“मैं वापस आऊँगा…” रूह कंपा देने वाली एक खौफ़नाक कहानी? Horror Story In Hindi।

“मैं वापस आऊँगा…” रूह कंपा देने वाली एक खौफ़नाक कहानी? Horror Story In Hindi। Hindirama.com

क्या होगा जब एक खतरनाक पेड़ हर रात अपनी जगह बदलने लगे?

Hindi Rama | डरावनी कहानी

एक सरकारी रिसर्च ऑफिसर की जिंदगी तब बर्बाद हो जाती हैं, जब उसे एक श्रापित खतरनाक हवेली, रहस्यमयी कौआ और 300 साल पुराने खूनी रहस्य का सामना करना पड़ता हैं।

कदम-कदम पर मौत, हर मौड़ नया राज और अंत में ऐसा रहस्य जो आपकी रूह कंपा देगा। 

तो पढ़िए  “मैं वापस आऊँगा” एक ऐसी डरावनी कहानी, जिसका सच आखरी पल तक आपको भयानक डर और रहस्य से बाँधकर रखेगा। 

उस पेड़ के पास जाते ही मौत पीछा करने लगी। Horror Story In Hindi               

सर्दियों की बेहद ठंडी और ढलती रातों में महेश दिल्ली से इस सुदूर, वीरान गाँव में आया था।

वह एक पढ़ा-लिखा सरकारी रिसर्च ऑफिसर था, जो यहाँ के पुराने इतिहास पर डेटा इकट्ठा करने आया था।     

गाँव की मुख्य आबादी से करीब आधा किलोमीटर दूर, खेतों के बीच वह अकेली और पुरानी हवेली खड़ी थी।

हवेली सदियों पुरानी और जर्जर थी, लेकिन हाल ही में रंग-पेंट करके उसे थोड़ा ठीक कर दिया गया था।

महेश बहुत ही व्यावहारिक और साइंटिफिक सोच रखने वाला लड़का था, जो भूत-प्रेत जैसी बातों को बिल्कुल नहीं मानता था।

हवेली के ठीक आगे एक बहुत बड़ी बालकनी बनी थी, जहाँ से चारों तरफ का सन्नाटा साफ दिखाई देता था।

बालकनी के ठीक सामने एक विशाल, पुराना और डरावना पेड़ था, जो बहुत ही हरा-भरा और अजीब लगता था।

उस रहस्यमई पेड़ की एक सूखी टहनी पर हमेशा एक बड़ा, काला और अजीब सा कौआ बैठा रहता था।

उस कौए की आँखें सामान्य पक्षियों जैसी काली नहीं, बल्कि इंसानों की तरह बिल्कुल सफेद और पथरीली थीं।

महेश जब भी उसे पत्थर मार कर भगाता, वह बहुत मुश्किल से उड़ता और वापस वहीं आकर बैठ जाता।

वह कौआ अपनी गर्दन को पूरा पीछे मोड़कर, अपनी डरावनी आँखों से सीधे केवल महेश को ही घूरता रहता था।

कुछ ही दिनों बाद, महेश ने सुबह उठकर बालकनी से देखा तो उसे एक बहुत ही अजीब बात महसूस हुई।

कल सुबह वह पेड़ जहाँ खड़ा था, आज सुबह वह अपनी जगह से करीब दस फीट आगे खिसक चुका था।

क्या कोई पेड़ रातों-रात अपनी जगह बदल सकता है? यही खौफनाक सवाल रोज़ महेश के दिमाग में घूमता था।

डर की असली शुरुआत तब हुई, जब रोज़ रात को ठीक बारह बजे के बाद पेड़ के पास से आवाज़ें आने लगीं।

घने सन्नाटे में सूखी लकड़ियों पर भारी कुल्हाड़ी चलने जैसी, “टक… टक… टक…” की भयानक आवाज़ गूंजती थी।

एक रात कड़कती बिजली के बीच, वह कौआ अचानक बालकनी का शीशा तोड़कर सीधे महेश के कमरे में घुस आया।

कौए ने बेड के ठीक सामने खड़े होकर अपनी इंसानी आँखों से घूरा और फर्श पर गाढ़े खून की उल्टी की!

कांपते हाथों से महेश ने देखा; फर्श पर बिखरे उस काले और बदबूदार खून से साफ़-साफ़ लिखा था— “भागो!”

