जिस लड़की ने भी उस खूनी रजिस्टर को खोला, उसका नाम अगले ही पल खून से उसके पन्नों पर अपने आप लिख गया।
नाम पूरा होते ही वह लड़की हमेशा के लिए उस रहस्यमयी रजिस्टर की दुनिया में कैद हो गई। वहां से आज तक कोई वापस नहीं लौटा।
अब पुराने लॉकर रूम के रजिस्टर के अंदर मौत हर समय किसी नए नाम का इंतजार करती रहती है।
चौकीदार रामदास वर्षों से छात्राओं को उस कमरे से दूर रहने की चेतावनी देता है, लेकिन जिज्ञासा कई लड़कियों को वहीं पहुंचा देती है।
इसी बीच अवनी शर्मा अपने लापता भाई अजय कुमार का सच जानने के लिए उसी कॉलेज में दाखिला लेती है।
उसे नहीं पता कि उसके भाई का रिश्ता उसी खूनी रजिस्टर, श्रापित पिशाच और कैद हुई लड़कियों से जुड़ा हुआ है।
अमावस्या की काली रात आते ही पुराने किले में अजीब आवाजें गूंजने लगती हैं और बंद रहस्य फिर जाग उठते हैं।
हर गुजरती रात के साथ खूनी रजिस्टर के पन्ने अपने आप खुलने लगते हैं, जैसे किसी नई लड़की का इंतजार कर रहे हों।
तो जानिए इस गर्ल्स कॉलेज के खूनी रजिस्टर में अगला नाम किस लड़की का लिखा जाएगा और क्या कोई उस श्रापित रजिस्टर की दुनिया से कभी वापस लौट पाएगा।
गर्ल्स कॉलेज का छिपा हुआ रहस्य। Horror Story In Hindi
उदयपुर शहर से बहुत दूर अरावली की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच रतनगढ़ नाम का एक छोटा सा गांव था।
इस गांव से कुछ दूरी पर एक बहुत पुराना किला बना हुआ था, जिसकी दीवारें समय के साथ कमजोर हो चुकी थीं।
कभी इस किले में राजघराने के लोग रहा करते थे, लेकिन वर्षों बाद यह किला पूरी तरह वीरान हो गया।
किले के बड़े-बड़े कमरे, ऊंची दीवारें और पुराने रास्ते सिर्फ इतिहास की निशानी बनकर रह गए थे।
लंबे समय तक यह किला खाली पड़ा रहा और धीरे-धीरे लोग इसे भूलने लगे।
लगभग चालीस साल पहले सरकार ने इस पुराने किले की मरम्मत करवाने का फैसला किया।
टूटी हुई दीवारों को ठीक किया गया और किले के अंदर एक बड़ा महाविद्यालय बनाया गया।
समय के साथ यह जगह रतनगढ़ महिला महाविद्यालय के नाम से प्रसिद्ध हो गई।
किले के पुराने कमरों को कक्षाओं में बदला गया और एक बड़े हिस्से को गर्ल्स हॉस्टल बना दिया गया।
दूर-दूर के शहरों और गांवों से लड़कियां यहां पढ़ने के लिए आने लगीं।
कॉलेज की पढ़ाई अच्छी थी और हॉस्टल में रहने की सुविधा भी बेहतर थी।
शुरुआती वर्षों में यह जगह बिल्कुल सामान्य थी और किसी को यहां कोई डर महसूस नहीं होता था।
लेकिन कुछ वर्षों बाद इस कॉलेज का नाम पढ़ाई के कारण नहीं बल्कि एक रहस्य के कारण फैलने लगा।
रतनगढ़ गांव में धीरे-धीरे यह चर्चा होने लगी कि कॉलेज की कुछ लड़कियां अचानक गायब हो रही हैं।
पहले लोगों ने इसे सिर्फ अफवाह समझा, लेकिन जब गायब होने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ने लगी तो सभी डरने लगे।
किसी को समझ नहीं आता था कि आखिर वह लड़कियां कहां चली जाती थीं।
