रामचरितमानस मंगलाचरण । Ramcharitmanas In Hindi
⇒ रामचरितमानस के आरंभ में गोस्वामी तुलसीदास जी सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करते हैं।
⇒ हिन्दू धर्म में किसी भी अच्छे काम को शुरू करने के पहले गणेश जी की वंदना की जाती है। वे विघ्नों को दूर करने वाले और बुद्धि देने वाले देवता माने जाते हैं।
⇒ भगवान गणेश शिव और पार्वती के पुत्र हैं ।
⇒ उनका स्वरूप भक्तों को ज्ञान, विवेक और सफलता का संदेश देता है। तुलसीदास जी भी अपनी महान रचना के आरंभ में गणेश जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं ताकि उनके लेखन में कोई बाधा न आए।
⇒ गणेश जी की प्रथम पूज्य कहा गया है । देवताओ ने उन्हे यह वरदान दिया कि किसी भी सुबह कार्य से पहले उनकी पूजा की जाएगी। इसलिए रामचरित मानस जैसे महान ग्रंथ की शूरूआत भी उनके स्मरण से होती है।
⇒ भक्त जब सच्चे मन से गणेश जी का नाम लेते हैं तो उनके जीवन के अनेक कठिनईयां दूर हो जाती है, वे मन मे सकारात्मक विचार उत्पन्न करते हैं और व्यक्ति को सही मार्ग दिखाते है।
⇒ गणेश जी का बड़ा मस्तक ज्ञान का प्रतीक है । उनके बड़े कान यह शिक्षा देते हैं की हमे अच्छी बाते ध्यान से सुननी चाहिए ।
⇒ उनकी छोटी आंखे एकाग्रता का सन्देश देती है। उनकी सूंड बुद्धिमानी तथा कार्यकुशलता का प्रतीक मानी जाती है ।
⇒ तुलसीदास जी की भावना थी कि गणेश जी की कृपा से रामकथा का वर्णन सरल , सुंदर , और भक्तिमय बने ।
⇒ इसलिए वे सबसे पहले उनका स्मरण करते हाँ। और उनकी वंदना करते हुए अपने कार्य का शुभारंभ करते हैं।
⇒ जो व्यक्ति प्रतिदिन गणेश जी का ध्यान करता है, उनके जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है। उसे अपने कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
☀️गुरु वंदना Ramcharitmanas
⇒ रामचरितमानस में गुरु का स्थान अत्यंत ऊंचा बताया गया है।
⇒ गुरु वह हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं इसलिए तुलसीदास जी गणेश वंदना के बाद गुरु वंदना करते हैं।
⇒ भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान के समान माना गया है। माता – पिता जन्म देते हैं, एलकीं गुरु जीवन को सही दिशा देते हैं। वे हमे धर्म , ज्ञान और सदाचार का मार्ग दिखाते है।
⇒ तुलसीदास जी अपने गुरु के चरणों में प्रणाम करते हुए कहते हैं कि गुरु की कृपा के बिना प्रभु की भक्ति प्राप्त रकना कठिन है।
⇒ गुरु ही वह माध्यम है जो जीव को भगवान से जोड़ते हैं।
⇒ गुरु का ज्ञान सूर्य के समान होता है, जिस प्रकार सूर्य अंधकार को मिटा देता है,
⇒ उसी प्रकार गुरु का उपदेश मनुष्य के जीवन से अज्ञान को दूर करता है। गुरु के कारण ही मनुष्य सत्य और असती में भेद करना सीखता है।
⇒ रामचरितमानस में गुरु के चरणों की धूल को अत्यंत पवित्र बताया गया है। तुलसीदास जी मानते हैं कि गुरु की कृपा से ही उनके हृदय में रामभक्ति का प्रकाश हुआ।
⇒ गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाले मार्गदर्शक होते हैं।
⇒ उनका आशीर्वाद व्यक्ति को कठिन परिस्थितियो में भी सही निर्णय लेने की शक्ति देता है।
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⇒ जो व्यक्ति अपने गुरु का सम्मान करता है, वह जीवन में उन्नति प्राप्त करता है। गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण रखने से मन मे विनम्रता आती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
⇒ इसलए तुलसीदास जी रामकथा प्रारंभ करने से पहले अपने गुरु को प्रणाम करते हैं और उनकी कृपा की कामना करते हैं।
☀️संत वंदना Ramcharitmanas
