ऐसा वादा जो बना जीवन भर का इंतजार । Love Returned After 20 Years
⇒ सावन की हल्की बारिश हो रही थी। आसमान में बदल छाए हुए थे , और पूरे गाँव में मिट्टी की खुशबू फैल रही थी ।
⇒ लेकिन उस दिन आकाश और आरती के दिल में किसी तूफान से कम दर्द नहीं था । घर के दरवाजे पर खड़ी आरती की आँखों से लगातार आँसू निकल रहे थे ।
⇒ उसकी उँगलियाँ आकाश का हाथ कसकर पकड़े हुए थी, जैसे वह उसे जाने से रोक लेना चाहती हो। उसकी आँखों में हजारों सपने थे और उन सपनों के साथ गहरा डर भी था।
⇒ जल्दी लौट आना , आकाश ,,, आरती ने कांपती आवाज में कहा कि आकाश तुम्हारे बिना यह घर, यह आँगन , यह जिंदगी सब अधूरी होती है।
⇒ आकाश ने उसकी आँखों से आँसू पोंछे और खुद से मुस्कुराने की कोशिश करी, लेकिन सच तो ये था कि वह खुद बहुत निराश था ।
⇒ उसने कहा बस थोड़े समय की बात है आरती । फिर मैं जब लौटकर आऊँगा तुम्हें सारी खुशियां दूँगा ।
⇒ यह कहते हुए वह बस में बैठ गया। बस धीरे – धीरे आगे बढ़ने लगी और आरती उसको टब तक निहारती रही जब तक वह बस वहाँ से उसकी आँखों से ओझल नहीं हुआ।
⇒ उस दिन उसे स बात का अंदाजा भी नही था,,,,,,,, कि उसका यह इंतजार एक साल का नही बल्कि पूरे 20 साल का होने वाला है।
⇒ हर दिन वह दरवाजे पर सिर्फ यही देखती कि आकाश को उसके घर ले आने वाली बस कब आएगी।
⇒ शुरुआत में आकाश के पत्र आते रहे । हर पत्र में आरती के लिए प्यार था ,भविष्य के सपने थे और जल्द लौटने का वादा था। आर्ट उन पत्रों को देख और पढ़कर घंटों रोती फिर मुसकुराती ।
⇒ कुछ महीनों बाद उसे पता चला की वह माँ बनने वाली है ।
⇒ यह खुशी सुनकर उसकी खुश का ठिकाना ना रहा । उसने तुरंत आकाश को पत्र लिखकर उसको यह खुशखबरी दी कि वह पिता बनने वाला है।
⇒ लेकिन उसी दिन से जैसे किस्मत ने करवट बदल ली । आकाश के पत्र आने बंद हो गए। फोन आना बंद हो गए। हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था।
⇒ सुबह होते ही आरती दरवाजे पर खड़ी होकर डाकिए का इंतजार करती रही।
⇒ शाम को किसी के आने की आवाज सुनकर वह दौड़कर दरवाजे पर पहुंची, लेकिन हर बार निराश होने के सिवा और कुछ नही मलता उसको।
⇒ दिन महीनों मे बदल गए और महीने सालों में । मगर आकाश नहीं आया।
जब आरती की उम्मीद टूटने लगी
⇒ बेटे आशु के जन्म के बाद भी आरती का इंतजार खत्म नही हुआ ।
⇒ वह अपने बेटे को गोद में लेकर अक्सर आकाश की तस्वीर के सामने बैठ जाती और घंटों रोती रहती। शांति देवी अपने बेटे की तस्वीर देखकर आहें भरती थी।
⇒ उनकी बुढी आँखे भी हर दिन दरवाजे की ओर लगी रहती थी। उन्हे विश्वास था कि उनका बेटा एक दिन जरूर लौटेगा।
⇒ लेकिन गाँव वालो की बाते आरती के दिल को रोज घायल करती थी, कोई कहता था कि आकाश दूसरी शादी कर चुका होगा ।
⇒ तो कोई कहता था कि शायद अब वह इस दुनिया में ही नही है।
⇒ हर बात आरती के दिल में एक नया घाव छोड़ जाता था। लेकिन उसको अपने प्यार पर बहुत ही विश्वास था कभी शक नही किया ।
अचानक एक खबर नें सब कुछ खत्म कर दिया
⇒ पाँच साल बाद शहर से एक आदमी गाँव आया। उसने बताया की जिस फैक्ट्री मे आकाश काम करता था .