कॉलेज के पुराने हिस्से में बने एक कमरे को लेकर सबसे ज्यादा बातें होने लगीं।
उस कमरे को कोई इस्तेमाल नहीं करता था और वहां हमेशा अजीब सा सन्नाटा रहता था।
उस कमरे के अंदर एक बड़ी पुरानी अलमारी रखी थी, जिसके सबसे ऊपर एक पुराना रजिस्टर रखा रहता था।
वह रजिस्टर ही धीरे-धीरे पूरे कॉलेज के डर की वजह बन गया था।
हैरानी की बात यह थी कि उस कमरे के दरवाजे पर कभी कोई ताला नहीं लग पाया।
कई लोगों ने कोशिश की, लेकिन हर बार कुछ न कुछ अजीब घटना हो जाती थी।
कभी ताला अपने आप टूट जाता था और कभी लगाने वाला व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाता था।
इसलिए वह कमरा हमेशा खुला रहता था।
पुराने लॉकर रूम में रखा खूनी रजिस्टर और रहस्यमयी मौत

आज के समय में कई लड़कियां भूत और पिशाच जैसी बातों पर विश्वास नहीं करती थीं।
उन्हें लगता था कि यह सब सिर्फ पुराने लोगों की बनाई हुई कहानियां हैं।
कुछ लड़कियां मजाक में उस कमरे तक चली जाती थीं और पुराने रजिस्टर को देखने की कोशिश करती थीं।
लेकिन वह नहीं जानती थीं कि वह रजिस्टर हर किसी को अपनी तरफ नहीं बुलाता था।
वह सिर्फ उन लोगों को अपनी ओर खींचता था जिनके मन में डर, कमजोरी या कोई अधूरा भाव छिपा होता था।
जैसे ही कोई लड़की उस रजिस्टर को खोलती थी, उसके पन्ने अपने आप पलटने लगते थे।
कुछ ही पलों में उस लड़की का नाम उस रजिस्टर में अपने आप दिखाई देने लगता था।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि नाम स्याही से नहीं बल्कि उस लड़की के खून से लिखा जाता था।
और जैसे ही नाम पूरा होता था, वह लड़की इस दुनिया से गायब हो जाती थी।
कहा जाता था कि वह लड़की कहीं नहीं जाती थी, बल्कि उस खूनी रजिस्टर की एक अलग दुनिया में कैद हो जाती थी।
चौकीदार की चेतावनी और अजय शर्मा के रहस्य की पहली आहट
इस पूरे रहस्य के बारे में कॉलेज में सिर्फ कुछ पुराने लोग जानते थे।
उनमें से एक था चौकीदार रामदास।
रामदास पिछले कई वर्षों से उस महाविद्यालय की देखभाल कर रहा था।
उसने कॉलेज के अच्छे दिन भी देखे थे और उन डरावनी घटनाओं को भी देखा था, जिनके बाद सब कुछ बदल गया था।
रामदास हमेशा लड़कियों को उस पुराने कमरे से दूर रहने की सलाह देता था।
रामदास ने कहा – “बेटियों, उस कमरे में मत जाना, क्योंकि वहां सिर्फ एक पुरानी किताब नहीं रखी है, वहां किसी का इंतजार हो रहा है।”
लेकिन रामदास की बात कोई नहीं सुनता था।
क्योंकि किसी को नहीं पता था कि इस खूनी रजिस्टर की शुरुआत आखिर कैसे हुई थी।
और उस शुरुआत के पीछे छिपी थी एक ऐसी कहानी, जिसने एक अच्छे लड़के की जिंदगी छीन ली थी।
उस लड़के का नाम था अजय शर्मा। कॉलेज में उसे सभी लड़कियाँ अजय कुमार बोला करती थी।
लेकिन अजय की पूरी कहानी अभी भी उस पुराने किले की दीवारों में कैद थी।
और जल्द ही एक लड़की उस कॉलेज में आने वाली थी, जो उस बंद पड़े रहस्य को हमेशा के लिए खोलने वाली थी।
