता है—ठंडा और सड़ा हुआ। वह रिया की कलाई पकड़ लेती है। रिया के दिमाग में एक साथ सैकड़ों चीखें गूँजने लगती हैं।
एक पल तो उसे ऐसा लगा, जैसे वह उस बिल्डिंग में नहीं है, बल्कि वहाँ है जहाँ सालों पहले निशा फँसी हुई थी, उसी लिफ्ट में। चारों तरफ अंधेरा था, दम घोंटने वाली हवा थी और लिफ्ट की दीवारों पर खून के निशान थे।
वह खुद को लिफ्ट के अंदर चिल्लाते हुए देखती है, “कोई है…? मुझे बाहर निकालो…” उसकी अपनी ही आवाज उसके कानों में गूँजती है। तभी लिफ्ट के बाहर से कोई आवाज आती है, लेकिन वह मदद की आवाज नहीं थी। वह धीमी हँसी थी, वही खतरनाक हँसी।
निशा की आवाज अब हर तरफ गूँज रही थी, “मैं यहाँ मर गई थी… अकेली तड़प-तड़पकर। अब तुम मेरी जगह लोगी…” अचानक लिफ्ट के दरवाजे अपने आप बंद हो जाते हैं और अंदर बहुत ज्यादा अंधेरा छा जाता है। रिया पूरी ताकत से दरवाजा पीटने लगती है—ठक! ठक! ठक! लेकिन बाहर कोई नहीं था।
कोई सुनने वाला नहीं था। तभी उसके पीछे से किसी के नाखून उसकी गर्दन को छूते हैं और उसके कान में ठंडी साँस की आवाज गूँजती है, “अब तुम कभी बाहर नहीं जाओगी…”
उस दिन क्यों खुला हुआ था बेसमेंट का दरवाजा
लिफ्ट अचानक बहुत तेज झटके के साथ नीचे जाकर रुकती है। रिया को ऐसा लगता है, जैसे उसका पूरा शरीर अंदर से हिल गया हो। कुछ सेकेंड तक सब कुछ बिल्कुल शांत हो जाता है। इतनी शांति थी कि उसकी साँसों की आवाज भी डराने लगती है।
फिर धीरे-धीरे लिफ्ट का दरवाजा आधा खुलता है और सामने घुप्प अंधेरा दिखाई देता है। यह बेसमेंट था, लेकिन यह सामान्य बेसमेंट नहीं था। हवा में सड़न की बदबू थी, जैसे कोई बहुत पुरानी चीज सड़ रही हो… या शायद कोई लाश।
रिया डरते-डरते लिफ्ट से बाहर कदम रखती है। उसके पैर जैसे भारी हो गए थे, लेकिन कोई अनजानी ताकत उसे आगे बढ़ने पर मजबूर कर रही थी। बेसमेंट की दीवारें गीली थीं और उन पर काले-काले धब्बे थे, जो देखने में खून जैसे लग रहे थे।
तभी उसकी नजर सामने एक पुराने लोहे के दरवाजे पर पड़ती है, जो आधा खुला हुआ था। वह दरवाजा अपने आप धीरे-धीरे हिल रहा था—चर… चर… जैसे कोई अंदर से धक्का दे रहा हो। अंदर से हल्की-हल्की खटखटाने की आवाज आ रही थी—ठक… ठक… ठक… जैसे कोई बहुत कमजोर होकर दरवाजा पीट रहा हो।
रिया की साँसें तेज हो जाती हैं, लेकिन वह उस दरवाजे के करीब जाने लगती है। जैसे ही वह दरवाजे के पास पहुँचती है, अचानक अंदर से ठंडी हवा का एक झोंका निकलता है और दरवाजा अपने आप पूरा खुल जाता है।
अंदर पूरा अंधेरा था, पर उस अंधेरे में कुछ हलचल थी। फिर अचानक एक धीमी आवाज गूँजती है, “मुझे बाहर निकालो…” यह आवाज इतनी कमजोर थी, जैसे कोई सालों से बंद हो। उसी पल रिया को एहसास हुआ कि यह वही जगह है जहाँ से कोई बाहर नहीं आया और अब शायद वह भी नहीं जा पाएगी।
मुर्दाघर में दिखी मुझे अपनी ही लाश
रिया काँपते हुए उस खुले दरवाजे के अंदर कदम रखती है। अंदर का माहौल और भी भयानक था। यह हॉस्पिटल का पुराना मुर्दाघर था। चारों तरफ लोहे के टेबल थे, जिन पर सफेद चादरें ढकी हुई थीं। हवा इतनी ठंडी थी कि उसकी साँसें धुंध की तरह दिखाई दे रही थीं।
अचानक एक-एक करके सारी चादरें हटने लगती हैं, जैसे नीचे रखी लाशें जिंदा हो गई हों। रिया डर के मारे पीछे हटती है, लेकिन तभी कमरे के कोने में रखे स्टील के टेबल पर उसकी नजर पड़ती है, जहाँ एक लाश पड़ी थी और उसके ऊपर की चादर अपने आप हटने लगती है।