⇒ उसमे एक दिन भीषण आग लग गई थी, जिसके कारण कई मजदूर को अपनी जान गवानी पड़ी। और काफी के तो शव तक पहचाने नही जा रहे थे।
⇒ पूरे गाँव ने मान लिया कि आकाश अब इस दुनिया में नही है। यह खबर सुनकर आरती जैसे पत्थर बन गई, उसकी आँखों से आँसू तक निकलना बंद हो गए।
⇒ उस रात उसने आकाश की तस्वीर को सीने से लगाकर इतना रोया कि उसकी आवाज बैठ सी गई। उसे लग रहा था जैसे उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई हो।
⇒ मगर दिल के किसी कोने में उम्मीद अब भी जिंदा थी उसे लगता था कि शायद उसका आकाश अभी भी कहीं जिंदा हो।
कठिन जीवन में संजय का सहारा
⇒ समय धीरे – धीरे आगे पढ़ता रहा और आँसू भी बड़ा होने लगा था। और आरती की जिंदगी जिम्मेदारियों के नीचे दबते चली गई ।
⇒ तभी उसकी जिंदगी में संजय आया। वह एक सीधा – सादा नेकदिल और बहुत ही समझदार इंसान था। उसे आरती के अतीत के बारे मे सब पता था ।
⇒ संजय ने कभी आरती पर अपना हक जताने की कोशिश नही की । उसने सिर्फ इतना कहा मैं तुम्हारे टूटे हुए जिंदगी को सहारा देना चाहता हूँ,,,, तुम्हारे अतीत को मिटाना नही।
⇒ शांति देवी और गाँव वालों के समझने पर आखिरकर आरती ने संजय से शादी कर ली। लेकिन उसके दिल में आकाश की यादें हमेशा जिंदा रही।
⇒ संजय ने अंशु को हमेशा अपने बेटे की तरह प्यार किया कभी उसको यह अहसास नही होने दिया कि वह उसका सगा पिता नही है।

जब मरा हुआ इंसान वापस लौट आया
⇒ एक दिन गाँव में थका हुआ बूढ़ा और बिखरा हुआ आदमी दाखिल हुआ , उसके बाल सफेद हो चुके थे और चेहरे पर दर्द की गहरी लकिरे थी। वह सीधे अपने पुराने घर के सामने जाकर खड़ा हो गया।
⇒ दरवाजे पर बैठी शांति देवी जैसे उसे देखा तो जोर से उसका दल धडक उठा । आकाश…… , उनके मुहँ से बस इतना ही निकल पाया।
आरती की दुनिया फिर हिल गई
⇒ जब आरती ने आकाश को देखा तो उसके हाथ से पानी का लोटा जमीन पर गिर गया। उसकी आंखे फैल गई और शरीर कांपने लगी। उसके सामने उसका पहला प्यार पहला पति , उसका अधूरा सपना खड़ा था ।
⇒ वह इंसान जिसे उसने बीस साल पहले खो दिया था , दोनों के आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन
⇒ अब उनके बीच बीस साल का फसला खड़ा था । तभी संजय घर के अंदर आया और आकाश को देखा और एक पल के लिए वह सब समझ गया था।
सच्चाई जाकर आकाश बिल्कुल टूट गया
⇒ आकाश को पता चला की आरती अब संजय की पत्नी है। यह सुनकर आकाश के दिल में ऐसा दर्द उठा,,, जैसे किसी ने उसकी आत्मा को चीर दिया हो। उसे लगा कि शायद आरती उसको भूल गई हो।
⇒ लेकिन जब उसने आरती के अंशु देखे टब उसे समझ आया की,,,,, यह औरत आज भी उसे उतना ही प्यार करती है जितना बीस साल पहले। उस रात आरती ने उसे सब कुछ बताया – अपना इंतजार , अपने आँसू , अपनी मजबूरीयां और अपने टूटे हुए सपने ।
⇒ आकाश की आँखों से आँसू बह निकले । उसी पहली बार समझ आया कि आरती ने उसे नही छोड़ा था, बल्कि किस्मत ने दोनों को अलग कर दिया था।