उस लड़की का नाम था अवनी शर्मा।
वह रात जब रजिस्टर ने एक और नाम निगल लिया

अवनी शर्मा के कॉलेज आने से कुछ दिन पहले रतनगढ़ महिला महाविद्यालय में एक और ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे कॉलेज के पुराने डर को फिर से जिंदा कर दिया।
उस लड़की का नाम था काव्या। काव्या पढ़ाई में ठीक थी, लेकिन उसे पुराने किस्सों और भूत प्रेत की बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था।
वह अक्सर अपनी सहेलियों से कहती थी –
काव्या ने कहा – “आज के समय में भी लोग इन पुरानी बातों पर विश्वास करते हैं, मुझे तो यह सब सिर्फ डराने वाली कहानियां लगती हैं।”
लेकिन काव्या नहीं जानती थी कि कुछ रहस्य ऐसे होते हैं, जिन्हें इंसान की सोच भी नहीं समझ सकती।
काव्या उन्हीं लड़कियों में से एक थी, जो नैना को अजय के खिलाफ भड़काती थी।
उसी ने नैना से कहा था कि अजय जैसा गरीब लड़का तुम्हारे लायक नहीं है और उसे सबक सिखाना चाहिए।
उसे नहीं पता था कि उसके किए हुए कामों का हिसाब एक दिन उसी पुराने रजिस्टर के सामने होगा।
उस रात हॉस्टल की सभी लड़कियां अपने कमरों में थीं।
रात के लगभग बारह बजे अचानक कॉलेज के सबसे पुराने हिस्से की लाइट जल उठी।
काव्या की नजर उस तरफ गई।
वह हैरान थी क्योंकि वह कमरा वर्षों से बंद जैसा पड़ा था।
काव्या ने सोचा कि शायद कोई अंदर गया होगा। वह धीरे-धीरे उस पुराने कमरे की तरफ बढ़ने लगी।
उसे नहीं पता था कि कोई अदृश्य ताकत उसे अपनी तरफ बुला रही थी।
नीचे गेट के पास चौकीदार रामदास अपनी कुर्सी पर बैठा था। अचानक उसे ऊपर पुराने कमरे की लाइट दिखाई दी।
रामदास डर गया। रामदास ने कहा – “नहीं, यह कैसे हो सकता है, उस कमरे में कोई नहीं जा सकता।”
उसने ऊपर देखा तो उसे काव्या खिड़की के पास खड़ी दिखाई दी।
रामदास ने जोर से आवाज लगाई –
रामदास ने कहा – “काव्या बेटा, वहां से बाहर आ जाओ, तुरंत नीचे आओ।” लेकिन काव्या रामदास की तरफ देख रही थी।
ऐसा लग रहा था जैसे वह उसे देख तो रही है, लेकिन उसकी आवाज सुन नहीं पा रही।
रामदास दौड़कर सीढ़ियों की तरफ गया।
लेकिन जैसे ही उसने ऊपर जाने की कोशिश की, अचानक नीचे का बड़ा गेट अपने आप बंद हो गया।
चारों तरफ अंधेरा फैल गया।
रामदास ने गेट खोलने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खुला।
उसी समय ऊपर कमरे के अंदर पुराने रजिस्टर के पन्ने अपने आप पलटने लगे।
काव्या धीरे-धीरे उस अलमारी के पास पहुंच गई।
वह पुराना रजिस्टर उसे अपनी तरफ खींच रहा था। काव्या ने कांपते हाथों से रजिस्टर खोला। अचानक कमरे का तापमान बहुत ठंडा हो गया।
हवा तेज चलने लगी और रजिस्टर के खाली पन्ने अपने आप खुलने लगे।
फिर एक डरावनी आवाज पूरे कमरे में गूंजी।
“जिसने सच को ठुकराया है, उसका नाम अब इस किताब में लिखा जाएगा।” काव्या पीछे हटना चाहती थी, लेकिन उसके पैर जैसे जमीन से चिपक गए थे।
