कुआँ तुम्हारा नाम पुकारे, तो जवाब मत देना । डरावना कुआँ की खौफनाक कहानी । Horror Story In Hindi

कुआँ तुम्हारा नाम पुकारे, तो जवाब मत देना । डरावना कुआँ की खौफनाक कहानी । Horror Story In Hindi

काशीपुर के बाहर खड़ा वह पुराना कुआँ दिन में भी डरावना लगता था, लेकिन चाँदनी रात में उसकी गहराई से उठती आवाजें पूरे गांव को दहला देती थीं। बीस साल पहले उसी कुएँ में नायरा नाम की दुल्हन की जली हुई लाश फेंक दी गई थी। कुएँ से कुछ ही दूर एक विशाल पुराना पीपल का पेड़ और उसके पास खड़ा जर्जर घर भी रहस्य का हिस्सा था, जहां आधी रात के बाद पायल की छम-छम-छम सुनाई देती थी। घर से कुएँ तक हमेशा किसी औरत के पैरों के निशान दिखाई देते, लेकिन वापस लौटने के निशान कभी नहीं मिलते थे। शहर से आया विवान मल्होत्रा इन बातों को अंधविश्वास समझता था, मगर एक रात कुएँ के भीतर झांकने के बाद उसकी अपनी आवाज भी उसी अंधेरे की कैद बन गई।

Hindi Rama | डरावनी कहानी

काशीपुर का वह मनहूस कुआँ। Horror Story In Hindi

काशीपुर छोटा सा गांव था, जहां शाम होते ही खेतों के रास्ते खाली हो जाते और लोग अपने घरों के दरवाजे जल्दी बंद कर लेते थे।

गांव के आखिरी छोर पर एक बहुत पुराना कुआँ था, जिसकी पत्थर वाली मुंडेर जगह-जगह से टूट चुकी थी और आसपास घास हमेशा सूखी रहती थी।

दिन में भी उस कुएँ के पास हवा कुछ ज्यादा ठंडी महसूस होती थी, जबकि आसपास की जमीन धूप से तपती रहती थी।

गांव वाले उसे खूनी कुआँ कहते थे और बच्चों को बचपन से ही समझाया जाता था कि वहां अकेले जाने की गलती कभी मत करना।

कुएँ में वर्षों से पानी नहीं था, फिर भी रात में वहां से पानी टपकने जैसी आवाजें आती थीं, जबकि नीचे केवल सूखी मिट्टी पड़ी थी।

लेकिन उस कुएँ का रहस्य केवल उसकी गहराई तक सीमित नहीं था, क्योंकि उससे कुछ ही दूरी पर एक बहुत बड़ा पुराना पीपल का पेड़ खड़ा था।

उस पीपल की मोटी शाखाएं इतनी दूर तक फैली थीं कि चांदनी रात में भी उसके नीचे का रास्ता अंधेरे में डूबा रहता था।

पीपल के ठीक पास एक बहुत पुराना घर बना हुआ था, जिसकी दीवारों पर दरारें थीं और खिड़कियां वर्षों से बंद दिखाई देती थीं।

गांव में कहा जाता था कि कुएँ से पहले उस पुराने घर ने किसी को बुलाना शुरू किया था।

रात गहरी होने पर कभी-कभी उस घर के भीतर से पायल की धीमी आवाज सुनाई देती थी, जो धीरे-धीरे पीपल के पेड़ के पास आती थी।

फिर वही आवाज खेतों के रास्ते से गुजरती हुई कुएँ तक पहुंचती और अचानक पूरी तरह बंद हो जाती थी।

सुबह उस पुराने घर से लेकर कुएँ तक मिट्टी में औरत के पैरों के निशान दिखाई देते, लेकिन कुएँ से घर की ओर कोई निशान नहीं होता था।

पुराने घर से आती छम-छम

गांव के लोग उस पुराने घर के बारे में ज्यादा बात नहीं करते थे, क्योंकि उसका नाम लेते ही बुजुर्गों के चेहरे पर अजीब डर दिखाई देने लगता था।

किसी को यह ठीक से पता नहीं था कि घर आखिरी बार कब आबाद था और उसके बाद वहां रहने वाला कोई क्यों नहीं दिखाई दिया।