आखिर में संजय ने जो किया , उसने सबको रुला दिया
⇒ अगले दिन संजय ने आकाश और आरती को एक साथ बैठाया । उसकी आँखों में भी आँसू थे लेकिन चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था।
⇒ उसने कांपती आवाज में कहा ,,,, कि मैंने कल रात सब समझ लिया था ।
⇒ मैंने तुम्हारी आँखों में वह प्यार देखा है, जो बीस साल बाद भी खत्म नही हुआ है। यह सुनते ही आकाश और आरती दोनों रो पड़े। उन्हे समझ नही आ रहा था कि इतना बड़ा दिल कोई आदमी कैसे रख सकता है।
⇒ संजय ने अंशु का हाथ पकड़ा और कहा बेटा मैंने हमेशा तुम्हें अपने बेटे कि तरह प्यार दिया है ।
⇒ और मैं करता रहूँगा, और फिर आरती की तरफ देखकर उसने कहा मैं अपना प्यार पाने के लिए किसी का प्यार तोड़ना नहीं चाहता ।
⇒ अगर मैं तुम्हें अपने पास रख भी लूँ तो तुम्हारे दिल में हमेशा आकाश ही रहेगा। पूरा घर सिसकियों से भर उठा और शांति देवी भी फुट फुट कर रोई , ।
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एक महान इंसान का सबसे बड़ा त्याग
⇒ संजय ने अपना छोटा सा समान उठाया और दरवाजे की तरफ बढ़ गया , उसके कदम भारी थे लेकिन दिल में कोई शिकायत नही थी ।
⇒ जाते – जाते उसने कहा मैं तुम लोगों से नराज नही हूँ । प्यार कभी जबर्दस्ती नही होता सच्चा प्यार हमेशा आजाद होता है,।
⇒ उसने आकाश के अंधे पर हाथ रखा और कहा इनका ख्याल रखना । इन्होंने बहुत दर्द सहा है।
⇒ फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा मैं दूसरे गाँव में रहने के लिए चला जाऊँगा । लेकिन हर महीने तुम सबसे मिलने जरूर आऊँगा। क्योंकि अंशु सिर्फ तुम्हारा बेटा नही मेरा भी है।
⇒ यह सुनकर आँशु दौड़कर संजय के गले लग गया और बच्चों की तरह फुट फुटकर रोने लगा।
आँशु के दो पिता
⇒ आँशु ने रोते हुए कहा मेरे लिए आप दोनों ही पापा हैं। एक ने जन्म दिया और दूसरे ने जीना सिखाया।
⇒ यह सुनकर आकाश की आंखे भर आई उसने संजय को गले लगा लिया । वर्षों का दर्द, प्यार और सम्मान उस एक आलिंगन में समा गया।
⇒ उस दिन वह तीनों पुरुष रो रहे थे लेकिन उन अंसुओ में नफरत ने बल्कि प्यार था ।
कुछ प्यार कभी नहीं मरते
⇒ समय आगे बढ़ता गया और आरती और आकाश ने अपनी अधूरी जिंदगी को फिर से जोड़ना शुरू कर दिया। लेकिन वह कभी संजय का एहसान नही भूले । हर महीने संजय उनसे मिलने आता, ।
⇒ आँशु दोनों को पिता कहकर बुलाता। और दोनों के साथ एक जैसा सम्मान और प्यार करता।
⇒ गाँव वाले अक्सर कहते थे कि उन्होंने बहुत सी कहानियाँ सुनी है लेकिन इतनी दर्द भरी और इतनी पवित्र कहानी कभी नही सुनी ना देखी।
⇒ आकाश को उसका खोया हुआ प्यार मिल गया और आरती का अधूरा सपना मिल गया, और संजय को लोगों के दिलों में ऐसी जगह मिली , जो शायद बहुत कम लोगों को नसीब होगी।
⇒ क्योंकि सच्चा प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं होता, कभी – कभी सच्चा प्यार त्याग बनकर भी अमर हो जाता है । Love Returned After 20 Years