अचानक उसकी उंगली से खून की एक बूंद रजिस्टर के पन्ने पर गिर गई।
और उसी पल उस पन्ने पर अपने आप काव्या का नाम लिखा जाने लगा।
काव्या चीख उठी।
लेकिन उसकी आवाज कमरे से बाहर नहीं जा पाई। अचानक रजिस्टर के अंदर का दृश्य बदल गया।
उसे लगा जैसे वह किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गई हो। वहां चारों तरफ अंधेरा था और दूर-दूर तक धुंध फैली हुई थी।
उसी धुंध के बीच कुछ लड़कियां खड़ी थीं, जो वर्षों पहले गायब हो चुकी थीं। तभी काव्या की नजर एक कुर्सी पर बैठे दो डरावने चेहरों पर पड़ी।
एक अजय था और उसके साथ नैना थी।
दोनों अब इंसान जैसे नहीं दिख रहे थे। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी और उनके चेहरे पर वर्षों का दर्द दिखाई दे रहा था।
काव्या डर के मारे पीछे हट गई। अचानक अजय ने उसकी तरफ देखा।
अजय ने कहा – “जिस दर्द को तुमने मजाक समझा था, आज वही दर्द तुम्हारे सामने खड़ा है।”
काव्या कुछ बोल नहीं पाई।
अचानक अजय का हाथ आगे बढ़ा और उसने काव्या का हाथ पकड़ लिया। काव्या चीखती रही, लेकिन कोई उसकी आवाज सुनने वाला नहीं था।
एक पल में वह भी उसी खूनी रजिस्टर की दुनिया में कैद हो गई।
अमावस्या की रात जब रजिस्टर के पिशाच कॉलेज में लौटे

कुछ दिनों बाद रामदास ने उस रात के बारे में किसी को नहीं बताया।
लेकिन वह जानता था कि काव्या के साथ क्या हुआ है।
अगले दिन प्रिंसिपल अशोक सिन्हा को इस घटना की खबर मिली।
वह रामदास के पास पहुंचे।
अशोक सिन्हा ने कहा – “यह बात कॉलेज से बाहर नहीं जानी चाहिए। अगर लोगों को पता चला तो कॉलेज बदनाम हो जाएगा।”
रामदास चुप रहा।
वह जानता था कि सच छिपाने से खतरा कम नहीं होगा।
अशोक सिन्हा ने कहा – “लड़की के घर वालों को कुछ पैसे देकर मामला शांत कर दिया जाएगा।”
रामदास को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई।
वह ईमानदार आदमी था और उसे अपनी आंखों के सामने हो रही घटनाओं से डर लगने लगा था।
उसे पता था कि यह सिर्फ एक लड़की के गायब होने की बात नहीं थी।
एक अमावस्या की काली रात को रामदास ने अपनी आंखों से कुछ ऐसा देखा, जिसे देखकर उसकी सांसें रुक गईं।
रात के लगभग ढाई बजे अचानक कॉलेज के पुराने हिस्से में तेज हवा चलने लगी।
फिर चौकीदार के सामने अचानक रजिस्टर के सारे पिशाच और पिशाचिनी आ गए।
रामदास डर के मारे पीछे हट गया। उनके बीच अजय भी खड़ा था।
लेकिन इस बार वह डरावने रूप में नहीं बल्कि अपने पुराने रूप में दिखाई दे रहा था।
रामदास की आंखों से आंसू निकल आए।
रामदास ने कहा – “अजय बाबू… आप जिंदा हैं?” अजय ने धीमी आवाज में कहा –
अजय ने कहा – “मैं मरा ही कब था रामदास, मेरी कहानी तो उस दिन शुरू हुई थी।”
तभी उसके पीछे नैना दिखाई दी।
रामदास समझ गया कि रजिस्टर के अंदर कैद सभी आत्माएं अभी भी इस कॉलेज से जुड़ी हुई हैं।
अचानक नैना रामदास के पास आई और बोली –
नैना ने कहा – “रामदास, क्या तुम्हारे पास सिगरेट है?”
