तुम मेरे थे …. पर किस्मत के नही । emotional love story in hindi
⇒ संध्या उस दिन पहली बार शहर आई थी। छोटे से गाँव की सीधी – सादी लड़की , जिसकी आँखों में बहुत सारे सपने थे। उसे नही पता था, कि शहर की भीड़ में उसे कोई ऐसा मिलने वाला है, जो उसकी पुरी जिंदगी बदल देगा।
⇒ कॉलेज का पहला दिन था संध्या बहुत घबराई हुई थी। नये लोग, नई जगह, नया माहौल । वह क्लास ढूंढ ही रही थी कि अचानक किसी से टकरा गई और उसकी किताबे नीचे गिर गई । सॉरी मैंने देखा नही …. किताबे उठाते हुए लड़के ने कहा …. ।
⇒ संध्या ने पहली बार समीर की तरफ देखा । उसका नाम तो आपको बता दिया कि वह लड़का कौन था। यह उनकी पहली मुलाकात थी । एक टक्कर , और वही से एक कहानी शुरू हो गई।
पहली मुलाकात
⇒ समीर ने मुस्कुराकर कहा, आप नई आई हैं शायद ? संध्या बस हल्का सा मुस्कुरा दी । वह ज़्यादा बात करने वाली लड़की नही थी । लेकिन समीर की बातों में कुछ अलग हइ अपनापन था । धीरे – धीरे दोनों रोज मिलने लगे , बाते करने लगे।
⇒ पहले हैलो,,,, कैसी हो ? फिर साथ में कैंटीन तक जाना – सब कुछ बहुत धीरे – धीरे हो रहा था, पर दोनों को एक – दूसरे का इंतजार रहने लगा था। संध्या को अब कॉलेज अच्छा लगने लगा था। और समीर भी अब दोस्तों के साथ कम , संध्या के साथ ज्यादा दिखने लगा था,।
⇒ एक दिन समर ने पुछा , तुम इतनी चुप क्यों रहती हो ? संध्या ने धीरे से कहा ,, क्योंकि मुझे डर लगता है , ,,,, लोग छोड़ के चले जाते है।
दोस्ती से प्यार तक
⇒ उस दिन के बाद से समीर ने उसको एक बात कही कि संध्या मैं तुमको छोड़ के कभी नही जाऊँगा । यह सुनकर संध्या एकदम से रो पड़ी उसके सामने । शायद उसको पहली बात किसी पर भरोसा हुआ है ।
⇒ अब दोनों घंटों फोन पर बात करते , साथ में ही कॉलेज जाते , साथ वापस आते। पूरे कॉलेज में सबको पता चल गया था। कि ये दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन आजतक दोनों ने एक- दूसरे को अपने प्यार का इजहार भी नही किया ठा।
⇒ एक दिन बारिश हो रही थी, कॉलेज जल्दी बंद हो गया। दोनों बस स्टॉप पर खड़े थे और बहुत तेज बारिश होने लगी समीर ने अपना बैग संध्या के सिर पर रखा और उसे बारिश से बचाने लगा । संध्या ने कहा , तुम भी तो भीग रहे हो समीर हंसकर बोला , अगर तुम बीमार हो गई तो मुझे कौन देखेगा ?
वो बारिश और हमारा प्यार
⇒ एक पेड़ दोनों नीचे खड़े थे । उस दिन बहुत तेज ही बारिश संध्या ठंड से कांप रही थी । समीर ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा । संध्या ने हाथ नही छुड़ाया । समीर ने धीरे से कहा, संध्या अगर मै तुम्हारा हाथ जिंदगी भर पकड़ना चाहू तो ….. क्या तुम छोड़ोगी तो नही ?