कई सालों से उसके दरवाजे पर जंग लगा ताला लटका था, लेकिन आधी रात के बाद भीतर से हल्की रोशनी कभी-कभी दिखाई देती थी।

लोग कहते थे कि यह रोशनी किसी दीये की नहीं, बल्कि घर की टूटी खिड़की के पीछे घूमती हुई किसी परछाईं की थी।

सबसे डरावनी बात पायल की आवाज थी, जो पहले घर के अंदर से आती और फिर कुछ देर बाद कुएँ के पास सुनाई देती थी।

उस आवाज में हमेशा तीन कदमों का अंतर रहता था, जैसे कोई धीरे-धीरे अंधेरे में चल रहा हो और हर कदम के साथ पायल बज रही हो।

छम… छम… छम… फिर अचानक सन्नाटा, जैसे कोई कुएँ के अंदर उतर गया हो।

सुबह मिट्टी पर बने पैरों के निशान हमेशा घर की चौखट से शुरू होते और सीधे कुएँ की मुंडेर तक जाकर खत्म हो जाते थे।

किसी ने कभी उन निशानों का पीछा करने की हिम्मत नहीं की, क्योंकि कुएँ के पास पहुंचते ही वे निशान मिट्टी से अचानक गायब हो जाते थे।

गांव वालों को लगता था कि यह किसी चुड़ैल के पैरों के निशान हैं, लेकिन कोई यह बताने को तैयार नहीं था कि वह चुड़ैल कौन थी।

बीस साल पहले नायरा के साथ क्या हुआ था

लगभग बीस साल पहले काशीपुर में नायरा नाम की एक नई दुल्हन आई थी, जिसकी शादी गांव के एक परिवार में हुई थी।

नायरा शांत स्वभाव की थी और शादी के बाद उसने गांव की जिंदगी को अपनाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन कुछ ही महीनों में हालात बदल गए।

उसके ससुराल में विवाद बढ़ने लगे और धीरे-धीरे उसके साथ ऐसा व्यवहार होने लगा, जिससे गांव के कुछ लोगों को भी शक होने लगा था।

कभी वह रास्ते में मिलती तो उसकी आंखों में डर साफ दिखाई देता, लेकिन वह किसी से कुछ कहने की कोशिश नहीं करती थी।

एक रात अचानक उसके घर से चीख सुनाई दी, मगर कुछ देर बाद सब कुछ बिल्कुल शांत हो गया और किसी ने बाहर निकलने की हिम्मत नहीं की।

अगली सुबह गांव में खबर फैली कि नायरा घर से गायब है और उसके बारे में अलग-अलग बातें कही जाने लगीं।

कुछ दिनों बाद गांव के बाहर उसी पुराने कुएँ के पास जली हुई चूड़ियों के टुकड़े और पायल का एक टूटा हुआ हिस्सा मिला।

लोगों को तब समझ आया कि नायरा कहीं गई नहीं थी, बल्कि उसके साथ कुछ ऐसा हुआ था जिसे छिपाने के लिए उसकी लाश कुएँ में फेंक दी गई थी।

उस घटना के बाद पहली चाँदनी रात में कुएँ से एक औरत के रोने की आवाज आई और उसी रात पुराने घर से भी पायल बजने लगी।

नायरा की मौत के बाद कुआँ रोने लगा और पुराने घर से उसकी पायल चलने लगी।

तभी से गांव में यह डर फैल गया कि नायरा की आत्मा केवल कुएँ में नहीं थी, बल्कि उसका रास्ता उस पुराने घर से होकर जाता था।

ईशान देव की पुरानी चेतावनी

गांव के सबसे बुजुर्ग लोगों में ईशान देव का नाम लिया जाता था, क्योंकि उन्होंने नायरा के गायब होने के समय बहुत कुछ करीब से देखा था।

अब अड़सठ साल के हो चुके ईशान देव उस कुएँ और पुराने घर का नाम सुनते ही गंभीर हो जाते और बातचीत बदल देते थे।

उन्होंने कई बार गांव के युवाओं से कहा था कि कुएँ से रोने की आवाज सुनाई दे तो वहां जाने की कोशिश कभी मत करना।

