कृष्ण को सुदर्शन चक्र कैसे मिला ? Mystery Of Sudarshan Chakra ।


कृष्ण और सुदर्शन चक्र कैसे मिलें ? Mystery Of Sudarshan Chakra


⇒ भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में हमेशा एक दिव्य अस्त्र दिखाई देता है , जिसे सुदर्शन चक्र कहा जाता है। यह चक्र इतना शक्तिशाली था कि बड़े से बड़ा योद्धा भी इसका सामना नही कर सकता था। जब भी धर्म पर संकट आता था, भगवान कृष्ण इसी चक्र से दुष्टों का नाश करते है।

⇒ लेकिन क्या आपको पता है कि भगवान श्री कृष्ण को यह चक्र कैसे मिला ? पुराणों में इसकी एक सुंदर कथा मिलती है। 

⇒ यह कथा हमे भक्ति , श्रद्धा और धर्म समर्पण का महत्व भी सिखाती है। द्वापर युग में पृथ्वी पर कई दुष्ट राजा और राक्षस लोगों को परेशान कर रहे थे ।

⇒ वे कमजोर लोगों पर अत्याचार करते थे और धर्म के मार्ग से भटक चुके थे। 

⇒ भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था ताकि पृथ्वी को इन अत्याचारों से मुक्त कर सके। भगवान कृष्ण जानते थे कि धर्म की रक्षा के लिए उन्हे एक ऐसे दिव्य अस्त्र की आवश्यकता है जो अजेय हो।

⇒ ऐसा अस्त्र जो किसी भी दृष्टि शक्ति को रोक सके । तब उन्होंने भगवान शिव की आराधना करने का निश्चय किया।

कृष्ण नें भगवान शिव की तपस्या क्यों की ? 

⇒ भगवान कृष्ण एक पवित्र स्थान पर गए और वहाँ भगवान शिव की कठोर तपस्या शुरू कर दी । वे पूरे मन से शिवजी का ध्यान करने लगे। उनका मन केवल भक्ति में लगा रहता था।

⇒ कई दिनों तक उन्होंने भगवान शिव की पूजा की। वे रोज कमल के फूल लाते और शिवलिंग पर अर्पित करते । उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि देवता भी उनकी श्रद्धा देखकर प्रसन्न थे।

⇒ भगवान कृष्ण ने संकल्प लिया कि वे भगवान शिव को एक हजार कमल के फूल अर्पित करेंगे उन्होंने पूरी श्रद्धा और भक्ति से यह पूजा प्रारंभ की ।

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भगवान शिव ने ली कृष्ण की कठिन परीक्षा 

⇒ जब पूजा का अंतिम दिन आया, तब भगवान शिव ने भगवान कृष्ण की भक्ति की परीक्षा लेने का विचार कितना सच्चा है।

⇒ भगवान शिव ने चुपचाप एक कमल का फूल हटा दिया । अब वहाँ केवल 999 फूल हो गए।

⇒ भगवान कृष्ण जब फूल चढ़ाने लगे, तब उन्होंने गिनती की । उन्हे पता चला कि एक फूल कम है। उन्होंने चारों ओर देखा, लेकिन वह फूल कहीं नही मिला।

⇒ अब उनके सामने एक बड़ी समस्या थी। यदि एक फूल कम रह जाता, तो उनका संकल्प पूरा नही हो पाता।

कृष्ण ने शिव चरणों में समर्पित की अपनी आँख 

⇒ भगवन कृष्ण को कमलनयन कहा जाता है। उनकी आँखों की तुलना कमल से की जाती है। जब उन्हे कमल का फूल नही मिला, तब उन्होंने एक अद्भुत निर्णय लिया।

⇒ उन्होंने सोचा कि अगर एक कमल कम है तो, अपनी एक आँख भगवान शिव को अर्पित कर दूँगा। मेरी आँख भी कमल के स्वरूप है।

⇒ इस प्रकार भगवान कृष्ण ने अपनी आँख बिना किसी डर और संकोच के अर्पित करने का निश्चय किया।

⇒ उनके मन में केवल भगवान शिव की भक्ति थी। उन्हे अपने पीड़ा और कष्ट की चिंता नही थी। वे केवल अपना संकल्प पूरा करना चाहते थे।

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कृष्ण की भक्ति से भगवान शिव हुए प्रसन्न 

