कैसे गर्भ में ही सीखा अभिमन्यु नें चक्रव्यूह का ज्ञान ? Mystery Of Abhimanyu Death Explained ।

कैसे गर्भ में ही सीखा अभिमन्यु नें चक्रव्यूह का ज्ञान ? Mystery Of Abhimanyu Death Explained । Hindirama.com

अभिमन्यु की मृत्यु : महाभारत के वीर योद्धा अभिमन्यु का नाम आज भी बहुत सम्मान से लिया जाता है। अभिमन्यु अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र थे।

छोटी सी उम्र में ही उन्होंने बहुत सारी कला और विद्या सिख ली थी। लोग आज भी महाभारत के ऐसे वीर योद्धा अभिमन्यु की कहानी सुनते और सुनाते हैं।

अपनी माँ के गर्भ में ही रहकर अभिमन्यु ने चक्रव्यूह का ज्ञान प्राप्त कर लिया था।

 महभारत में वीर अभिमन्यु कौन थे ? Mystery Of Abhimanyu Death Explained

अभिमन्यु महान योद्धा और अर्जुन के पुत्र थे उनकी माता का नाम सुभद्रा था। सुभद्रा भगवान श्री कृष्ण की बहन थी। इसलिए श्री कृष्ण अभिमन्यु के मामा थे। बचपन से ही अभिमन्यु बहुत साहसी, बुद्धिमानी और निडर थे।

उन्हे युद्ध करना बहुत अच्छी तरह से आता था। उन्होंने अपने पिता और अन्य कई बड़े योद्धाओ से बाते सीखी थी। 

कम उम्र में ही इतने कुशल योद्धा बन गए थे कि बड़े बड़े योद्धा भी उनकी प्रशंसा करते थे।

⁕ अभिमन्यु ने गर्भ में रहकर भी चक्रव्यूह का ज्ञान कैसे प्राप्त किया ?

महाभारत के अनुसार एक दिन अर्जुन अपनी पत्नी सुभद्रा को युद्ध से जुड़ी बाते सुना रहे थे। उस समय सुभद्रा गर्भवती थी और उनके गर्भ में अभिमन्यु थे।

अर्जुन, सुभद्रा को चक्रव्यूह की कहानी सुना रहा था । वह समझा रहे थे कि चक्रव्यूह के अंदर कैसे प्रवेश किया जाता है।

गर्भ में मौजूद अभिमन्यू भी अपने पिता की बाते सुन रहे थे। उन्होंने चक्रव्यूह में प्रवेश करने की पूरी विधि सुन ली थी।

लेकिन जब अर्जुन चक्रव्यूह के बाहर निकलने की बाते बताने जा रहे थे , तो सुभद्रा को अचानक नींद आ गई।

सुभद्रा के सो जाने के कारण अर्जुन ने आगे की बाते बताना बंद कर दिया।

इसी कारण अभिमन्यु को चक्रव्यूह के अंदर जाना कैसे है यह तो मालूम है, लेकिन बाहर निकलने का तरीका नही पता चल सका।

⁕ चक्रव्यूह का रहस्य क्या था ?

चक्रव्यूह युद्ध की एक विशेष रचना थी, इसमे सैनिक और योद्धा कई गोल घेरों में खड़े होते  हैं।

जैसे-जैसे कोई योद्धा अंदर जाता था, उसे एक के बाद एक कई घेरों को पार करना पड़ता था।


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इस रचना को बहुत कठीण माना जाता है बहुत कम योद्धा इसे भेद सकते थे।

अर्जुन उन कुछ लोगो में से एक थे जिन्हे चक्रव्यूह मे जाना और बाहर आना दोनों मालूम था।

⁕ युद्ध के तेरहवें दिन ऐसा क्या हुआ ?

