Mystery Of Mahabharat
➡️ जब अर्जुन टूटने लगे तो कृष्ण नें कैसे संभाला → महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था। कुरुक्षेत्र की धरती पर लाखों योद्धा खड़े थे। शंख बज चुके थे , रथ सज चूके थे और हर तरफ युद्ध का माहौल था। पांडव और कौरव आमने – सामने खड़े थे ।
➡️ उसी समय अर्जुन अपने रथ पर खड़े होकर युद्धभूमि को देखने लगे।
➡️ उन्होंने अपने सामने भीष्म पितामह गुरु द्रोणाचार्य , भाई रिश्तेदार और मित्रों को देखा । यह देखकर उनका मन कांप उठा। अर्जुन बहुत महान योद्धा थे उनके पास दिव्य गाँडीव धनुष था और उन्हे कोई आसानी से हरा नही सकता था ।
➡️ लेकिन उस दिन उनका हृदय दुख और मोह से भर गया। उन्होंने सोचा – मैं अपने ही परिवार को कैसे मार सकता हूँ ?
➡️ ऐसे राज्य का क्या लाभ जिसमे अपने ही लोग न रहे ? अर्जुन का शरीर कांपने लगा। उनके हाथों से गांडीव धनुष छूटने लगा ।
➡️ आँखों में आँसू आ गए । उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा, हे माधव ! मैं यह युद्ध नही करूंगा । अपने गुरू और परिवार को मारकर मुझे कोई सुख नही मिलेगा।
युद्धभूमि मे टूट चुका था अर्जुन
➡️ श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी थे। वे जानते थे कि अर्जुन इस समय भ्रम और मोह में फंस चुके हैं। अगर अर्जुन युद्ध छोड़ देते , — तो अधर्म की जीत हो जाती । दुर्योधन का अन्याय पूरी धरती पर फैल जाता। इसलिए कृष्ण ने अर्जुन को जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान देने का निश्चय किया।
➡️ श्रीकृष्ण मुस्कुराये और अर्जुन से बोले , हे पार्थ ! यह कमजोरी एक वीर योद्धा को शोभा नही देती। जिस धर्म की रक्षा के लिए तुम पैदा हुआ हो, उससे पीछे हटना उचित नही है।
➡️ अर्जुन ने कहा , लेकिन मैं अपने ही लोगों को कैसे मारूं ? — भीष्म पितामह और गुरु द्रोणाचार्य मेरे पूज्यनिय है। तब श्री कृष्ण ने अर्जुन को आत्मा का रहस्य समझाया। उन्होंने कहा, मनुष्य का शरीर नष्ट होता है। लेकिन आत्मा कभी नहीं मरती ।
➡️ आत्मा ना जन्म लेती और ना मरती है जैसे इंसान पुराने कपड़े छोड़कर नए कपड़े पहनता है वैसे ही आत्मा नया शरीर धारण करती है। कृष्ण की बाते सुनकर अर्जुन ध्यान से सुनने लगे।
➡️ श्रीकृष्ण ने आगे कहा, हे अर्जुन ! मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा की नही।
➡️ इसलिए किसी के शरीर के नष्ट होने पर शोक करना उचित नही है।
श्री कृष्ण नें बताया जीवन और आत्मा का सबसे बड़ा ज्ञान
➡️ इसके बाद श्री कृष्ण ने कर्म का महत्व बताया । उन्होंने कहा , मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, फल पर नही। अगर इंसान फल की चिंता में डूब जाए, तो वह अपना कर्तव्य ठीक से नही कर सकता ।
➡️ यह बात अर्जुन के मन को छु गई । उन्होंने महसूस किया कि वे परिणाम के डर से अपने धर्म से पीछे हट रहे थे। श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि धर्म की रक्षा करना ही एक क्षत्रिय का सबसे बड़ा काम है ।
➡️ अगर कोई अन्याय और अधर्म को देखकर भी चुप रहे, तो वहभी पाप का भागी दार होगा।