⇒ रामचरितमानस में संतों की महिमा का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। तुलसीदास जी संतों को संसार का कल्याण करने वाला बताते हैं।
⇒ वे दूसरों के दुख दूर करने और धर्म का प्रचार करने का कार्य करते हैं।
⇒ संतों का हृदय दया , करुणा, और प्रेम से भरा होता है। वे किसी से द्वेष नही करते और सभी जीवो के प्रति समान भावना रखते हैं । उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा बनता हैं।
⇒ तुलसीदास जी कहते हैं की संतों का संग मनुष्य के जीवन को बदल सकता है । उनके साथ रहने से अच्छे जीवन को उत्पन्न होते हैं और बुरे संस्कार धीरे – धीरे समाप्त होने लगते हैं।
⇒ संत लोगों को भगवान के भक्ति का मार्ग दिखाते हैं । वे अपने आचरण से सीखते हैं कि जीवन में सत्य, प्रेम और सेवा का कितना महत्व है। उनके वचन मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
⇒ रामचरित मानस में संतों की तुलना चंदन से की गई है। चंदन जिस वस्तु के संपर्क मे आता है ।
⇒ उसे सुगंधित कर देता है । उसी प्रकार संतों का संग जीवन को पवित्र और सुखद बना देता है।
⇒ संत स्वयं कष्ट लेते है, लेकिन दूसरों का भला करने का प्रयास करते रहते है ।
⇒ वे किसी से बदले की भावना नहीं रखते । उनके मन में केवल भगवान और समाज के कल्याण का विचार रहता है ।
⇒ तुलसीदास जी संतों की वंदना करके यह संदेश देते हैं कि मनुष्य को संतों के मार्ग पर चलना चाहिए। उनके उपदेशों का पालन करने से जीवन में शांति और आनंद प्राप्त होता है।
⇒ संतों की कृपा से भगवन की भक्ति दृढ़ होती है और मनुष्य का जीवन सफल बनता है इसलिए रामचरितमानस में संत वंदना का विशेष महत्व है।
☀️श्री राम वंदना Ramcharitmanas
⇒ गणेश , गुरु और संतों की वंदना के बाद तुलसीदास जी भगवान श्रीराम का स्मरण करते हैं ।
⇒ श्रीराम का स्मरण करते है। श्रीराम मर्यादा, धर्म , सत्य और करुणा के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनका जीवन समस्त मानवता के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
⇒ भगवान श्रीराम विष्णु के अवतार माने जाते है। उन्होंने पृथ्वी पर जन्म लेकर धर्म की स्थापना की और अधर्म का नाश किया । उनका चरित्र आदर्श पति और आदर्श राजा का उदाहरण प्रस्तुत करता हिय।
⇒ तुलसीदास जी श्रीराम को करूणा का सागर बताते हैं। वे अपने भक्तों के दुख दूर करते हैं ।
⇒ और उन्हे सदैव संरक्षण प्रदान करते हैं । जो व्यक्ति सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसे मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।
⇒ श्रीराम का जीवन त्याग और कर्तव्य का संदेश देता है । उन्होंने पिता के वचन की रक्षा के लिए वनवास स्वीकार किया और कठिन परिस्थितियो में भी धर्म का पालन किया।
⇒ माता सीता के प्रति उनका प्रेम , लक्ष्मण के प्रति उनका स्नेह और प्रजा के प्रति उनका समर्पण उन्हे महान बनाता है। वे प्रत्येक संबंध को आदर्श रूप में निभाने की प्रेरणा देते हैं।
⇒ रामनाम को तुलसीदास जी अत्यंत प्रभावशाली बताते हैं। उनका विश्वास है कि राम का नाम लेने मात्र से मनुष्य के अनेक पाप नष्ट हो जाते है और उसका मन पवित्र हो जाता है।
⇒ श्रीराम की भक्ति मनुष्य को विनम्र , दयालु और धर्मनिष्ठ बनाती है । उनका स्मरण जीवन में में आशा , साहस और सकारात्मक का संचार करता है।
⇒ इसी भावना के साथ तुलसीदास जी भगवान श्रीराम को प्रणाम करते हैं और उनकी कृपा से रामचरित मानस की पावन कथा का आरंभ करते हैं।
⇒ यह वंदना सम्पूर्ण रामकथा का आधार है और भक्तों के हृदय में रामभक्ति का दीप प्रज्वलित करती हैं।
नोट्स – रामचरितमानस बालकाण्ड का अगला भाग आपको अगले ही दिन पढ़नें को मिलेगा । ☀️ जय श्री राम ☀️