उनका कहना था कि नायरा की आत्मा केवल अपने साथ हुए अन्याय से परेशान नहीं थी, बल्कि वह किसी को तलाश रही थी।

किसे तलाश रही थी, इसका जवाब ईशान देव ने कभी साफ शब्दों में नहीं दिया, लेकिन उनके चेहरे का डर उस रहस्य से कहीं ज्यादा बड़ा था।

एक शाम उन्होंने अद्विक राठौर को बताया कि नायरा की मौत के बाद पुराने घर से कुएँ तक पैरों के निशान लगातार दिखाई देते रहे थे।

उन्होंने कहा कि कई बार निशान इतने ताजे होते थे, जैसे कोई उसी समय नंगे पैर मिट्टी पर चलकर गया हो।

ईशान देव ने कहा, “अगर कुआँ तुम्हारा नाम लेकर पुकारे, तो जवाब मत देना, क्योंकि वह आवाज तुम्हारी नहीं होगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर रात में पुराने घर से छम-छम-छम सुनाई दे, तो किसी भी कीमत पर उसकी दिशा में मत जाना।

विवान मल्होत्रा को कहानी पर विश्वास नहीं था

कुछ दिनों के लिए शहर से विवान मल्होत्रा काशीपुर आया था और अपने दोस्त अद्विक राठौर के घर ठहरा हुआ था।

पच्चीस साल का विवान मल्होत्रा तेज दिमाग वाला और बेहद आत्मविश्वासी युवक था, जिसे भूत-प्रेत की कहानियां हमेशा मजाक लगती थीं।

जब अद्विक राठौर ने उसे खूनी कुएँ और पुराने घर की कहानी सुनाई, तो विवान हंस पड़ा और उसने गांव वालों को डरपोक कह दिया।

पास बैठी काव्या ने उसकी तरफ देखा और कहा कि उस कुएँ की आवाज उसने खुद कई बार सुनी है।

काव्या ने बताया कि बचपन में उसने चाँदनी रात में कुएँ के पास किसी औरत को रोते हुए सुना था।

उसने जब आवाज की दिशा में देखने की कोशिश की थी, तो उसे कुएँ की मुंडेर से लेकर पुराने घर तक अजीब पैरों के निशान दिखाई दिए थे।

विवान बोला, “अगर वहां सच में कोई है, तो आज रात मैं खुद देखकर आऊंगा।”

उसकी बात सुनकर अद्विक राठौर का चेहरा गंभीर हो गया और उसने साफ कहा कि ऐसी चुनौती किसी को नहीं देनी चाहिए।

रात एक बजे का फैसला

उस रात गांव में चांद पूरा था और आसमान इतना साफ था कि खेतों की मेड़ें दूर तक दिखाई दे रही थीं।

रात के खाने के बाद विवान मल्होत्रा अपने कमरे में गया और उसने मोबाइल, टॉर्च तथा पानी की छोटी बोतल अपने बैग में रख ली।

उसने अद्विक राठौर को कुछ नहीं बताया, क्योंकि उसे डर था कि उसका दोस्त उसे फिर रोकने की कोशिश करेगा।

रात ठीक एक बजे विवान घर से बाहर निकला और गांव की आखिरी गली पार करके खेतों की तरफ बढ़ने लगा।

रास्ते में हवा बिल्कुल शांत थी, लेकिन पेड़ों की सूखी पत्तियां बिना हवा के भी कभी-कभी अचानक हिल जाती थीं।

जैसे-जैसे विवान पुराने पीपल के पेड़ के करीब पहुंचा, उसे सामने वही जर्जर घर दिखाई दिया जिसकी खिड़कियां चांदनी में काली दिखाई दे रही थीं।

वह घर को देखकर कुछ पल रुका, लेकिन तभी उसके अंदर से बहुत धीमी आवाज सुनाई दी।

छम… छम… छम…

विवान ने टॉर्च घर की खिड़की पर डाली, मगर वहां कुछ नहीं था और अगले ही पल वही पायल कुएँ की दिशा से सुनाई देने लगी।

उसने कदम तेज कर दिए और खुद को समझाया कि शायद हवा या किसी जानवर की वजह से ऐसी आवाज पैदा हुई होगी।

