कैसे सुलझाया खतरनाक मौत के रहस्य को ? – Murder Mystery ।
⇒ आज मै आपको एक रहस्यमयी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो जासूस रमन और उसका सहाय सुजॉय की एक बेहतरीन जासूसी कहानी है। यह कहानी आपको अंत तक बाँध कर रखेगी । इसलिए कहानी को आखिरी तक जरूर सुने । चाहिए अब आपको कहानी के बारे मे बताता हूँ।
⇒ कोलकाता दिसंबर 1993 रात का समय कोहरा घना था। अल्बर्ट रोड की सड़कों पर स्ट्रीट लाइट्स मे धुंध मे खोई हुई थी, कही दूर ट्रक कि घंटिया गूंज रही थी। और पास ही गली के मोड पे कुछ कुत्ते भौक रहे थे। रमन खिड़की के पास बैठा ,,,,, चाय की चुसकियाँ ले रहा था । और सुजॉय टाईप राइटर पर एक रिपोर्ट तैयार कर रहा था ।
⇒ कमरे मे एक पुराना रेडियो बज रहा था । जिसमे किशोर कुमार की धीमी सी आवाज गूंज रही थी । अचानक टेलीफोन की सुनाई देती है, रमन ने चाय की प्याली नीचे रखी और फोन उठाया । दूसरी ओर से इंस्पेक्टर घोषाल की आवाज आई ।…… अब हैलो रमन बाबू आवाज सध हुई थी , लेकिन गंभीर थी इस तरफ से रमन ने कहा , ।
⇒ जी घोषाल बाबू कैसे याद किया दूसरी तरफ से इंस्पेक्टर घोषाल बोले अब रमन बाबू थिएटर छाया मे मर्डर हुआ है लाइव शो के दौरान मालविका रॉय मारी गई रमन कुछ क्षणों के लिए चुप रहा और फिर बोला ठीक है हम आते है , उसके बाद रमन और सुजॉय थिएटर छाया के लिए निकले।
⇒ थिएटर छाया कोलकता के सबसे पुराने थिएटर मे से एक है । 1940 मे बना और 90 के दशक मे भी उस पर पुरानी दुनिया की छाप थी। जब रमन और सुजॉय वहाँ पहुंचे , थिएटर के बाहर भीड़ जमा रखी थी। पुलिस बैरिकेडस लगाए जा चुके थे। रमन ने पूछा कि क्या , यह मर्डर शो के दौरान हुआ है ? इंस्पेक्टर घोषाल ने सिर हिलाया और बोला हाँ।
⇒ दूसरा सीन चल रहा था । विक्रमदत्त ने एक नकली रिवाल्वर से गोली चलाई लेकिन वो असली निकली । मालविका को सीने मे गोली लगी। और मंच पर ही उसकि जान चली गई। रमन मंच पर पहुँच वहाँ अभी भी खून के धब्बे चमक रहे थे । और रिवाल्वर एक मेज पर रखा था । रमन ने पुछा अब क्या कोई दूसरा हथियार मिला ?