⇒ जैसे ही भगवान कृष्ण अपनी आँख अर्पित करने लगे। उसी समय भगवान शिव उनके सामने प्रकट हो गए। उनके साथ माता पार्वती भी थी।

⇒ भगवान शिव मुस्कुराने लगे,,, उन्होंने कृष्ण भगवान का हाथ पकड़ लिया और कहा, हे कृष्ण ! अब रुक जाओ तुम्हारी परीक्षा पुरी हो चुकी है।

⇒ भगवान कृष्ण ने भगवान शिव को तुंरत प्रणाम किया। शिवजी ने कहा, मै तुम्हारी भक्ति और श्रद्धा को परखना चाहता था।

⇒ तुमने अपनी आँख तक अर्पित करने का निश्चय कर लिया । इससे सिद्ध हो गया कि तुम्हारी भक्ति सच्ची और निष्कपट है।

⇒ भगवान शिव भगवान कृष्ण के समर्पण से अत्यंत प्रसन्न हुए।

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कृष्ण को दिया सुदर्शन चक्र का वरदान  

⇒ भगवान शिव ने कहा, हे कृष्ण ! मै तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ , इसलिए मैं तुमको एक दिव्य अस्त्र देना चाहता हूँ। इतना कहकर भगवान शिव ने भगवान कृष्ण को चक्र प्रदान किया ।

⇒ वह चक्र तेज प्रकाश से चमक रहा था। उसकी शक्ति अद्भुत थी। उसे कोई रोक नही सकता था।

⇒ भगवान शिव ने कहा यह सुदर्शन चक्र , धर्म की रक्षा के लिए है। जब भी कोई दुष्ट व्यक्ति निर्दोष लोगों को कष्ट देगा , तब तुम इसका उपयोग करना ।

⇒ भगवान कृष्ण ने दोनों हाथ जोड़कर सुदर्शन चक्र को स्वीकार किया और भगवान शिव का धन्यवाद किया।

भयंकर सुदर्शन चक्र की शक्ति 

⇒ सुदर्शन चक्र साधारण अस्त्र  नही था। यह भगवान की दिव्य शक्ति का प्रतीक था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यह अपने लक्ष्य को कभी नहीं चुकता था। जिस पर ईसे छोड़ा जाता, उसे यह अवश्य पराजित कर देता था।

⇒ अपना कार्य पूरा करने के बाद यह तुरंत वापस भगवान कृष्ण के पास लौट आता था। बाद  में भगवान कृष्ण ने इससे कई दुष्ट राजाओ और राक्षसों का विनाश किया है।

⇒ उन्होंने हमेशा इसका उपयोग धर्म और न्याय के लिए किया है।

इस कथा से मिलने वाली शिक्षा

⇒ यह कथा हमे सिखाती है कि सच्ची भक्ति में स्वार्थ नहीी होता, भगवान कृष्ण ने भगवान शिव की पूजा पूरे मन और श्रद्धा से की।

⇒ यह कथा बताती है कि, भगवान अपने भक्तों की हमेशा परीक्षा लेते है लेकिन सच्चे भक्त कभी पीछे नही हटते ।

⇒ हमे भी अपने जीवन में धैर्य , विश्वास और मेहनत बनाए रखनी चाहिए । कठिन समय आने पर घबराना नही चाहिए।

⇒ भगवान कृष्ण का समर्पण हमे यह सिखाती है कि जब मन साफ हो और भक्ति सच्ची हो, तब भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

निष्कर्ष 

⇒ पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या और सच्ची भक्ति से प्रसन्न करके सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था ।

⇒ जब एक कमल का फूल कम पड़ गया, तब उन्होंने अपनी आँख अर्पित करने का निश्चय कर लिया ।

⇒ उनका इसी अद्भुत श्रद्धा से भगवान  शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हे सुदर्शन चक्र का वरदान दिया।

⇒ यह कथा केवल एक दिव्य अस्त्र की प्राप्ति की कहानी नही है,,, बल्कि सच्ची भक्ति , विश्वास और समर्पण का सुंदर संदेश भी देती है।

⇒ इसलिए आज भी भक्त स कथा को श्रद्धा के साथ सुनते हैं और भगवान कृष्ण तथा भगवान शिव दोनों का स्मरण करते  हैं। Mystery Of Sudarshan Chakra

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