कुएँ तक जाते पैरों के निशान

पुराने पीपल से कुछ कदम आगे बढ़ते ही विवान की टॉर्च की रोशनी जमीन पर पड़ी और वह अचानक रुक गया।

मिट्टी पर साफ पैरों के निशान बने हुए थे, जैसे किसी औरत ने नंगे पैर अभी-अभी वहां से होकर गुजरना शुरू किया हो।

विवान ने टॉर्च पीछे घुमाई तो वही निशान पुराने घर की तरफ जाते हुए दिखाई दिए, और सामने देखने पर वे सीधे कुएँ तक पहुंच रहे थे।

उसके चेहरे की हंसी गायब हो गई, क्योंकि मिट्टी में बने निशानों पर नमी थी, जबकि उस रात कई दिनों से बारिश नहीं हुई थी।

विवान ने एक कदम पीछे लिया, मगर तभी पायल की आवाज उसके बिल्कुल पीछे से सुनाई दी।

छम… छम… छम…

उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था और केवल पीपल की लंबी शाखाएं अंधेरे में हिल रही थीं।

विवान ने पहली बार महसूस किया कि शायद वह कुएँ को देखने नहीं, बल्कि कुआँ उसे देखने आया है।

सूखे कुएँ के भीतर से आती आवाज

आखिरकार विवान पुराने कुएँ के सामने खड़ा था और उसकी टॉर्च की रोशनी टूटी हुई पत्थर की मुंडेर पर घूम रही थी।

कुएँ के आसपास कोई इंसान नहीं था और जमीन पर पुराने पत्तों के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

उसने टॉर्च नीचे की ओर की तो साफ दिखाई दिया कि कुआँ पूरी तरह सूखा हुआ था और नीचे काली मिट्टी तथा पत्थर पड़े थे।

फिर भी रोने की आवाज साफ उसी गहराई से आ रही थी और अब उसमें किसी महिला की घुटी हुई सिसकियां सुनाई दे रही थीं।

विवान ने मोबाइल निकालकर रिकॉर्डिंग शुरू की और कुएँ की मुंडेर के बिल्कुल पास जाकर नीचे देखने लगा।

अचानक नीचे से बहुत धीमी आवाज आई, जैसे कोई अंधेरे में बैठकर उसका नाम फुसफुसा रहा हो।

“विवान…”

वह पीछे हट गया और कुछ सेकंड तक उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि उसने सच में अपना नाम सुना है।

फिर वही आवाज दोबारा आई, लेकिन इस बार वह आवाज कुएँ से नहीं, बल्कि पुराने पीपल के पेड़ की दिशा से सुनाई दी।

विवान ने टॉर्च उधर घुमाई, मगर पेड़ के नीचे केवल अंधेरा था और उसी अंधेरे में कुछ देर तक पायल बजती रही।

छम… छम… छम… और फिर कुएँ के भीतर से किसी के हंसने की आवाज आई।

कुएँ के तल में बैठी नायरा

हंसी सुनते ही विवान ने दोबारा कुएँ के अंदर देखा और उसकी सांस अचानक रुक गई, क्योंकि नीचे उसे एक औरत दिखाई दे रही थी।

वह औरत काले कपड़ों में कुएँ के तल पर बैठी थी और उसके लंबे बाल पत्थर की दीवार से चिपके हुए थे।

उसका चेहरा नीचे झुका हुआ था और दोनों हाथ घुटनों पर टिके थे, जैसे वह काफी देर से किसी का इंतजार कर रही हो।

विवान ने कांपती आवाज में पूछा, “कौन है वहां?”

कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया, फिर वह औरत बहुत धीरे-धीरे अपना सिर ऊपर उठाने लगी।

उसका चेहरा पूरी तरह जला हुआ था और त्वचा जगह-जगह काली पड़ चुकी थी, जबकि उसकी आंखें बिल्कुल काली दिखाई दे रही थीं।

वह औरत मुस्कुराई और उसके जले हुए होंठों के बीच से ऐसी आवाज निकली, जैसे किसी सूखे गले में वर्षों से दबा हुआ गुस्सा बाहर आ रहा हो।

“तू भी आएगा मेरे पास… जैसे बाकी आए थे…”