महाभारत युद्ध के तेरहवें दिन कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह बनाया।

उस दिन अर्जुन युद्धभूमि के दूसरे भाग में लड रहे थे और वहाँ मौजूद नही थे।

पांडवों सेना के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई। क्योंकि चक्रव्यूह को तोड़ना बहुत कठिन था।

तब अभिमन्यु आगे आए और बोले उन्हे चक्रव्यूह में प्रवेश करना आता है।

उन्होंने बोला वह रास्ता बना देंगे और बाकी योद्धा उनके पीछे आ जाए।

सभी ने उनकी बात मान ली और अभिमन्यु युद्ध के लिए आगे बढ़ गए।

⁕ निडर अभिमन्यु की ताकत और वीरता   

अभिमन्यु बिना डरे चक्रव्यूह के अंदर घुस गए।

उन्होंने अपने बाणों और धनुष से कौरव सेना को पीछे जाने के लिए मजबूर कर दिया।

उनकी बहादुरी देखकर कौरव पक्ष के कई योद्धा चकित रह गए।

वह लगातार आगे बढ़ते गए और रास्ते में आने वाले कई योद्धाओ को हरा दिया। इतनी कम उम्र में इतना साहसी होना सब आश्चर्य कर रहे थे।

⁕ युद्ध में अभिमन्यु अकेले कैसे रह गए ?

अभिमन्यु के पीछे पाँडव सेना भी प्रवेश करना चाहती थी, चक्रव्यूह में। लेकिन जयद्रथ ने पांडव योद्धा को रोक दिया।

उसके कारण कोई बहुत अभिमन्यु तक नहीं पहुँच सका। अब अभिमन्यु चक्रव्यूह के अंदर अकेले रह गए थे।

फिर भी उन्होंने डरने के बजाय युद्ध जारी रखा।

⁕ वीर अभिमन्यु की मृत्यु कैसे और किसने की ?    

अभिमन्यु कई बड़े-बड़े योद्धाओ से अकेले लड़ते रहे।

कौरव पक्ष के कई शक्तिशाली योद्धा एक साथ उनके सामने आ गए। पहले उनका धनुष तोड़ दिया। फिर उनका रथ भी नष्ट कर दिया।

उनके घोड़े और सारथी भी मारे गए।  इसके बाद भी अभिमन्यु ने हार नही मानी ।

उन्होंने तलवार उठकर लड़ाई जारी रखी।

जब तलवार टूट गया तो उन्होंने रथ के पहिये से युद्ध करना शुरू किया। अंत तक वह बहादुरी से लड़ते रहे ।

आखिरी में कई योद्धाओ ने मिलकर उन पर हमला किया और उनका वध कर दिया ।

उस समय अभिमन्यु की उम्र लगभग 16 वर्ष बताई जाती है।


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⁕ योद्धा अभिमन्यु की मृत्यु के बाद क्या हुआ ?

अर्जुन को जब उनके पुत्र के मृत्यु का समाचार मिला तो उन्हे बहुत दुख हुआ।

उन्होंने प्रतीक्षा की कि अगले दिन सूर्यास्त से पहले वह जयद्रथ को मरेंगे।

अगले दिन अर्जुन ने अपना वचन पूरा किया और जयद्रथ का बढ़ कर दिया।

अभिमन्यु का बलिदान पांडवों के लिए बहुत बडी प्रेरणा बनी। उनकी वीरता ने पूरी सेना का उत्साह बढ़ा दिया।

⁕ वीर अभिमन्यु से हमे क्या सीख मिलती है ?  

अभिमन्यु की कहानी हमे साहस और कर्तव्य की सीख देती है। उन्होंने कठिन समय  में भी डरकर पीछे हटना नही चुना ।

वह  जानते थे कि उनके सामने बड़ा खतरा है, फिर भी उन्होंने अपना काम पूरा किया ।

उनकी कहानी हमे सिखाती है कि हमे हर परिस्थिति में हार नही माननी चाहिए।

⁕ निष्कर्ष 

अभिमन्यु महाभारत के सबसे वीर योद्धाओ में से एक थे । गर्भ में भी चक्रव्यूह का ज्ञान प्राप्त करने की कथा और युद्ध मे उनका साहस उन्हे सबसे विशेष बनाता है।

उनकी मृत्यु कम उम्र में हुई, लेकिन उनका नाम आज भी वीरता, साहस और बलिदान के लिए याद किया जाता है।

महाभारत की यह कहानी हमे सिखाती है कि सच्चा योद्धा वही होता है जो कठिन समय में भी अपने कर्तव्य से पीछे नही हटे ।

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