उस हवेली में गाँव का ही एक लोकल नौकर काम करता था, जिसका नाम दीनू काका था।

नौकर दीनू काका हमेशा बहुत डरा-सहमा रहता था और पूरे घर में अजीब नज़रें घुमाकर काम करता था।

दीनू काका की एक ही सख्त शर्त थी; शाम के ठीक पांच बजते ही वह अपनी साइकिल उठाकर भाग जाता था।

एक शाम दीनू काका जाने लगा, तो बालकनी की रोशनी में दीवार पर उसकी परछाई बिल्कुल उल्टी बनी दिखाई दी!

जब महेश ने उसे टोकना चाहा, तो दीनू काका का आधा चेहरा अचानक किसी सड़ी हुई लाश जैसा दिखने लगा था!

उसकी आँखों से खून के आंसू बह रहे थे, लेकिन अगले ही पल वह सामान्य होकर वहाँ से भाग गया।

अगले दिन दोपहर को गाँव के कुछ बुजुर्ग और मुखिया डरे हुए चेहरों के साथ सीधे महेश से मिलने हवेली आए।

मुखिया ने हाथ जोड़कर कहा, “बाबूजी! आप पढ़े-लिखे हैं, लेकिन हमारी बात मानकर यह श्रापित और खौफनाक घर तुरंत छोड़ दीजिए।”

मुखिया ने राज़ खोला कि सदियों पहले इस ज़मीन के अमीर जमींदार की बहुत ही बेरहमी से हत्या की गई थी।

दुष्ट कातिलों ने तड़पाते हुए जमींदार के दोनों हाथ काट दिए थे और उसे उसी पेड़ के पास ज़िंदा गाड़ दिया था।

बुरी आत्माओं का जाल और सविता का आगमन

“मैं वापस आऊँगा…” रूह कंपा देने वाली एक खौफ़नाक कहानी? Horror Story In Hindi। Hindirama.com

उसी शाम महेश की कंपनी से उसकी सीनियर रिसर्च ऑफिसर, जिसका नाम सविता था, वहाँ अचानक पहुँच गई।

32 साल की सविता ऊंचे पद पर काम करती थी और भूत-प्रेत जैसी बातों पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं करती थी।

पूरे गाँव में कोई दूसरा अच्छा कमरा खाली न होने के कारण, वह भी उसी हवेली में रुकने के लिए मजबूर हो गई।

रात को ठीक एक बजे, आसमान में घने काले बादल छा गए और तेज़ तूफानी हवाएं चलने लगीं।

अचानक सविता की आँखें एक बहुत ही दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाली चीख के साथ खुल गईं!

गहरी नींद में सविता को एक भयानक सपना आया था, जिसमें उसने 300 साल पुराना खूनी मंजर देखा था।

उसने देखा कि जलती आँखों वाले नकाबपोश लोग जमींदार को बेरहमी से काटकर, पेड़ के नीचे जिंदा दबा रहे थे।

मरते वक्त उस तड़पते हुए जमींदार ने अपनी कटी उंगलियों के खून से हवा में लिखा था— “मैं वापस आऊँगा!”

बुरी तरह घबराकर सविता ने तुरंत महेश को जगाया और कहा, “हमें इसी वक्त इस मनहूस जगह से भागना होगा।”

दोनों ने अपना सामान उठाया और जैसे ही मुख्य दरवाज़े की तरफ भागे, वह दरवाज़ा ज़ोर से खुद-ब-खुद बंद हो गया!

हवेली की सारी खिड़कियाँ लोहे की तरह सख्त हो गईं और पूरा कमरा श्मशान की तरह बर्फ जैसा ठंडा हो गया।

अब वे दोनों उस हवेली के अंदर पूरी तरह कैद हो चुके थे और बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं था।

सुबह होने पर बाहर से आया नौकर दीनू काका भी, लाख कोशिशों के बाद, हवेली का दरवाज़ा नहीं खोल पा रहा था।

गाँव के लोग बाहर लाठियां लेकर जमा थे; लेकिन कोई भी उस अदृश्य, बर्फीली और खौफनाक शक्ति को पार नहीं कर पा रहा था।

तभी हवेली के मुख्य ड्राइंग रूम का फर्श, बिना किसी आहट के, बीच से दो हिस्सों में अचानक फटने लगा!