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➡️ कृष्ण ने कहा, हे अर्जुन ! दुर्योधन ने छल , अहंकार और अन्याय का मार्ग चुना है। उसने धर्म का अपमान किया है। ऐसे अधर्म को रोकना जरूरी है। अर्जुन धीरे – धीरे समझने लगे कि यह युद्ध केवल राज्य पाने के लिए नह था । यह धर्म और अधर्म के बीच की लड़ाई थी।
➡️ श्रीकृष्ण ने फिर योग का ज्ञान दिया । उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों को नियंत्रित कर लेता है , वही सच्चा योगी कहलाता है। मनुष्य को हर परिस्थिति में शांत और स्थिर रहना चाहिए ।
➡️ अर्जुन ने पुछा , हे कृष्ण! मन बहुत चंचल होता है इसे नियंत्रित करना कठिन है। श्री कृष्ण बोले , अभ्यास और धैर्य से मन को वश में किया जा सकता है जो व्यक्ति अपने मन को जीत लेता है , वह संसार में सबसे शक्तिशाली बन जाता है।
विराट रूप देखकर कांप उठे अर्जुन
➡️ इसके बाद श्रीकृष्ण ने भक्ति का महत्व बताया । उन्होंने कहा, जो व्यक्ति सच्चे मन से मुझे याद करता है और अच्छे कर्म करता है, मैं हमेशा उसके साथ रहता हूँ।
➡️ अर्जुन अब पहले से शांत महसूस करने लगे थे। उनके मन का डर धीरे – धीरे खत्म हो रहा था । तभी कृष्ण ने अर्जुन को अपना विराट रूप दिखाया । अर्जुन ने देखा कि पूरे ब्रह्माण्ड में केवल कृष्ण ही है । सभी देवता , ग्रह , तारे और संसार उन्ही के भीतर समाए हुए है।
➡️ अर्जुन यह अद्भुत रूप देखकर कांप उठे । —उन्होंने देखा, कि युद्ध में मरने वाले सभी योद्धा पहले से ही भगवान की इच्छा से निर्धारित है। तब श्रीकृष्ण ने कहा, हे अर्जुन! तुम केवल एक माध्यम हो। जो होना तय है, वह होकर रहेगा।
➡️ इसलिए उठो और अपना कर्तव्य निभाओ। अर्जुन अब पूरी तरह बदल चुके थे, उन्होंने खुद के मन के मोह को समाप्त कर लिया था । उन्होंने समझ लिया की सच्चा धर्म केवल अपने कर्तव्य का पालन करना है।
➡️ अर्जुन ने हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण से कहा हे कृष्ण ! — अब मेरा भ्रम समाप्त हो चुका है अब मैं आपकी आज्ञा का पालन करून्गा । इसके बाद अर्जुन ने फिर से अपना गांडीव धनुष उठाया । उनका आत्मविश्वास लौट आया ।
➡️ अब वे केवल योद्धा नही बल्कि धर्म के रक्षक भी बन गए थे ।
गीता का ज्ञान पुरी मानवता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ?
➡️ यही कारण है कि श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का की ज्ञान दिया गया । अगर उस समय अर्जुन टूट जाते , तो अधर्म की जीत हो जाती और संसार में अन्याय फैल जाता । भगवद गीता केवल अर्जुन के लिए नही थी ।
➡️ यह पूरी मानवता के लिए जीवन का मार्गदर्शन है। गीता हमे सिखाती है कि कठिन समय में डरना नही चाहिए और हमेशा धर्म और सत्य का साथ देना चाहिए । गीता यह भी सिखाती कि इंसान को अपने कर्म ईमानदारी से करते रहना चाहिए ।
➡️ आज भी करोड़ों लोग गीता पढ़ते हैं और उससे प्रेरणा लेते हैं जब भी कोई व्यक्ति दुख , दर या भ्रम में फँसता है, गीता उसे शि रास्ता दिखाती है । महाभारत का यह प्रसंग केवल एक युद्ध की कहानी नही है ।
➡️ यह जीवन का सबसे बड़ा ज्ञान है जो हमे सिखाती है कि सच्ची जीत बाहरी नही, बल्कि अपने मन और डर पर विजय पाने में है। इसी वजह से भगवद गीता को दुनिया का सबसे महान ज्ञान देकर केवल एक योद्धा को नही संभाला , बल्कि पूरी मानवता को जीवन जीने का रास्ता दिखाया ।