2:30 बजे मेरी परछाई मुझसे बात क्यों करनें लगी? परछाई का डर – भाग 1। Haunted Shadow Story In Hindi।

क्या होगा अगर एक रात आपकी अपनी परछाई आपसे अलग होकर आपसे बात करने लगे? क्या सच में हमारी परछाई कभी जिंदा हो सकती हैं?

इस डरवानी कहानी के भाग 1 में कबीर के साथ कुछ ऐसा ही होता हैं। जब ठीक 2:30 बजे उसकी परछाई खतरनाक तरीके से अचानक, कबीर से बात करने लगती हैं। 

शुरुआत में कबीर को यह भ्रम लगता हैं, लेकिन जल्द ही कबीर क मुलाकात अनन्या से होती हैं। अब रहस्य और भी भयानक हो जाता हैं।   

कैमरे में कैद एक रहस्यमयी साया, सुनसान अजीब पार्क, अजीबो-गरीब घटनाएं। एक पुराने कब्रिस्तान से मिला खौफनाक सुराग उसे ऐसी दुनिया में ले गया जहाँ से लौटना बिल्कुल आसान नहीं । 

क्या कबीर अपनी परछाई का रहस्य जान पाएगा? अनन्या के साथ आखिर क्या होने वाला हैंं। 2:30 का समय श्रापित क्यों हैं?                               

ठीक 2:30 बजे मेरी परछाई मुझसे बात करने लगी। Haunted Shadow Story In Hindi। 

14 नवंबर की वो रात थी। घड़ी में ठीक 2 :30 बज रहे थे । बाहर ठंडी हवा चल रही थी। और दूर कहीं कुत्ते के भौकने की आवाज आ रही थी। 

पूरा शहर नींद में था , लेकिन कबीर अपने कमरे में लैपटॉप पर एक हॉरर वीडियो ऐडिट कर रहा था।

कमरे में केवल स्क्रीन की नीली रोशनी थी। बाकी सब कुछ अंधेरे में डूबा हुआ था। तभी उसकी गर्दन में हल्का दर्द हुआ।

उसने कुर्सी पर पीछे झुककर लंबी सांस ली और अनजाने में उसकी नजर सामने वाली दीवार पर चली गई।

दीवार पर उसकी परछाई बन रही थी। उसने हाथ उठाया , परछाई ने भी हाथ उठाया । उसने सिर घुमाया, परछाई ने भी सिर घुमाया। सब कुछ सामान्य था।

लेकिन अगले ही पल में उसका दिल धड़कना भूल गया।

कबीर ने अपना हाथ नीचे कर लिया था, मगर दीवार पर बनी परछाई अब भी हाथ उठाए खड़ी थी।

उसकी आंखे फैल गई। उसने दोबारा हाथ हिलाया। फिर धीरे – धीरे अपना सिर घूमाया और सीधे कबीर की तरफ देखने लगी।

कबीर का गला सुख गया । परछाई के चेहरे पर कोई नक्श नही था, फिर भी उसे साफ महसूस हुआ कि वह मुस्कुरा रही है।

ऐसी मुस्कान जैसे किसी शिकारी को उसका शिकारी मिल गया हो।

कबीर घबराकर उठा और कमरे की लाईट जला दी। रोशनी फैलते ही सब सामान्य हो गया। लेकिन उसके दिल में एक अजीब डर जन्म ले चुका था।

निखिल ने हंसकर बात जरूर टाल दी, लेकिन अभी तो डर बाकी था     

कबीर भागता हुआ अपने दोस्त निखिल के कमरे मे पहुँचा। निखिल नींद में उठा , उसने देखा कि इतनी रात में यह यहाँ क्यों आया ।

कबीर ने सब कुछ बताया उसको और निखिल सब कुछ ध्यान से सुनता रहा ।

फिर भी उसने उसकी बात पर विश्वास नही किया। उसका मजाक उड़ाया । उसको बोला कि अरे,,, भाई तू दिन – रात भूतों की वीडियो देखता रहता हैं यही वजह है ऐसा होने का ।