⇒ इंस्पेक्टर घोषाल ने बोला नही लेकिन बैक स्टेज मे किसी ने देखा था कि रिवाल्वर दोपहर मे बदला गया । रमन ने पूछा और विक्रम ,,,,,, इंस्पेक्टर बोले हाँ वो यहीं है , लेकिन सदमे मे है। रमन विक्रम के पास गया और उसने विक्रम से कहा विक्रम क्या शो से पहले तुमने रिवाल्वर चेक नही किया ? विक्रम कांपती आवाज मे बोला , हर शो की तरह यह नकली रिवाल्वर थी साहब ।
⇒ मैं समझ नही पा रहा हूँ, कि मैं मालविका को क्यों मारना चाहूँगा । रमन ने विक्रम से पूछा , “ अच्छा , उसके साथ तुम्हारे रिस्ते कैसे थे ? ” विक्रम ने कांपती आवाज मे कहा , अब कुछ महीने पहले हम काफी नजदीक थे। फिर उसने मुझसे दूरी बना ली, सर।
⇒ वो कहती थी कि वह इस रिश्ते को लेके सिरियस नही थी। लेकिन इसके लिए मै उसे मारूँगा तो नही, सर । रमन जानता था कि इंसान झूठ बोल सकता है पर उसकि आंखे नही। विक्रम कि आँखों मे सिर्फ डर था लेकिन चालाकी नही। वो झूठ नही बोल रहा था । तब तक सुजॉय ने मालविका के ड्रेसिंग रूम की तलाशी ली। वहाँ एक टूटी अलमारी मे एक लिफाफा मिला।
⇒ पीला धुंधला और तय किया हुआ। उसके अंदर एक पत्र था जिस पर लिखा था अगर तुम मेरे खिलाफ गवाही दोगी,, तो मै तुम्हारे सारे राज खोल दूँगी । चाहे तुम कुछ भी कर लो । मै तुमसे डरने वाली नही हूँ। और उसके आखिरी मे नाम का इनिशियल लिख था। लेटर एम ! ,
⇒ सुजॉय ने रमन से कहा , अब लग रहा है, कि यह मर्डर सिर्फ मंच का सीन नही था, यह कोई सोची समझी साजिश थी। रात के 12:00 बज चुके थे । रमन ने तेज आवाज मे पूछा यह रंजीत बोस कहा है ? इंस्पेक्टर घोषले ने इशारा किया । एक कोने मे एक मोटा पसीने से लथपट आदमी बैठा था । उसकी आँखों मे डर कम था , पर गुस्सा ज्यादा । रमन उसके पास गया , और उसने उससे पूछा, क्या आप ही इस थिएटर के मालिक हैं? हाँ, रंजीत बोला , मालविका मेरी ही कंपनी मे स्टार थी।
⇒ और अब सब खत्म हो गया । रमन ने पूछा क्या उसने कोई बीमा करवाया था? रंजीत चौका अब क्या मतलब है आपका? रमन ने कहा हमारे सुनने मे आया है, कि छाया थिएटर के ऊपर कर्ज चढ़ा था । और मालविका के मौत के बाद आपको अच्छी – खासी रकम मिलने वाली है।
⇒ क्या यह बात सही है ? यह बात सुनकर रंजीत की आंखे सिकुड़ गई। वो बोला अब तो आप मुझे हत्यारा समझ रहे है। , रमन ने कहा मै सिर्फ अपने सवालों के जवाब पूछ रहा हूँ। और जवाबों के टुकड़ों को जोड़ने की कोशिश कर रहा हूँ। ताकि मै असली कातिल को पकड़ सकूँ। क्या आप नही चाहते रंजीत बाबू ,,, कि असली कातिल हमारे सबके सामने आए।
⇒ इसी बीच सुजॉय ने मंच के पीछे कमरे मे एक छोटी सी प्लास्टिक की बोतल बरामद की। वो बोतल दिखाते हुए रमन ने कहा, इस बोतल मे गन ऑयल की गंध आ रही है। कोई इस बोलत से रिवाल्वर की सफाई कर रहा था। लेकिन इस बैकस्टेज मे सफाई की सामग्री नही मिलती ।
⇒ रमन ने कहा तो इसका मतलब किसी ने जानबूझ कर असली हथयार को साफ किया । ताकि वह नकली लगे । सुजॉय बोला , एक और बात है। बगल मे एक खाली दस्ताने का पैकेट पड़ा है। रमन मुस्कुराया । हम चाहे कातिल कितना ही शातिर क्यों ना हो पर कोई ना कोई सुराग छोड़ ही जाता है। रमन और सुजॉय अब मालविका के घर पहुंचे । बालीगंज का एक पुरानी कोठी जहां वो अकेले ही किराये पर रहती थी।
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⇒ मालविका का कमरा एकदम साफ सुथरा और अच्छी तरह से व्यवस्थित था। किताबें, म्यूजिक रिकार्डर्स और दीवार पर टंगी एक पुरानी तस्वीर मे मालविका , रंजीत बोस और एक तीसरा व्यक्ति , एक आजनबी। सुजॉय ने पूछा , अब यह कौन हो सकता है ?