विवान के हाथ से टॉर्च लगभग छूट गई और वह पीछे हटने लगा, लेकिन कुएँ के अंदर बैठी वह औरत अब उसकी तरफ लगातार देख रही थी।

उसकी आंखों में इंसान जैसी कोई चमक नहीं थी, वहां केवल अंधेरा था और उस अंधेरे में विवान का चेहरा दिखाई दे रहा था।

तभी कुएँ की दीवारों से पायल की आवाज गूंजने लगी और ऐसा लगा जैसे एक नहीं, कई पायल एक साथ बज रही हों।

काले हाथों ने विवान को पकड़ लिया

अचानक कुएँ के तल से दो लंबे और बेहद काले हाथ तेजी से ऊपर उठे और विवान का पैर पकड़ लिया।

उसने पूरी ताकत से पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन हाथों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि उसका शरीर पत्थर की मुंडेर से टकराने लगा।

विवान चीखा, लेकिन आसपास के खेतों में उसकी आवाज जैसे किसी अदृश्य दीवार से टकराकर वापस लौट गई।

उसने मुंडेर पकड़ ली और दूसरे पैर से जमीन पर जोर लगाया, लेकिन काले हाथ उसे धीरे-धीरे नीचे खींचते जा रहे थे।

कुएँ के अंदर बैठी नायरा की मुस्कान और चौड़ी हो गई और उसके बाल हवा के बिना ही चारों तरफ फैलने लगे।

उसी समय पुराने पीपल के पेड़ से फिर पायल की आवाज आई, जैसे कोई अदृश्य औरत पेड़ के नीचे खड़ी होकर यह सब देख रही हो।

छम… छम… छम… और विवान की चीख अचानक उसी आवाज के अंदर दब गई।

अगले ही पल उसका शरीर कुएँ के अंधेरे में खिंच गया और ऊपर केवल उसकी टॉर्च की रोशनी घूमती हुई दिखाई दी।

कुछ सेकंड बाद टॉर्च भी बुझ गई और पूरा इलाका फिर उसी डरावने सन्नाटे में डूब गया।

सुबह कुएँ के पास सिर्फ टॉर्च मिली

सुबह अद्विक राठौर को जब पता चला कि विवान रात में घर से बाहर गया था, तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

वह तुरंत काव्या और रुद्रांश के साथ खेतों की तरफ निकला और उनके साथ ईशान देव भी चल पड़े।

पुराने पीपल के पास पहुंचते ही उन्हें जमीन पर पैरों के कई निशान दिखाई दिए, जो सीधे कुएँ तक जा रहे थे।

लेकिन इस बार उन निशानों के साथ एक दूसरी बात भी थी, क्योंकि कुछ निशान इतने गहरे थे जैसे किसी भारी चीज को घसीटते हुए ले जाया गया हो।

कुएँ के पास पहुंचकर रुद्रांश ने टूटी मुंडेर के पास पड़ी टॉर्च उठा ली, लेकिन विवान का कहीं कोई पता नहीं था।

अद्विक ने घबराकर कुएँ के अंदर झांकना चाहा, लेकिन ईशान देव ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक दिया।

उसी क्षण कुएँ के भीतर से धीमी आवाज आई, जैसे कोई बहुत दूर से रो रहा हो और मदद के लिए पुकार रहा हो।

वह आवाज नायरा की नहीं थी। वह विवान की आवाज थी, जो कुएँ के अंदर से मदद मांग रही थी।

विवान की आवाज अब कुएँ में कैद थी

अद्विक को विश्वास नहीं हो रहा था कि कुछ घंटे पहले तक उसके साथ रहने वाला विवान अब कुएँ के भीतर से बोल रहा था।

उसने जोर से पूछा, “विवान, तुम अंदर हो?” कुछ पल खामोशी रही और फिर नीचे से बिल्कुल वैसी ही आवाज आई।

“हां… मुझे बाहर निकालो…” आवाज बिल्कुल विवान जैसी थी, लेकिन उसके पीछे किसी दूसरी धीमी सांस की आवाज भी सुनाई दे रही थी।

काव्या रोने लगी और उसने कहा कि यह वही आवाज है जो उसने बचपन में कई बार कुएँ से सुनी थी।