कबीर ने ज्यादा बहस नहीं की वह अपने कमरे में वापस चला गया।

उस रात उसको बिल्कुल बह नींद नही आई। सारी रात जगता रहा । सपने में वह एक लंबी दीवार के सामने खड़ा था , दीवार के पीछे किसी लड़की के रोने की आवाज आ रह थी।

पर दीवार पर उसकी कोई परछाई नही थी।

वहाँ कोई और था। कोई ऐसा जो लगातार उसे घूर रहा था।

 


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मेरी परछाई अचानक सड़क पर मुझसे अलग चलने लगी 

अगले दिन जब कबीर कॉलेज जा रहा था, सूरज चमक रहा था और सड़क पर बहुत भीड़ थी। सब कुछ वैसा ही था जैसा पहले तभी चलते – चलते उसने नीचे देखा ।

उसकी परछाई उसके कम से कम आधा कदम पीछे चल रही थी।

लेकिन उसने फिर रुककर देखा , उसका शरीर तो रुक गया मगर परछाई आगे बढ़ गई एक कदम ।

और फिर धीरे – धीरे वापस अपने जगह आ गई। कबीर के माथे पर पसीना आ गया, फिर भी वह आगे बढ़ा और कॉलेज गया।

लेकिन उसे एहसास तक नहीं था कि उसके साथ आगे क्या होने वाला है….।

वह लड़की अनन्या जिसकी कोई परछाई ही नही थी

कॉलेज की छुट्टी के बाद कबीर कॉलेज के कैंपेस में खड़ा था, तभी उसकी नजर एक लड़की को देखता है।

लड़की बहुत सुंदर थी और उसके काले लंबे बाल , शांत चेहरा , सफेद सूट उसका नाम था अनन्या ।

कबीर की नजर जमीन पर पड़ी। और उसका दिल बैठ गया तेज धूप होने के बाद भी नाजाने क्यूं अनन्या की कोई परछाई नही थी जमीन पर ।

बिल्कुल ही नही, जैसे रोशनी उसको छु ही नही रही है।

कबीर बहुत देर तक देखता रहा, तभी अनन्या ने अचानक पीछे देखा। उसके चेहरे पर साफ डर दिख रहा था।

जैसे किसी ने अभी अभी उसका नाम लेकर पुकारा हो। लेकिन वहाँ कोई नहीी था ।

 पार्क के कोने में खड़ा वह बिल्कुल काला आदमी       

कुछ दिन बाद कबीर शाम के समय में पार्क में बैठा था, तभी उसने वहाँ भी अनन्या को देखा वह अकेली एक बेंच पर बैठी थी।

लेकिन उसकी नजर बार – बार पार्क के एक अंधेरे कोने की तरफ जा रही थी।

कबीर ने भी उधर देखा वहाँ एक लंबा काला आदमी खड़ा था। उसका चेहरा साफ दिख रहा था, वह बिल्कुल स्थिर खड़ा था जैसे किसी चीज का इंतजार कर रहा हो।

कबीर की नजर कुछ सेकंड के लिए हट गई।

जब उसने दोबारा देखा…. वह आदमी पता नही कहाँ जा चुका था, पर अब अनन्या के चेहरे का रंग उड़ गया था । वह जल्दी से पार्क छोड़ कर चली गई।

और कबीर को पहलइ बार ऐसा लगा कि वह साया केवल उसका पीछा नही कर रहा।

वह अनन्या में भी दीलचस्पी ले रहा था।

आधी रात को कबीर के फोन में आई वह तस्वीर 

उसी रात कबीर के फोन में एक अनजान नंबर से एक तस्वीर आई। तस्वीर देखकर उसका खून जम गया। 

फ़ोटो में वह खुद दिखाई दे रहा था , जबकि उस समय वह अपने कमरे में अकेले ही बैठा था।

फ़ोटो किसने खींची थी ? यह सवाल उसके दिमाग में हथौड़े की तरह बजने लगा।

मोबाईल कैमरे में कैद हुआ असली चेहरा 

अगले दिन कबीर और निखिल ने यह फैसला किया कि वह ये सब क्या हो रहा है , पता करना पड़ेगा।