⇒ रमन ने उससे कहा, इस आदमी के बारे मे पता करो और देखो यहाँ कोई पुरानी डायरी मिले तो , सुजॉय और रमन ने कमरे की अच्छी से तलाशी ली। और एक ड्रेसिंग टेबल की दराज मे एक काली डायरी मिली। उसमे लिखा था , विक्रम को आज मुझसे डर नही लगता क्योंकिं उसे पता है कि मै किसी को कुछ नही बताऊँगी।
⇒ लेकिन रंजीत वो एक बार फिर से वही कर रहा था । जो उसने आज से बारह साल पहले किया था। मै इस बारे मे किसी को जरूर बताऊँगी। सुजॉय ने पूछा आज से 12 साल पहले यानी 1981 को क्या हुआ होगा ? रमन बोले हमे अब यह भी जानना ही पड़ेगा। कि , आखिरकार 1981 को हुआ क्या था? हो सकता है,
⇒ वही से कहानी कि असली शुरुआत हो। उसके बाद रमन और सुजॉय छाया थिएटर से बाहर निकले । अपने घर निकलते समय रमन और सुजॉय अपने दफ्तर की ओर बढ़ रहे थे । रास्ता सूनसान था। घना कोहरा और धीमी बारिश भी होने लगी थी। तभी एक गोली चलने की आवाज आई।
⇒ रमन झुका और गोली पास की दीवार पर जा लगा। नीचे झुको सुजॉय चिल्लाया और रमन को खींच लिया। काले कपड़ों मे एक परछाई बिजली के खंभे के नीचे से भागी। रमन ने दौड़कर उसका पीछा किया । लेकिन वो काली परछाई मोड पर कही गायब हो चुकी थी।
⇒ रमन धीमे से बोला । कोई है, जो नही चाहता कि हम मालविका कि अतीत तक पहुंचे । सुजॉय बोला, आप पर हमला हुआ , इसका मतलब आप शि दिशा मे जा रहे है। सर। अगली सुबह एक टेलीग्राम आया और वो टेलीग्राम भेजा गया था। …..
⇒ मालविका कि एक पुरानी दोस्त अनन्या मुखर्जी की तरफ से जो अब दिल्ली मे रहती हैं। उस टेलीग्राम मे लिखा था , कि मालविका मुझे 1981 की घटना बताने वाली थी। कृपया मुझसे मिले। रमन ने निर्णय लिया । हमे लगता है, कि इस सच्चाई के धागे कोलकता से दिल्ली तक जुड़े हैं। हमे अनन्या मुखर्जी से मिलने दिल्ली जाना होगा।
⇒ सुजॉय 17 दिसंबर 1993 कोहरे से भरी एक सुबह रेलवे प्लेटफार्म नंबर 9 पर गए। रमन ने सुजॉय को टिकट थमते हुए कहा , कोलकता मेल से हम कल सुबह दिल्ली पहुँच जाएंगे । सुजॉय ने रमन से कहा आप पर हमला हुआ और आप एसे घूम रहे हैं , जैसे कुछ हुआ ही नही ।
⇒ रमन हल्की मुस्कान के साथ बोला , जो मौत से डर जाए सुजॉय वो जासूस कैसा सुजॉय ने झुँझलाकर कहा कम से कम कोट के नीचे बुलेट प्रूफ जैकेट तो पहन लेटे रमन ने धीरे से कहा अब सच जानने के लिए अगर जान भी दांव पर लगानी पड़े, तो सौदा बुरा नही है, सुजॉय सुबह 11:15 बजे तक रमन और सुजॉय दिल्ली के कारोल बाग पहुंचे ।
⇒ और वहाँ से सीधा अनन्या मुखर्जी के घर अनन्या मुखर्जी करीब 50 की उम्र की एक औरत थी। चेहरे पर गहराई थी। वो शांत थी जैसे , कुछ बहुत समय से उसने अपने सीने मे दबा कर रखा हो। रमन ने अनन्या से पुछा, क्या आपको मालविका के बारे मे कुछ बताना है ? अनन्या ने खिड़की की ओर देखा और बोली मालवीका मेरी सबसे पुरानी दोस्त थी।