ईशान देव ने आंखें बंद कर लीं और कहा कि अब कुआँ एक नई आवाज को अपने अंदर रख चुका है।

रुद्रांश ने नीचे देखने की कोशिश की, लेकिन टॉर्च की रोशनी अचानक कुएँ के बीच में ही बुझ गई।

फिर अंधेरे से दो आवाजें एक साथ आईं—पहले नायरा की हंसी और उसके तुरंत बाद विवान की चीख।

चारों लोग पीछे हट गए और किसी ने भी दोबारा कुएँ की तरफ देखने की हिम्मत नहीं की।

कुएँ से घर की ओर जाते निशान

कुछ देर बाद रुद्रांश की नजर जमीन पर पड़ी और वह अचानक बिल्कुल शांत हो गया, जैसे उसकी आंखों के सामने कोई ऐसी चीज आ गई हो जिसे समझना मुश्किल था।

जहां पहले तक पुराने घर से कुएँ तक पैरों के निशान दिखाई दे रहे थे, वहां अब मिट्टी पर नए निशान बन चुके थे।

लेकिन इस बार निशान उल्टी दिशा में थे और वे कुएँ की मुंडेर से शुरू होकर पुराने पीपल के पेड़ की तरफ जा रहे थे।

फिर वे निशान पीपल के पेड़ के पास से मुड़कर उसी पुराने घर की ओर बढ़ने लगे, जिसका दरवाजा वर्षों से बंद था।

अद्विक ने घबराकर ईशान देव की तरफ देखा, लेकिन बुजुर्ग की आंखों में ऐसा डर था जैसा किसी ने पहले कभी नहीं देखा था।

ईशान देव ने धीमी आवाज में कहा कि इतने वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि निशान कुएँ से वापस घर की तरफ जा रहे हैं।

ईशान देव ने फुसफुसाकर कहा, “जो चीज कुएँ में थी, वह अब घर तक पहुंच चुकी है।”

उसी समय पुराने घर के भीतर से पायल की आवाज सुनाई दी और इस बार वह पहले से कहीं ज्यादा तेज थी।

छम… छम… छम…

पुराने घर की खिड़की में खड़ी परछाईं

सभी की नजर पुराने घर की बंद खिड़की पर टिक गई और कुछ सेकंड बाद उसके पीछे एक काली परछाईं धीरे-धीरे दिखाई देने लगी।

परछाईं किसी औरत की थी, लेकिन उसका सिर असामान्य रूप से झुका हुआ था और उसके बाल चेहरे के सामने लटक रहे थे।

रुद्रांश ने टॉर्च उठाकर खिड़की पर रोशनी डाली, मगर रोशनी पड़ते ही परछाईं गायब हो गई और घर फिर बिल्कुल खाली दिखाई देने लगा।

अगले ही पल उसके पीछे किसी ने बहुत धीमी आवाज में उसका नाम लिया।

“रुद्रांश…”

रुद्रांश का शरीर कांप उठा, लेकिन उसने पीछे मुड़ने की हिम्मत नहीं की, क्योंकि उसे ईशान देव की चेतावनी याद थी।

तभी उसके कान के पास किसी ने बहुत धीमे स्वर में फुसफुसाया, “पीछे क्यों नहीं देख रहे?”

रुद्रांश समझ गया कि आवाज विवान की थी, लेकिन विवान की आवाज तो अभी भी कुएँ के अंदर से आ रही थी।

उसने आंखें बंद कर लीं और बिना पीछे देखे बाकी लोगों के साथ वहां से भाग गया।

अब भूतनी सिर्फ कुएँ में नहीं थी

उस घटना के बाद काशीपुर में लोगों ने पुराने कुएँ के साथ-साथ उस घर के रास्ते पर जाना भी पूरी तरह बंद कर दिया।

ईशान देव ने कहा कि नायरा की आत्मा का रहस्य अब पहले जैसा नहीं रहा, क्योंकि कुएँ और घर के बीच का रास्ता एक नए डर में बदल चुका था।

अब कई रातों में पहले पुराने घर से छम-छम-छम की आवाज आती, फिर वही आवाज पीपल के पेड़ तक पहुंचती और आखिर में कुएँ से विवान की आवाज सुनाई देती।

