अंधेरे में कोई है – Hindi Bhutiya Kahani
⇒ बरसों से वीरान पड़े उस गाँव का नाम था – कालीघाट । नक्शे में उसका नाम था … लेकिन असल दुनिया में उसको सब भूल चुके थे । जो भी उस गाँव का रास्ता पूछता था, लोग बस एक ही बात कहते थे : – सूरज ढलने से पहले लौट आना …. वरना अंधेरे में कोई है।
⇒ खंडहर बन चुका गाँव – अरुण एक यूट्यूबर और रहस्यमयी जगहों की तलाश करने वाला लड़का , अपने दोस्त सुमित और रीना के साथ उस गाँव में पहुँचा । जैसे ही उनकी जीप टूटी पगडंडी से गाँव में दाखिल हुई – मोबाईल का नेटवर्क गायब ….. हवा ठंडी और अजीब सी सड़ांध ….।
⇒ ये जगह सही नही है, रीना ने धीमे से कहा । तभी …. एक घर का दरवाजा अपने आप चररर … की आवाज के साथ खुल गया।
पीपल का पेड़ और पहला संकेत –
⇒ गाँव के बीचों – बीच एक बहुत बड़ा सुखा पीपल का पेड़ था उस पर सैकड़ों लाल धागे बंधे थे …. और नीचे टूटी हुई मूर्तियां । सुमित ने कैमरा ऑन किया – स्क्रीन में पेड़ दिख रहा था लेकिन … कमरे में पेड़ के पीछे कोई खड़ा था ।
⇒ जब उन्होंने पलट कर देखा तो वहाँ कोई नही था। कैमरा बंद ,,,, फिर चालू इस बार वो चीज और पास थी …।
खाली घर या कोई है यहाँ ?
⇒ उन्होंने के पुराने घर में रात रुकने का प्लान बनाया घर के अंदर धूल से ढकी चारपाई दीवारों पर अजीब सा निशान ,,. और एक कोने में मिट्टी से बना छोटा सा चूल्हा … रीना को एक पुरानी डायरी मिली। उसमे लिखा था हम सब मर चूकें है । ,,,, वो अंधेरे में आताा है वो नाम लेकर बुलाता है …।
⇒ और वो जवाब देता है ,…. वो अगली सुबह जिंदा नही मिलता …।
⇒ रीना ने डरते हुए पुछा – अगर वो हमारा नाम ले तो ? तभी … पीछे से आवाज आई रीना …..
पहली मौत
⇒ सुमित ने पीछे देखा अरुण खड़ा था । अभि तुमने रीना को बुलाया ? सुमीत ने पूछा ,। अरुण ने कहा मैं तो बाहर था। रीना वहाँ से गायब थी , कुछ देर बाद … वो घर के पीछे वाले कुएं के पास मिली – उसकी आंखे खुली हुई … चेहरे पर डर से जमे हुए और होंठो पर सिर्फ एक शब्द : अंधेरा…।
रात का असली डर
⇒ रात होते ही गाँव बदल गया , हर घर में कदमों की आवाज आ रही थी। छत पर कोई दौड़ रहा था …. दरवाजे पर खरोंच और फिर ,,,,, अरुण….। इस बार आवाज सुमित के पीछे से आई । अरुण सामने खड़ा था और दोनों एक दूसरे को देख रहे थे।
⇒ फिर धीरे – धीरे पीछे मुड़े …. अंधेरे में उन दोनों की परछाई के अलावा एक तीसरी परछाई भी थी।
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डायरी का आखिरी पन्ना
⇒ अरुण ने डायरी का आखिरी पन्ना खोला ….। उसमे लिखा था ये कोई आत्मा नही …। ये हमारा डर है…. जो रात होते ही रूप ले लेता है। और जो अपने डर से भागता है ,,,, वो मर जाता है। तभी सुमित चिल्लाया उसके सामने वही खड़ा था ,,,,, लंबी ….. काली .. बिना चेहरे के…. लेकिन उसकी आवाज …. सुमित की ही थी।
सच्चाई
⇒ ये गाँव शापित नहीं था। यहाँ सालों पहले एक तांत्रिक ने लोगों के डर को जीवित कर दिया । जो यहाँ आताा था उसका सबसे बड़ा डर उसके सामने आ जाता था। रीना अंधेरे से डरती थी इसलिए उसे कुएं के अंधेरे ने मार दीया ।
⇒ सुमित – खुद से डरता था। उसने अपनी ही परछाई देखी …. और पागल होकर भागा … सुबह उसका शरीर पेड़ से लटका मिला।
आखिरी रात
⇒ अब अरुण अकेला था। पूरा गाँव अंधेरे मए डूब चुका था। तभी…. उसे अपनी माँ की आवाज सुनाई दी – जो 10 साल पहले मर चुकी थी बेटा इधर आ …। अरुण रो पड़ा वो आवाज के पीछे गया और अचानक रुक गया ,,,,, ।
⇒ डायरी की लाईन आ गई – जो जवाब देता है वो मर जाता है …। उसने आंखे बंद की और चिल्लाया – तू मेरा डर है …. सच नही …। पूरा गाँव हिल गया । चीखे …. हवा…. और फिर सन्नाटा ।
अगली सुबह
⇒ सूरज उगा। गाँव फिर से वीरान था , अरुण बाहर खड़ा था – जिंदा । लेकिन…. जब उसने कैमरा चेक किया – आखिरी वीडियो में वो खुद खड़ा था और उसके पीछे एक काली परछाई । जो धीरे – धीरे कैमरे की तरफ बद्ध रही थी।
अंतिम पंक्ति
⇒ अरुण शहर लौट आया। वीडियो अपलोड किया , स्क्रीन काली हुई और एक आवाज आई…. वीडियो देखने वाले … अब तेरे पीछे खड़ा हूँ…। अंधेरे में कोई है…। समाप्त या शुरू…?