⇒ हम दोनों 1981 मे दर्जलिङ्ग के एक थिएटर कैंप मे थे। उस साल कुछ ऐसा हुआ जो मालविका के जीवन को बदल के रख दिया । रमन ने पुछा क्या हुआ था, उस साल ? अनन्या बोली एक रात एक सीनियर अभिनेता जिसका नाम था, अशोक मेहरा उसने मालविका पर पूरी नजर डाली , ।
⇒ उसने जबरदस्ती करने की कोशिश की , सुजॉय बीच मे बोल पड़ा , उसके बाद क्या हुआ ? अनन्या बोली कि मालविका खुद को बचा रही थी लेकिन वो बहुत डरी हुई थी। वो यह बात किसी को बताना नही चाहती थी, पर उसी हफ्ते अशोक की मौत हो गई।
⇒ एक हादसे मे वो मर गया ऐसा कहा गया पर मालविका को हमेशा यकीन था कि उसे किसी ने मारा है। रमन ने पुछा किसी ने मतलब ,,, अनन्या बोली हाँ। उसे और किसी ने नही बल्कि रंजीत बोस ने मारा ,। अनन्या ने डायरी का एक पन्ना दिखाया पन्ने मे लिख था ।,, रंजीत ने कहा था कि, तेरा अपमान मेरा अपमान है।
⇒ और फिर इसके कुछ ही दिनों मे अशोक मारा गया। लेकिन अब रंजीत बोस मुझे भी धमकाया । कि मैं यह बात किसी को ना बताऊ । अगर मैंने मुंह खोला तो अगली मौत मेरी होगी। रमन ने डायरी को धीरे- धीरे बंद किया।
⇒ अनन्या आगे बोली तो असल मे मालविका को मरवाया गया है। इसलिए नही कि वह स्टार थी बल्कि इसलिए क्योंकि वह 1981 कि सच्चीई बाहर लाना चाहती थी। और अगर 1981 की सच्चयी बाहर आती तो, उसमे यह भी सच उजागर हो जाता कि अशोक मेहरा की मौत एक हादसा नही बल्कि एक साजिश थी जो कि रंजीत बोस ने रची थी।
⇒उसके बाद रमन और सुजॉय अनन्या के घर से वापस आ गए। और उन्होंने कोलकता के लिए वापस ट्रेन पकड़ ली। ट्रेन की खिड़की से बाहर कोहरा गहरा होता जा रहा था। रमन और सुजॉय अपनी सीटों पर चुप चाप बैठे थे ।
⇒ सुजॉय बोला अगर यह सच है, तो रंजीत ने दो – दो कत्ल करवाए हैं। एक 1981 मे और एक अब । रमन ने कहा और अगर वह इन दोनों कत्ल मे खुद के हाथों से नही किया है तो , कम से कम दोनों मर्डर मे उसकि मौजूदगी जरूर रही होगी। अब हमे एक ठोस सबूत चाहिए सुजॉय।
⇒ रमन ने अपनी कोट से एक फाइल निकाली जिसमे लिखा था , ब्योरों ऑफ इंश्योरेंस क्लेम रिकवेस्ट मालविका रॉय रंजीत बोस ने मर्डर के दो दिन बाद ही बीमा की रकम का क्लेम फाइल कर दिया था । सुजॉय बोला इतनी जल्दी क्लेम यानि उसको मालविका की मौत के पहले सब कुछ पता था ।
⇒ रात के 2:30 बजे टर्न अब बर्धवान स्टेशन के पास थी। डिब्बे मे ज्यादातर यात्री सो रहे थे । और रमन और सुजॉय भी झपकी ले रहे थे । तभी डिब्बे की खिड़की का कांच टूटा, एक छोटी सी गोल चीज अंदर आयी , और कुछ ही सेकेंड मे कम्पार्टमेंट मे धूँआ फैलने लगा रमन चिल्लाया यह गैस बम है। बाहर निकलिए सब।
⇒ सुजॉय ने रमन को खिंचा लेकिन तभी रमन की नाक से खून टपकने लगा । गैस मे कोई जहरीला तत्व था। रमन गिर पड़ा। सुजॉय ने साहस दिखाया , और दरवाजा खींचकर इमरजेन्सी चैन खीच दी। ट्रेन रुकी। रमन बेहोश था, पर जिंदा था।