कभी-कभी घर की बंद खिड़की पर किसी औरत की परछाईं दिखाई देती और उसके नीचे मिट्टी में ताजे पैरों के निशान मिलते।

लेकिन अब निशान हमेशा एक ही दिशा में नहीं होते थे, क्योंकि कुछ रातों में वे घर से कुएँ तक जाते और कुछ रातों में कुएँ से वापस घर तक आते थे।

गांव वालों को डर था कि अब नायरा का रास्ता कुएँ पर खत्म नहीं होता, बल्कि पुराने घर के अंदर जाकर गायब हो जाता है।

सबसे डरावनी बात यह थी कि कभी-कभी पुराने घर के भीतर से विवान की आवाज आती और उसी समय कुएँ से नायरा की हंसी सुनाई देती।

चाँदनी रात में दो आवाजें

विवान के गायब होने के बाद कई दिनों तक काशीपुर में कोई भी उस पुराने कुएँ या घर के पास नहीं गया, लेकिन डर वहां से कहीं नहीं गया।

अगली चाँदनी रात को गांव के कई घरों में रहने वाले लोगों ने फिर वही रोने की आवाज सुनी और उसके साथ पायल भी बजने लगी।

पहले पुराने घर से आवाज आई, फिर पीपल के पेड़ के नीचे किसी के चलने की आहट हुई और उसके बाद कुएँ से विवान की घुटी हुई आवाज उठी।

वह आवाज बार-बार एक ही बात कह रही थी, “मुझे बाहर निकालो… मैं अभी जिंदा हूं…”

गांव वालों को पता था कि यह विवान की आवाज है, लेकिन कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि वह सच में जिंदा है।

ईशान देव ने सबको समझाया कि अब उस आवाज का जवाब देना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है, क्योंकि नायरा का रहस्य पहले से कहीं ज्यादा गहरा हो चुका है।

अब काशीपुर में डर केवल कुएँ से नहीं था, क्योंकि भूतनी की छम-छम पुराने घर तक पहुंच चुकी थी।

रुद्रांश ने कुएँ के पास जो देखा

घटना के दो दिन बाद रुद्रांश अकेले खेत की तरफ गया, क्योंकि उसे यकीन था कि उस रात उसने कुछ ऐसा देखा था जिसे बाकी लोगों ने नहीं देखा।

उसने कुएँ से काफी दूरी बनाकर खड़े होकर नीचे देखने की कोशिश की और उसे पत्थरों के बीच हल्की सफेद चमक दिखाई दी।

पहले उसे लगा कि शायद कोई कपड़ा पड़ा है, लेकिन फिर वह चमक धीरे-धीरे ऊपर उठने लगी।

रुद्रांश पीछे हट गया और उसकी आंखें कुएँ की मुंडेर पर टिक गईं, जहां कुछ लंबे काले बाल लटक रहे थे।

बाल धीरे-धीरे हिले और उनके पीछे से जला हुआ चेहरा दिखाई दिया, लेकिन इस बार चेहरा पूरी तरह नायरा जैसा भी नहीं था।

उस चेहरे की आंखें पूरी तरह काली थीं और होंठों पर वही डरावनी मुस्कान थी, जिसे रुद्रांश पुराने घर की खिड़की में देख चुका था।

रुद्रांश को लगा कि कुआँ केवल आवाजें नहीं रखता, बल्कि किसी की शक्ल भी अपने अंधेरे में कैद कर सकता है।

वह पीछे मुड़ा और भागने लगा, तभी उसके पीछे पायल की वही आवाज सुनाई दी।

छम… छम… छम…

रुद्रांश ने इस बार पीछे नहीं देखा और सीधे गांव की तरफ भागता चला गया।

कुएँ से आने वाली आखिरी पुकार

कुछ महीनों बाद अद्विक राठौर ने काशीपुर छोड़ने का फैसला किया, लेकिन जाने से पहले वह एक बार ईशान देव से मिलने गया।

उसने पूछा कि क्या कभी नायरा की आत्मा को शांति मिल सकती है, लेकिन ईशान देव ने सिर झुका लिया।