रामदास का शरीर डर से कांपने लगा।
उसे याद आ गया कि यह वही नैना थी जिसने कभी इस कॉलेज में सब कुछ बदल दिया था।
कुछ ही देर बाद घड़ी में ढाई बज गए।
अचानक सभी आत्माएं हवा में उठने लगीं और धीरे-धीरे उसी पुराने रजिस्टर की तरफ लौटने लगीं।
वह दृश्य देखकर रामदास बेहोश होते-होते बचा।
अगली सुबह से उसकी तबीयत खराब रहने लगी। कुछ दिनों बाद अशोक सिन्हा उससे मिलने आए।
रामदास ने डरते हुए कहा –
रामदास ने कहा – “साहब, आपकी जान खतरे में है। अजय आपको ढूंढ रहा है। मैंने उसे देखा है और उसके साथ आपकी बेटी श्रेया को भी देखा है।”
लेकिन अशोक सिन्हा ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया।
अशोक सिन्हा ने कहा – “यह सब तुम्हारा डर है रामदास, मैं ऐसी बातों पर विश्वास नहीं करता।”
लेकिन रामदास जानता था कि आने वाला समय बहुत भयानक होने वाला है।
क्योंकि अब अवनी शर्मा उस कॉलेज में आने वाली थी।
और वह अकेली लड़की थी जो खूनी रजिस्टर के पीछे छिपी पूरी कहानी को सामने ला सकती थी।
नई छात्रा अवनी शर्मा और चौकीदार रामदास की बेचैनी

सुबह की हल्की धूप पूरे रतनगढ़ महिला महाविद्यालय में फैल चुकी थी।
कॉलेज के मुख्य द्वार पर नई छात्राओं की भीड़ लगी हुई थी।
कोई अपने माता पिता के साथ आया था तो कोई अपने रिश्तेदारों के साथ।
उसी भीड़ के बीच एक लड़की धीरे-धीरे कॉलेज के मुख्य दरवाजे की तरफ बढ़ रही थी।
उसके हाथ में एक छोटा सा बैग था और कंधे पर किताबों का थैला टंगा हुआ था।
उस लड़की का नाम था अवनी शर्मा।
अवनी पूरे रास्ते एक ही बात सोच रही थी।
करीब दो साल पहले उसका बड़ा भाई अजय कुमार अचानक लापता हो गया था।
घर वालों ने उसे हर जगह खोजा।
पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई गई। लेकिन अजय का कहीं कोई पता नहीं चला। धीरे-धीरे पुलिस ने भी खोज बंद कर दी।
घर के लोग मान चुके थे कि शायद अजय अब इस दुनिया में नहीं है।
लेकिन अवनी ने कभी यह बात नहीं मानी।
उसे हमेशा लगता था कि उसका भाई कहीं न कहीं जिंदा है। उसे सिर्फ तलाशने की जरूरत है।
कुछ महीने पहले किसी अनजान आदमी का एक पत्र उनके घर पहुंचा था।
उस पत्र में सिर्फ एक पंक्ति लिखी थी।
“अगर अजय कुमार का सच जानना है तो रतनगढ़ महिला महाविद्यालय आ जाओ।”
उस पत्र में न नाम था और न ही कोई पता।
बस उसी दिन अवनी ने तय कर लिया था कि वह इस कॉलेज में दाखिला लेकर अपने भाई का सच ढूंढेगी।
कॉलेज के अंदर कदम रखते ही उसने चारों तरफ नजर दौड़ाई।
पुरानी दीवारें।
लंबे बरामदे।
ऊंची छतें।
सब कुछ किसी पुराने राजमहल जैसा दिखाई दे रहा था।
अचानक उसकी नजर मुख्य भवन के ऊपर लगी एक पुरानी घड़ी पर गई। घड़ी बिल्कुल बंद थी। फिर भी उसके कानों में टिक… टिक… टिक… की आवाज गूंजने लगी।
अवनी ने हैरानी से ऊपर देखा।
लेकिन घड़ी की सुइयां बिल्कुल नहीं चल रही थीं। उसी समय पीछे से एक धीमी आवाज आई।
“बेटी… पहली बार आई हो क्या?” अवनी ने पीछे मुड़कर देखा। सामने चौकीदार रामदास खड़ा था।
उसके चेहरे पर अजीब सी घबराहट थी।
रामदास कुछ पल तक अवनी को देखता ही रह गया।
अचानक उसकी आंखें फैल गईं।
उसने धीरे से कहा – “यह चेहरा… बिल्कुल अजय बाबू जैसा…” अवनी चौंक गई।
अवनी ने कहा – “आप मेरे भाई को जानते हैं?”