⇒ अगले दिन कोलकता के एक छोटे निजी अस्पताल मे रमन को होश आया । सुजॉय पास मे ही बैठा था । उसकी आंखे लाल थी, सुजॉय रमन से बोला बच गए आप। लेकिन अब यह केश सिर्फ मर्डर केश नही बल्कि , अब यह लड़े न्याय की है, और आपकी जान की भी। रमन ने धीरे से कहा , इस बार जो हमला हुआ है, यह एक चेतावनी थी। अगली बार शायद सीधे मौत होगी ।
⇒ फिर रमन ने दीवार की ओर देखा , अब वक्त है, खेल को खत्म करने का , हमे यह खेल खत्म करना होगा सुजॉय। अब कहानी उस मोड पर आ पहुंची है, जहाँ साजिशें गहराती है। और परदे के पीछे से कोई है, जो रमन को रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है ।
⇒ 20 दिसंबर 1981 रमन अस्पताल से डिस्चार्ज होके केश की अगली कड़ी मे कूदने को तैयार था। सुबह की रोशनी खिड़की से छनकर कमरे मे आ रहा थी। रमन अब ठीक था , पर उसकि आखों मे कुछ अलग ठहराव सा था। जैसे मानो मौत को बहुत करीब से देखने वाला इंसान पूरी तरह से शांत हो जाता है । बिल्कुल वैसा ही।
⇒ सुजॉय ने अस्पताल की रिपोर्ट समेटते हुए कहा , गैस मे क्लोरोथयरीन मिला था। इसे युद्ध मे इस्तेमाल किया जाता था । मतलब हम थिएटर के सिर्फ मर्डर केश मे नही बल्कि एक वासविक जाल मे फंस गए है।
⇒ रमन ने धीमे से कहा ,कातिल हमसे एक कदम आगे चल रहा है। सुजॉय पर अब समय है उसे पीछे धकेलने का। दफ्तर लौटते ही रमन ने अपने पुराने परिचित एक पत्रकार को बुलाया जिनका नाम मनोहर दास था। रमन ने मनोहर से कहा , मनोहर , क्या तुम मुझे 1981 के अशोक मेहरा एक्सीडेंट की प्रेस रिपोर्ट दिखा सकते हो ?
⇒ मनोहर बोला , अरे वाह तुमने तो इतिहास खोदना शुरू कर दिया । मुझे बस दो दिन दे दो मै लाइब्रेरी से ढूंढ कर लाऊँगा। रमन ने कहा और अगर कोई मेडिकल रिपोर्ट या पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल जाए तो और भी अच्छी बात है। मनोहर ने कहा, ठीक है, मै देख कर बताता हंू बहुत जल्द ।
⇒ इतना सब कुछ बोल के मनोहर वहाँ से चला गया और कुछ घंटों बाद एक पुरानी फाईल लेकर लौटा। उसमे लिखा था , अशोक मेहरा कि मौत कार की ब्रेक फेल होने के कारण । लेकिन कुछ आयी विटनेस का कहना है।, कि गाड़ी के नीचे तेल फैल गया था। मानो जैसे किसी ने जानबूझकर सड़क मे तेल फैलाया हो फिसलन पैदा करने के लिए ।
⇒ रमन ने कहा रंजीत बोस 1981 मे उस कैंप का मैनेजर था , औरअब उसी की नज़रों के सामने दो मौते हुई थी, जिनकी मौतें हुई है, वो उसी कैंप का हिस्सा थे। बस इसी बीच सुजॉय को थिएटर के एक पुराने कर्मचारी गोपाल से एक कॉल आया।
⇒ गोपाल बोला साहब मैंने एक चीज बचा के रखी है। मालविका मैडम कभी – कभी अपने ड्रेसिंग रूम मे टेप रिकार्डर चलती थी साहब । और एक दिन उन्होंने मुझसे कहा था, कि अगर मुझे कुछ हो जाए तो यह टेप रिकार्डर किसी भरोसेमंद इंसान को दे देना ।