उन्होंने कहा कि कुछ मौतें केवल शरीर के खत्म होने से पूरी नहीं होतीं, खासकर जब मरने वाले की आखिरी पुकार अनसुनी रह जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि विवान की आवाज शायद इसलिए कुएँ में रह गई, क्योंकि उसने खुद उस जगह को चुनौती दी थी।

अद्विक ने पूछा कि अगर कोई दोबारा कुएँ के पास जाकर विवान को बाहर निकालने की कोशिश करे तो क्या होगा।

ईशान देव ने उसकी तरफ देखकर केवल इतना कहा कि कुआँ किसी को वापस नहीं करता, वह केवल उसकी आवाज वापस करता है।

उसी रात कुएँ से आखिरी बार आवाज आई—“अद्विक… अब तुम्हारी बारी है…”

अद्विक ने यह आवाज साफ सुनी, जबकि वह उस समय ईशान देव के घर के अंदर बैठा था और कुआँ वहां से बहुत दूर था।

उसने खिड़की बंद कर दी और फिर कभी उस दिशा में नहीं देखा, लेकिन चाँदनी रात आते ही उसके घर के बाहर कभी-कभी वही सिसकी सुनाई देती थी।

चाँदनी रात का डरावना कुआँ और अधूरी कहानी

आज भी काशीपुर में उस पुराने कुएँ और जर्जर घर के आसपास कोई नया घर नहीं बनाता और शाम ढलते ही उस रास्ते से लोग गुजरना बंद कर देते हैं।

पुराने पीपल की शाखाएं अब पहले से भी ज्यादा फैल चुकी हैं और उसकी जड़ों के पास कभी-कभी ताजा पैरों के निशान दिखाई देते हैं।

गांव के लोग कहते हैं कि जब चांद पूरा होता है, तो पुराने घर से पायल की आवाज शुरू होती है और धीरे-धीरे वही आवाज कुएँ तक पहुंचती है।

फिर कुछ देर तक वहां सन्नाटा रहता है और उसके बाद कुएँ से किसी पुरुष की आवाज सुनाई देती है, जैसे कोई अंधेरे में मदद मांग रहा हो।

कभी-कभी दोनों आवाजें एक साथ सुनाई देती हैं और उनके बीच अचानक किसी औरत की डरावनी हंसी गूंजने लगती है।

सबसे अजीब बात यह है कि पुराने घर से कुएँ तक बने पैरों के निशान अब भी कभी-कभी दिखाई देते हैं, लेकिन कोई नहीं जानता कि वे किसके हैं।

काशीपुर के लोग कहते हैं, उस जगह का सबसे बड़ा खतरा भूतनी को देखना नहीं, बल्कि उसकी आवाज का जवाब देना है।

क्योंकि जिसने भी उस आवाज का जवाब दिया, उसके बाद गांव में उसकी अपनी आवाज कहीं और से सुनाई दी।

और शायद इसी वजह से आज भी जब काशीपुर में आसमान साफ होता है और चांद उस पुराने पीपल के ऊपर आकर ठहरता है, तो लोग अपने दरवाजे बंद कर लेते हैं।

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उन्हें डर रहता है कि कहीं अंधेरे से कोई धीरे से उनका नाम न पुकार दे और वे अनजाने में जवाब न दे बैठें।

क्योंकि काशीपुर का चाँदनी रात का डरावना कुआँ आज भी सूखा है, लेकिन उसकी गहराई में रोने वाली आवाजें खत्म नहीं हुई हैं।

और कुएँ से थोड़ी ही दूर खड़े उस पुराने पीपल के नीचे आज भी कभी-कभी किसी के चलने की आवाज सुनाई देती है।

छम… छम… छम…

फिर पुराने घर की बंद खिड़की के पीछे एक परछाईं दिखाई देती है और कुछ ही क्षण बाद कुएँ के भीतर से किसी की आवाज आती है—“मुझे बाहर निकालो…”

शायद विवान आज भी उस कुएँ में है… या शायद वह अब उस पुराने घर तक पहुंच चुका है।

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नोट: यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। इसमें बताए गए पात्र, गांव, कुआँ, घर, घटनाएं और रहस्यमयी परिस्थितियां मनोरंजन के लिए रची गई हैं। इसका उद्देश्य किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान या घटना के बारे में तथ्यात्मक दावा करना नहीं है।

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