जैसे ही चादर पूरी तरह हटती है, रिया की चीख निकल जाती है, क्योंकि वहाँ रखी लाश किसी और की नहीं, बल्कि उसकी खुद की थी। वही कपड़े, वही चेहरा। शरीर पूरी तरह ठंडा और बेजान पड़ा हुआ था।
उसकी आँखें खुली हुई थीं और सीधे रिया की तरफ देख रही थीं। तभी अचानक उस लाश के होंठ हल्के से हिलते हैं और एक टूटी हुई आवाज निकलती है, “तुम देर से आई…” अगले ही पल कमरे की सारी लाइटें एक साथ बंद हो जाती हैं।
अंधेरे में वही खतरनाक हँसी गूँजने लगती है। अब रिया समझ चुकी थी कि यह जगह उसे जिंदा नहीं छोड़ने वाली।
अब रिया की आत्मा पर पूरी तरह उसका कब्जा
मुर्दाघर के अंधेरे में रिया अपनी ही लाश को घूर रही थी। तभी अचानक उसके पीछे कोई खड़ा हो जाता है, इतना करीब कि उसकी सड़ी हुई साँस उसकी गर्दन को छू रही थी। धीरे-धीरे एक ठंडा हाथ उसके कंधे पर रखा जाता है और जैसे ही रिया मुड़ने की कोशिश करती है, उसका पूरा शरीर जकड़ जाता है।
वह हिल नहीं रही थी, बोल नहीं पा रही थी। सिर्फ उसकी आँखों में डर था। उसकी आँखें फैलती जा रही थीं। तभी उसके कानों में एक आवाज गूँजती है—वही टूटी हुई, डरावनी आवाज निशा की। “अब तुम्हारा शरीर… मेरा है…”
अगले ही पल ऐसा लगता है, जैसे कोई उसके शरीर के अंदर घुस गया हो। उसकी साँस रुकने लगती है और दिल की धड़कन धीमी होने लगती है। उसकी आँखों के सामने अजीब-अजीब तस्वीरें चमकने लगती हैं।
लिफ्ट में फँसी निशा, उसका चीखना, उसकी मौत… और फिर अंधेरा। रिया चीखना चाहती है, लेकिन उसकी आवाज बाहर ही नहीं निकल रही थी, क्योंकि अब उसके होंठ उसके अपने नहीं थे।
कुछ सेकेंड बाद अचानक सब कुछ शांत हो जाता है। रिया का शरीर धीरे-धीरे सीधा खड़ा हो जाता है, लेकिन अब उसकी आँखें वैसी नहीं थीं। वे पूरी तरह काली हो चुकी थीं और उसके चेहरे पर एक खतरनाक, धीमी मुस्कान आ जाती है।
वह धीरे-धीरे अपना सिर घुमाती है, जैसे किसी नई चीज को महसूस कर रही हो। फिर उसकी नजर अपनी ही पड़ी हुई लाश पर जाती है और वह बहुत धीमी आवाज में हँसती है, “अब मैं आजाद हूँ…” उसी पल साफ हो जाता है कि रिया अब रिया नहीं रही। उसके शरीर पर उस आत्मा का पूरा कब्जा हो चुका था।
सुबह की वह भयानक और डरावनी सच्चाई
अगली सुबह सिटी केयर हॉस्पिटल में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन पुरानी बिल्डिंग के आसपास अजीब सन्नाटा था। गार्ड रमेश रात की घटना की वजह से बहुत डरा हुआ था, लेकिन उसने हिम्मत करके कुछ स्टाफ के साथ बेसमेंट की तरफ जाने का फैसला किया।
जैसे ही वे लोग नीचे पहुँचे, वहाँ की हवा और भी भारी लग रही थी, जैसे कुछ बहुत गलत हो चुका हो। मुर्दाघर का दरवाजा आधा खुला था। अंदर जाने पर सबकी साँसें थम जाती हैं। एक स्टील टेबल पर रिया की लाश पड़ी थी। उसकी आँखें खुली हुई थीं और चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था, जैसे उसने मरने से पहले कुछ बहुत भयानक देखा हो।
तभी पीछे से कदमों की आवाज आती है—ठक… ठक… ठक… सब लोग धीरे-धीरे मुड़ते हैं और देखते हैं कि रिया उनके पीछे खड़ी है, जिंदा। लेकिन कुछ तो बहुत गलत था। उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं और उसके चेहरे पर एक अजीब, डरावनी मुस्कान थी।
