मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा ? Emotional Love Story In Hindi
⇒ इस कहानी में इतना दर्द है कि .. आरव और खूबसूरत मीरा का इतना सच्चा प्यार जो आपने शायद ही सुना हो । मगर प्यार के कितने ही दुश्मन न जाने कहाँ – कहाँ से आते हैं । और उनके लिए मुसीबते खड़ी करते हैं । आप खुद हइ पढ़ लीजिए ।
पढिए प्यार का वह दर्द, जो शायद हइ कोई महसूस कर सकें ?
⇒ राम नगर गाँव की सुबह हमेशा धुएं और ओस की खुशबू से शुरू होती थी। कच्ची पगडंडी पर चलते हुए ऐसा लगता था जैसे समय यहाँ रुककर बैठ गया था ।
⇒ खेतों के ऊपर उड़ती सफेद बगुलों की कतार , दूर मंदिर की घंटी और तालाब के किनारे बैठा एक दुबला – पतला लड़का – यही थी उस गाँव की पहचान । उस लड़के का नाम था आरव ।
⇒ आरव के पास बहुत कुछ नही था, लेकिन उसके पास एक आदत थी – सपने देखने की। वह मिट्टी के घर के बाहर बैठकर किताब खोलता जरूर था, पर पढ़ता कम था और आसमन देखता था।
⇒ उसे लगता था कि उसके लिए भी कही न कहीं एक अलग दुनिया बनी है।
⇒ उसी सुबह बैलगाड़ी की चरमराहट ने उसका ध्यान तोड़ा उसने सिर उठाया – और पहली बार उसे देखा। लाल सूट , पायल की धीमी आवाज , बड़ी आंखे और चेहरे पर शहर की चमक ।
⇒ वह मीरा थी। उस दिन आरव को पहली बार समझ आया कि दिल धड़कने की आवाज भी सुनाई देती है।
⇒ मीरा शहर में पली थी, लेकिन गाँव में आते ही वह मिट्टी से दोस्ती कर बैठी। वह खेतों में दौड़ती , तालाब के पानी में पैर डालकर बैठ जाती और हर चीज पर सवाल पूछती ।
⇒ आरव चुपचाप उसके पीछे – पीछे चलता, जैसे उसकी हर बात को अपनी जिंदगी में लिख लेना चाहता हो ।
प्यार पहली धड़कनों का मौसम….
⇒ मीरा और आरव की दोस्ती बहुत धीरे शुरू हुई। पहले सिर्फ नजरे मिलती थी। फिर मुस्कान आई।
⇒ फिर एक दिन मीरा ने खुद पूछ लिया – तुम हमेशा तालाब के पास क्यों बैठे रहते हो ? आरव ने हकलाते हुए कहा – क्योंकि यहाँ शोर नही होता ।
⇒ मीरा हंस पड़ी – तो अब होगा । उस दिन से सच में शोर होने लगा – हंसी का, बातों का, सपनों का। वे दोनों पीपल के पेड़ के नीचे बैठते ।
⇒ मीरा बादलों में कहानियाँ ढूंढती और आरव उस कहानियों में अपना भविष्य ढूँढता।
⇒ एक दिन मीरा ने मिट्टी पर दो नाम लिखे – मीरा और आरव – फिर जल्दी से मिटा दिए।
⇒ आरव ने पुछा भी नही – क्योंकि वह समझ चुका था। समय के साथ यह दोस्ती आदत बन गई। अगर एक दिन मुलाकात न हो तो दोनों बेचैनी होने लगती है।
⇒ मीरा शहर की बाते बताती – मॉल , बड़ी सड़के , समंदर … और आरव आंखे बंद करके सुनता रहता।
⇒ मै तुम्हें एक दिन समंदर …. और आरव आंखे बंद करके सुनता रहता। मैं तुम्हें एक दिन समंदर दिखाऊँगा …. उसने कहा था।
जुदाई का वह दर्दनाक दिन …
⇒ जब आरव को मुंबई पढ़ने जाने का मौका मिला तो , पूरे गाँव में खुशी थी। लेकिन उस खुशी में एक खामोशी भी थी – मीरा की। स्टेशन पर भीड़ थी।
⇒ आरव ट्रेन में चढ़ चुका था। उसने खिड़की से बाहर देखा – मीरा दूर खड़ी थी। आँखों में आँसू ,लेकिन होंठों पर मुस्कान ।
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⇒ उसने एक छोटा स रुमाल उसकी तरफ बढ़ाया – जब मेरी याद आए तो इसे देख लेना …. ट्रेन चल पड़ी। आरव ने पहली बार जाना की सफर कितना दर्द देता है।
⇒ मुंबई पहुँच कर पहली बार उसने समंदर देखा ।
⇒ लहरे जैसे उसे पुकार रही हो ,,,,, उसने जेब से वही रुमाल निकाला और धीरे से कहा मीरा मैं आ गया।
⇒ लेकिन उस रात जब उसने फोन किया – फोन किसी और ने उठाया । भारी आवाज – आज के बाद इस नंबर पर फोन मत करना फोन कट गया,,,,,,।
⇒ खौफ का नाम ठाकुर रुद्र सिंह ….। मीरा का घर अब घर नही रहा था – एक कैदखाना बन गया था ।
⇒ उसके पिता रुद्र प्रताप सिंह के लिए इज्जत सबसे बड़ी चीज थी। उसकी किताबों को जला दिया गया फोन तोड़ दिया।
⇒ और मीरा से कहा गया – प्यार करना ठाकुर की बेटा को सोभा नही देता, मीरा ने पहली बार उस रात चाँद को देखकर रोते हुए कहा – आरव … मुझे ले चलो यहाँ से …। उधर मुंबई मे आरव हर शाम समंदर के किनारे बैठता और दो चाय लेता ।
⇒ एक खुद पीता …. दूसरी लहरों में डाल देता।
⇒ समंदर के बीच लिया गया फैसला एक रात मीरा घर से भाग गयी । नंगे पैर … बिना कुछ लिए सिर्फ एक नाम नाम लेकर …।
⇒ आरव । मुंबई स्टेशन पर जब वे दोनों देर तक एक – दूसरे को देखते रहे। कोई शब्द नही था…. सिर्फ धड़कने थी।
⇒ वे फेरो में बैठकर समंदर के बीच गए। चारों तरफ सिर्फ पानी था, चलो भाग चलते हैं …। मीरा ने कहा, आरव चुप रहा ।
⇒ बहुत देर बाद बोला – तुम अपने माँ बाप को छोड़ पाओगी ? मीरा टूट गई । उसका जवाब – उसकी खामोशी थी।
⇒ खून और मजबूरी वापसी में ठाकुर के लोगों ने आरव को घेर लिया । उसकी बुरी तरह पिटाई हुई। मीरा को खींचकर ले जाया गया।
⇒ मुंबई की सड़क पर गिरा आरव सिर्फ एक नाम बोल रहा था – मीरा…..