⇒ संध्या की आँखों में आँसू आ गए , उसने बस सिर हिला दिया – नही । उस दिन पहली बार संध्या ने समीर के कंधे पर सिर रखा था। और समीर ने पहली बार महसूस किया था कि यही लड़की उसकी जिंदगी है।
⇒ दोनों अब छुप- छुप कर मिलने लगे थे । कभी पार्क में, कभी लाईब्रेरी में, कभी मंदिर के पीछे । उनका प्यार बढ़ता जा रहा था , और उन्हे दुनिया की कोई परवाह नही थी।
छुप – छुप कर मिलने लगे
⇒ एक दिन समीर ने संध्या से कहा , मेरे घर की हालत अच्छी नही है, मैं समीर नही हूँ ….. पर मै तुम्हें बहुत खुश रखूँगा। संध्या ने तुरंत कहा, मुझे पैसा नही, बस तुम चाहिए । लेकिन हर प्रेम कहानी में एक डर होता है – परिवार । और वही डर अब धीरे – धीरे सच बनने वाला था।
⇒ एक दिन संध्या का भाई मोहन उसे कॉलेज छोड़ने आया। उसने दूर से देख लिया कि संध्या एक लड़के से बात कर रही है …. और वह लड़का समीर था। उस दिन संध्या घर पहुँची तो घर का माहौल बदला हुआ ठा । पिता कुर्सी पर बैठे थे, भाई गुस्से में था, और माँ रो रही थी।
जब घरवालों को पता चला
⇒ संध्या के पिता ने जोर से पुछा , कौन है वो लड़का ? संध्या चुप रही । एक थप्पड़ की आवाज पूरे घर में गुज गई। आज के बाद कॉलेज बंद । और उस लड़के से अगर मिली तो, मुझसे बुरा कोई नही होगा । संध्या पूरे समय दिरफ रोती रही लेकिन उस दिन उसकी जिंदगी बदल गई ।
⇒ उसने अगले दिन समीर को फोन किया , और सारी बात बता दी। समीर कुछ देर चुप रहा और फिर बोला ,,,, डरो मत मैं बात करूंगा तुम्हारे पिता से । संध्या डर गई – नही समीर , पापा बहुत गुस्से वाले हैं , वो तुम्हें मार देंगे।
हमारे प्यार के दुश्मन
⇒ लेकिन प्यार कब डरता है । समीर सच मे संध्या के घर चला गया और वही हुआ जिसका डर था। संध्या के पिता ने उसकी बहुत बेज़्जति की। अपनी औकात देखी है ? मेरी बेटी से शादी करेगा ? पहले अपने घर की हालत देख !
⇒ समीर सब कुछ सुनता रहा उस दिन समीर बिना कुछ बोले वापस चला गया । उसने संध्या को फोन भी नही किया इधर संध्या सोचती रही – समीर ने फोन क्यों नही किया ? क्या वो डर गया ? क्या उसने मुझे छोड़ दिया।
एक गलतफहमी
⇒ तीन दिन बाद तक समीर का कोई फोन नही आया । संध्या रो – रोकर बीमार हो गई। उसे लगा समीर उसे छोड़कर चला गया । उधर सच यह था कि समीर अपने पिता के साथ शहर छोड़कर काम करने चला गया था, ताकि पैसे कमा सके और फिर संध्या के पिता से बात कर सके ।
⇒ लेकिन यह बात संध्या को नही पता थी , उसे सिर्फ इतना पता था कि – समीर चला गया…. बिना बताए ….। और यही से उनकी प्रेम कहानी में दर्द शुरू हो गया.। संध्या तीन दिन से समीर के फोन का इंतजार कर रही थी। हर बार फोन की घंटी बजती , तो वह दौड़कर फोन उठाती लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती।
⇒ उसकी आंखे रो – रोकर थक चुकी थी। और वह हार चुकी थी अब उसे बार – बार समीर की याद आ रही थी – मैं तुम्हें कभी छोड़कर नही जाऊँगा …। और अब वही समीर बिना बताए चला गया संध्या को लगने लगा की शायद समीर भी बाकी लोगों की तरह है।
⇒ एक रात संध्या छत पर बैठी थी। हाथ में समीर की दी हुई छोटी सी रिंग थी, जो उसने एक मेले से खरीदकर दी थी। कोई महँगी अंगूठी नहइ थी मगर संध्या के लिए वह अंगूठी ही सब कुछ थी। संध्या रोते हुए बोली,,,, समीर तुमने बोला था,ना कि तुम कभी छोड़ कर नही जाओगे…..?