दोनों लोग उसी पार्क में पहुंचे और कबीर ने मोबाइल कैमरा शुरू किया  पहले तो सब सामान्य दिखायी दिया।

लेकिन जैसे ही कैमरा पार्क के उस कोने में गया, स्क्रीन पर वही कला आदमी दीखाई दे रहा था। वह पेड़ के पास खड़ा था, उसकी आंखे चमक रही थी।

लेकिन जब निखिल ने भी उसको देखा, वहाँ कुछ नही था।

केवल मोबाइल कैमरे मे वह आकृति दिखाई दे रही थी। तभी स्क्रीन पर अजीब से रेखाए उभरने लगी। और अगले ही पल वह आकृति कैमरे के बिल्कुल सामने आ गई।

इतनी करीब कि उसका चेहरा पुरी स्क्रीन पर फैल गया।

निखिल के चेहरे का रंग उड गया। अब उसे भी यकीन हो गया था कि कबीर झूठ नही बोल रहा।


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कब्रिस्तान की टूटी कब्र से मिला पहला सुराग 

कुछ दिनों बाद दोनों को एक पुराने चौकीदार से जानकारी मिली। उसने शहर के बाहर बने एक पुराने कब्रिस्तान का नाम बताया। कहा जाता था कि वहाँ कई रहस्य  दफन है ।

कबीर और निखिल उसी शाम वहाँ पहुंचे ।

कब्रिस्तान सुनसान था। हवा में अजीब सी बदबू थी। टूटे हुए पत्थर और जंग लगी लोहे की जालियाँ हर तरफ दिखाई दे रही थी।

तभी उन्हे एक टूटी हुई कब्र दिखाई दी। उस पर लिखा था, “अर्जुन मल्होत्रा , मृत्यु – 1948 और नीचे खुदे हुए शब्द पढ़कर दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।”

और जब अंधेरा किसी लड़की को चुन लेता है, तब कोई उसे बचा नही सकता। कबीर और निखिल ने एक – दूसरे की तरफ देखा। दोनों के मन मे एक ही नाम था। अनन्या।

कब्रिस्तान में सुनाई दी वह लड़की की खतरनाक चीख  

जैसे ही वह वहाँ से लौटने लगे , अचानक दूर से एक चीख सुनाई दी। वह किसी लड़की की आवाज थी। दोनों आवाज की दिशा में दौड़े ।

लेकिन वहाँ कोई नही था। केवल एक पुराना पेड़ खड़ा था।

और पेड़ की छाल पर किसी ने नाखूनों से एक नाम लिखा हुआ था। अनन्या दोनों का खून जम गया। क्योंकि यह नाम बिल्कुल ताजा लिखा गया था।

जैसे कुछ मिनट पहले ही किसी ने उसे उकेरा हो।

और फिर अनन्या अचानक कहाँ गायब हो गई ?     

अगले कॉलेज में हलचल मची हुई थी। हर कोई एक ही बात कर रहा था। अनन्या गायब हो चुकी थी। वह रात से घर नही लौटी थी।

उसका फोन बंद था। किसी को नही पता था कि वह कहाँ गई।

कबीर का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसे तुरंत कब्रिस्तान की वह चेतावनी याद आ गई । केवल एक तस्वीर ।

तस्वीर में अनन्या दिखाई दे रही थी। वह किसी अंधेरी जगह में खड़ी थी। उसके पीछे सैकड़ों काली परछाइयाँ थी।

और सबसे पीछे….. वही काला साया खड़ा मुस्करा रहा था।

तस्वीर के नीचे केवल एक लाइन लिखी थी , “अगर उसे बचाना है, तो आज रात 2 :37 बजे पुराने कब्रिस्तान में आना, और उसी पल कबीर ने महसूस किया, उसकी अपनी परछायी उसके पैरों के नीचे से गायब हो चुकी थी ।”

कहानी का भयानक और डरावना रहस्य तो अभी बाकी हैं। जानिए आगे क्या होगा? जल्द आएगा कहानी का भयानक रहस्यमयी “परछाई का डर भाग 2”    


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