⇒ अब तक छुपा रखा था साहब। अब आप ही वह सही इंसान हो। सुजॉय छाया थिएटर मे गया और गोपाल से मिलकर वो कैसेट ले आया। जब उस कैसेट को चलाया गया तब उसमे मालविका कि आवाज थी। और उसके शब्द कुछ ऐसी थी, अगर रंजीत मुझे मरने की सोचेगा तो यह रिकार्डिंग उसका भांडा फोड़ कर उसका कफन बनेगी।
⇒ वो सोचता है कि मै उससे डरती हूँ , लेकिन मै अब चुप नही रहूँगी । 1981 की रात को जब उसने अशोक मेहरा को खत्म करने की योजना बनाई थी, तब भी मैने उसकी योजना का टेप रिकार्डर मे रिकार्ड केर लिया था ।
⇒ बस यह सुनकर रमन की आंखे चमक उठी । इंस्पेक्टर घोषल को जैसे ही उस टेप रिकार्डर के बारे मे पता चला, तो वह भागा – भागा रमन के दफ्तर मे आा पहुँचा । उसके चेहरे पर परेशानी के भाव थे वो रमन से बोला यह कैसेट आपके पास कैसे? रमन ने एक शक भरी नजर से उसकि ओर देखा…..।
⇒ अभी तक तो मेरे ही पास है, घोषल बाबू। क्यों क्या हुआ घोषाल बाबू ,,, वो बहुत ही उलझन मे आ गया। उसके चेहरे पर बहुत ही परेशानी देखने को मिली । मन मे बोला उसने की अगर किसी को इसकी भनक लगी तो मेरा क्या होगा ?
⇒ उसी वक्त रमन ने टेप रिकार्डर को प्ले कर दिया । और वो कैसेट बज उठी। उसमे सबसे पहले ही इंस्पेक्टर घोषाल की आवाज आई जिसे मालविका ने मरने से पहले कही छुप कर रिकार्ड किया था। उस समय इंस्पेक्टर घोषाल किसी के साथ मिलकर षड्यन्त्र रच रहे थे जो कि मालविका के खिलाफ था।
⇒ और वो किसी से हत्या के बारे मे बात कर रहा था ,,,,,,, देखो अगर किसी को अशोक मेहरा के हत्या के बारे मे पता चला तो हम मुसीबत मे पड़ जाएंगे । मै तुम्हारी मदद कर सकता हूँ। बस तुम मेरी जेब गरम करना ना भूलना और सबसे पहले तुम उस शख्स को मार डालो जो तुमहरे राज जानता हो।
⇒ बाकी कौन सा आरोप किसपे लगाना है यह मै बहुत ही, अच्छी तरह जानता हूँ। अपना भांडा फूटता देखा घोषाल रमन के ऊपर बहुत तेज चिल्लाया । अब यह क्या बकवास है रमन ? यह मेरी आवाज नही है , फिर वो कुछ देर सोच कर बोला । अब अगर यह टेप यहाँ से बाहर गया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा रमन ।
⇒ इतना कहकर इंस्पेक्टर घोषाल वहाँ से चला गया । सुजॉय ने दंग होके रमन की तरफ देखा और बोला ओह ,,,, इसका मतलब इंस्पेक्टर घोषाल मे इस सब कतलों मे शामिल है। रमन ने कहा हाँ और अंदर से ही केश को सड़ा रहा था । अब यह लड़ाई सीधी नही पूरी कानून व्यवस्था के खिलाफ है।
⇒ रमन ने उस रात कैसेट की एक कॉपी तैयार की और असली कैसेट को पुराने दोस्त वकील अमरनाथ शाह को सौंप दिया और उससे कहा अगर मुझे कुछ हो जाए अमर तो यह कैसेट कोर्ट मे पहुँचा देना। अमरनाथ ने सिर हिलाया । अब तुम अकेले नहीं हो रमन । मैं भी तुम्हारे साथ हूँ। रात 2:00 बजे रमन और सुजॉय अपने दफ्तर मे ही थे।