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रामदास के हाथ से टॉर्च नीचे गिर गई।
उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था।
कुछ पल तक वह कुछ बोल ही नहीं पाया।
फिर उसने चारों तरफ देखा।
जैसे कोई उनकी बातें सुन रहा हो।
उसने धीरे से कहा –
“यहां नहीं… मेरे साथ चलो…”
वह खौफनाक सच जिसे सुनकर अवनी की दुनिया उजड़ गई

रामदास अवनी को कॉलेज के पीछे बने पुराने बगीचे में ले गया।
वह जगह बिल्कुल सुनसान थी।
चारों तरफ पुराने पेड़ खड़े थे।
हवा भी जैसे धीरे-धीरे चल रही थी।
रामदास की आंखें भर आईं। उसने कांपती आवाज में कहा –
“बेटी… तुम्हारा भाई अब इस दुनिया में नहीं है…” यह सुनते ही अवनी के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तुरंत रामदास का हाथ पकड़ लिया।
अवनी ने रोते हुए कहा –“नहीं… यह झूठ है… मेरे भाई को कुछ नहीं हो सकता…”
रामदास की आंखों से भी आंसू बहने लगे।
उसने गहरी सांस ली।
फिर बोला –“मैंने अपनी आंखों से सब देखा था… लेकिन मैं किसी को बचा नहीं पाया…”
अवनी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
रामदास ने कहा –“तुम्हारे भाई को किसी हादसे ने नहीं मारा था…”
“उसे मार दिया गया था…”
अवनी की आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे।
उसने कांपती आवाज में पूछा –“किसने…?”
रामदास कुछ पल तक चुप रहा।
फिर बोला –“इस कॉलेज के अंदर… उसी रात…” “कुछ लड़कियों ने…”
“और…”
वह रुक गया।
उसकी आवाज कांप रही थी।
अवनी ने फिर पूछा –“और कौन…?”
रामदास ने धीरे से कहा –“प्रिंसिपल अशोक सिन्हा भी वहां पहुंच गए थे…”
“उस रात जो हुआ… उसे आज तक किसी ने नहीं जाना…”
“सबूत छिपा दिए गए…”
“पैसों से कई लोगों का मुंह बंद कर दिया गया…”
“और अगले ही दिन यह खबर फैला दी गई कि अजय कुमार कहीं भाग गया है…”
अवनी वहीं जमीन पर बैठ गई। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था।
जिस भाई को वह जिंदा समझकर ढूंढती रही…वह तो वर्षों पहले इस दुनिया से जा चुका था।
रामदास ने धीरे से कहा –“लेकिन बेटी…” “उस रात अजय कुमार पूरी तरह गया नहीं था…”
“उस रात कुछ और भी हुआ था…”
अवनी ने आंसू पोंछे।
उसने पूछा –“क्या हुआ था…?” रामदास ने कांपते हुए आसमान की तरफ देखा।
आज अमावस्या थी।
उसने घड़ी देखी।
रात होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा था।
रामदास ने धीरे से कहा –
“अगर तुम्हें सच देखना है…”
“तो आज आधी रात तक जिंदा रहना होगा…”
यह सुनकर अवनी की सांसें तेज हो गईं।
उसे बिल्कुल समझ नहीं आया कि रामदास आखिर कहना क्या चाहता है।
धीरे-धीरे शाम ढलने लगी। सूरज पूरी तरह पहाड़ियों के पीछे छिप गया।
पूरे कॉलेज में अजीब सा सन्नाटा फैल गया।
और जैसे ही रात गहराने लगी…
पुराने लॉकर रूम की दिशा से किसी के धीरे-धीरे हंसने की आवाज आने लगी… भाग 1 समाप्त
अगले भाग 2 में.. क्या अवनी शर्मा भी खूनी रजिस्टर का अगला शिकार बनेगी?