तुमने मुझ पर भरोसा नही किया
⇒ उधर समीर शहर से बहुत दूर एक फैक्ट्री में काम कर रहा था । दिन – रात मेहनत कर रहा था । उसके हाथों में छाले पड गए थे , लेकिन दिमाग में सिर्फ एक बात थी – मुझे पैसे कमाने हैं , मुझे संध्या के लायक बनना हैं…..।
⇒ समीर रोज फोन करने की कोशिश करता , लेकिन संध्या के घर वाले अब उसका फोन उठाने ही नही देते हैं , मोहन ने साफ मना कर दिया था – अगर उस लड़के का फोन आया, तो कहना संध्या की शादी तय हो चुकी है ।
⇒ जब समीर ने यह बात सुनी , तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई । उसने कई बार संध्या से बात करने की कोशिश की मगर हार बार वह उदास हुआ। समीर पुरइ रात सड़क पर बैठा था उसकी आँखों से आँसू रुक नहइ रहे थे ।
⇒ वह बार -बार एक ही बात बोल रहा था कि – संध्या ऐसानही कर सकती …। वो मुझे छोड़ कर नही जा सकती….।
मेरी शादी तय हो गई
⇒ इधर संध्या के घर मे उसकी शादी की बात चल रही थी,, लड़का अमीर था, बड़ाा घर था, गाड़ी थी , पैसा था – बस प्यार नही था। संध्या ने अपनी माँ से रो रोकर कहा, माँ मैं किसी और से शादी नह कर सकती…। माँ बहुत रोने लगी लेकिन बोली बेटी,,,, बाप के आगे हमारी नही चलती।
⇒ संध्या ने एक आखिरी बार समीर को फोन करने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन बंद आ रहा था। संध्या को लगा की समीर सच मे उसको छोड़ के जा चुका है । उसी रात संध्या ने अपनी डायरी मे लिखा ….। आज मेरा दिल टूटा है जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया उसने आज मुझे अकेला छोड़ दिया ।
तुम मुझे छोड़कर चले गए
⇒ कुछ दिनों बाद समीर अचानक शहर से वापस आया , वह सीधे संध्या के घर गया लेकिन वहा जो देखा , वह देखकर उसकी दुनिया खत्म हो गई। घर के बाहर लाइटें लगी थी। ढोल की आवाज आ रही थी लोगों ने बताया घर में शादी है,,,, संध्या की शादी ।
⇒ समीर वहीं सड़क पर खड़ा रहा । उसके हाथ मे बैग था वो भी गिर गया उसके आँखों से लगातार आँसू गिर रहे थे वह धीरे – धीरे मुड़ा और वापस चला गया उसे भी वही लगा की लगता संध्या मुझे भूल चुकी है ।
मेरी शादी …. मेरी मौत
⇒ शादी वाले दिन संध्या दुल्हन बनी बैठी थी। लाल जोड़ा , हाथों मे मेहंदी , आँखों मे आँसू थे बाहर सब खुश थे , लेकिन अंदर एक लड़की मर रही थी। जब पंडित जी ने कहा, कन्या को बुलाइए , तो संध्या धीरे – धीरे उठी । हर कदम पर उसे समीर याद आ रहा था।
⇒ फेरो के समय संध्या मन ही मन बोल रही थी,,, – समीर अगर तुम आ जाओ ना …. तो मै ये शादी छोड़ दूँ …। बस एक बार आ जाओ…। लेकिन समीर नही आया संध्या किसी और की पत्नी बन गई।
सुहागरात पर तुम्हारा नाम
⇒ सुहागरात की रात संध्या कमरे में बैठी थी। विक्रम कमरे मे आया । उसने देखा की संध्या रो रही थी। विक्रम ने धीरे से पुछा …. – क्या तुम किसी और से प्यार करती हो ? संध्या चौक गई – आपको कैसे पता ? वक्रम हल्का सा मुस्कुराया , क्योंकिं शादी की पुरइ रस्मों में तुमने एक बार भी नही देखा मुझको।