⇒ तभी खिड़की से एक पत्थर आया, साथ मे एक चिट्ठी लिपटी हुई थी। उस चिट्ठी मे लिख था , की कैसेट वापस कर दो। वरना अगली बार निशाना चुकने वाला नही होगा । और उसमे नाम का इनिशियल लिखा था , लेटर आर । रमन ने चिट्ठी को फोल्ड किया। मेज पर रखी सिगरेट जलायी और खिड़की की ओर देखा और मुह ही मुह बुदबुदाया…. ।
⇒ हम्म तो अब खेल शुरू हुआ है,,, दोस्त। रमन और सुजॉय ने अगली सुबह थाने मे इंस्पेक्टर घोषाल को निबंधन आदेश के साथ गिरफ्तार करवाया। कमिश्नर बनर्जी खुद आए और बोले हाँ रमन बाबू अपने यह काम करके बहुत अच्छा किया ।
⇒ आपने पुलिस महकमे का कचरा बाहर निकाल दिया है। अब बताए आपका अगला कदम क्या होगा? रमन बोला , कमिश्नर साहब अब रंजीत का आमना समाना करना होगा। पर सीधे नही हमे कुछ ऐसा करना होगा कि वह खुद हमारे पास आए।
⇒ रमन ने एक अखबार मे फर्जी खबर छपवाई। खबर कुछ ऐसी थी। मालविका की मौत से जुड़े एक टेप मे रंजीत बोस का नाम । पुलिस के पास आया नया सबूत। और जैसे ही ये खबर अखबार मे छपी , शाम को रंजीत ने खुद ही पुलिस को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस मे बुलाया । प्रेस कॉंफरेश मे रंजीत बोला , यह सब साफ झूठ है।
⇒ मालविका मेरी दोस्त थी । यह सब अफवाह है कि उसकी मौत मे मै भी शामिल हूँ। मै इस झूठी खबर छापने वाले अखबार के ऊपर कानूनी कारवाई करूंगा। रमन पीछे भीड़ मे खड़ा होकर मुस्कुरा रहा था। और मन मे बोला कि हाँ अब मछली जाल मे फस चुकी है।
⇒ उसी रात रमन अपने घर से बाहर निकल रहा था , कि एक काली एम्बेसड़र कार उसके पास आकर रूकी। उसमे से चार लोग निकल कर रमन के पास आए ,, और रमन से बोले कि सर हम सीआईडी से हैं। आपको ऊपर बुलवाया गया है। रमन को शक हुआ।
⇒ उसने कहा अच्छा कहाँ से आर्डर आया हुआ है? वो आदमी बोले कमिश्नर बनर्जी ने बुलाया है। रमन ने कुछ सोचा फिर चुप – चाप गाड़ी मे बैठ गया ,। पर फिर 5 मिनट बाद गाड़ी किसी सुनसान गोदाम की ओर मूड गई। रमन ने कहा , हैलो सुनिए मेरी बात यह रास्ता थाने का नही है ।
⇒ कहाँ लेकर जा रहे हो मुझे ? रमन कार का दरवाजा खोलने के लिए जैसे ही हैंडल पकड़ा , तभी पीछे से किसी ने रमन के सिर पर कोई भारी चीज से मार दी । रमन की आँखों के सामने अंधेरा छा गया । और फिर वो बेहोश होकर कार की सीट मे ही गिर गया ।
⇒ सुजॉय को जैसे ही पता चला कि रमन घर पर नही है, और कुछ लोग उसके घर पर सीआईडी बन कर आए थे रमन को बुलाने के लिए । लेकिन रमन को जो बुलावा आया था वो सब कुछ झूठ था । सुजॉय तुरंत हरकत मे आया ।
⇒ थाने मे जांच के बाद उसे एक छोटी सी सूचना मिली, एक लोकल आदमी ने सुजॉय को बताया कि उसने रमन को गोलबाड़ी के एक बंद गोदाम की ओर जाते हुए देखा था। सुजॉय ने खुदको हथियार से लैस किया और अकेले ही निकल गया रमन को वापस लाने ।