ज़मीन के फटे हुए मलबे के अंदर से काले धुएं का एक विशाल, डरावना और बिना चेहरे वाला साया बाहर निकला।

उस भयानक साये की कटी हुई बाहें सीधे महेश का गला घोंटने के लिए, बहुत ही तेजी से आगे बढ़ीं!

महेश की सांसें रुकने ही वाली थीं कि तभी सविता ने कोने में रखा एक छोटा, तांबे का पवित्र त्रिशूल देख लिया।

सविता ने बिना डरे वह त्रिशूल उठाया और जैसे ही साये के सामने किया, एक दिव्य और तेज़ रोशनी चमकी।

त्रिशूल की चमक देखते ही वह भयानक साया, खिड़की का मजबूत काँच तोड़कर, सीधे सामने वाले पेड़ में समा गया।

कुछ समय के लिए हवेली के अंदर का माहौल बिल्कुल शांत हो गया और दरवाज़े का अदृश्य पहरा थोड़ा ढीला हुआ।

मौका पाकर बाहर फंसा नौकर दीनू काका भी खिड़की के रास्ते किसी तरह हवेली के भीतर दाखिल होने में कामयाब हो गया।

जमींदार का भूत और शिफ्टिंग ट्री के नीचे गहरी खुदाई  

“मैं वापस आऊँगा…” रूह कंपा देने वाली एक खौफ़नाक कहानी? Horror Story In Hindi। Hindirama.com

तीनों हॉल में डरे हुए बैठे थे, तभी थककर बैठी सविता को दोबारा एक बहुत ही खौफनाक सच का अहसास हुआ।

सविता चिल्लाई, “वह जमींदार का भूत हमें नहीं मार रहा, बल्कि वह तो उन दुष्ट आत्माओं से लड़ रहा है!”

असल में सदियों पहले जिन कातिलों ने उसे मारा था, वे इस गाँव के बहुत ही भयानक और अघोरी तांत्रिक थे।

उन कातिल तांत्रिकों की दुष्ट आत्माएं आज भी उस बेगुनाह जमींदार को उस पेड़ के भीतर कैद करके तड़पाती थीं।

वह पेड़ खुद अपनी जगह नहीं बदलता था; बल्कि दुष्ट आत्माएं कंकाल को हमसे छुपाने के लिए उसे खिसकाती थीं!

इस खौफनाक जाल से मुक्ति का केवल एक ही रास्ता था; उस शिफ्टिंग ट्री के नीचे गहरी खुदाई करना।

कुल्हाड़ी और फावड़ा उठाकर महेश, सविता और नौकर दीनू काका उस डरावने पेड़ की तरफ बहुत तेजी से बढ़े।

जैसे ही महेश ने पहला फावड़ा ज़मीन पर चलाया, आसमान में हजारों खूंखार कौए मंडराने लगे और अंधेरा छा गया!

तभी ज़मीन फाड़कर उन मृत कातिल तांत्रिकों की खौफनाक, सड़ी हुई और बदबूदार आत्माएं एक साथ बाहर आ गईं!

उन दुष्ट आत्माओं के चेहरों पर मांस नहीं था; सिर्फ सूखी खोपड़ियाँ और जलते हुए लाल अंगारे चमक रहे थे!

वे तीनों को ज़िंदा चबाने के लिए आगे बढ़ीं; लेकिन तभी पेड़ के तने से जमींदार का विशाल साया बाहर निकला।

जमींदार के साये और उन दुष्ट तांत्रिकों की आत्माओं के बीच, हवा में एक भयानक और खूनी जंग छिड़ गई!

हवा में गूंजती डरावनी चीखों के बीच, महेश और दीनू काका ने पूरी ताकत लगाकर पाँच फीट गहरा गड्ढा खोद दिया।

गड्ढे के अंदर सचमुच एक पुराना पीला कंकाल मिला, जिसकी दोनों हाथों की सारी उंगलियाँ कटी हुई थीं।

सविता ने बिना एक पल गंवाए, सूखी लकड़ियाँ डालीं और उस कंकाल में माचिस से तुरंत आग लगा दी!