रमेश डर के मारे पीछे हटता है और काँपती आवाज में कहता है, “तू… तू तो अंदर…” लेकिन रिया धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ती है और बहुत शांत आवाज में कहती है, “वो रिया थी… मैं नहीं।” उसी पल सबको समझ आ जाता है कि असली रिया मर चुकी है और जो उनके सामने खड़ी है, वह कुछ और है।
अब मैं अकेली नहीं हूँ… रिया
रिया के शरीर में खड़ी वह छाया अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी, लेकिन उसकी चाल इंसानों जैसी बिल्कुल नहीं थी। हर कदम के साथ उसकी गर्दन अजीब तरीके से दाएँ-बाएँ मुड़ रही थी, जैसे उसकी हड्डियाँ टूट चुकी हों।
उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं और उनमें कोई भाव नहीं था। सिर्फ खालीपन और भूख! अचानक मुर्दाघर का दरवाजा अपने आप धड़ाम से बंद हो जाता है। कमरे की लाइटें एक-एक करके बुझने लगीं और पूरा माहौल घुप्प अंधेरे में डूब गया।
उसी अंधेरे में आवाज गूँजती है। दो अलग-अलग आवाजें, रिया और निशा की, एक साथ कहती हैं, “तुम सबने मुझे देखा… अब कोई बाहर नहीं जाएगा।” अगले ही पल कमरे में रखी सारी लाशों की चादरें अपने आप हवा में उड़ने लगती हैं।
ठंडी हवा इतनी तेज हो जाती है, जैसे तूफान कमरे के अंदर ही चल रहा हो। रमेश और बाकी लोग डर के मारे दरवाजा खोलने की कोशिश करते हैं, लेकिन दरवाजा जैसे किसी ने बाहर से जकड़ दिया हो। तभी अचानक एक-एक करके सबको पीछे से कोई पकड़ लेता है।
अदृश्य हाथ, ठंडे और सड़े हुए। धीरे-धीरे चीखें गूँजने लगती हैं, “बचाओ! छोड़ दो!” लेकिन हर चीख के बाद वही हँसी सुनाई देती है, लंबी और गूँजती हुई, जैसे कोई उनके दर्द का मजा ले रहा हो। अचानक एक सेकेंड के लिए लाइट जलती है और एक ऐसा नजारा दिखाई देता है, जो किसी भी इंसान के होश उड़ा दे।
रिया अब हवा में तैर रही थी। उसके चारों तरफ कई साये घूम रहे थे, जैसे कई आत्माएँ उसके साथ जुड़ चुकी हों। उसका चेहरा अब पूरी तरह बदल चुका था—आधा रिया, आधा निशा। उसकी मुस्कान इतनी खतरनाक थी कि देखने वाला वहीं जम जाता।
वह धीरे-धीरे सबकी तरफ हाथ बढ़ाती है और वह इंसान वहीं गायब हो जाता है, जैसे उसे अंधेरे ने निगल लिया हो। कुछ घंटों बाद जब हॉस्पिटल का बाकी स्टाफ हिम्मत करके बेसमेंट का दरवाजा तोड़ता है, तो अंदर का नजारा देखकर सबकी रूह काँप जाती है।
पूरा मुर्दाघर खाली था। एक भी इंसान नहीं था, लेकिन फर्श, दीवारें और छत तक खून के निशानों से भरी हुई थीं। ऐसा लग रहा था, जैसे अंदर कोई भयानक लड़ाई हुई हो… या फिर कुछ और। बीच में दीवार पर खून से बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था—”अब हम अकेले नहीं हैं…”
और उसके नीचे कई हाथों के निशान बने हुए थे, जैसे अंदर कई लोग फँसे हों और बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हों। तभी अचानक पीछे से टिंग… की आवाज गूँजती है। सब लोग धीरे-धीरे मुड़ते हैं। पुरानी लिफ्ट अपने आप खुल चुकी थी।
अंदर अंधेरा था। धीरे-धीरे उस अंधेरे में से रिया बाहर आती है, सिर झुकाए, शरीर टेढ़ा-मेढ़ा। जैसे ही वह अपना सिर ऊपर उठाती है, उसके पीछे कई और चेहरे दिखाई देते हैं। वही लोग, जो अभी-अभी गायब हुए थे।
उनकी आँखें भी अब काली हो चुकी थीं। रिया धीरे-धीरे मुस्कुराती है और उसकी आवाज पूरे हॉस्पिटल में गूँजती है, “अब अगला कौन है…?”






बहुत ही डरावनी और अच्छी कहानी।👍