⇒ गोलाबाड़ी के उस बंद गोदाम मे रमन को जब होश आया , तो वो एक कुर्सी से बंधा हुआ था। सामने अंधेरा था । सिर्फ एक छोटा सा बल्ब जल रहा था । और वही पास मे खड़ा था। वि क्रम डे । रमन ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा , और कहा तुम तो वो मालविका के साथ एक अजनबी आदमी उस फोटो मे थे…..।
⇒ वो आदम बोला हाँ बिल्कुल , और मालविका मेरी मंगेतर थी। लेकिन उसने मुझे छोड़ दिया उस रंजीत के लिए ,,,,, ओह तो इसलिए तुमने मालविका को मार डाला । विक्रम ने हँसते हुए कहा नही रमन बाबू मैंने नही मारा पर मैं जानता हूँ, कि उसे किसने मारा है। और अब वो आदमी आपको जिंदा नही छोड़ने वाला है।
⇒ रमन बोला अच्छा तो तुम उसके लिए काम करते हो? वो आदमी बोला हा सही बोला तुमने ,,,,तभी दरवाजा खुला और अंदर आया रंजीत बोस । रंजीत बोस ने रमन के पास आकर कहा तुम बहुत दूर तक आ गए हो रमन , बहुत लोगों के चेहरे बेंकब किये और अब खुद के लिए भी तैयार हो जाओ।
⇒ ये तुम्हारा आखिरी दिन है रमन ,,,, रमन बहुत शांत था। फिर कुछ देर रुक कर उसने रंजीत से पुछा अच्छा एक आखिरी सवाल का जवाब तो दे दो , तुमने मालविका को मारा ही क्यों रंजीत बोस बोला क्योंकि उसने मुह खोलना शुरू कर दिया था और अगर वो 1981 की बात बता देती तो , मेरा सब कुछ चला जाता।
⇒ इसलिए मैंने उसका मुह बंद कर दिया हमेशा के लिए । वो तो अब चुप हो गई और थोड़ी देर बाद तुम भी चुप हो जाओगे । रमन अपनी बात खत्म करके रंजीत ने अपने कोट की जेब से एक रिवॉल्वर निकाला । लेकिन तभी बहुत तेजी से दरवाजा टूटने का आवाज सुनाई दिया।
⇒ सुजॉय ने अंदर घुसते ही फायर शुरू कर दिया । एक गोली विक्रम की बाह पर लगी और दूसरी गोली रंजीत के हाथ मे लगी और उसके हाथ से पिस्तौल नीचे गिर गई। तभी सुजॉय चिल्लाया कि हिलने की कोशिश मत करना । दोनों हाथ ऊपर करो। रमन हँसते हुए बोला ,,, क्या हीरो वाली एंट्री मारी है तुमने सुजॉय ।
⇒ एकदम सही टाइम पर आएहो सुजॉय , रंजीत और विक्रम दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ दिन बाद कोर्ट मे पेशी होने के बाद उस दौरान मालविका की रिकार्डिंग कैसेट की सच्चयी और इंस्पेक्टर घोषाल की गवाही के बाद रंजीत बोस और विक्रम डे को आजीवन कारावास की सजा मिली।
⇒ कमिश्नर बनर्जी ने प्रेस को बताया , कि यह केश बताता है, कि कोई कितना भी बड़ा शातिर बदमाश क्यों ना हो, सच सामने आता ही है आज नही तो कल । और उसके लिए हमे रमन और जासूस की जरूरत है । रमन और सुजॉय कोर्ट के बाहर खड़े थे । सुजॉय ने कहा चलो यह केश तो खत्म हुआ । अब छुट्टी पर चले ।
⇒ रमन ने एक पाईप सुलगाया और एक लंबा कश मारकर धूँआ छोड़ते हुए कहा । सुजॉय बाबू मौत, झूठ और साजिशें यह कभी छुट्टी पर नहीं जातें तो हम कैसे चलें जाएं ।
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