तांत्रिक की दुष्ट आत्माएं और जमींदार की आत्मा को मिली बरसों बाद सुकून  

कंकाल के पूरी तरह जलते ही उन तांत्रिकों की दुष्ट आत्माएं, दर्द से चिल्लाती हुई, काली राख में बदल गईं।

जमींदार का वह विशाल भयानक साया, सबका सुक्रिया अदा करके, आग के गर्म धुएं के साथ, आसमान में हमेशा के लिए सुकून से विलीन हो गया।

अगली सुबह जब सूरज खिला, तो वह डरावना पेड़ पूरी तरह सूखकर, काले कोयले की तरह ज़मीन पर गिर चुका था।

हवेली के सारे बंद दरवाज़े अपने आप खुल गए और गाँव के लोग दौड़कर उन तीनों के पास सलामती पूछने पहुँचे।

हमेशा के लिए गाँव छोड़ने से पहले मुखिया ने महेश को हवेली के गुप्त तहखाने से मिली एक पुरानी डायरी सौंपी।

यह कहानी भी पढ़ें   →   गर्ल्स कॉलेज का खूनी रजिस्टर। पिशाज का अगला शिकार कौन? 📖

डायरी के आखिरी पन्ने पर उस 300 साल पुराने, मरे हुए जमींदार की एक धुंधली और हाथ से बनी तस्वीर थी।

उस तस्वीर को ध्यान से देखते ही, महेश और सविता के पैरों तले से मानो पूरी ज़मीन ही खिसक गई!

उस पुरानी तस्वीर में जो चेहरा हूबहू बना था, वह किसी और का नहीं बल्कि खुद महेश का ही था!

कहानी का सबसे बड़ा खौफनाक सच यह था कि वह मरा हुआ जमींदार कोई दूसरा या अजनबी इंसान नहीं था।

वह जमींदार खुद महेश का पिछला जन्म था, जो सदियों से अपने ही अगले जन्म का यहाँ इंतज़ार कर रहा था।

लेकिन सबसे असली और रोंगटे खड़े कर देने वाला ट्विस्ट अब सामने आया, जब सविता ने डायरी के पीछे छिपे नाम पढ़े।

उन कातिल तांत्रिकों की लिस्ट में जो सबसे मुख्य नाम लिखा था, वह नाम किसी और का नहीं था!

वह नाम सविता के पिछले जन्म का था, जिसने पिछले जन्म में लालच में आकर अपने ही साथी को धोखा दिया था!

अचानक सविता की आँखें पूरी तरह खून की तरह लाल हो गईं और उसके चेहरे पर वही पुरानी दुष्ट तांत्रिकों वाली मुस्कान आ गई!

वह खौफनाक श्राप अभी खत्म नहीं हुआ था; क्योंकि कातिल और शिकार दोनों फिर से उसी हवेली में वापस आ चुके थे!

इस डरावनी कहानी का निष्कर्ष (Conclusion)

यह भयानक और खौफनाक कहानी हमें सिखाती है कि इंसान के कर्म और उसका अतीत कभी भी उसका पीछा नहीं छोड़ते हैं।

विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, पर इस ब्रह्मांड में कुछ शक्तियां हमारी सोच और समझ से बहुत ज्यादा परे होती हैं।

हम अपने बुरे कर्मों से दुनिया से भाग सकते हैं, लेकिन समय का खतरनाक चक्र घूमकर हमें दोबारा वहीं खड़ा कर देता है।

बुराई चाहे कितनी भी पुरानी और ताकतवर क्यों न हो, न्याय की गर्म आग एक दिन सब कुछ जलाकर राख कर देती है।

____कहानी समाप्त___

Hindi Rama को फॉलो करें — और पढ़ें 150+ डरावनी व रोमांचक कहानियाँ।

🌸 HindiRama को सपोर्ट ज़रूर करें
अच्छी कहानियों को ज़िंदा रखने में अपना छोटा सा योगदान दें ✨
Support HindiRama QR Code
आपका योगदान ₹10, ₹20 या ₹50 हमें और बेहतरीन कहानियाँ लिखने में मदद करेगा।
PhonePe | Google Pay | Paytm | BHIM UPI
*यह HindiRama.com को दिया गया एक ऐच्छिक सहयोग (Support) है। (Non-80G)
Spread the love

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

रामायण कॉमिक्स महाभारत
Scroll to Top