⇒ कुछ दिनों बाद मीरा की शादी कर दी गई विक्रम से । एक अमीर लेकिन नशेड़ी आदमी । शादी के मंडप में भी उसकी आंखे भीड़ में किसी को ढूंढ रही थी। इंतजार का शहर आरव बच गया।
⇒ उसने शादी नहीं की। वह नौकरी करने लगा – लेकिन उसकी असली जिंदगी शाम को शुरू होती थी।
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⇒ समंदर किनारे दो चाय। एक उसके लिए , एक मीरा के लिए।
⇒ सब लोग उसको पागल ही समझते थे। वह मुस्कुरा देता ,,,, मीरा की टूटी हुई दुनिया विक्रम शराब में डूबा रहता। मीरा हर रात मार खाकर सोती। उसकी चूड़ियाँ टूट गई।
लेकिन मीरा ने सिंधूर नहीं पोंछा। क्योंकि ….
⇒ उसे निभाना आता था बारह साल बाद एक शाम वही आवाज – आज भी दो चाय लेते हो ?
⇒ आरव ने पीछे मुड़कर देखा , मीरा सफेद साड़ी में , आँखों में पूरा समंदर । दोनों पूरी रात बैठे रहे।
⇒ अपनी – अपनी हार सुनाते रहे। मोहब्बत का नया नाम – दोस्ती अब मीरा कभी – कभी आती थी। विक्रम बीमार है।
⇒ वह उसकी सेवा करती है। आरव उसका इंतजार करता फिर दोनों साथ बैठते हैं। लेकिन हाथ नही पकड़ते सबसे दर्दनाक सच।
⇒ एक दिन मीरा ने पुछा – अगर मैं आजाद हो जाऊ तो क्या तुम मुझसे शादी करोगे ? आरव मुस्कुराया – अब हमारी मोहब्बत शादी से बड़ी हो गई है …. मीरा रो पड़ी। बूढ़ा होता समंदर साल और बीत गया।
⇒ बाल सफेद हो गए , चेहरे पर झुर्रियां आ गई । लेकिन आदत नही बदली। आरव आज भी दो चाय लेता है । मीरा आज भी कभी – कभी आती है ।
⇒ आरव और मीरा दोनों डूबते सूरज को देखते हैं।
आखिरी इंतजार…..और मौत
⇒ एक दिन मीरा नही आई। दूसरे दिन भी नही। आरव ने गाँव फोन किया , तो पता चला की मीरा आरव की याद मे एक पत्र लखकर मर गई ।
⇒ अब आरव बहुत पछताया और सोचने लगा कि मीरा नें मुझसे पूछा भी था , कि अगर मैं आजाद हो जाऊँ तो क्या तुम मुझसे शादी करोगे या नही ।
⇒ मैंने ही उसका दिल नहीं पहचान । मुझे नहीं पता था , कि वह मेरे प्यार में इतनी दूरी महसूस कर रही हैं , कि मीरा तुम मेरे लिए आत्महत्या हइ कर लोगी ।
⇒ मुझे माफ़ कर देना मीरा — मैं भी आ रहा हु तुम्हारे पास फिर ऊपर भगवान के पास हम दोनों वहीं शादी करेंगे पक्का ।
⇒ यह कहकर आरव भी समुद्र किनारे दो चाय रखकर वहीं कुर्सी पर बैठा – बैठा मर गया । 😭😭
कहानी से सिख ….
इतना सच्चा प्यार । मुझे तो कहानी लिखते हुए भी आरव और मीरा के लिए बहुत बुरा लग रहा हैं । प्यार में कितना कुछ हो जाता हैं । मगर आत्महत्या करना इसका निवारण नहीं ।
सच्चा प्यार अगर पास रहकर किया जा सकता हैं , तो दूर रहकर , कभी – कभी मिलकर भी उसे निभाया जा सकता हैं । आप इस कहानी के लिए क्या कहेंगे । एक कमेन्ट करके जरूर बताइए । धन्यवाद