⇒ यह सुनकर संध्या जोर – जोर से रोने लगी उसने किसी के सामने पहली बार कहा – हा मै किसी और से प्यार करती हूँ । और शायद मरते दम तक करती रहूँ।
मैं किसी की पत्नी बन गई
⇒ विक्रम ने कुछ देर बाद कहा, संध्या मैं तुम्हें मजबूर नही करूंगा। मैं तुम्हें समय दूँगा । जब तक तुम मुझे अपना नही मानोगी , मै तुम्हें छूऊँगा तक नही। संध्या यह सुनकर और रोने लगी। उसे पहली बार लगा की वहएक अच्छे इंसान की जिंदगी भी बर्बाद कर रही है।
⇒ उधर समीर ने शराब पीना शुरू कर दिया था । वह रात संध्या की फ़ोटो देखकर रोता था वह हमेशा एक हइ बात बोलता था,,,, सध्या तुम खुश तो हो .. ना ? अगर तुम खुश हो तो मैं सह लूँगा ….।
सालों बाद तुम मिले
⇒ 5 साल बीत गए। एक दिन संध्या अस्पताल गई थी , अपनी माँ का चेकअप कराने । अचानक उसने सामने एक आदमी को देखा। वह समीर था। वह बहुत बदल चुका था । दाढ़ी , थका हुआ चेहरा , उदास आंखे । लेकिन संध्या उसे एक नजर में पहचान गई।
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⇒ दोनों एक – दूसरे को देखते रह गए। 5 साल का दर्द, प्यार , शिकायत – सब आँखों मे था, लेकिन शब्द नही थे। आखिर समीर ने पुछा , खुश हो ? संध्या की आँखों से आँसू गिर गए – तुम्हारे बिना कोई खुश रह सकता है क्या ?
हम फिर रोए
⇒ दोनों अस्पताल के पीछे जाकर बैठ गए। दोनों रो रहे थे। जैसे 5 साल का दर्द आज बाहर आ रहा था। संध्या ने रोते हुए कहा , तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए थे ? समीर चौक गया – मै तुम्हारे लिए पैसे कमाने गया था …. तुम्हारे पापा से शादी की बात करने ….
⇒ अब चौकने की बारी संध्या की थी- मुझे कहा , गया था कि तुम भाग गए …. मुझे छोड़कर दोनों एक – दूसरे को देखते रह गए । एक गलतफहमी ने दोनों की जिंदगी बर्बाद कर दी थी।
तुम मेरे थे …. पर किस्मत के नही
समीर ने कहा, अगर हम उस दिन एक बार मिल लेते , तो शायद आज सब कुछ अलग होता,,,, संध्या रोते हुए बोली, हम मिले थे समीर लेकिन किस्मत हमसे नही मिली,,,,। समीर ने जेब से वही पुराण रिंग निकाली – मैंने संभालकर रखा …. संध्या ने अपनी चेन से वही रिंग निकाली – मैंने भी दोनों रो पड़े ।
आखिरी मुलाकात
⇒ संध्या ने कहा अब मैं किसी और की पत्नी बन गई हूँ। और तुम …. तुम अब भी मेरे हो … लेकिन हम एक – दूसरे के नही हो सकते समीर ने मुस्कुराने की कोशिश की – प्यार हमेशा शादी से नही मिलता … कभी- कभी यादों में भी पूरा जीवन गुजर जाता है। संध्या जाने लगी फिर अचानक वापस आई और समीर को गले लगा लिया ।
⇒ दोनों बहुत देर तक रोते रहे उसकी ये आखिरी मुलाकात थी।
अधूरी मोहब्बत
⇒ कुछ प्यार पूरे नही होते … लेकिन कभी खत्म भी नही होते समीर ने शादी नही की । संध्या ने अपना फर्ज निभाया ,लेकिन दिल मे हमेशा समर ही रहा…। दोनों अपनी – अपनी जिंदगी जीते रहे लेकिन दिल में एक हइ नाम था समीर।
⇒ समीर और संध्या एक प्यार का मिशाल बन चुका था आज भी मैं तुमसे प्यार करती हूँ ….. समीर एक दिन उसने अपनी डायरी में लिखा कि अगर समीर अगले जन्म में आएगा तो मैं सिर्फ उसकी बनकर आऊँगी । क्योंकि इस जन्म मे तुम मेरे तो थे पर किस्मत मे नही ।